पाठ्यक्रम: GS2/भूख से संबंधित मुद्दे
संदर्भ
- वैश्विक खाद्य संकट रिपोर्ट 2026 (GRFC 2026) के अनुसार, 47 देशों में 26.6 करोड़ से अधिक लोग तीव्र खाद्य असुरक्षा के उच्च स्तर का सामना कर रहे हैं।
खाद्य संकट पर वैश्विक रिपोर्ट (GRFC) 2026 के मुख्य निष्कर्ष
- उच्च स्तर की तीव्र भूख: 2025 में लगभग 26.6 करोड़ लोग (आकलित जनसंख्या का 22.9%) तीव्र खाद्य असुरक्षा के उच्च स्तर से प्रभावित थे।
- यह अनुपात 2020 से लगातार 20% से ऊपर बना हुआ है तथा 2016 की तुलना में लगभग दोगुना हो चुका है।
- भूख संकट का क्षेत्रीय वितरण: वैश्विक भूख संकट का लगभग दो-तिहाई भार दस देशों पर केंद्रित था।
- ये देश हैं—अफगानिस्तान, बांग्लादेश, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, म्यांमार, नाइजीरिया, पाकिस्तान, दक्षिण सूडान, सूडान, सीरिया तथा यमन।
- इनमें अफगानिस्तान, सूडान, दक्षिण सूडान और यमन सबसे गंभीर संकट से प्रभावित रहे।
- विनाशकारी भूख (Catastrophic Hunger): छह देशों में लगभग 14 लाख लोगों को ‘कैटास्ट्रॉफी’ (IPC Phase 5) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया, जो तीव्र खाद्य असुरक्षा का सर्वोच्च स्तर है।
- यह संख्या 2016 की तुलना में नौ गुना बढ़ चुकी है।
- गाज़ा तथा सूडान के कुछ हिस्सों में अकाल (Famine) घोषित किया गया। GRFC के इतिहास में यह पहली बार है कि एक ही वर्ष में एक से अधिक देशों में अकाल की पहचान की गई।
- बाल कुपोषण: लगभग 3.55 करोड़ बच्चे तीव्र कुपोषण से पीड़ित हैं।
- इनमें लगभग 1 करोड़ बच्चे गंभीर तीव्र कुपोषण (Severe Acute Malnutrition) से प्रभावित हैं।
- संघर्ष प्रमुख कारण के रूप में: संघर्ष और असुरक्षा के कारण 19 देशों में 14.74 करोड़ लोग प्रभावित हुए, जिससे यह अत्यधिक मौसमीय घटनाओं को पीछे छोड़ते हुए भूख का प्रमुख कारण बन गया।
- लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों ने कृषि, बाजारों, आजीविका तथा मानवीय सहायता तक पहुँच को बाधित किया है।
- वित्तपोषण में गिरावट: खाद्य संकट से निपटने के लिए उपलब्ध वित्तपोषण घटकर 2016–17 के स्तर पर पहुँच गया है।
- World Food Programme (WFP) तथा Food and Agriculture Organization (FAO) द्वारा किए जाने वाले सर्वेक्षणों में कमी आने से वैश्विक निगरानी प्रणाली कमजोर हुई है, जिसके कारण वास्तविक संकट का कम आकलन हो रहा है।
भूख संकट और भारत
- भारत GRFC द्वारा किए गए तीव्र खाद्य संकट के आकलन में शामिल देशों में नहीं था।
- Hamburg Sustainability Conference 2026 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य (UN SDG) सूचकांक में अब तक की अपनी सर्वोच्च रैंक प्राप्त की। भारत 2025 में 99वें स्थान से बढ़कर 2026 में 167 देशों में 94वें स्थान पर पहुँचा तथा उसका कुल स्कोर 68.3/100 रहा।
- यह उपलब्धि गरीबी उन्मूलन, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल सुशासन तथा सामाजिक सुरक्षा वितरण में प्रगति को दर्शाती है।
- हालाँकि, SDG 2 (Zero Hunger) की दिशा में प्रगति अभी भी असमान बनी हुई है।
- नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5, 2019-21) के अनुसार:
- पाँच साल से कम उम्र के 35.5% बच्चे स्टंटेड (उम्र के हिसाब से कम लंबाई वाले) हैं।
- 19.3% बच्चे वेस्टेड (लंबाई के हिसाब से कम वज़न वाले) हैं।
- 32.1% बच्चों का वज़न कम है।
- 15-49 साल की उम्र की 57% से ज़्यादा महिलाएँ एनीमिया से पीड़ित हैं।
- लगभग 67% बच्चे (6-59 महीने) एनीमिया से पीड़ित हैं।
प्रमुख चिंताएँ –
- खाद्य उपलब्धता में सुधार के बावजूद बच्चों में लगातार कुपोषण;
- पोषण संबंधी परिणामों में राज्यों तथा क्षेत्रों के बीच उल्लेखनीय असमानताएँ;
- महिलाओं एवं बच्चों में एनीमिया की उच्च व्यापकता;
- जलवायु परिवर्तनशीलता, कृषि संकट तथा आजीविका संबंधी असुरक्षाएँ।
संबंधित प्रयास और पहल
- वैश्विक पहल:
- संयुक्त राष्ट्र का सतत विकास लक्ष्य 2 (शून्य भुखमरी)
- भुखमरी और गरीबी के खिलाफ वैश्विक गठबंधन
- विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के हस्तक्षेप
- FAO की ‘हैंड-इन-हैंड’ पहल
भारत में पहल और प्रयास
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013: यह भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी को सब्सिडी वाला अनाज उपलब्ध कराता है।
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY): यह NFSA के लाभार्थियों को मुफ्त अनाज सुनिश्चित करती है।
- पोषण अभियान और मिशन पोषण 2.0: इसका उद्देश्य अलग-अलग योजनाओं के तालमेल और टेक्नोलॉजी-आधारित निगरानी के ज़रिए महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के पोषण के स्तर में सुधार करना है।
- एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (ICDS): यह अतिरिक्त पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच और प्री-स्कूल शिक्षा प्रदान करती है।
- PM-पोषण योजना: यह पोषण और शिक्षा के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए स्कूली बच्चों को पका हुआ मिड-डे मील (दोपहर का भोजन) उपलब्ध कराती है।
- एनीमिया मुक्त भारत: इसका लक्ष्य महिलाओं, किशोरों और बच्चों में एनीमिया को कम करना है।
- ईट राइट इंडिया पहल: यह सुरक्षित, स्वस्थ और टिकाऊ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देती है।
आगे का रास्ता: भारत में भुखमरी के संकट से निपटना
- खाद्य सुरक्षा से आगे बढ़कर पोषण सुरक्षा पर बल दिया जाए तथा दालों, श्रीअन्न, फलों और सब्जियों सहित विविध आहार को प्रोत्साहित किया जाए।
- सूखा-रोधी फसलों, सिंचाई के विस्तार तथा सतत कृषि पद्धतियों के माध्यम से जलवायु-सहिष्णु कृषि को सुदृढ़ किया जाए।
- विशेषकर जीवन के प्रथम 1,000 दिनों के दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाया जाए।
- स्वास्थ्य, कृषि, स्वच्छता तथा सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के बीच बेहतर अभिसरण सुनिश्चित किया जाए।
- लक्षित हस्तक्षेपों के लिए डेटा प्रणालियों तथा वास्तविक समय की पोषण निगरानी को मजबूत किया जाए।
- विशेष रूप से कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा एवं पोषण कार्यक्रमों में निवेश बढ़ाया जाए।
- आहार संबंधी व्यवहार, स्वच्छता तथा बाल देखभाल के प्रति सामुदायिक सहभागिता और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा दिया जाए।
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