पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप
संदर्भ
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के लिए स्टेम सेल थेरेपी केवल विधिवत स्वीकृत नैदानिक परीक्षणों के माध्यम से ही प्रदान की जाए तथा इसे नियमित या मानक चिकित्सकीय उपचार के रूप में प्रचारित न किया जाए।
स्टेम सेल थेरेपी क्या है?
- स्टेम सेल थेरेपी में स्टेम कोशिकाओं के विशिष्ट गुणों, जैसे स्वयं का नवीनीकरण और विभेदन, का उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य मानव शरीर में क्षतिग्रस्त कोशिकाओं और ऊतकों का पुनर्निर्माण करना या इन कोशिकाओं को नई, स्वस्थ एवं पूर्णतः कार्यशील कोशिकाओं से प्रतिस्थापित करना है।
- इसे पुनर्योजी चिकित्सा के रूप में भी जाना जाता है। इसमें स्टेम कोशिकाओं या उनके व्युत्पन्नों का उपयोग करके रोगग्रस्त, असामान्य रूप से कार्य करने वाले या क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत की प्राकृतिक प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाता है।
- यह अंग प्रत्यारोपण की दिशा में एक आगामी कदम माना जाता है, जिसमें सीमित उपलब्धता वाले दाता अंगों के स्थान पर कोशिकाओं का उपयोग किया जाता है।
- स्टेम कोशिकाओं को प्रयोगशालाओं में विकसित किया जाता है और उन्हें इस प्रकार परिवर्तित किया जाता है कि वे विशिष्ट प्रकार की कोशिकाओं, जैसे हृदय की मांसपेशियों की कोशिकाओं, रक्त कोशिकाओं या तंत्रिका कोशिकाओं में विभेदित हो सकें।
- इसके बाद इन विशिष्ट कोशिकाओं को किसी व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित किया जा सकता है।
भारत का नियामक ढाँचा
- स्टेम सेल अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश, 2017 स्टेम सेल अनुसंधान तथा इसके चिकित्सकीय अनुप्रयोगों के नैतिक और वैज्ञानिक पर्यवेक्षण के लिए मूलभूत ढाँचा प्रदान करते हैं।
- ये दिशानिर्देश भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से जारी किए गए हैं।
- इन दिशानिर्देशों के अनुरूप, ऑटिज़्म में किसी भी प्रकार की स्टेम सेल के चिकित्सकीय उपयोग को विधिवत स्वीकृत नैदानिक परीक्षणों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए।
- क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010: यह अधिनियम राज्य और जिला प्राधिकरणों को अनधिकृत स्टेम सेल उपचार प्रदान करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कार्रवाई करने में सक्षम बनाता है।
स्टेम सेल थेरेपी के लाभ
- जटिल रोगों का उपचार: कोशिका-आधारित उपचार पद्धतियों में कैंसर, आनुवंशिक विकारों, हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोगों, तंत्रिका संबंधी विकारों और ऊतक क्षति जैसी स्थितियों में संभावित उपयोग की संभावना है। हालांकि, विभिन्न रोगों में इनके प्रभावों से संबंधित वैज्ञानिक प्रमाणों की स्थिति काफी भिन्न है।
- रक्त-निर्माणकारी स्टेम सेल प्रत्यारोपण कई रक्त संबंधी और प्रतिरक्षा संबंधी विकारों के लिए एक स्थापित उपचार पद्धति है।
- अनुसंधान और व्यक्तिगत चिकित्सा: स्टेम कोशिकाओं का उपयोग रोगों के मॉडल तैयार करने, दवाओं के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया का अध्ययन करने और अधिक लक्षित उपचार विकसित करने के लिए किया जा सकता है।
चुनौतियाँ
- सीमित नैदानिक प्रमाण: प्रयोगशाला या प्रारंभिक चरण के आशाजनक परिणाम आवश्यक रूप से रोगियों में उपचार की सुरक्षा और प्रभावशीलता को प्रमाणित नहीं करते। अनेक प्रस्तावित अनुप्रयोग अभी भी प्रायोगिक चरण में हैं।
- सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: उचित नियंत्रण के बिना किए जाने वाले कोशिका-आधारित उपचारों से प्रतिरक्षा संबंधी प्रतिक्रियाएँ, संक्रमण, असामान्य ऊतक वृद्धि और ट्यूमर बनने जैसे जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
- नैतिक चिंताएँ: स्टेम सेल अनुसंधान में सूचित सहमति, कोशिकाओं के स्रोत, भ्रूण से प्राप्त कोशिकाओं, रोगी की सुरक्षा और उपचार तक समान एवं न्यायसंगत पहुँच से संबंधित प्रश्न उठते हैं।
निष्कर्ष
- स्टेम सेल थेरेपी पुनर्योजी चिकित्सा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य देखभाल के लिए अत्यंत संभावनाशील क्षेत्र है तथा इसके विभिन्न अनुप्रयोग पहले से ही उपयोग में हैं। हालांकि, इसके व्यापक उपयोग के लिए कठोर नैदानिक प्रमाण, विश्वसनीय विनिर्माण प्रक्रियाएँ, दीर्घकालिक सुरक्षा निगरानी और कड़े नियमन की आवश्यकता होगी, ताकि प्रायोगिक दवाओं एवं उपचारों के दुरुपयोग को रोका जा सके।
ऑटिज़्म क्या है?
- ऑटिज़्म, जिसे ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) भी कहा जाता है, एक आजीवन न्यूरो-विकासात्मक स्थिति है, जो व्यक्ति के संचार करने, सामाजिक रूप से बातचीत करने और व्यवहार करने के तरीके को प्रभावित करती है।
- “स्पेक्ट्रम” शब्द लक्षणों और उनकी गंभीरता में व्यापक विविधता को दर्शाता है। प्रत्येक ऑटिस्टिक व्यक्ति में ऑटिज़्म अलग-अलग रूप में दिखाई दे सकता है और उन्हें अलग-अलग स्तर के सहयोग एवं सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
- प्रमुख विशेषताएँ: सामाजिक-संचार और सामाजिक अंतःक्रिया में निरंतर कठिनाइयाँ तथा व्यवहार या रुचियों के सीमित एवं दोहराव वाले पैटर्न।
- कई ऑटिस्टिक व्यक्तियों में संवेदी जानकारी को संसाधित करने के तरीके में भी अंतर होता है। उन्हें कुछ विशेष प्रकार की आवाज़ें, रोशनी या बनावट अत्यधिक तीव्र, परेशान करने वाली या असहज लग सकती हैं।
स्रोत: TH
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संक्षिप्त समाचार 17-09-2026