सार्वभौमिक बुनियादी आय (UBI) का विचार अब एक व्यावहारिक नीतिगत आवश्यकता के रूप में उभर रहा है, क्योंकि भारत बढ़ती असमानता, तकनीकी व्यवधान और कल्याणकारी अक्षमताओं का सामना कर रहा है।
भारत को 2047 तक विकसित भारत बनने की आकांक्षा है। इसके लिए आर्थिक विकास और राष्ट्रीय प्रगति हेतु एक स्वच्छ, पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था की आवश्यकता है।
विगत एक दशक से अधिक समय से BRICS देश डॉलर-प्रधान सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन (SWIFT) वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।
भारत के आईटी क्षेत्र में जारी कार्यबल में कटौती, जिसे प्रायः ‘साइलेंट एग्ज़िट्स’ कहा जा रहा है, गहरे संरचनात्मक परिवर्तनों को दर्शाती है। टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी आईटी दिग्गज कंपनियाँ अपने कार्यबल को एआई एवं ऑटोमेशन द्वारा संचालित नई डिजिटल वास्तविकता के अनुरूप समायोजित कर रही हैं।
जैसे-जैसे भारत संविधान की 76वीं वर्षगांठ की ओर बढ़ रहा है, इसके मूल मूल्यों और संरचनात्मक नींव पर पुनः चिंतन किया जा रहा है। भारतीय संघ अब भी राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय विविधता के बीच संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण बना हुआ है।
भारत के नए श्रम संहिता कई वर्तमान कानूनों को एकीकृत, आधुनिक ढांचे में समाहित करते हैं, जो कार्यबल में स्पष्टता, स्थिरता और समानता को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों और आशा कार्यकर्ताओं द्वारा छत्तीसगढ़, हरियाणा एवं केरल सहित कई राज्यों में हाल ही में किए गए आंदोलनों ने भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा कार्यबल में गंभीर संरचनात्मक संकट को उजागर किया है।
संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025 का प्रस्ताव शासन और जवाबदेही को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया है, लेकिन इसके साथ ही यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों एवं नागरिक स्वतंत्रताओं के लिए गंभीर जोखिम भी उत्पन्न करता है।
पश्चिमी हिंद महासागर (WIO) एक महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र के रूप में उभरा है, जहाँ सुरक्षा, व्यापार और कूटनीति का संगम होता है। यह क्षेत्र, जिसे पहले एक दूरस्थ विस्तार और वैश्विक भू-राजनीति में एक गौण चिंता माना जाता था, अब केंद्र में आ गया है।
हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने एक नया रणनीतिक EU-भारत एजेंडा घोषित किया, जिसमें भारत के कार्बन बाजार को EU के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के साथ एकीकृत करने के प्रस्ताव को शामिल किया गया है। यह वैश्विक उत्तर और दक्षिण के बीच कार्बन बाजार तंत्र को संरेखित करने की दिशा में एक कदम है।