डिजिटल युग में भारत के महत्त्वपूर्ण अवसंरचना तंत्र की सुरक्षा 

पाठ्यक्रम: GS3/ आंतरिक सुरक्षा

संदर्भ

  • भारत का महत्त्वपूर्ण अवसंरचना तंत्र तीव्रता से डिजिटल प्रौद्योगिकियों पर निर्भर होता जा रहा है। इनसे दक्षता में वृद्धि हुई है, किंतु साथ ही साइबर हमलों एवं दूरस्थ व्यवधानों के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ी है।

राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण अवसंरचना क्या है?

  • राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण अवसंरचना (CNI) उन परिसंपत्तियों, प्रणालियों, नेटवर्कों एवं सेवाओं को संदर्भित करती है जिनका व्यवधान या विनाश राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता, जनसुरक्षा एवं शासन पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
  • महत्त्वपूर्ण अवसंरचना में शामिल हैं:
    • विद्युत उत्पादन एवं प्रसारण प्रणालियाँ।
    • तेल रिफ़ाइनरी, ईंधन पाइपलाइन एवं एलपीजी वितरण नेटवर्क।
    • रेलवे नेटवर्क, हवाई अड्डे एवं बंदरगाह।
    • बैंकिंग एवं भुगतान प्रणालियाँ।
    • दूरसंचार एवं इंटरनेट अवसंरचना।
    • जल आपूर्ति एवं स्वच्छता प्रणालियाँ।
    • स्वास्थ्य संस्थान एवं आपातकालीन सेवाएँ।
    • रक्षा प्रतिष्ठान एवं सामरिक परिसंपत्तियाँ।

महत्त्वपूर्ण अवसंरचना सुरक्षा का महत्व

  • राष्ट्रीय सुरक्षा: विद्युत ग्रिड, संचार प्रणाली या ईंधन आपूर्ति का व्यवधान रक्षा तैयारी एवं आंतरिक सुरक्षा को कमजोर कर सकता है।
  • आर्थिक स्थिरता: महत्त्वपूर्ण अवसंरचना औद्योगिक उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग एवं व्यापार का आधार है। व्यवधान आर्थिक वृद्धि को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
  • जनसुरक्षा एवं शासन: स्वास्थ्य, परिवहन या जल आपूर्ति प्रणालियों का विघटन नागरिकों के जीवन एवं शासन तंत्र को प्रत्यक्षतः खतरे में डाल सकता है।
  • सामरिक संप्रभुता: अविश्वसनीय प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता भारत को भू-राजनीतिक संघर्षों के दौरान सामरिक कमजोरियों के प्रति उजागर कर सकती है।

महत्त्वपूर्ण अवसंरचना का डिजिटल रूपांतरण

  • स्वचालन एवं IoT की भूमिका: औद्योगिक प्रणालियाँ तीव्रता से स्वचालन एवं दूरस्थ निगरानी प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर रही हैं।
    • IoT-सक्षम सेंसर दबाव, तापमान, ईंधन स्तर, यातायात गति एवं औद्योगिक संचालन संबंधी वास्तविक समय की जानकारी एकत्र करते हैं।
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं भविष्यवाणी विश्लेषण दक्षता, रखरखाव एवं संसाधन प्रबंधन में सुधार करते हैं।
  • SCADA प्रणालियों का एकीकरण: पूर्व में कई औद्योगिक प्रणालियाँ पृथक SCADA (पर्यवेक्षी नियंत्रण और डाटा अधिग्रहण) प्रणालियों पर संचालित होती थीं। अब ये इंटरनेट-आधारित प्लेटफ़ॉर्म से जुड़कर केंद्रीकृत नियंत्रण एवं भविष्यवाणी आधारित रखरखाव हेतु प्रयुक्त हो रही हैं।
  • IT–OT–IoT अभिसरण: आधुनिक अवसंरचना तीन प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों की परस्पर क्रिया से संचालित होती है:
    • सूचना प्रौद्योगिकी (IT): डेटा प्रसंस्करण, सॉफ़्टवेयर, संचार नेटवर्क एवं डिजिटल सेवाओं का प्रबंधन।
    • संचालन प्रौद्योगिकी (OT): मशीनरी, औद्योगिक संयंत्र, परिवहन प्रणाली एवं विद्युत ग्रिड जैसे भौतिक प्रक्रियाओं का नियंत्रण।
    • इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT): भौतिक उपकरणों एवं सेंसरों को डिजिटल प्रणालियों से जोड़कर वास्तविक समय डेटा संग्रह एवं दूरस्थ संचालन सक्षम करना।

सुरक्षा संबंधी चिंताएँ

  • साइबर हमलों का विस्तार: इंटरनेट-सक्षम उपकरणों के बढ़ते उपयोग ने साइबर हमलों के अवसरों को बढ़ा दिया है। सेंसर, नियंत्रक एवं संचार प्रणालियों की कमजोरियाँ हमलावरों को महत्त्वपूर्ण अवसंरचना नेटवर्क तक पहुँच प्रदान कर सकती हैं।
  • आयातित उपकरणों से जोखिम: कई IoT उपकरण विदेशी निर्माताओं से आयातित होते हैं, जिनमें छिपी कमजोरियाँ, अनधिकृत डेटा-साझाकरण तंत्र या दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर हो सकते हैं।
  • कमज़ोर खरीद प्रथाएँ: सरकारी विभाग एवं सार्वजनिक उपक्रम प्रायः खरीद के दौरान टेम्पलेट-आधारित अनुपालन जाँच पर निर्भर रहते हैं। निविदा शर्तें हमेशा विश्वसनीय स्वदेशी प्रौद्योगिकियों या विस्तृत सुरक्षा ऑडिट पर बल नहीं देतीं।
  • अपर्याप्त सुरक्षा प्रमाणन: कई IoT उपकरणों के लिए सुरक्षा प्रमाणन तंत्र समान रूप से लागू नहीं किए जाते।

वैश्विक घटनाएँ जो जोखिम दर्शाती हैं

  • कोलोनियल पाइपलाइन रैनसमवेयर हमला: अमेरिका में इस हमले ने ईंधन आपूर्ति बाधित कर दी और दिखाया कि महत्त्वपूर्ण अवसंरचना पर साइबर हमले बड़े पैमाने पर आर्थिक एवं सामाजिक व्यवधान उत्पन्न कर सकते हैं।
  • गैस स्टेशन निगरानी प्रणालियों पर हमले: हाल ही में अमेरिका के कई राज्यों में ऑटोमैटिक टैंक गेज (ATG) प्रणालियों पर साइबर घुसपैठ ने इंटरनेट-सक्षम ईंधन निगरानी अवसंरचना की कमजोरियों को उजागर किया।

भारत का महत्त्वपूर्ण अवसंरचना संरक्षण तंत्र

  • भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In): यह साइबर सुरक्षा घटनाओं के प्रति राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है। यह चेतावनी, परामर्श एवं सुरक्षा दिशानिर्देश जारी करती है।
  • राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र (NCIIPC): ऊर्जा, बैंकिंग, दूरसंचार एवं परिवहन जैसे क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा हेतु उत्तरदायी।
  • साइबर स्वच्छता केंद्र: बॉटनेट सफाई एवं मैलवेयर विश्लेषण केंद्र जो नेटवर्क की निगरानी करता है एवं नागरिकों एवं संगठनों को संक्रमित उपकरणों की सुरक्षित सफाई में सहायता करता है।
  • मानकीकरण परीक्षण एवं गुणवत्ता प्रमाणन (STQC): यह इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल उपकरणों के लिए सुरक्षा परीक्षण एवं प्रमाणन करता है। हाल ही में इसने निगरानी कैमरों एवं संबंधित उपकरणों के परीक्षण तंत्र को सुदृढ़ किया है।
  • केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF): यह हवाई अड्डों, समुद्री बंदरगाहों, परमाणु संयंत्रों, मेट्रो नेटवर्क, विद्युत संयंत्रों, अंतरिक्ष प्रतिष्ठानों एवं प्रमुख औद्योगिक परिसरों जैसी महत्त्वपूर्ण अवसंरचना स्थापनाओं को भौतिक सुरक्षा प्रदान करता है।

आगे की राह

  • सुरक्षा प्रमाणन को सुदृढ़ करना: भारत को महत्त्वपूर्ण अवसंरचना में प्रयुक्त सभी IoT उपकरणों हेतु अनिवार्य एवं कठोर प्रमाणन तंत्र स्थापित करना चाहिए।
  • विश्वसनीय स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना: सरकारी खरीद में आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत सुरक्षित स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • निरंतर निगरानी एवं ऑडिटिंग: महत्त्वपूर्ण अवसंरचना प्रणालियों का नियमित रूप से भेद्यता आकलन, पैठ परीक्षण एवं वास्तविक समय निगरानी किया जाना चाहिए।

Source: TH

 

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