पाठ्यक्रम: जीएस-3/ अर्थव्यवस्था
सन्दर्भ
- भारतीय रिज़र्व बैंक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जमाकर्ता अपने धन को कम ब्याज वाले बचत खातों से निकालकर अधिक प्रतिफल देने वाली सावधि जमा (FD) में स्थानांतरित कर रहे हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा रेखांकित प्रमुख प्रवृत्तियाँ
बचत जमा की हिस्सेदारी में गिरावट
- मार्च 2026 में कुल बैंक जमाओं में बचत जमा की हिस्सेदारी केवल 28.7% रह गई, जो मार्च 2022 के 34.6% से काफी कम है।
- मई 2026 तक मांग जमा (बचत एवं चालू खाते) 31.65 लाख करोड़ रुपये पर पहुँच गई।
सावधि जमा की बढ़ती लोकप्रियता
- चार वर्षों में सावधि जमा की हिस्सेदारी 55.2% से बढ़कर 61.6% हो गई तथा मई 2026 तक इसका मूल्य 225.23 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया।
- जमाकर्ता अधिक प्रतिफल सुनिश्चित करने के लिए अपने धन को लंबी अवधि के लिए जमा कर रहे हैं।
मध्यम अवधि की जमाओं को प्राथमिकता
- 1 से 3 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाली जमाओं की हिस्सेदारी 2022 में 50.4% से बढ़कर 2026 में 69.8% हो गई।
- एक वर्ष से कम अवधि वाली जमाओं की हिस्सेदारी 16.7% से घटकर 8.8% रह गई।
बड़े जमाकर्ताओं का प्रभुत्व
- मार्च 2026 तक 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक की जमाएँ कुल सावधि जमाओं का 46.3% थीं।
घरेलू बचत का योगदान
- मार्च 2026 के अंत तक घरेलू बचत कुल बैंक जमाओं का 59.3% हिस्सा थी और भारतीय बैंकिंग प्रणाली की जमा आधारशिला बनी हुई है।
अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों की ओर विविधीकरण
- अनेक परिवार अधिक प्रतिफल प्राप्त करने के लिए म्यूचुअल फंड, अंश पूंजी तथा अन्य बाजार-आधारित साधनों में निवेश कर रहे हैं।
- बचत का यह बढ़ता विविधीकरण वित्तीय जागरूकता तथा पूंजी बाजारों में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
भारतीय सावधि जमा को क्यों प्राथमिकता दे रहे हैं?
बचत खातों पर कम ब्याज दरें
- अधिकांश प्रमुख बैंक बचत खातों पर केवल 2.5–3% ब्याज प्रदान करते हैं।
- इसके विपरीत, एक और दो वर्ष की सावधि जमा पर लगभग 6.25–6.45% प्रतिफल मिलता है।
बचत जमाओं पर नकारात्मक वास्तविक प्रतिफल
- जब बचत खातों की ब्याज दर मुद्रास्फीति से कम रहती है, तब धन का वास्तविक मूल्य घटता है।
- लगभग 3.48% खुदरा मुद्रास्फीति की स्थिति में 2.5% ब्याज देने वाला बचत खाता नकारात्मक वास्तविक प्रतिफल प्रदान करता है।
बैंकिंग क्षेत्र की प्राथमिकताएँ
- ऋण वृद्धि के लिए संसाधन जुटाने हेतु बैंकों ने आकर्षक सावधि जमा दरें प्रदान की हैं।
- इसके कारण जमाकर्ता अधिक प्रतिफल सुनिश्चित करने के लिए 1 से 3 वर्ष की अवधि वाली जमाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सरल पहुँच
- इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल अनुप्रयोगों के प्रसार से अब कुछ ही क्लिक में सावधि जमा खोली जा सकती है।
जमा बीमा की सुरक्षा
- सावधि जमा जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) के अंतर्गत संरक्षित होती है।
- यह प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक 5 लाख रुपये तक की जमा राशि का बीमा प्रदान करता है, जिससे अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।
सुविधाजनक तरलता एवं ऋण सुविधा
- निवेशक 7 दिनों से लेकर 10 वर्षों तक की अवधि चुन सकते हैं।
- आकस्मिक धन की आवश्यकता होने पर सावधि जमा तोड़ी जा सकती है या उसके विरुद्ध ऋण/अधिविकर्ष प्राप्त किया जा सकता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
सकारात्मक प्रभाव
- सावधि जमा में वृद्धि से बैंकों की ऋण प्रदान करने की क्षमता के लिए संसाधन आधार मजबूत होता है।
- वित्तीय बचत में घरेलू भागीदारी बढ़ने से वित्तीय क्षेत्र का गहन विकास होता है।
- ब्याज अर्जित करने वाले साधनों की ओर झुकाव अर्थव्यवस्था में बचत के अधिक कुशल आवंटन को प्रोत्साहित करता है।
उभरती चिंताएँ
- अधिक जमा ब्याज दरों के कारण बैंकों की वित्तीय लागत बढ़ सकती है, जिससे उनकी लाभप्रदता और ऋण दरों पर दबाव पड़ सकता है।
- जमा संग्रहण में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की घटती हिस्सेदारी बड़े वाणिज्यिक बैंकों में जमाओं के बढ़ते संकेंद्रण को दर्शाती है।
आगे की राह
- नीति-निर्माताओं को दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए घरेलू बचत को जमा, पेंशन, बीमा और पूंजी बाजार साधनों में अधिक विविधीकृत करने के प्रयास करने चाहिए।
- बैंकों को ऐसे लचीले जमा उत्पाद विकसित करने चाहिए जो अधिक प्रतिफल के साथ आपातकालीन परिस्थितियों में धन तक आसान पहुँच भी प्रदान करें।
- सावधि जमाओं की ओर बढ़ते रुझान के साथ-साथ ऐसे व्यापक वित्तीय क्षेत्र सुधार भी आवश्यक हैं जो घरेलू बचत को उत्पादक निवेशों की ओर प्रवाहित करें और आर्थिक विकास को गति दें।
निष्कर्ष
- बचत खातों से सावधि जमाओं की ओर बढ़ता झुकाव कम बचत ब्याज दरों तथा मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं के बीच परिवारों की अधिक और स्थिर प्रतिफल प्राप्त करने की प्राथमिकता को दर्शाता है।
- यद्यपि बाजार-आधारित व्यवस्थित निवेश योजनाएँ लोकप्रिय हो रही हैं, फिर भी सावधि जमाओं की सुरक्षा, पूर्वानुमेयता और सुनिश्चित प्रतिफल उन्हें भारतीय बचत संस्कृति का एक महत्वपूर्ण आधार बनाए हुए हैं।
स्रोत: IE