भारत में सूक्ष्म वित्त का पुनःपरिकल्पन 

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • हाल ही में अर्थशास्त्रियों ने तर्क दिया है कि यद्यपि सूक्ष्म वित्त ने भारत में वित्तीय समावेशन का विस्तार किया है, भविष्य की वृद्धि को बनाए रखने के लिए मध्यम वित्त (मेसो-फाइनेंस) और बढ़ते उद्यमों के लिए सशक्त वित्तीय सेवाओं की ओर परिवर्तन आवश्यक होगा।

सूक्ष्म वित्त क्या है?

  • सूक्ष्म वित्त का आशय छोटे पैमाने की वित्तीय सेवाओं, विशेषकर ऋण, से है जो निम्न-आय वाले परिवारों और सूक्ष्म उद्यमों को प्रदान की जाती हैं जिन्हें औपचारिक बैंकिंग संस्थानों तक पहुँच नहीं होती।
  • इस अवधारणा को वैश्विक पहचान 1976 में बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस द्वारा स्थापित ग्रामीण बैंक के माध्यम से मिली, जिसने बिना संपार्श्विक (कोलेटरल) के गरीब परिवारों को समूह-आधारित ऋण की लोकप्रिय बनाया।

पारंपरिक सूक्ष्म वित्त मॉडल की सफलता

  • भारत का सूक्ष्म वित्त क्षेत्र मुख्यतः संयुक्त देयता समूह (JLG) मॉडल पर आधारित है। इसने लाखों निम्न-आय वाले परिवारों, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं, को औपचारिक ऋण तक पहुँच प्रदान की है।
  • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक द्वारा लागू स्व-सहायता समूह-बैंक लिंक कार्यक्रम ने 144 लाख से अधिक स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 17 करोड़ से अधिक परिवारों को सशक्त बनाया है।
  • लगभग 46% सूक्ष्म वित्त ऋण उन परिवारों को दिए जाते हैं जिनकी मासिक आय ₹20,000 से कम है, जिससे आय-सृजन गतिविधियों और परिसंपत्ति निर्माण को समर्थन मिलता है।

सूक्ष्म वित्त से संबंधित सरकारी पहलें

  • क्रेडिट सूचना साझा करने का आदेश: आरबीआई ने सभी सूक्ष्म वित्त ऋणदाताओं को CRIF हाई मार्क और CIBIL जैसे क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया है, जिससे उधारकर्ताओं का क्रेडिट इतिहास उचित मूल्यांकन हेतु उपलब्ध हो सके।
  • सूक्ष्म वित्त ऋण हेतु आरबीआई का संशोधित नियामक ढाँचा, 2022: सभी विनियमित संस्थाओं (बैंक, एनबीएफसी, एनबीएफसी-एमएफआई, एसएफबी) के लिए एक समान नियामक ढाँचा प्रदान करता है ताकि उधारकर्ता संरक्षण और जिम्मेदार ऋण को बढ़ावा मिल सके।
  • SHG-बैंक लिंक कार्यक्रम: स्व-सहायता समूहों को औपचारिक बैंकिंग संस्थानों से जोड़ता है और आय-सृजन गतिविधियों को प्रोत्साहित करता है।
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: सूक्ष्म और लघु उद्यमों को ₹20 लाख तक का बिना संपार्श्विक ऋण प्रदान करती है।
  • नाबार्ड पुनर्वित्त समर्थन: सूक्ष्म वित्त संस्थानों को पुनर्वित्त सहायता प्रदान करता है ताकि वंचित वर्गों तक ऋण प्रवाह बढ़ाया जा सके।

सूक्ष्म वित्त मॉडल की सीमाएँ

  • पारंपरिक सूक्ष्म वित्त मॉडल मुख्यतः छोटे पैमाने की आजीविका गतिविधियों और कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं के लिए उपयुक्त है।
  • उच्च ब्याज दरें इसे उन उद्यमों के लिए अनुपयुक्त बनाती हैं जिन्हें बड़े निवेश और लंबी पुनर्भुगतान अवधि की आवश्यकता होती है।
  • मानकीकृत ऋण उत्पाद प्रायः उधारकर्ताओं की विविध वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहते हैं।
  • पर्याप्त बचत और बीमा के बिना अत्यधिक ऋण पर निर्भरता वित्तीय असुरक्षा बढ़ाती है।
  • विभिन्न सूक्ष्म वित्त संस्थानों से कई बार ऋण लेने से ऋण-जाल का जोखिम बढ़ा है, जहाँ क्षेत्र की लगभग 8–10% परिसंपत्तियाँ उन उधारकर्ताओं से जुड़ी हैं जिनके पास चार से अधिक ऋणदाता हैं।

मेसो-फाइनेंस क्या है?

  • मेसो-फाइनेंस उन वित्तीय सेवाओं को संदर्भित करता है जो सूक्ष्म वित्त और पारंपरिक बैंक ऋण के बीच के अंतर् को समाप्त करते  हैं।
  • यह सूक्ष्म वित्त ऋणों से बड़ा और अधिक लचीला वित्त प्रदान करता है, लेकिन पारंपरिक वाणिज्यिक बैंक ऋणों से छोटा अवं कम औपचारिक होता है।
  • यह व्यवसाय विस्तार, परिसंपत्ति निर्माण, रोजगार सृजन और ग्रामीण आर्थिक विकास को समर्थन देता है।

सूक्ष्म वित्त और मध्यम वित्त में अंतर

पहलूसूक्ष्म वित्तमेसो-फाइनेंस
ऋण आकारछोटे ऋणमध्यम आकार के ऋण
उद्देश्यकार्यशील पूंजी और आजीविका गतिविधियाँव्यवसाय विस्तार और परिसंपत्ति निर्माण
पुनर्भुगतान अवधिअल्पकालिकमध्यम से दीर्घकालिक
लक्षित समूहनिम्न-आय वाले परिवार और सूक्ष्म उद्यमउदीयमान सूक्ष्म और लघु उद्यम
उदाहरणसिलाई मशीन या दुग्ध पशु खरीदनाडेयरी फार्म, खाद्य प्रसंस्करण इकाई या ग्रामीण उद्यम स्थापित करना

मध्यम वित्त की ओर संक्रमण में चुनौतियाँ

  • उच्च ऋण जोखिम: बड़े ऋण आकार से चूक और वित्तीय हानि का जोखिम बढ़ता है।
  • कमजोर ऋण मूल्यांकन प्रणाली: वित्तीय संस्थानों को अधिक सशक्त उधारकर्ता मूल्यांकन और नकदी प्रवाह आकलन तंत्र की आवश्यकता है।
  • व्यवसाय समर्थन सेवाओं की आवश्यकता: बढ़ते उद्यमों को वित्त के साथ-साथ सतत निगरानी, मार्गदर्शन और बाज़ार संपर्क की आवश्यकता होती है।
  • नियामक बाधाएँ: वर्तमान नियामक ढाँचे और वित्तीय संस्थान मुख्यतः या तो सूक्ष्म वित्त या पारंपरिक बैंकिंग के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

मध्यम वित्त के सफल मॉडल

  • थाईलैंड का कृषि और कृषि सहकारी बैंक: किसान समूहों, सहकारी समितियों और ग्रामीण उद्यमों को मध्यम आकार के ऋण प्रदान करता है, जिससे वे निर्वाह गतिविधियों से आगे बढ़ सकें।
  • बांग्लादेश में BRAC: छोटे उद्यम ऋण शुरू किए, जो उन व्यवसायों का समर्थन करते हैं जो पारंपरिक सूक्ष्म वित्त से आगे बढ़ चुके हैं लेकिन वाणिज्यिक बैंक ऋण तक पहुँचने के लिए बहुत छोटे हैं।
  • KfW विकास बैंक: अफ्रीका और एशिया में SME-वित्तपोषण कार्यक्रमों का समर्थन करता है जो बढ़ते उद्यमों को मध्यम पैमाने का ऋण प्रदान करते हैं।
  • भारत में: मान देशी महिला सहकारी बैंक और कई छोटे वित्त बैंक सफल सूक्ष्म वित्त ग्राहकों को बड़े उद्यम ऋण प्रदान कर रहे हैं, जिससे वे मध्यम वित्त दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहे हैं।

आगे की राह

  • वित्तीय सहायता के साथ क्षमता निर्माण, वित्तीय साक्षरता और व्यवसाय विकास सेवाएँ प्रदान की जानी चाहिए।
  • छोटे वित्त बैंक, एनबीएफसी और सूक्ष्म वित्त संस्थानों को उद्यम विस्तार हेतु अनुकूलित वित्तीय उत्पाद बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • वित्तीय संस्थानों को ऋण के साथ बचत, बीमा और पेंशन उत्पाद भी प्रदान करने चाहिए ताकि परिवारों की लचीलापन बढ़े।
  • ऋण मूल्यांकन को मानकीकृत मॉडलों के बजाय नकदी प्रवाह और व्यवसाय क्षमता पर आधारित होना चाहिए।

निष्कर्ष

  • यद्यपि संयुक्त देयता समूह मॉडल ने भारत में वित्तीय समावेशन का उल्लेखनीय विस्तार किया है, इसकी भविष्य की वृद्धि क्षमता सीमित होती जा रही है।
  • मेसो-फाइनेंस, सशक्त बचत प्रणाली और विविधीकृत वित्तीय सेवाओं की ओर संक्रमण एक अधिक लचीला एवं समावेशी वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में सहायक होगा।

स्रोत: BS

 

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