पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।
- यह दोनों नेताओं के बीच इस वर्ष भारत-फ्रांस संबंधों को “विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत किए जाने के बाद प्रथम बैठक थी।
प्रमुख बिंदु
- प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को दीर्घकालिक दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से “इनोवेशन रोडमैप 2030” को अपनाया गया।
- दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ बनाने हेतु संयुक्त भारत-फ्रांस एआई कार्य समूह की स्थापना पर सहमति व्यक्त की।
- दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से “भारत इनोवेट्स 2026” के प्रथम संस्करण का उद्घाटन किया, जो केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की एक पहल है।
- यह भारत के डीप-टेक नवोन्मेषकों तथा वैश्विक हितधारकों के बीच नवाचार-आधारित साझेदारियों को प्रोत्साहन देने हेतु एक प्रमुख मंच के रूप में कार्य करता है।
भारत-फ्रांस संबंधों की प्रमुख विशेषताएँ
- भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी: इसकी शुरुआत 26 जनवरी 1998 को हुई थी और यह भारत की प्रथम रणनीतिक साझेदारी है।
- मुख्य उद्देश्य: रणनीतिक स्वायत्तता को सुदृढ़ करना तथा द्विपक्षीय सहयोग को गहरा बनाना।
- प्रमुख रणनीतिक स्तंभ:
- रक्षा एवं सुरक्षा
- असैन्य परमाणु सहयोग
- अंतरिक्ष सहयोग
- विस्तारित सहयोग के क्षेत्र:
- हिंद-प्रशांत सहयोग
- समुद्री सुरक्षा
- डिजिटलीकरण
- साइबर सुरक्षा
- जलवायु परिवर्तन
- सतत विकास
- उन्नत प्रौद्योगिकियाँ
- आतंकवाद-रोधी सहयोग
- रक्षा सहयोग : इसकी समीक्षा वार्षिक रक्षा संवाद (मंत्री-स्तरीय) तथा उच्च रक्षा सहयोग समिति (HCDC) (सचिव-स्तरीय) के माध्यम से की जाती है।
- राफेल लड़ाकू विमान: भारत ने डसॉल्ट एविएशन से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की है।
- स्कॉर्पीन पनडुब्बियाँ (प्रोजेक्ट P-75):
- फ्रांस के नेवल ग्रुप के सहयोग से भारत में 6 पनडुब्बियों का निर्माण किया गया।
- नवीनतम पनडुब्बी INS वागशीर है।
- लड़ाकू विमान इंजन विकास:
- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और सैफरन हेलीकॉप्टर इंजन्स ने IMRH कार्यक्रम के अंतर्गत इंजनों के सह-विकास हेतु समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- हाल ही में दोनों देशों ने भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-एम लड़ाकू विमानों की खरीद हेतु एक अंतर-सरकारी समझौता (IGA) औपचारिक रूप से संपन्न किया।
- भविष्य की योजनाएँ: आगामी पीढ़ी के लड़ाकू विमान इंजनों का सह-विकास।
- संयुक्त सैन्य अभ्यास :
- शक्ति
- वरुणा
- फ्रिंजेक्स-23
- आर्थिक सहयोग: यूरोपीय संघ के अंदर फ्रांस, नीदरलैंड और जर्मनी के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
- विगत एक दशक में द्विपक्षीय व्यापार दोगुने से अधिक बढ़कर वर्ष 2025-26 में 13.59 अरब यूरो (15.81 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुँच गया है।
- भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर के बाद व्यापारिक संबंधों को अधिक गति मिलने की संभावना है।
- दोनों देश संयुक्त रूप से नई प्रौद्योगिकियों के विकास तथा वर्तमान तकनीकों के एकीकरण की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं।
- फ्रांस में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को सक्षम बनाने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है।
- अंतरिक्ष सहयोग: ISRO तथा CNES के बीच 60 वर्षों से अधिक का सहयोग रहा है।
- फ्रांस, घटकों एवं प्रक्षेपण सेवाओं का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है।
- संयुक्त मिशन:
- TRISHNA उपग्रह मिशन
- MDA प्रणाली
- ग्राउंड स्टेशन सहायता
- ऊर्जा सहयोग :
- अंतरराष्ट्रीयसौर गठबंधन (ISA): अंतरराष्ट्रीयसौर गठबंधन की स्थापना भारत और फ्रांस द्वारा वर्ष 2015 में विश्वभर में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संयुक्त रूप से की गई थी।
- परमाणु ऊर्जा सहयोग: वर्ष 2025 में भारत-फ्रांस रणनीतिक संवाद के अंतर्गत परमाणु ऊर्जा पर विशेष कार्यबल की प्रथम बैठक आयोजित की गई।
- दोनों पक्षों ने निम्न एवं मध्यम क्षमता वाले मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) तथा उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टरों (AMR) पर साझेदारी स्थापित करने की दिशा में कार्य करने पर सहमति व्यक्त की है।
चिंता के क्षेत्र
- व्यापार असंतुलन: द्विपक्षीय व्यापार अभी भी अपनी संभावित क्षमता से कम है, विशेषकर यूरोपीय संघ के अन्य देशों के साथ भारत के व्यापार की तुलना में।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं रक्षा प्रतिबंध: यद्यपि फ्रांस ने भारत के रक्षा उद्देश्यों का समर्थन किया है, फिर भी बड़े रक्षा सौदों में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की गहराई को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं।
- परमाणु दायित्व संबंधी चिंताएँ: वर्ष 2008 के असैन्य परमाणु समझौते तथा जैतापुर में रिएक्टरों की स्थापना की योजनाओं के बावजूद प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही है।
- भू-राजनीतिक मतभेद: चीन के साथ फ्रांस के सुदृढ़ आर्थिक संबंध कभी-कभी हिंद-प्रशांत मुद्दों पर भारत के साथ पूर्ण सामंजस्य को प्रभावित करते हैं।
- मध्य-पूर्व की भू-राजनीति के प्रति दोनों देशों के दृष्टिकोण में भी समय-समय पर अंतर दिखाई देता है।
भविष्य की संभावनाएँ
- होराइजन 2047 रोडमैप: वर्ष 2023 में भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर दोनों देशों ने होराइजन 2047 रोडमैप को अपनाया, जिसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक द्विपक्षीय संबंधों को दिशा प्रदान करना और उन्हें सुदृढ़ बनाना है।
- प्रमुख लक्ष्य: उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों का संयुक्त विकास एवं उत्पादन।
- संयुक्त रूप से विकसित उत्पादों का वैश्विक हित में तृतीय देशों को निर्यात।
- समुद्री एवं अंतरिक्ष सुरक्षा सहयोग को सुदृढ़ करना।
- रणनीतिक संवाद तथा संयुक्त सैन्य उपस्थिति के माध्यम से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सामरिक अभिसरण।
निष्कर्ष
- भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग उनकी व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक प्रमुख आधार स्तंभ है।
- संप्रभुता, बहुपक्षवाद तथा क्षेत्रीय स्थिरता जैसे साझा हितों के आधार पर दोनों देश होराइजन 2047 दृष्टि के अंतर्गत अपने संबंधों को और अधिक ऊँचाई देने के लिए तैयार हैं। इससे रक्षा सहयोग अधिक सहभागी, नवाचार-उन्मुख तथा निर्यात-केंद्रित बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
स्रोत: PIB
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संक्षिप्त समाचार 13-06-2026