सीमा प्रबंधन

पाठ्यक्रम: GS3/आंतरिक सुरक्षा

समाचार में

  • केंद्र सरकार पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी भारत की सीमाओं को सुदृढ़ करने हेतु स्मार्ट बॉर्डर परियोजना शुरू करने जा रही है। इसमें ड्रोन, राडार और आधुनिक निगरानी कैमरों जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

सीमा प्रबंधन

  • सीमा प्रबंधन वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कोई देश अपनी सीमाओं को नियंत्रित और प्रबंधित करता है ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और अधिकृत व्यक्तियों एवं वस्तुओं का सुचारु आवागमन हो।
  • इसमें अवैध प्रवेश और खतरों को रोकना शामिल है, साथ ही वैध व्यापार एवं यात्रा को न्यूनतम व्यवधान के साथ सुगम बनाना भी।
  • नोट: भारत की तटरेखा की लंबाई 7516.6 किमी से पुनर्मूल्यांकन कर 11098.81 किमी कर दी गई है। यह कार्य राष्ट्रीय हाइड्रोग्राफिक कार्यालय (NHO) ने सर्वे ऑफ इंडिया (SoI) के सहयोग से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) द्वारा प्रदत्त नवीनतम संदर्भ शर्तों के अनुसार किया।

सीमा प्रबंधन का महत्व

  • राष्ट्रीय सुरक्षा: भारत की 15,106 किमी लंबी स्थलीय सीमा सात देशों—पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान—से लगती है।
    • इन सीमाओं की सुरक्षा घुसपैठ, आतंकवाद और अवैध प्रवासन को रोकने के लिए आवश्यक है।
  • आर्थिक विकास: सीमा सड़कें, सुरंगें और संपर्क परियोजनाएँ व्यापार, पर्यटन एवं पुनः प्रवासन को सक्षम बनाती हैं, जिससे “दूरस्थ” गाँव “प्रथम गाँव” में परिवर्तित होते हैं।
  • रणनीतिक स्थिरता: प्रभावी सीमा प्रबंधन भारत की प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करता है और त्वरित सैन्य लामबंदी में सहायक होता है।
  • सामुदायिक एकीकरण: सीमा गाँवों का विकास राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है और सीमावर्ती जनसंख्या में अलगाव को कम करता है।

चुनौतियाँ

  • छिद्रपूर्ण सीमाएँ: विशेषकर बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार से लगी सीमाएँ तस्करी, अवैध प्रवासन एवं मानव तस्करी जैसी सुरक्षा चुनौतियाँ उत्पन्न करती हैं।
  • कठिन भू-भाग: हिमालय, रेगिस्तान और घने वन निगरानी एवं अवसंरचना विकास में बाधा डालते हैं।
  • सीमा-पार आतंकवाद: भारत-पाकिस्तान सीमा पर लगातार घुसपैठ के प्रयास।
  • प्रौद्योगिकीय अंतराल: AI, UAV (ड्रोन) और स्मार्ट फेंसिंग के व्यापक उपयोग की आवश्यकता।
  • सामाजिक-आर्थिक कमजोरियाँ: सीमा गाँवों में स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका की कमी उन्हें शोषण के प्रति संवेदनशील बनाती है।
  • समन्वय संबंधी समस्याएँ: अनेक एजेंसियों के बीच कभी-कभी कार्यों का ओवरलैप और समन्वय की कठिनाई।

भारत द्वारा उठाए गए कदम

  • सीमा अवसंरचना एवं प्रबंधन (BIM) योजना:  यह एक केंद्रीय क्षेत्र कार्यक्रम (2021–26) है जिसकी लागत ₹13,020 करोड़ है। इसका उद्देश्य भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को सुदृढ़ करना है।
    • इस योजना का फोकस सीमा सुरक्षा को बेहतर बनाने पर है, जिसमें बाड़बंदी, सड़कें, फ्लडलाइट, सीमा चौकियाँ, हेलीपैड और फुट ट्रैक जैसी अवसंरचना का विकास शामिल है। साथ ही, उन क्षेत्रों में तकनीक का उपयोग किया जाता है जहाँ भौतिक बाड़बंदी संभव नहीं है।
  • समग्र एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS): यह प्रणाली भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमाओं पर वास्तविक समय की स्थिति जागरूकता को बेहतर बनाने एवं त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने हेतु बनाई गई है।
    • यह जनशक्ति, सेंसर, नेटवर्क, खुफिया जानकारी और कमांड-एंड-कंट्रोल प्रणालियों का एकीकरण कर सीमा निगरानी को सुदृढ़ करती है।
  • सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP): इसका उद्देश्य भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से 10 किमी के अंदर रहने वाले लोगों की जीवन स्थितियों में सुधार करना है।
    • इसके अंतर्गत स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, जल, स्वच्छता और आजीविका जैसी आवश्यक अवसंरचना का विकास समन्वित सरकारी योजनाओं के माध्यम से किया जाता है।
  • सीमा सड़क संगठन (BRO) की भूमिका: BRO सीमा और दुर्गम क्षेत्रों में रणनीतिक सड़कों, पुलों, सुरंगों तथा हवाई पट्टियों का निर्माण एवं रखरखाव करता है ताकि सैन्य और नागरिक दोनों आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।
    • अब तक BRO ने 64,100 किमी सड़कें, 1,179 पुल, 07 सुरंगें और 22 हवाई पट्टियाँ भारत की सीमा क्षेत्रों एवं मित्र पड़ोसी देशों में निर्मित की हैं।
  • सीमा सुरक्षा बल (BSF) का अधिकार क्षेत्र विस्तार: BSF का अधिकार क्षेत्र 15 किमी से बढ़ाकर 50 किमी कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल में भूमि आवंटन से संबंधित निर्णय भी अंतिम रूप दिया गया है।
  • डिजिटल कनेक्टिविटी: सरकार भारतनेट जैसी परियोजनाओं के माध्यम से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार कर रही है।
    • डिजिटल भारत निधि द्वारा वित्तपोषित भारतनेट सभी ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड पहुँचाने का लक्ष्य रखता है।
    • संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के अंतर्गत शेष गाँवों तक कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है।
    • ऑफ़लाइन, बहुभाषी और सुलभ सुविधाओं वाले डिजिटल शासन प्लेटफॉर्म का उपयोग डिजिटल विभाजन को कम करने तथा अंतिम छोर तक सेवा वितरण सुनिश्चित करने हेतु किया जा रहा है।
  • जीवंत गाँव कार्यक्रम
    • जीवंत गाँव कार्यक्रम-I (VVP-I, 2023): उत्तरी सीमा के साथ अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और लद्दाख में 662 गाँवों का समग्र विकास।
    • जीवंत गाँव कार्यक्रम-II (VVP-II, 2025): 15 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में अन्य अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्रों के 1,954 गाँवों का विकास। इसका फोकस सीमा समुदायों के समग्र सामाजिक-आर्थिक उत्थान पर है।

निष्कर्ष एवं आगे की राह

  • भारत का सीमा प्रबंधन अब एक समग्र प्रणाली के रूप में विकसित हो रहा है, जिसमें तकनीक, अवसंरचना और सामुदायिक विकास का संयोजन है।
  • आगे की दिशा में AI और उपग्रह-आधारित निगरानी का विस्तार, सीमा गाँवों में स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आजीविका का विकास, सुरक्षा बलों और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना, स्मार्ट एवं आत्मनिर्भर सीमा गाँवों को बढ़ावा देना, पड़ोसी देशों के साथ क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना और हाइब्रिड साइबर-भौतिक खतरों के विरुद्ध लचीलापन विकसित करना आवश्यक है।
  • स्मार्ट बॉर्डर पहल से एकीकृत, तकनीक-आधारित सुरक्षा तंत्र एक वर्ष के अंदर स्थापित होने की अपेक्षा है।

Source  : IE

 

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