डीप टेक पारिस्थितिकी तंत्र(Deep Tech Ecosystem) हेतु एक बजट

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • केंद्रीय बजट 2026-27 तकनीकी विकास हेतु धन आवंटन से हटकर संपूर्ण प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की ओर एक रणनीतिक बदलाव का संकेत देता है, जिसमें भारत के डीप टेक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अवसंरचना, विनिर्माण और मानव पूंजी पर समान बल दिया गया है।

केंद्रीय बजट 2026-27 एवं डीप टेक पारिस्थितिकी तंत्र

  • सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (फुल-स्टैक सोच): यह संपूर्ण सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला पर केंद्रित है, अर्थात उपकरण, निर्माण और कुशल कार्यबल, जबकि पूर्ववर्ती योजनाएँ केवल उपकरण या सब्सिडी तक सीमित थीं।
    • यह हार्डवेयर और प्रतिभा दोनों में संतुलित निवेश को बढ़ावा देता है।
      • हार्डवेयर निर्माण (उपकरण और सुविधाएँ);
      • कौशल विकास (तकनीशियन, अभियंता, परिचालन ज्ञान);
    • ऐसी ‘फुल-स्टैक’ सोच सरकार के दीर्घकालिक आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन और क्षमता निर्माण पर ध्यान को इंगित करती है।
  • उन्नत विनिर्माण: बजट उन्नत विनिर्माण में समान द्विपक्षीय बल बनाए रखता है।
    • विमानन घटकों के लिए शुल्क छूट हार्डवेयर निर्माण को प्रोत्साहित करती है।
    • उच्च-प्रौद्योगिकी टूल रूम, डिजिटल रूप से सक्षम सेवा ब्यूरो के रूप में स्थापित किए गए हैं, जो कौशल और परिचालन तत्परता पर केंद्रित हैं।
  • एआई और डेटा केंद्र (भारत एक वैश्विक नोड के रूप में): सरकार ने एआई और विदेशी डेटा केंद्रों के लिए कर अवकाश बढ़ा दिया है, जो वैश्विक निवेश आकर्षित करने का स्पष्ट संकेत है।
    • इसका उद्देश्य डेटा केंद्र संचालकों, थर्मल इंजीनियरों और एआई कंप्यूट इंजीनियरों को लाभ पहुँचाना है।
    • बजट का लक्ष्य भारत में आधारित वैश्विक-स्तरीय अवसंरचना सक्षम करके देश को प्रौद्योगिकी और डेटा-आधारित नवाचार का केंद्र बनाना है।
  • कॉर्पोरेट मित्र (संस्थापकों के लिए अनुपालन सुगमता): संस्थापक-केंद्रित एक प्रमुख पहल कॉर्पोरेट मित्रों की शुरुआत है, जिसे तकनीकी कंपनियों के लिए अनुपालन बाधाओं को कम करने हेतु डिज़ाइन किया गया है।
    • यह सस्ती, संरचित शासन सहायता प्रदान करता है और केवल वित्तीय प्रोत्साहनों से परे डीप टेक संस्थापकों के प्रति सहानुभूति दर्शाता है।
    • इसके अतिरिक्त, शेयर बायबैक कराधान में बदलाव प्रोत्साहकों को व्यक्तिगत पूंजीगत लाभ पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय अपने व्यवसायों में पुनर्निवेश करने के लिए प्रेरित करता है।
  • एआई और कार्यबल: बजट प्रथम बार कार्यबल पर एआई के प्रभाव का आकलन करने के लिए एक औपचारिक समिति का गठन करता है। यह प्रतिभा नियोजन और उभरती प्रौद्योगिकियों के अनुरूप कौशल विकास की दिशा में एक सक्रिय दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है।
भारत का डीप टेक पारिस्थितिकी तंत्र

स्टार्टअप इंडिया: यह एआई, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में डीप टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देता है।
– प्रोत्साहनों में वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन सुविधाएँ और परामर्श कार्यक्रम शामिल हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST): DST की पहलें जैसे प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पहल डीप टेक नवाचारों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देती हैं।
– केंद्रित क्षेत्र: एआई, फोटोनिक्स, उन्नत सामग्री, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो टेक।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY): TIDE 2.0 कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स, IoT, एआई और साइबर सुरक्षा में डीप टेक स्टार्टअप्स का समर्थन करता है।
– यह बीज वित्तपोषण, परामर्श और इनक्यूबेशन प्रदान करता है।
इन्वेस्ट इंडिया: यह एआई, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे डीप टेक क्षेत्रों में स्टार्टअप्स के लिए क्षेत्रीय अंतर्दृष्टि एवं नीतिगत समर्थन प्रदान करता है।
– विदेशी और घरेलू निवेश को सुगम बनाने पर ध्यान केंद्रित करता है।
राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (DBT): यह अनुदान, इनक्यूबेशन और व्यावसायीकरण समर्थन के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी डीप टेक स्टार्टअप्स का समर्थन करता है।
केंद्रित क्षेत्र: वैक्सीन प्रौद्योगिकी, निदान, औषधि खोज।
अटल नवाचार मिशन (नीति आयोग): AIM अटल टिंकरिंग लैब्स और अटल इनक्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से एआई, रोबोटिक्स एवं अन्य अग्रणी प्रौद्योगिकियों को लक्षित करता है।
– यह छात्रों और नवप्रवर्तकों के बीच उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है।
ICMR एवं स्वास्थ्य में डीप टेक: ICMR चिकित्सा एआई, निदान और जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों में स्टार्टअप्स का समर्थन करता है।
– स्वास्थ्य देखभाल डीप टेक के लिए अनुवादात्मक अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करता है।
अंतरिक्ष एवं रक्षा डीप टेक: ISRO और DRDO उपग्रह प्रौद्योगिकी, रक्षा हेतु एआई, रोबोटिक्स और उन्नत सामग्री में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देते हैं।
– निजी क्षेत्र के नवप्रवर्तकों के लिए वित्तपोषण और सहयोग के अवसर उपलब्ध कराते हैं।

संबंधित मुद्दे एवं चिंताएँ

  • कार्यान्वयन जटिलता:सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 जैसी फुल-स्टैक पहलें कई मंत्रालयों और निजी हितधारकों के बीच समन्वित क्रियान्वयन की मांग करती हैं।
    • अवसंरचना विस्तार और कौशल विकास के बीच विलंब या असंगति का जोखिम।
  • कौशल अंतराल चुनौतियाँ: प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यबल की तत्परता एआई, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण में तीव्र तकनीकी प्रगति से पीछे रह सकती है।
    • तकनीशियनों, अभियंताओं और एआई विशेषज्ञों का विस्तार शिक्षा एवं पुनःकौशल में सतत निवेश की मांग करेगा।
  • अनुपालन एवं शासन:कॉर्पोरेट मित्र अनुपालन घर्षण को कम करने का लक्ष्य रखते हैं, परंतु उनकी प्रभावशीलता छोटे डीप टेक स्टार्टअप्स द्वारा जागरूकता, पहुँच और अपनाने पर निर्भर करेगी।
    • कर और शासन नियमों में अति-नियमन या अस्पष्टता अभी भी प्रारंभिक चरण के संस्थापकों को हतोत्साहित कर सकती है।
  • राजकोषीय स्थिरता: शुल्क छूट, कर अवकाश और विनिर्माण प्रोत्साहन राजकोषीय रूप से उदार हैं, परंतु यह सरकारी राजस्व पर दबाव डाल सकते हैं।
    • दीर्घकालिक प्रभाव निजी क्षेत्र की भागीदारी और इन प्रोत्साहनों से आर्थिक प्रतिफल पर निर्भर करेगा।
  • समानता एवं समावेशन: उच्च-प्रौद्योगिकी फोकस बड़े उद्यमों या महानगरीय स्टार्टअप्स को लाभ पहुँचा सकता है, जिससे द्वितीय/तृतीय श्रेणी के शहरों या छोटे संस्थापकों को पीछे छोड़ने का जोखिम है।
    • समावेशी पारिस्थितिकी तंत्र विकास सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त लक्षित समर्थन आवश्यक होगा।
  • एआई एवं कार्यबल संक्रमण: एआई समिति का गठन सकारात्मक है, परंतु श्रमिकों को पुनःकौशल देने और रोजगार की रक्षा हेतु नीतियाँ महत्वपूर्ण होंगी।
    • यदि एआई अपनाने की गति कार्यबल की तत्परता से आगे निकल गई तो नियमित भूमिकाओं में रोजगार विस्थापन का जोखिम रहेगा।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: विदेशी एआई/डेटा केंद्र निवेश आकर्षित करना आशाजनक है, परंतु भारत प्रतिभा और निवेश के लिए सिंगापुर, यूएई एवं यूरोप से प्रतिस्पर्धा करता है।
    • वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करने के लिए गति, स्पष्टता और व्यापार सुगमता आवश्यक होगी।

निष्कर्ष  

  • समग्र रूप से, केंद्रीय बजट 2026 एक निर्माता-केंद्रित दृष्टि को प्रतिबिंबित करता है:
    • विनिर्माण और अवसंरचना को प्रोत्साहन देना;
    • संस्थापकों के लिए कौशल विकास और सुशासन का समर्थन करना;
    • प्रौद्योगिकी कंपनियों में पुनर्निवेश को प्रोत्साहित करना;
  • यह एक स्पष्ट संकेत है कि भारत व्यापक प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने का लक्ष्य रखता है, जहाँ हार्डवेयर, मानव पूंजी और नवाचार सह-अस्तित्व में रहकर विकसित होते  हैं।
मुख्य परीक्षा दैनिक अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न] भारत के डीप टेक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित नीतिगत उपायों पर चर्चा कीजिए। ये उपाय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी तथा क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे उभरते क्षेत्रों को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?

स्रोत: BL

 

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