पाठ्यक्रम: GS1/विश्व इतिहास
संदर्भ
- भारत के रक्षा मंत्री और कोरिया गणराज्य के मंत्री ने संयुक्त रूप से दक्षिण कोरिया में भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया और इसमें भारतीय सैनिकों के योगदान को सम्मानित किया गया।
कोरियाई युद्ध की पृष्ठभूमि
- द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात, जापानी शासन के अधीन रहा कोरिया 38वें समानांतर पर विभाजित कर दिया गया।
- उत्तरी भाग सोवियत प्रभाव में आया और किम इल सुंग के नेतृत्व में उत्तर कोरिया बना।
- दक्षिणी भाग अमेरिकी प्रभाव में आया और सिंगमन री के नेतृत्व में दक्षिण कोरिया बना।
- दोनों सरकारों ने पूरे कोरियाई प्रायद्वीप पर वैधता का दावा किया।
युद्ध की रूपरेखा
- उत्तर कोरियाई आक्रमण (1950): 25 जून 1950 को उत्तर कोरियाई सेनाएँ 38वें समानांतर को पार कर दक्षिण कोरिया में घुस गईं।
- संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया: सुरक्षा परिषद ने आक्रमण की निंदा की और दक्षिण कोरिया को सैन्य सहायता की अनुमति दी।
- संयुक्त राष्ट्र का प्रत्याक्रमण: संयुक्त राष्ट्र-नेतृत्व वाली सेनाओं ने सफल इंचोन युद्ध लड़ा। उत्तर कोरियाई सैनिकों को चीन की सीमा तक “प्रत्यावर्तित किया गया।
- चीनी हस्तक्षेप: चीन ने 1950 के अंत में युद्ध में प्रवेश किया, क्योंकि उसे अपनी सीमा पर शत्रु सेना का भय था। चीनी सेनाओं ने संयुक्त राष्ट्र की सेनाओं को दक्षिण की ओर धकेला, जिससे भारी हताहत और लंबा संघर्ष हुआ।
- युद्ध अंततः मूल 38वें समानांतर के आसपास स्थिर हो गया।
- 1953 में युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर हुए, परंतु कोई औपचारिक शांति संधि नहीं हुई। इस कारण दोनों कोरिया तकनीकी रूप से आज भी युद्धरत हैं।
- इस समझौते ने शत्रुता की समाप्ति और 2.5 मील चौड़े असैन्यीकृत क्षेत्र (DMZ) की स्थापना की।
प्रमुख परिणाम
- कोरिया का स्थायी विभाजन—उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया।
- शीत युद्ध की सैन्य गठबंधनों का सुदृढ़ीकरण।
- पूर्वी एशिया में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का विस्तार।
- वैश्विक राजनीति में चीन का एक महत्वपूर्ण सैन्य शक्ति के रूप में उदय।
भारत की भूमिका
- कूटनीतिक मध्यस्थता और शांति प्रयास: भारत ने निरंतर संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की और शीत युद्ध के दौरान युद्ध की वृद्धि रोकने हेतु संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से कार्य किया।
- न्यूट्रल नेशंस रिपैट्रिएशन कमीशन (NNRC) की अध्यक्षता: भारत ने NNRC की अध्यक्षता की, जो 1953 के युद्धविराम के बाद युद्धबंदियों की वापसी और आदान-प्रदान की निगरानी हेतु जिम्मेदार था।
- कस्टोडियन फोर्स इंडिया (CFI) की तैनाती: भारत ने CFI भेजी, जिसने उन युद्धबंदियों का प्रबंधन और संरक्षण किया जिन्होंने तत्काल वापसी से मना किया।
- मानवीय और चिकित्सीय सहायता: भारत ने 60वीं पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस यूनिट तैनात की, जिसने युद्ध के दौरान घायल सैनिकों और नागरिकों को चिकित्सीय उपचार एवं मानवीय सहायता प्रदान की।
Source: TH
Previous article
सीमा प्रबंधन
Next article
संक्षिप्त समाचार 23-05-2026