भारत में डिजिटल धोखाधड़ी और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के प्रतिपूरक उपाय

पाठ्यक्रम:GS3/अर्थव्यवस्था; साइबर सुरक्षा

समाचार में

  • हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने छोटे मूल्य की धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन से होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति का प्रस्ताव रखा है।

RBI के हस्तक्षेप के मुख्य बिंदु

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों को छोटे मूल्य की धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन से हुई हानि की भरपाई के लिए ₹25,000 तक का मुआवज़ा देने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें वे मामले भी शामिल हैं जहाँ एक बार प्रयोग होने वाला पासवर्ड (OTP) साझा किया गया हो।
    • यह प्रत्येक ग्राहक के लिए केवल एक बार लागू होगा। क्षतिपूर्ति ₹25,000 या नुकसान का 85% तक होगी, और कुछ मामलों में RBI नुकसान का 70% वहन करेगा तथा शेष बैंक द्वारा साझा किया जाएगा।
    • भुगतान डिपॉज़िट एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड के अधिशेष से किया जाएगा।
  • RBI तीन क्षेत्रों पर सार्वजनिक परामर्श हेतु मसौदा दिशानिर्देश जारी करेगा:
    • वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री रोकना
    • निष्पक्ष ऋण वसूली प्रथाओं को सुनिश्चित करना
    • अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन में ग्राहक की देयता को सीमित करना
  • एक चर्चा पत्र डिजिटल भुगतान सुरक्षा को बढ़ाने पर भी विचार करेगा, जिसमें विलंबित क्रेडिट सत्यापन और संवेदनशील उपयोगकर्ताओं के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण शामिल होगा।
    • इन कदमों का उद्देश्य भारत की बैंकिंग प्रणाली में विश्वास, सुरक्षा और जवाबदेही को सुदृढ़ करना है।

डिजिटल धोखाधड़ी की वर्तमान स्थिति

  • भारत में साइबर सुरक्षा घटनाओं में तीव्र वृद्धि हुई है: 2022 में 10.29 लाख से बढ़कर 2024 में 22.68 लाख तक।
  • साइबर धोखाधड़ी से वित्तीय हानि भी उल्लेखनीय रहे हैं।
  • RBI के आँकड़ों के अनुसार, भारत विश्व में सबसे अधिक डिजिटल भुगतान दर्ज करता है। प्रत्येक 1,01,242 लेन-देन में एक धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन होता है और प्रत्येक ₹1 लाख लेन-देन पर केवल ₹1.40 की हानि होती है।

डिजिटल धोखाधड़ी के प्रमुख कारण

  • तीव्र डिजिटलीकरण: 86% से अधिक भारतीय परिवार इंटरनेट से जुड़े हैं, जिससे डिजिटल सेवाओं तक पहुँच बढ़ी है, लेकिन साइबर धोखाधड़ी का जोखिम भी बढ़ा है।
  • कम डिजिटल साक्षरता: जागरूकता की कमी के कारण कई उपयोगकर्ता फ़िशिंग और OTP घोटालों का शिकार होते हैं।
  • कमज़ोर व्यक्तिगत सुरक्षा प्रथाएँ: OTP साझा करना, कमजोर पासवर्ड का उपयोग करना, अप्रमाणित ऐप्स डाउनलोड करना।
    • धोखेबाज़ों की रणनीतियाँ: नकली लिंक और संदेशों से बैंकिंग क्रेडेंशियल्स चुराना।
  • संगठित साइबर अपराध नेटवर्क: दूरसंचार और बैंकिंग प्रणालियों की कमजोरियों का दुरुपयोग।
    • धोखेबाज़ अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी एजेंट बनकर पीड़ितों को गुमराह करते हैं।
  • सीमा-पार खतरे: भारत के बाहर से उत्पन्न जटिल हमले।
  • निवेश और पोंज़ी घोटाले: नकली उच्च-लाभ प्लेटफ़ॉर्म उपयोगकर्ताओं को निवेश के लिए धोखा देते हैं।
  • प्रौद्योगिकीय शोषण: नकली ऐप्स, क्लोन वेबसाइट्स और सोशल इंजीनियरिंग का उपयोग कर व्यक्तिगत जानकारी निकालना।

प्रभाव

  • बड़ी वित्तीय हानि: नागरिकों और व्यवसायों ने हज़ारों करोड़ रुपये की हानि की रिपोर्ट की है।
  • कम पुनर्प्राप्ति दर: जटिल धन प्रवाह और म्यूल खातों के कारण केवल थोड़े से धन की ही वसूली हो पाती है।
  • विश्वास का क्षरण: बार-बार होने वाली धोखाधड़ी ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल सेवाओं में विश्वास घटाती है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएँ: साइबर धोखाधड़ी डेटा चोरी और जासूसी जोखिमों से जुड़ी होती है।
  • सामाजिक प्रभाव: बुज़ुर्ग और ग्रामीण उपयोगकर्ता अधिक प्रभावित होते हैं।
    • डिजिटल साक्षरता की कमी: अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी से धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ता है।

कानून और विधायन

  • भारत का साइबर सुरक्षा ढाँचा प्रमुख विधायनों पर आधारित है:
    • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: पहचान चोरी, प्रतिरूपण, ऑनलाइन धोखाधड़ी और हानिकारक सामग्री के प्रसार जैसे अपराधों को संबोधित करता है।
    • सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021: सोशल मीडिया मध्यस्थों, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और ऑनलाइन मार्केटप्लेस की जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
    • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023: सभी व्यक्तिगत डेटा को विधिसम्मत और उपयोगकर्ता की सहमति से संभालने की आवश्यकता करता है।
    • CERT-In: साइबर जोखिमों की निगरानी करता है, परामर्श जारी करता है और अभ्यास आयोजित करता है।
    • NCIIPC: बैंकिंग, दूरसंचार, ऊर्जा और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा करता है।
    • I4C: कानून प्रवर्तन क्षमताओं को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और वास्तविक समय समन्वय के माध्यम से सुदृढ़ करता है।
    • राष्ट्रीय अभ्यास: भारत राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा अभ्यास 2025 और STRATEX जैसे अभ्यास अंतर-एजेंसी समन्वय का परीक्षण करते हैं।

निष्कर्ष और आगे की राह

  • भारत का तीव्र डिजिटल परिवर्तन अवसरों और साइबर जोखिमों दोनों को बढ़ा रहा है। सरकार की बहु-स्तरीय साइबर प्रतिक्रिया प्रणाली, उन्नत फॉरेंसिक, बिग डेटा एनालिटिक्स और स्वदेशी उपकरणों द्वारा समर्थित है, जिसने धोखाधड़ी को रोकने एवं घोटालों को बाधित करने में सहायता की है।
  • हालाँकि, साइबरस्पेस की सुरक्षा के लिए सरकार और नागरिकों दोनों की संयुक्त कार्रवाई आवश्यक है।
  • इसलिए आवश्यकता है:
    • सख्त दंड और तीव्र शिकायत निवारण के साथ साइबर कानूनों को सुदृढ़ करना।
    • वास्तविक समय धोखाधड़ी पहचान के लिए AI और मशीन लर्निंग का उपयोग करना।
    • क्षेत्रीय भाषाओं में जन-जागरूकता अभियान चलाना।
    • पुलिस और न्यायपालिका को प्रशिक्षण देकर क्षमता निर्माण करना।
    • सीमा-पार साइबर अपराध से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना।

स्रोत:IE

 

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