पाठ्यक्रम: जीएस-2/ स्वास्थ्य
सन्दर्भ
- द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, भारत में अत्यधिक शक्तिशाली ‘वॉच (Watch)’ श्रेणी के प्रतिजैविकों (antibiotics)का आवश्यकता से अधिक उपयोग किया जा रहा है।
प्रमुख बिंदु
वैश्विक परिदृश्य
- अध्ययन में 186 देशों एवं क्षेत्रों को शामिल किया गया, जो विश्व की 99.8% जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- अध्ययन में पाया गया कि 72% देशों में आवश्यक अनुमान से अधिक प्रतिजैविकों का उपयोग किया जा रहा था।
- 90% देशों में ऐसे प्रतिजैविक अत्यधिक मात्रा में लिखे जा रहे थे, जो प्रतिजैविक प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance-AMR) को सबसे अधिक बढ़ावा देते हैं।
- 60% देशों में ऐसे प्रतिजैविकों का उपयोग जारी था, जिन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) अब नियमित रूप से लिखने की अनुशंसा नहीं करता।
भारतीय परिदृश्य
- अध्ययन के अनुसार, भारत में ‘रिज़र्व (Reserve)’ श्रेणी के प्रतिजैविकों का उपयोग, देश में प्रतिरोध के उच्च बोझ के बावजूद, अपेक्षाकृत कम हो रहा है; जबकि जिन प्रतिजैविकों की अब अनुशंसा नहीं की जाती, उनका उपयोग अपेक्षा से अधिक जारी है।
- वर्तमान में भारत में कुल प्रतिजैविक उपयोग का केवल 27% ‘एक्सेस (Access)’ श्रेणी से आता है, जबकि इसकी अनुमानित आवश्यकता 52.3% है।
- भारत में कुछ ‘वॉच (Watch)’ श्रेणी के प्रतिजैविकों का अनावश्यक उपयोग हो रहा है, जिसे ‘एक्सेस (Access)’ श्रेणी के प्रतिजैविकों से प्रतिस्थापित किया जा सकता है।
प्रतिजैविक (Antibiotics)
- प्रतिजैविक ऐसी औषधियाँ हैं, जो जीवाणुओं (बैक्टीरिया) को नष्ट करती हैं अथवा उनकी वृद्धि को धीमा कर देती हैं। चिकित्सक इनका उपयोग जीवाणुजनित संक्रमणों के उपचार के लिए करते हैं। ये जीवाणुओं को मारकर तथा उनके गुणन को रोककर कार्य करती हैं।
- अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1928 में प्रथम प्राकृतिक प्रतिजैविक पेनिसिलिन की खोज की थी।
- प्रतिजैविक विषाणुजनित (वायरल) संक्रमणों के विरुद्ध प्रभावी नहीं होते।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रतिजैविकों का वर्गीकरण
- एक्सेस (Access): सामान्य संक्रमणों के उपचार के लिए प्रथम विकल्प वाले प्रतिजैविक, जिनसे प्रतिरोध विकसित होने का जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है।
- वॉच (Watch): व्यापक प्रभाव वाले प्रतिजैविक, जिनका उपयोग केवल विशिष्ट संक्रमणों में किया जाना चाहिए क्योंकि इनमें प्रतिजैविक प्रतिरोध बढ़ाने का जोखिम अधिक होता है।
- रिज़र्व (Reserve): बहु-औषधि प्रतिरोधी संक्रमणों के उपचार के लिए अंतिम विकल्प के रूप में सुरक्षित रखे गए प्रतिजैविक।
प्रतिजैविक प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance-AMR)
- प्रतिजैविकरोधी औषधियाँ (Antimicrobials): ये ऐसे कारक हैं जिनका उपयोग मनुष्यों, पशुओं तथा पौधों में संक्रामक रोगों की रोकथाम, नियंत्रण एवं उपचार के लिए किया जाता है।
- इनमें प्रतिजैविक (Antibiotics), कवकरोधी औषधियाँ (Fungicides), विषाणुरोधी औषधियाँ (Antiviral agents) तथा परजीवीरोधी औषधियाँ (Parasiticides) शामिल हैं।
- प्रतिजैविक प्रतिरोध (AMR): यह वह स्थिति है जब जीवाणु, विषाणु, कवक तथा परजीवी औषधियों के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देते हैं, जिससे रोगियों का उपचार कठिन हो जाता है तथा रोग के प्रसार, गंभीर बीमारी और मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।

प्रतिजैविक प्रतिरोध (AMR) के कारण
- अत्यधिक उपयोग: मनुष्यों एवं पशुओं में प्रतिजैविकों का अत्यधिक तथा अनुचित उपयोग प्रतिजैविक प्रतिरोध का प्रमुख कारण है।
- स्व-चिकित्सा (Self-Medication): उचित चिकित्सकीय परामर्श के बिना स्वयं प्रतिजैविकों का सेवन उनके दुरुपयोग को बढ़ावा देता है।
- खाद्य-पशुओं में प्रतिजैविकों का उपयोग: खाद्य पशुओं एवं पोल्ट्री में वृद्धि प्रोत्साहक (Growth Promoter) के रूप में प्रतिजैविकों का उपयोग एक सामान्य प्रथा है, जो बाद में खाद्य श्रृंखला के माध्यम से मनुष्यों तक पहुँचता है।
- खराब स्वच्छता व्यवस्था: बड़ी मात्रा में सीवेज का बिना उपचार किए जल निकायों में छोड़ा जाना नदियों को प्रतिजैविक अवशेषों तथा प्रतिजैविक-प्रतिरोधी सूक्ष्मजीवों से गंभीर रूप से प्रदूषित करता है।
भारत में प्रतिजैविक प्रतिरोध के विरुद्ध उठाए गए कदम
- राष्ट्रीय प्रतिजैविक प्रतिरोध कार्ययोजना (NAP-AMR): यह “एक स्वास्थ्य (One Health)” दृष्टिकोण पर आधारित है तथा विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों सहित सभी हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई है।
- प्रतिजैविक प्रतिरोध निगरानी नेटवर्क (AMRSN): भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने देश में औषधि-प्रतिरोधी संक्रमणों की प्रवृत्तियों एवं स्वरूपों का आकलन करने तथा साक्ष्य एकत्र करने के लिए प्रतिजैविक प्रतिरोध निगरानी एवं अनुसंधान नेटवर्क (AMRSN) की स्थापना की है।
- भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI): इसने मछली एवं शहद जैसे खाद्य उत्पादों में प्रतिजैविकों की मात्रा को सीमित करने हेतु दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017: इसमें प्रतिजैविक प्रतिरोध को प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक माना गया है तथा प्रतिजैविकों के विवेकपूर्ण उपयोग और उनके अनियंत्रित उपयोग पर रोक लगाने के लिए दिशा-निर्देश विकसित करने को प्राथमिकता दी गई है।
- राष्ट्रीय प्रतिजैविक उपभोग नेटवर्क (NAC-NET): इस नेटवर्क के अंतर्गत शामिल संस्थान अपनी-अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं में प्रतिजैविकों की खपत से संबंधित आँकड़े संकलित कर राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) को भेजते हैं।
स्रोत: IE
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