‘सुमन रोडमैप 2030’ : मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की पहल 

पाठ्यक्रम: GS2/ स्वास्थ्य/ शासन

संदर्भ

  • केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए ‘सुमन रोडमैप 2030’ का शुभारंभ किया। 

सुमन रोडमैप 2030 के बारे में

  • सुमन रोडमैप 2030 को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य से संबंधित सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को वर्ष 2030 तक प्राप्त करने की दिशा में प्रगति को तेज़ करने हेतु एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति के रूप में तैयार किया गया है।
  • इस रूपरेखा का उद्देश्य वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) को प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 70 से कम करना है। साथ ही, इसका लक्ष्य नवजात मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना तथा रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु को शून्य के स्तर तक लाना है।
  • यह पहल 13 उच्च-प्राथमिकता वाले राज्यों के 130 जिलों पर केंद्रित है, जिनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, असम तथा पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

मातृ मृत्यु (Maternal Mortality) क्या है?

  • मातृ मृत्यु से आशय किसी महिला की गर्भावस्था के दौरान अथवा गर्भसमापन के 42 दिनों के भीतर होने वाली मृत्यु से है, चाहे गर्भावस्था की अवधि या उसका स्थान कुछ भी हो। यह मृत्यु गर्भावस्था अथवा उसके प्रबंधन से संबंधित या उससे उत्पन्न कारणों से होनी चाहिए, न कि आकस्मिक या संयोगवश कारणों से।
  • मातृ मृत्यु अनुपात (Maternal Mortality Ratio): यह प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर होने वाली मातृ मृत्यु की संख्या को दर्शाता है।
  • मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate): यह 15–49 वर्ष आयु वर्ग की प्रति 1,00,000 महिलाओं पर होने वाली मातृ मृत्यु की संख्या है, जिसकी गणना नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) के अंतर्गत की जाती है।
  • सतत विकास लक्ष्य (SDG) 3.1 का उद्देश्य वर्ष 2030 तक वैश्विक मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) को प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 70 से कम करना है।

MMR को कम करने हेतु सरकारी पहलें 

  • जननी सुरक्षा योजना (Janani Suraksha Yojana—JSY): वर्ष 2005 में प्रारंभ की गई इस योजना का उद्देश्य मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाना है। इसके अंतर्गत विशेष रूप से कमजोर सामाजिक-आर्थिक वर्ग की गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana—PMMVY): यह भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित मातृत्व लाभ योजना है। 
    • इसके अंतर्गत निर्धारित शर्तों की पूर्ति करने पर परिवार के प्रथम जीवित शिशु के लिए महिला को ₹5,000 की मातृत्व सहायता प्रदान की जाती है।
    • इसके अतिरिक्त, ‘मिशन शक्ति’ के अंतर्गत PMMVY 2.0 में यदि दूसरी संतान बालिका हो, तो अतिरिक्त नकद प्रोत्साहन भी प्रदान किया जाता है।
  • प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA): वर्ष 2016 में प्रारंभ इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक माह की 9वीं तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क, सुनिश्चित एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल (Antenatal Care) उपलब्ध कराई जाती है।
  • लक्ष्य (LaQshya): वर्ष 2017 में प्रारंभ की गई इस पहल का उद्देश्य प्रसव कक्षों एवं मातृत्व ऑपरेशन थिएटरों में सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना है, ताकि प्रसव तथा प्रसवोत्तर (Post-partum) अवधि के दौरान गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुनिश्चित की जा सके।
  • विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, दूर करने के लिए MBBS चिकित्सकों को एनेस्थीसिया (LSAS) तथा प्रसूति देखभाल (Obstetric Care), जिसमें सीज़ेरियन सेक्शन (EmOC) संबंधी कौशल भी शामिल हैं, का प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • मातृ मृत्यु निगरानी एवं समीक्षा (Maternal Death Surveillance Review—MDSR): इसे स्वास्थ्य संस्थानों तथा सामुदायिक स्तर दोनों पर लागू किया जाता है। इसका उद्देश्य उपयुक्त स्तर पर सुधारात्मक कार्रवाई करना तथा प्रसूति सेवाओं (Obstetric Care) की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
  • मासिक ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस : यह एक आउटरीच गतिविधि है, जिसके माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ पोषण संबंधी सेवाएँ भी प्रदान की जाती हैं।
  • प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य (Reproductive and Child Health—RCH) पोर्टल: यह गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं की नाम-आधारित वेब-सक्षम ट्रैकिंग प्रणाली है, जिसके माध्यम से उन्हें नियमित एवं पूर्ण सेवाएँ, जैसे प्रसवपूर्व देखभाल, संस्थागत प्रसव तथा प्रसवोत्तर देखभाल, सुनिश्चित की जाती हैं।

मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार

  • मध्य प्रदेश का ‘दस्तक अभियान’: यह एक समुदाय-आधारित अभियान है, जो मातृ स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की शीघ्र पहचान पर केंद्रित है तथा समय पर चिकित्सीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करता है।
  • तमिलनाडु का आपातकालीन प्रसूति देखभाल मॉडल : यह एक सुदृढ़ रेफरल प्रणाली (Referral System) है, जो गर्भवती महिलाओं को समय पर आपातकालीन प्रसूति सेवाएँ उपलब्ध कराकर मातृ जटिलताओं (Maternal Complications) में कमी लाती है।

भारत में अब भी विद्यमान चुनौतियाँ

  • जेब से होने वाला उच्च व्यय (High Out-of-Pocket Expenditure—OOPE): नीतिगत प्रयासों के बावजूद, आपातकालीन परिस्थितियों में परिवारों को जाँच, दवाओं तथा निजी स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च स्वयं वहन करना पड़ता है।
  • सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ: लैंगिक असमानता, निम्न शिक्षा स्तर, महिलाओं की सीमित निर्णय-निर्धारण क्षमता तथा मातृ स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा सामाजिक कलंक समय पर उपचार प्राप्त करने में विलंब का कारण बनते हैं।
  • उच्च-जोखिम वाली गर्भावस्थाओं में वृद्धि: विलंबित मातृत्व (Delayed Childbirth), मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा दो गर्भधारणों के बीच कम अंतराल जैसी प्रवृत्तियाँ गर्भावस्था को अधिक जोखिमपूर्ण बनाती हैं।
  • दूरस्थ क्षेत्रों में कमजोर स्वास्थ्य अवसंरचना: ग्रामीण, जनजातीय एवं पर्वतीय क्षेत्रों में आपातकालीन प्रसूति सेवाओं, विश्वसनीय परिवहन तथा रक्त भंडारण जैसी आवश्यक सुविधाओं का अभाव है।

बाल मृत्यु (Child Mortality)

  • प्रारंभिक नवजात मृत्यु दर: किसी वर्ष में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर जन्म के बाद पहले 7 दिनों के भीतर होने वाली नवजात शिशुओं की मृत्यु की संख्या।
  • नवजात मृत्यु दर: किसी वर्ष में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर जन्म के बाद पहले 28 पूर्ण दिनों के भीतर होने वाली नवजात शिशुओं की मृत्यु की संख्या।
  • शिशु मृत्यु दर: किसी वर्ष में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु की संख्या।
  • पाँच वर्ष से कम आयु मृत्यु दर: किसी वर्ष में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर पाँच वर्ष की आयु पूरी करने से पहले बच्चों की मृत्यु की संख्या।

आगे की राह

  • भारत ने मातृ मृत्यु अनुपात में कमी लाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के वर्ष 2020 तक MMR को 100 से कम करने के लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया है।
    • हालाँकि, वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्य के अनुरूप MMR के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।
  • देश में मातृ मृत्यु में और कमी लाने के लिए स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करना, मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विस्तार करना तथा सामाजिक-आर्थिक बाधाओं का समाधान करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण होगा।

स्रोत: PIB

 

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