भूल जाने के अधिकार (Right to be forgotten-RTBF) का दायरा

पाठ्यक्रम:GS2/शासन 

समाचार में

  • सर्वोच्च न्यायालय ने एक याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें दिसंबर 2025 के दिल्ली उच्च न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती दी गई है जिसमें एक बैंकर को धन शोधन मामले से बरी किए जाने के बाद उससे संबंधित पुराने समाचार रिपोर्टों को हटाने का आदेश दिया गया था। इसने “भूल जाने के अधिकार” (RTBF) के परिमाण पर प्रश्न खड़े किए हैं।

भूल जाने के अधिकार की पृष्ठभूमि और उत्पत्ति

  • भूल जाने का अधिकार (Right to be Forgotten) की उत्पत्ति 2014 में यूरोपीय न्यायालय के गूगल स्पेन  मामले से हुई थी, जिसमें एक स्पेनिश नागरिक ने अपने पुराने ऋणों से संबंधित अप्रासंगिक जानकारी को हटाने की मांग की थी।
  • बाद में इस सिद्धांत को यूरोपीय संघ के सामान्य डेटा संरक्षण विनियमन (GDPR) में अनुच्छेद 17 के माध्यम से सम्मिलित किया गया, जो डेटा मिटाने का अधिकार प्रदान करता है और साथ ही उन परिस्थितियों को भी परिभाषित करता है जिनमें यह अधिकार सीमित किया जा सकता है।

भूल जाने का अधिकार क्या है?

  • “भूल जाने का अधिकार” वह अधिकार है जिसके अंतर्गत किसी व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न होने देने का अधिकार मिलता है।
  • यह व्यक्ति को सक्षम बनाता है कि समाचार, वीडियो या तस्वीरों के रूप में उपलब्ध जानकारी को इंटरनेट अभिलेखों से हटवाया जा सके ताकि वह गूगल जैसे सर्च इंजनों पर दिखाई न दे।

महत्व

  • गोपनीयता की रक्षा: अप्रासंगिक या पुरानी व्यक्तिगत जानकारी से स्थायी हानि को रोकता है।
  • डिजिटल गरिमा: यह सुनिश्चित करता है कि पुराने आरोप या गलतियाँ स्थायी कलंक का कारण न बनें।
  • वैश्विक सामंजस्य: भारत को यूरोपीय संघ के GDPR जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाता है।
  • संतुलित अधिकार: व्यक्तिगत गोपनीयता और प्रेस की स्वतंत्रता व जनहित के बीच संतुलन स्थापित करता है।
  • पुनर्वास: विशेषकर उन व्यक्तियों के लिए जो बरी हो चुके हैं या अपनी सज़ा पूरी कर चुके हैं, पुनर्वास एवं पुनः एकीकरण में सहायक है।

चुनौतियाँ

  • सामग्री हटाना प्रेस की स्वतंत्रता से विरोधाभास उत्पन्न कर सकता है और सेंसरशिप का जोखिम उत्पन्न कर सकता है।
  • न्यायालयों को यह आकलन करना होगा कि गोपनीयता जनहित से अधिक महत्वपूर्ण है या नहीं।
  • DPDP अधिनियम, 2023 सीमित मान्यता देता है लेकिन स्पष्ट RTBF प्रक्रियाएँ नहीं हैं।
  • विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म, अभिलेखागार और सर्च इंजनों से डेटा हटाना जटिल है।
  • RTBF याचिकाओं की बढ़ती संख्या न्यायालयों पर भार डाल सकती है।
  • प्रभावशाली व्यक्ति RTBF का दुरुपयोग कर अपने पुराने कदाचार को छिपा सकते हैं और पारदर्शिता घटा सकते हैं।

भूल जाने के अधिकार पर कानून

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 43A संगठनों को संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा में विफल रहने पर क्षतिपूर्ति देने के लिए उत्तरदायी ठहराती है।
  • आईटी नियम, 2021 RTBF को मान्यता नहीं देते, लेकिन व्यक्तिगत जानकारी उजागर करने वाली सामग्री हटाने हेतु शिकायत निवारण तंत्र प्रदान करते हैं।
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और DPDP नियम, 2025 मिलकर नागरिक-केंद्रित डेटा संरक्षण ढाँचा स्थापित करते हैं, जिसमें सहमति, पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही जैसे सिद्धांत शामिल हैं। यह डेटा संरक्षण बोर्ड ऑफ इंडिया का गठन करता है और उल्लंघन पर भारी दंड लगाता है, जिससे भारत के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में गोपनीयता एवं विश्वास को सुदृढ़ किया जाता है।

न्यायिक टिप्पणियाँ

  • भारत में यद्यपि यह अधिकार विधि द्वारा स्पष्ट रूप से प्रदान नहीं किया गया है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने 2017 के के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ मामले में इसे अनुच्छेद 21 के अंतर्गत गोपनीयता के अधिकार का हिस्सा माना।
    • न्यायालय ने यूरोपीय संघ के 2016 विनियमन का उदाहरण देते हुए कहा कि व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत जानकारी हटाने का अधिकार है यदि वह अब आवश्यक, प्रासंगिक, सटीक या वांछित नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यह अधिकार पूर्ण नहीं है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कानूनी दायित्व, जनहित, जनस्वास्थ्य, शोध या कानूनी दावों द्वारा सीमित किया जा सकता है।
  • जोरावर सिंह मुंडी बनाम भारत संघ (2021) में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस सिद्धांत को लागू करते हुए एक मादक पदार्थ मामले के ऑनलाइन अभिलेख हटाने का निर्देश दिया, जिसमें याचिकाकर्ता बरी हो चुका था। न्यायालय ने माना कि ऑनलाइन उपलब्धता उसके रोजगार अवसरों को प्रभावित कर रही थी।

आगे की राह

  • भारत में भूल जाने का अधिकार एक निर्णायक चरण पर है, जहाँ व्यक्तिगत गोपनीयता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जनहित तथा तकनीकी व्यवहार्यता के बीच संतुलन आवश्यक है।
  • प्रगति हेतु एक स्पष्ट और व्यापक कानूनी ढाँचे की आवश्यकता होगी जिसमें परिभाषित सीमाएँ, स्वतंत्र पर्यवेक्षण, एवं सुसंगत न्यायिक मार्गदर्शन शामिल हों।
  • अनुपातिकता-आधारित मानकों को अपनाना, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के साथ तकनीकी सहयोग को सुदृढ़ करना, जन-जागरूकता बढ़ाना और दुरुपयोग के विरुद्ध सुरक्षा उपायों को समाहित करना आवश्यक होगा ताकि RTBF संवैधानिक मूल्यों एवं लोकतांत्रिक जवाबदेही के अनुरूप विकसित हो सके।

स्रोत :IE

 

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