केंद्रीय बजट 2026-27 में स्वास्थ्य: वादे, प्राथमिकताएँ और वास्तविकता

पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दे

संदर्भ

  • हाल ही में वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट 2026-27 प्रस्तुत किया, जो भारत की बढ़ती स्वास्थ्य और देखभाल आवश्यकताओं की पहचान को दर्शाता है।
  • आवंटन और प्राथमिकताएँ उद्देश्य और निवेश के बीच चिंताजनक अंतर को उजागर करती हैं।

केंद्रीय बजट (2026–27) में स्वास्थ्य आवंटन

  • संयुक्त आवंटन: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा आयुष मंत्रालय के लिए ₹1,10,939 करोड़, जो 2025–26 के बजट अनुमान ₹1,03,851 करोड़ से अधिक है।
  • वास्तविक रूप से मुद्रास्फीति समायोजन के बाद यह केवल लगभग 3.5% की वृद्धि है।
    • तथापि, 2026–27 में वास्तविक स्वास्थ्य व्यय 2020–21 के वास्तविक व्यय से कम बना हुआ है।

स्वास्थ्य क्षेत्र हेतु केंद्रीय बजट (2026–27) की प्रमुख घोषणाएँ

  •  ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य उन्नति हेतु बायोफार्मा रणनीति (शक्ति पहल): इसका उद्देश्य भारत की क्षमता को जैविक उत्पादों और बायोसिमिलर्स, उन्नत औषधि अनुसंधान तथा आवश्यक दवाओं के घरेलू उत्पादन में सुदृढ़ करना है।
    • आगामी पाँच वर्षों में ₹10,000 करोड़ का प्रावधान, जिससे भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।
    • 3 नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER) स्थापित किए जाएँगे तथा 7 वर्तमान संस्थानों का उन्नयन किया जाएगा।
    • 1000 से अधिक मान्यता प्राप्त भारतीय नैदानिक परीक्षण स्थलों का नेटवर्क बनाया जाएगा।
  •  स्वास्थ्य एवं देखभाल कार्यबल का विस्तार: 1.5 लाख सहायक स्वास्थ्य पेशेवरों (AHPs) और देखभालकर्ताओं का एक कैडर बनाने का प्रस्ताव।
    • इसका उद्देश्य वृद्धजन देखभाल, दीर्घकालिक देखभाल और पुनर्वास सेवाओं की बढ़ती माँग को पूरा करना है, जो भारत की वृद्ध होती जनसंख्या से प्रेरित है।
    • सहायक स्वास्थ्य पेशेवर निदान, उपचार और सहयोगी सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो डॉक्टरों और नर्सों को पूरक करते हैं।
  • आयुष (AYUSH): तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किए जाएँगे।
    • आयुष फार्मेसियों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन उच्च प्रमाणन मानकों हेतु किया जाएगा।
    • WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र का भी उन्नयन किया जाएगा।
  • चिकित्सा पर्यटन और सार्वजनिक–निजी भागीदारी: राज्यों को पाँच क्षेत्रीय चिकित्सा हब स्थापित करने में सहयोग देने हेतु एक योजना प्रस्तावित।
    • इन हब का उद्देश्य विदेशी रोगियों को आकर्षित करना और भारत को वैश्विक स्वास्थ्य गंतव्य के रूप में बढ़ावा देना है।
    • ये हब चिकित्सा, शैक्षणिक और अनुसंधान सुविधाओं को संयोजित करने वाले एकीकृत स्वास्थ्य परिसरों के रूप में कार्य करेंगे।
    • इनमें आयुष केंद्र, मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म सुविधा केंद्र तथा निदान, उपचारोत्तर देखभाल और पुनर्वास हेतु अधोसंरचना होगी।
  •  निवारक और कल्याण-उन्मुख दृष्टिकोण: केंद्रीय बजट ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल, कल्याण और जीवनशैली-आधारित हस्तक्षेपों के महत्व को पुनः रेखांकित किया।
  • आयुष के अंतर्गत पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के एकीकरण पर बल दिया गया।
  • मानसिक स्वास्थ्य और आघात देखभाल:NIMHANS-2 की स्थापना का प्रावधान।
    • रांची और तेजपुर स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को क्षेत्रीय शीर्ष संस्थानों के रूप में उन्नत किया जाएगा।
  • चिकित्सा शिक्षा और अधोसंरचना पर ध्यान: चिकित्सा और सहायक स्वास्थ्य शिक्षा क्षमता के विस्तार तथा चयनित तृतीयक देखभाल संस्थानों में अधोसंरचना विकास हेतु समर्थन की पुनः पुष्टि।
  • इन उपायों का उद्देश्य प्रशिक्षित स्वास्थ्य पेशेवरों की दीर्घकालिक कमी को दूर करना है, यद्यपि पैमाने और वित्तपोषण पर विवरण सीमित हैं।
  •  डिजिटल स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी पर बल: डिजिटल स्वास्थ्य पहलों के लिए आवंटन जारी रहेगा, जिसमें स्वास्थ्य अभिलेखों और सेवा प्रदाय प्लेटफ़ॉर्म शामिल हैं।
  • घोषित उद्देश्य दक्षता, डेटा एकीकरण और सेवाओं तक पहुँच में सुधार करना है।
  • तथापि, डिजिटल बहिष्करण, डेटा गोपनीयता और विभिन्न क्षेत्रों एवं सामाजिक समूहों में असमान लाभ को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं।

संबंधित चिंताएँ एवं मुद्दे

  • स्वास्थ्य के लिए घटती प्राथमिकता: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में स्वास्थ्य व्यय का हिस्सा 0.37% (2020–21 वास्तविक) से घटकर 0.28% (2026–27 बजट अनुमान) हो गया है।
    • केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य का हिस्सा इसी अवधि में 2.26% से घटकर 2.07% हो गया है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य में कटौती एवं वाणिज्यिक योजनाओं को बढ़ावा: वे कार्यक्रम जो सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करते हैं और कमजोर वर्गों की रक्षा करते हैं, जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY), पोषण योजनाएँ एवं स्वास्थ्य अनुसंधान, में उल्लेखनीय कटौती की गई है।
    • इसके विपरीत, वे योजनाएँ जो वाणिज्यिक और निजी क्षेत्र के हितों को बढ़ावा देती हैं, विशेषकर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) और डिजिटल स्वास्थ्य मिशन, को बढ़ा हुआ आवंटन मिला है, जबकि इनके क्रियान्वयन में लगातार विफलताएँ रही हैं।
  • स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों का अनिश्चित भविष्य: स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों (HWCs) का विस्तार व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
    • चूँकि HWCs को NHM के अंतर्गत वित्त पोषण मिलता है, NHM में लगातार कटौती इस नेटवर्क के विस्तार या प्रभावी संचालन पर गंभीर संदेह उत्पन्न करती है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) केस

  • NHM भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया की रीढ़ है, जो मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण कार्यक्रम, असंक्रामक रोग, प्राथमिक एवं द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाओं को कवर करता है।
  • 2021–22 से 2026–27 बजट में वास्तविक रूप से लगभग 8% की गिरावट दर्ज की गई है।
  • वास्तविक NHM व्यय लगातार आवंटन से अधिक रहा है, जो उच्च माँग और अपूर्ण आवश्यकताओं को दर्शाता है।
  • NHM अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, विशेषकर आशा कार्यकर्ताओं को वित्त पोषण करता है, जो मुख्यतः महिलाएँ हैं और महामारी के दौरान उनकी भूमिका वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई थी।
    • वित्त पोषण में कमी का अर्थ है कि सुरक्षित प्रसव, बाल्यावस्था टीकाकरण, टीबी उपचार जैसी आवश्यक सेवाएँ पूर्व स्तर पर उपलब्ध नहीं हो पाएँगी।
  • असंक्रामक रोगों और जलवायु परिवर्तन एवं स्वास्थ्य पर आधारित महत्वपूर्ण कार्यक्रम, जो मुख्यतः NHM के माध्यम से लागू होते हैं, अब नगण्य आवंटन के कारण गंभीर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) केस

  • PMJAY सरकार का ‘विशेष प्रिय’ कार्यक्रम प्रतीत होता है।
  • 2024–25 में ₹7,500 करोड़ आवंटित किए गए थे, किंतु केवल लगभग ₹6,983 करोड़ ही वास्तविक रूप से व्यय हुए।
  • 2026–27 बजट अनुमान में PMJAY का आवंटन 2024–25 की तुलना में 36% बढ़ा है।
  • यह चिंताजनक है क्योंकि PMJAY व्यापक रूप से निम्नलिखित के लिए जाना जाता है:
    • मुख्यतः निजी क्षेत्र को लाभ पहुँचाना;
    • अनेक दलितों, अनुसूचित जनजातियों और हाशिए पर रहने वाले समूहों को बाहर रखना;
    • केवल आंशिक वित्तीय राहत प्रदान करना, जिससे परिवारों पर उच्च जेब से व्यय का भार बना रहता है।
  • चिकित्सा पर्यटन बनाम सार्वजनिक स्वास्थ्य: संपन्न विदेशी रोगियों के लिए निजी स्वास्थ्य सेवा को सार्वजनिक संसाधनों से समर्थन देना असमानताओं को अधिक गंभीर करने का जोखिम उत्पन्न करता है।
    • यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने की कीमत पर आता है, जो गरीब और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए प्राथमिक देखभाल का स्रोत बनी हुई है।

आगे की राह: सार्वजनिक स्वास्थ्य पर ध्यान

  • भारत की स्वास्थ्य चुनौतियाँ एक सुदृढ़ और पर्याप्त वित्त पोषित सार्वजनिक प्रणाली की माँग करती हैं।
  • वाणिज्यिक हितों को बढ़ावा देने की अनियोजित प्रवृत्ति पर गंभीर आत्ममंथन आवश्यक है।
  • बीमा-आधारित और पर्यटन-उन्मुख मॉडलों का विस्तार करने के बजाय, केंद्र सरकार को चाहिए कि:
    • NHM और सार्वजनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना के लिए वित्त पोषण को पुनः स्थापित और विस्तारित करे;
    • अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए उचित वेतन सुनिश्चित करे;
    • सबसे कमजोर वर्गों के लिए सार्वभौमिक, निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता दे।
मुख्य परीक्षा दैनिक अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न] केंद्रीय बजट 2026–27 में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने हेतु अनेक घोषणाएँ की गई हैं। तथापि, स्वास्थ्य आवंटनों की पर्याप्तता और प्राथमिकता को लेकर चिंताएँ व्यक्त की गई हैं। टिप्पणी कीजिए।

Source: BL

 

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