पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भारत के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) 2022-23 के अनुमान जारी किए हैं।
परिचय
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) देश के सरकारी एवं निजी क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी व्यय तथा वित्तीय प्रवाह का आकलन करने का एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (NHSRC) में वर्ष 2014 से NHA अनुमानों की तैयारी को संस्थागत स्वरूप प्रदान किया गया।
- प्रकाशक: राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (NHSRC), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय।
- अब तक वर्ष 2013-14 से 2021-22 तक के 9 राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान तैयार किए जा चुके हैं।
- अपनाई गई कार्यप्रणाली: स्वास्थ्य लेखा प्रणाली, 2011 (SHA), जो स्वास्थ्य लेखांकन हेतु एक वैश्विक मानक ढाँचा है।
NHA 2022-23 की प्रमुख विशेषताएँ
- कुल स्वास्थ्य व्यय (THE): भारत का कुल स्वास्थ्य व्यय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 3.37 प्रतिशत तथा प्रति व्यक्ति 6,373 रुपये अनुमानित किया गया है।
- इसमें सरकारी एवं निजी स्रोतों सहित बाह्य/दाता निधियों से प्राप्त वर्तमान एवं पूंजीगत व्यय शामिल हैं।
- सरकारी स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि: देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में सरकारी स्वास्थ्य व्यय (GHE) की हिस्सेदारी वर्ष 2013-14 के 1.15 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 1.43 प्रतिशत हो गई है।
- वर्ष 2022-23 को आधार वर्ष मानने वाली नई GDP शृंखला के अनुसार यह 1.48 प्रतिशत है।
- सामान्य सरकारी व्यय (GGE) में GHE की हिस्सेदारी इसी अवधि में 3.78 प्रतिशत से बढ़कर 4.89 प्रतिशत हो गई है।
- प्रति व्यक्ति आधार पर सरकारी स्वास्थ्य व्यय लगभग 2.7 गुना बढ़कर 1,042 रुपये से 2,786 रुपये हो गया है।
- आउट ऑफ़ पॉकेट व्यय (OOPE): रिपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय तुलनात्मक विश्लेषण के अनुसार वर्ष 2022 में भारत का प्रति व्यक्ति आउट ऑफ़ पॉकेट स्वास्थ्य व्यय 121 अंतरराष्ट्रीय डॉलर (PPP) था, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर 64वें स्थान पर रहा।
- यह आँकड़ा दर्शाता है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं एवं बीमा कवरेज के विस्तार के बावजूद भारतीय परिवारों को उपचार व्यय का एक बड़ा हिस्सा स्वयं वहन करना पड़ रहा है।
- पड़ोसी देशों में यह व्यय:
- पाकिस्तान : 85 अंतरराष्ट्रीय डॉलर
- नेपाल : 180 अंतरराष्ट्रीय डॉलर
- बांग्लादेश : 130 अंतरराष्ट्रीय डॉलर
- श्रीलंका : 246 अंतरराष्ट्रीय डॉलर
- स्वास्थ्य व्यय का वितरण: वर्तमान स्वास्थ्य व्यय में निजी अस्पतालों की हिस्सेदारी 30.83 प्रतिशत है, जो सर्वाधिक है।
- इसके बाद सरकारी अस्पतालों की हिस्सेदारी 16.73 प्रतिशत है।
- निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर अपेक्षाकृत कम व्यय: निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय वर्तमान स्वास्थ्य व्यय (CHE) का केवल 8.88 प्रतिशत है।
- वहीं, रोगोपचार संबंधी अंतःरोगी एवं बाह्यरोगी सेवाएँ मिलकर कुल व्यय का 56 प्रतिशत से अधिक भाग ग्रहण करती हैं।
- औषधीय व्यय भी अपेक्षाकृत अधिक बना हुआ है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में कम सार्वजनिक व्यय से संबंधित चिंताएँ
- अपर्याप्त स्वास्थ्य अवसंरचना: कम सार्वजनिक निवेश के कारण स्वास्थ्य अवसंरचना, विशेषकर मानव संसाधनों की उपलब्धता प्रभावित हुई है तथा प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार की गति धीमी रही है।
- स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुँच: निम्न सार्वजनिक व्यय ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को बाधित करता है, जिससे शहरी एवं ग्रामीण जनसंख्या के मध्य स्वास्थ्य असमानताएँ बढ़ती हैं।
- निवारक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपेक्षा: भारत में स्वास्थ्य व्यय का बड़ा भाग तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं पर केंद्रित है, जबकि निवारक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल पाती।
- रोग भार में वृद्धि: कम सार्वजनिक निवेश के कारण संचारी रोगों, कुपोषण तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं जैसे रोके जा सकने वाले रोगों का भार बढ़ता है।
- आउट ऑफ़ पॉकेट व्यय में वृद्धि: सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना की कमी के कारण नागरिकों को निजी स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक निर्भर होना पड़ता है, जिससे उन पर वित्तीय भार बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने हेतु सरकार द्वारा उठाए गए हालिया कदम
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017: यह नीति सभी नागरिकों के लिए उच्चतम स्वास्थ्य एवं कल्याण स्तर सुनिश्चित करने की सरकार की दृष्टि को रेखांकित करती है तथा निवारक एवं प्रोत्साहनात्मक स्वास्थ्य सेवाओं पर बल देती है।
- आधुनिक चिकित्सा एवं पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी) को समान महत्त्व प्रदान किया गया है।
- आयुष्मान आरोग्य मंदिर: देशभर में लगभग 1.75 लाख स्वास्थ्य केंद्र कार्यरत हैं, जहाँ अब तक 369 करोड़ से अधिक मरीजों की विजिट दर्ज की गई हैं।
- 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह की जाँच पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (NDHM): वर्ष 2020 में प्रारंभ यह मिशन नागरिकों के लिए स्वास्थ्य पहचान पत्र (Health ID) तथा राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना के विकास के माध्यम से एक डिजिटल स्वास्थ्य पारितंत्र विकसित करने का लक्ष्य रखता है।
- स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWCs): सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने वाले स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों में परिवर्तित कर रही है।
- प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY): इस योजना का उद्देश्य नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) स्थापित करना तथा सरकारी मेडिकल कॉलेजों का उन्नयन कर तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं एवं चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ बनाना है।
- अनुसंधान एवं विकास पहल: सरकार टीकों, औषधियों और चिकित्सा प्रौद्योगिकियों के विकास हेतु अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित कर रही है।
- राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) अधिनियम, 2019: यह अधिनियम भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) के स्थान पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की स्थापना कर चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा व्यवसाय में पारदर्शिता तथा उत्तरदायित्व बढ़ाने का प्रयास करता है।
- जन औषधि योजना: प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) के अंतर्गत जन औषधि केंद्रों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएँ किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
आगे की राह
- कोविड-19 महामारी ने भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर किया तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिक सार्वजनिक निवेश की आवश्यकता को रेखांकित किया।
- प्रभावी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ गंभीर रोगों की रोकथाम में सहायक होती हैं। अतः प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में निवेश बढ़ाकर समग्र स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।
स्रोत: PIB