पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- हाल के उच्च-स्तरीय संवादों से संकेत मिलता है कि सीमा संबंधी मतभेदों के बावजूद भारत और नेपाल द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने के प्रयास कर रहे हैं।
भारत-नेपाल सीमा विवाद
- भारत और नेपाल के बीच लगभग 1,751 किमी लंबी सीमा साझा है, किंतु कुछ क्षेत्रों में सीमा विवाद अभी भी विद्यमान हैं।
- कालापानी–लिपुलेख–लिम्पियाधुरा विवाद: नेपाल ने अपने दावे का आधार वर्ष 1816 की सुगौली संधि को बनाया है, जो ईस्ट इंडिया कंपनी और गुरु गजराज मिश्र के बीच संपन्न हुई थी।
- इस संधि के अनुसार काली नदी को भारत और नेपाल के बीच पश्चिमी सीमा के रूप में निर्धारित किया गया था।
- नेपाल का दावा है कि काली नदी का उद्गम लिम्पियाधुरा से होता है, जिसके आधार पर लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल के भूभाग में आते हैं।
- इसके विपरीत, भारत का मत है कि नदी का उद्गम कालापानी के निकट निम्नतर बिंदु से होता है, जिससे लिपुलेख दर्रा, जो भारत, नेपाल और चीन के मध्य एक सामरिक त्रि-जंक्शन है, भारत के उत्तराखंड राज्य के अंतर्गत आता है।
- वर्षों के दौरान काली नदी की धारा में परिवर्तन होने से सीमा निर्धारण को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है।
- सुस्ता सीमा विवाद: सुस्ता भारत और नेपाल के बीच एक विवादित क्षेत्र है।
- वर्तमान में इसका प्रशासन भारत द्वारा बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के भाग के रूप में किया जाता है।
- नेपाल का दावा है कि यह क्षेत्र पश्चिम नवलपरासी जिले की सुस्ता ग्रामीण नगरपालिका का हिस्सा है।
- नेपाल का आरोप है कि सुस्ता क्षेत्र में लगभग 14,860 हेक्टेयर नेपाली भूमि पर भारत द्वारा अतिक्रमण किया गया है।
भारत-नेपाल संबंधों का अवलोकन
- साझी सीमा: नेपाल की सीमा भारत के पाँच राज्यों—सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड—से लगती है।
- स्थलरुद्ध राष्ट्र होने के कारण नेपाल वस्तुओं एवं सेवाओं के परिवहन तथा समुद्री पहुँच के लिए भारत पर अत्यधिक निर्भर है।
- भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि, 1950: वर्ष 1950 में हस्ताक्षरित यह संधि भारत-नेपाल के विशेष संबंधों की आधारशिला है।
- इस संधि के प्रावधानों के अनुसार नेपाली नागरिकों को भारत में भारतीय नागरिकों के समान अनेक सुविधाएँ एवं अवसर प्राप्त हैं।
- रक्षा सहयोग: भारत, नेपाली सेना के आधुनिकीकरण में उपकरण उपलब्ध कराकर तथा प्रशिक्षण प्रदान करके सहयोग करता रहा है।
- दोनों देश बारी-बारी से भारत और नेपाल में संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘सूर्य किरण’ का आयोजन करते हैं।
- वर्ष 1950 से दोनों देश एक-दूसरे के सेनाध्यक्षों को मानद जनरल की उपाधि प्रदान करते रहे हैं।
- भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंटों में आंशिक रूप से नेपाल के पर्वतीय जिलों से भर्ती की जाती है।
- व्यापार एवं आर्थिक संबंध: भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और निवेशक बना हुआ है।
- नेपाल में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के भंडार में भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 33.5 प्रतिशत है।
- नेपाल, वर्ष 2014 में 28वें स्थान से बढ़कर भारत का 17वाँ सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बन गया है।
- भारत से नेपाल को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में पेट्रोलियम उत्पाद, लोहा एवं इस्पात, ऑटोमोबाइल, मशीनरी तथा अनाज शामिल हैं।
- संपर्क एवं विकास साझेदारी: स्वास्थ्य, शिक्षा तथा संपर्क अवसंरचना जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भारत नेपाल का सबसे बड़ा विकास सहयोगी है।
- प्रमुख परियोजनाओं में गौचर हवाई अड्डा (वर्तमान त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा), पूर्व-पश्चिम राजमार्ग, सीमा-पार रेल संपर्क तथा एकीकृत जाँच चौकियों की स्थापना शामिल हैं।
- ऑपरेशन मैत्री एवं भूकंपोत्तर पुनर्निर्माण सहायता: वर्ष 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद भारत सबसे पहले सहायता पहुँचाने वाला देश था।
- भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन मैत्री’ के माध्यम से विदेश में अपना अब तक का सबसे बड़ा आपदा राहत अभियान संचालित किया।
- सांस्कृतिक संबंध: दोनों देशों के नेताओं ने समय-समय पर भारत-नेपाल के प्राचीन ‘रोटी-बेटी’ संबंधों का उल्लेख किया है।
- यह संबंध दोनों देशों के लोगों के बीच होने वाले सीमा-पार वैवाहिक एवं सामाजिक संबंधों को दर्शाता है।
अन्य चिंता के क्षेत्र
- कार्यान्वयन में विलंब: कुछ संपर्क एवं अवसंरचना परियोजनाओं की धीमी प्रगति ने समय-समय पर नेपाल में चिंताएँ उत्पन्न की हैं।
- भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा: नेपाल में चीन की बढ़ती आर्थिक एवं सामरिक उपस्थिति ने क्षेत्रीय भू-राजनीति तथा भारत की पड़ोस नीति को एक नया आयाम दिया है।
- असमानता की धारणा: नेपाल के राजनीतिक वर्ग एवं जनचर्चा के कुछ वर्गों ने द्विपक्षीय संबंधों में भारत की प्रमुख भूमिका को लेकर चिंताएँ व्यक्त की हैं, जिसे प्रायः ‘बिग ब्रदर’ धारणा कहा जाता है।
- राजनीतिक संवेदनशीलताएँ: दोनों देशों के आंतरिक राजनीतिक घटनाक्रम तथा राष्ट्रवादी बयानबाजी समय-समय पर अविश्वास उत्पन्न कर द्विपक्षीय संबंधों में तनाव उत्पन्न कर सकती है।
- जल संसाधन प्रबंधन: साझा नदियों के प्रबंधन, जलविद्युत सहयोग तथा बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं से जुड़े मतभेद अभी भी घनिष्ठ समन्वय एवं निरंतर संवाद की अपेक्षा रखते हैं।
आगे की राह
- कूटनीतिक संवाद का सुदृढ़ीकरण: सीमा विवादों सहित लंबित मुद्दों का समाधान वर्तमान द्विपक्षीय तंत्रों तथा सतत कूटनीतिक संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।
- संपर्क एवं व्यापार को प्रोत्साहन: सीमा-पार अवसंरचना, रेल, सड़क एवं ऊर्जा संपर्क परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तीव्रता लाई जानी चाहिए।
- ऊर्जा सहयोग का सुदृढ़ीकरण: जलविद्युत विकास, सीमा-पार विद्युत व्यापार तथा पारेषण अवसंरचना के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार किया जाना चाहिए।
- पारस्परिक विश्वास को प्रोत्साहन: नियमित उच्च-स्तरीय संवाद तथा एक-दूसरे की संप्रभुता एवं संवेदनशीलताओं के सम्मान के माध्यम से चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए।
- जन-से-जन संबंधों का विस्तार: शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन तथा युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों को सुदृढ़ कर प्राचीन ‘रोटी-बेटी’ संबंधों को अधिक सुदृढ़ बनाया जाना चाहिए।
Source: TH
Previous article
52वें जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की सहभागिता
Next article
भारत के रोजगार परिदृश्य का मानचित्रण