पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारत, जिसकी लगभग 65% जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है, अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग करते हुए विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में अग्रसर है।
युवा-नेतृत्वित विकास पर बल
- राष्ट्रीय युवा नीति (NYP), 2014 ने देश में युवा विकास के लिए आधारभूत रूपरेखा प्रदान की।
- इस नीति में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के व्यक्तियों को युवा के रूप में परिभाषित किया गया तथा शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, स्वास्थ्य, खेल, सामाजिक सहभागिता एवं सशक्तीकरण जैसे प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई।
- प्रस्तावित राष्ट्रीय युवा नीति, 2025 भविष्य के लिए आवश्यक कौशल, नेतृत्व, डिजिटल सहभागिता तथा सतत विकास जैसी उभरती प्राथमिकताओं पर विशेष बल देती है।
- युवाओं को अब सरकारी योजनाओं के निष्क्रिय लाभार्थियों के बजाय शासन एवं राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भागीदार के रूप में देखा जा रहा है।
भविष्य के लिए शिक्षा का रूपांतरण
- विद्यालयी शिक्षा का सुदृढ़ीकरण: 1.49 लाख से अधिक विद्यालयों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) तथा डिजिटल शिक्षा पहलों के अंतर्गत शामिल किया गया है।
- 1.76 लाख से अधिक स्मार्ट कक्षाओं तथा 1.79 लाख ICT प्रयोगशालाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है।
- कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय जैसी आवासीय विद्यालय योजनाओं ने बालिकाओं एवं वंचित समुदायों की शिक्षा तक पहुँच को बेहतर बनाया है।
- पीएम-जनमन (PM-JANMAN) तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत छात्रावास सुविधाओं ने जनजातीय विद्यार्थियों के लिए अवसरों का विस्तार किया है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020: राष्ट्रीय क्रेडिट रूपरेखा (NCrF) छात्रों को शैक्षणिक, कौशल-आधारित तथा अनुभवात्मक अधिगम के अंतर्गत अर्जित क्रेडिट संचित करने की सुविधा प्रदान करती है।
- अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) छात्रों को अपनी शैक्षणिक प्रगति को प्रभावित किए बिना विभिन्न संस्थानों के बीच क्रेडिट को संग्रहीत, स्थानांतरित एवं उपयोग करने की सुविधा देता है।
- स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री (APAAR ID) विद्यार्थियों की संपूर्ण शिक्षण यात्रा के दौरान अर्जित शैक्षणिक एवं कौशल क्रेडिट का रिकॉर्ड रखती है।
- डिजिटल शिक्षा एवं नवाचार: SWAYAM पर 18,500 से अधिक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जिनमें 6 करोड़ से अधिक नामांकन हुए हैं।
- DIKSHA अनेक भारतीय भाषाओं में डिजिटल शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराता है।
- वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन पहल ने शैक्षणिक एवं शोध संसाधनों तक पहुँच का विस्तार किया है।
- 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब्स विद्यालयी विद्यार्थियों में नवाचार को प्रोत्साहित कर रही हैं।
कुशल एवं रोजगारोन्मुख कार्यबल का निर्माण
- स्किल इंडिया मिशन (SIM): वर्ष 2015 में प्रारंभ किया गया स्किल इंडिया मिशन देशभर में कौशल, पुनः-कौशल एवं उन्नत कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है।
- प्रमुख योजनाएँ:
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)
- जन शिक्षण संस्थान (JSS)
- राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (NAPS)
- औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) में शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (CTS)
- प्रमुख योजनाएँ:
- SOAR (AI के लिए तैयारी हेतु कौशल विकास): वर्ष 2025 में प्रारंभ की गई यह पहल कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) संबंधी जागरूकता एवं आधारभूत कौशल प्रदान करती है।
- यह शिक्षकों को भी शिक्षण प्रक्रिया में AI अवधारणाओं को समाहित करने हेतु सक्षम बनाती है।
- प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS): वर्ष 2024 में प्रारंभ की गई इस योजना का उद्देश्य देशभर के युवाओं को संरचित एवं पारिश्रमिक-युक्त इंटर्नशिप अवसर प्रदान करना है।
- स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH):: वर्ष 2023 में प्रारंभ किया गया SIDH एकीकृत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मंच है, जो शिक्षार्थियों, प्रशिक्षण प्रदाताओं, नियोक्ताओं एवं सरकारी कार्यक्रमों को एक ही डिजिटल मंच पर जोड़ता है।
रोजगार सृजन एवं आर्थिक सशक्तीकरण
- रोजगार मेले: वर्ष 2022 में प्रारंभ किए गए रोजगार मेले रोजगार सृजन को बढ़ावा देने तथा देशभर में कार्यबल को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
- प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना: यह योजना नियोक्ताओं तथा प्रथम बार औपचारिक क्षेत्र में प्रवेश करने वाले कर्मचारियों दोनों को रोजगार-आधारित प्रोत्साहन प्रदान करती है।
- राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS) पोर्टल: जुलाई 2015 में प्रारंभ किया गया यह पोर्टल रोजगार की खोज कर रहे युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों के नियोक्ताओं से जोड़ता है तथा सूचना विषमता को कम करता है।
- रोजगार के इंजन के रूप में विनिर्माण: मेक इन इंडिया तथा उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने घरेलू विनिर्माण को सुदृढ़ बनाया है।

उद्यमिता एवं नवाचार को प्रोत्साहन
- स्टार्टअप इंडिया क्रांति: भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बनकर उभरा है।
- स्टार्टअप इंडिया के अंतर्गत 2.3 लाख से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता प्रदान की गई है।
- देश में 120 से अधिक यूनिकॉर्न कार्यरत हैं।
- मान्यता प्राप्त लगभग आधे स्टार्टअप टियर-II एवं टियर-III शहरों से हैं।
- वित्तपोषण संरचना:
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY): वर्ष 2015 में प्रारंभ यह योजना सूक्ष्म उद्यमों एवं लघु व्यवसायों को वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु प्रमुख कार्यक्रम है।
- स्टार्टअप्स हेतु क्रेडिट गारंटी योजना (CGSS): यह योजना DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को वित्तीय संस्थानों के माध्यम से बिना जमानत ऋण उपलब्ध कराती है।
- स्टार्टअप इंडिया इन्वेस्टर कनेक्ट पोर्टल: वर्ष 2023 में प्रारंभ यह पोर्टल युवा उद्यमियों को एकल आवेदन के माध्यम से अनेक निवेशकों तक पहुँचने की सुविधा प्रदान करता है।
डिजिटल युवा सहभागिता
- मेरा युवा भारत (MY Bharat): यह पहल भौतिक सहभागिता एवं डिजिटल संपर्क को एकीकृत करते हुए 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के लिए एक समेकित पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करती है।
- यह शिक्षण, स्वयंसेवा, मार्गदर्शन, करियर सेवाओं तथा नागरिक सहभागिता के अवसर उपलब्ध कराती है।
- प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA): वर्ष 2017 में प्रारंभ इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण भारत में डिजिटल साक्षरता सुनिश्चित करना है।
- इसके अंतर्गत युवाओं सहित नागरिकों को डिजिटल उपकरणों के उपयोग, इंटरनेट संचालन, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं तक पहुँच तथा डिजिटल वित्तीय लेन-देन के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
युवा सशक्तीकरण के साधन के रूप में खेल
- खेलो इंडिया: यह कार्यक्रम ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में खेलों में व्यापक सहभागिता तथा उत्कृष्टता को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है।
- टार्गेट ओलंपिक पोडियम योजना (TOPS): यह योजना खिलाड़ियों को विदेशी कोचिंग, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण, खेल विज्ञान सहायता, आधुनिक उपकरण तथा मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- फिट इंडिया आंदोलन: वर्ष 2019 में प्रारंभ यह आंदोलन व्यक्तिगत फिटनेस को राष्ट्रीय जनआंदोलन में परिवर्तित करने में सफल रहा है।
युवाओं का स्वास्थ्य एवं कल्याण
- राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK): यह कार्यक्रम पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य एवं नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम सहित किशोर स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं को समग्र रूप से संबोधित करता है।
- मानसिक स्वास्थ्य सहायता (Tele-MANAS): कलंक-मुक्त मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने हेतु टेली-मानस 24×7 पेशेवर टेली-परामर्श सेवाएँ उपलब्ध कराता है।
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM): वर्ष 2021 में प्रारंभ यह मिशन युवाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक डिजिटल, सुलभ एवं किफायती बनाता है।
युवा नेतृत्व एवं वैश्विक सहभागिता
- राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) तथा नेहरू युवा केंद्र संगठन (NYKS) सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, साक्षरता एवं आपदा प्रबंधन में युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा दे रहे हैं।
- Y20, BIMSTEC युवा शिखर सम्मेलन तथा SCO सहभागिता जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच भारत की वैश्विक युवा उपस्थिति को सुदृढ़ करने के साथ नेतृत्व क्षमता का विकास कर रहे हैं।
प्रमुख चुनौतियाँ
- कौशल विकास में गुणवत्ता-परिमाण अंतर: बड़ी संख्या में प्रशिक्षण दिए जाने के बावजूद रोजगार-योग्यता के परिणाम अपेक्षित नहीं हैं।
- उद्योग जगत प्रायः प्रमाणित युवाओं को वास्तविक कार्य आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार नहीं पाता, जो पाठ्यक्रम एवं उद्योग आवश्यकताओं के बीच असंगति को दर्शाता है।
- प्रमाण-पत्र एवं रोजगार के बीच असंगति: स्नातक बेरोजगारी और विनिर्माण एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में कौशल की कमी साथ-साथ विद्यमान है।
- यह शिक्षा से रोजगार तक की प्रक्रिया में संरचनात्मक कठोरता को दर्शाता है।
- क्षेत्रीय एवं सामाजिक असमानताएँ: शिक्षा, कौशल एवं अवसरों तक पहुँच में क्षेत्रों एवं सामाजिक समूहों के बीच असमानता बनी हुई है।
- भौगोलिक संकेन्द्रण: आर्थिक अवसर, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कुछ राज्यों तक सीमित हैं।
- आकांक्षी जिलों एवं पूर्वोत्तर राज्यों में अवसरों की कमी बनी हुई है।
- गिग अर्थव्यवस्था की असुरक्षा: बड़ी संख्या में युवा प्लेटफ़ॉर्म-आधारित गिग कार्यों में संलग्न हैं, जहाँ सामाजिक सुरक्षा, EPF कवरेज एवं करियर उन्नति के अवसर सीमित हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य के भार में वृद्धि: प्रतिस्पर्धात्मक दबाव, बेरोजगारी की चिंता एवं डिजिटल माध्यमों के अत्यधिक उपयोग के कारण मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ रही हैं, जिनसे निपटने हेतु वर्तमान स्वास्थ्य अवसंरचना अभी पर्याप्त नहीं है।
निष्कर्ष
- भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश आर्थिक विकास को गति देने, नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा राष्ट्र-निर्माण को सुदृढ़ करने का एक ऐतिहासिक अवसर प्रदान करता है।
- इस क्षमता का पूर्ण उपयोग तभी संभव है जब युवाओं को ज्ञान, कौशल एवं ऐसे अवसरों से सशक्त बनाया जाए, जो उन्हें तीव्र गति से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में सफलतापूर्वक आगे बढ़ने में सक्षम बनाएँ।
स्रोत: PIB
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