पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
सन्दर्भ
- हाल ही में भारत के विदेश मंत्री ने मस्कट में अपने ओमानी समकक्ष से भेंट की तथा दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा की।
भारत–ओमान संबंध
- ओमान सल्तनत भारत का एक रणनीतिक साझेदार है तथा खाड़ी सहयोग परिषद (GCC), अरब लीग और हिंद महासागर तटीय क्षेत्रीय सहयोग संघ (IORA) जैसे मंचों पर भारत का एक महत्त्वपूर्ण सहयोगी है।
- भारत और ओमान के बीच ऐतिहासिक, बहुआयामी तथा रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण संबंध हैं।
- फारस की खाड़ी के प्रवेश द्वार तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य के निकट स्थित ओमान, भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार तथा हिंद-प्रशांत दृष्टि के लिए एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण समुद्री साझेदार है।
- भारत के लिए महत्त्व:
- पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र का प्रवेश द्वार।
- होर्मुज़ जलडमरूमध्य के निकट रणनीतिक स्थिति।
- विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्तिकर्ता।
- मजबूत रक्षा एवं समुद्री सहयोग।
- भारत की पश्चिम एशिया नीति, सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा एवं विकास) तथा महासागर समुद्री दृष्टि का प्रमुख साझेदार।
ऐतिहासिक विकास
- प्राचीन काल:मसालों, वस्त्रों, खजूर, ताँबे तथा लोबान (Frankincense) का समृद्ध समुद्री व्यापार।
- औपनिवेशिक काल:भारत के गुजरात और केरल के व्यापारियों ने मस्कट में समृद्ध व्यापारिक समुदाय स्थापित किए।
- स्वतंत्रता के बाद:वर्ष 1955 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए तथा 1970 में सुल्तान काबूस के सत्ता में आने के बाद ये संबंध और मजबूत हुए।
- रणनीतिक साझेदारी (2008):रक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार तथा निवेश में सहयोग का विस्तार हुआ।
- समकालीन चरण:संबंधों का विस्तार प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा संपर्क व्यवस्था तक हुआ।
भारत–ओमान संबंध : प्रमुख आयाम
1. राजनीतिक संबंध
- उच्च स्तर पर नियमित यात्राएँ होती हैं। संयुक्त आयोग बैठक (JCM), विदेश कार्यालय परामर्श तथा रणनीतिक परामर्श के माध्यम से संस्थागत संवाद होता है।
- ओमान खाड़ी क्षेत्र में भारत के सबसे विश्वसनीय साझेदारों में से एक बना हुआ है।
2. रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग
- रक्षा सहयोग द्विपक्षीय संबंधों के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है।
रक्षा अभ्यास
- अल नजाह अभ्यास (थल सेना)
- ईस्टर्न ब्रिज अभ्यास (वायु सेना)
- नसीम अल बह्र अभ्यास (नौसेना)
सुरक्षा सहयोग
- समुद्री सुरक्षा
- नौसैनिक सहयोग
- जल सर्वेक्षण (हाइड्रोग्राफी)
- आतंकवाद-रोधी सहयोग
- समुद्री डकैती-रोधी अभियान
- श्वेत नौवहन सूचना साझाकरण (White Shipping Information Sharing)
- क्षमता निर्माण
रणनीतिक महत्त्व
- ओमान भारत को दुक्म बंदरगाह के उपयोग की परिचालन सुविधा प्रदान करता है, जिससे पश्चिमी हिंद महासागर में भारत की नौसैनिक उपस्थिति मजबूत होती है।
- दुक्म बंदरगाह भारत को रसद सुविधा, जहाजों के रखरखाव तथा अफ्रीका एवं पश्चिम एशिया तक रणनीतिक पहुँच उपलब्ध कराता है।
3. आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध
द्विपक्षीय व्यापार
- वित्त वर्ष 2023–24: 8.947 अरब अमेरिकी डॉलर
- वित्त वर्ष 2024–25: 10.613 अरब अमेरिकी डॉलर
भारत के प्रमुख निर्यात
- अभियांत्रिकी उत्पाद,खाद्य पदार्थ,चावल,औषधियाँ,मशीनरी,रसायन।
प्रमुख आयात
- कच्चा तेल,द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG),उर्वरक,पेट्रो-रसायन,खनिज।
निवेश
- भारत का निवेश विनिर्माण, इस्पात, सीमेंट, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आतिथ्य, नवीकरणीय ऊर्जा तथा सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में है।
- भारत में ओमान का निवेश सार्वभौमिक संपदा कोष (Sovereign Wealth Funds) तथा निजी उद्यमों के माध्यम से बढ़ रहा है।
4. ऊर्जा सहयोग
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं—
- दीर्घकालिक कच्चे तेल की आपूर्ति,LNG आयात,पेट्रो-रसायन,हरित हाइड्रोजन,नवीकरणीय ऊर्जा,स्वच्छ ईंधन, रणनीतिक पेट्रोलियम सहयोग आदि।
- दोनों देश हरित हाइड्रोजन, हरित अमोनिया तथा ऊर्जा संक्रमण प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर कार्य कर रहे हैं।
5. प्रवासी भारतीय संबंध
- ओमान में 6 लाख से अधिक भारतीय रहते और कार्य करते हैं, जो वहाँ का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है।
- भारतीय स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, अभियांत्रिकी, बैंकिंग, निर्माण, सेवा क्षेत्र तथा सूचना प्रौद्योगिकी में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।
6. सांस्कृतिक संबंध
- भारत और ओमान के बीच प्राचीन सभ्यतागत संबंध हैं।
- दोनों देशों में भारतीय त्योहार तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान आयोजित किए जाते हैं।
- शिक्षा एवं पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग है तथा ओमान में अनेक भारतीय विद्यालय संचालित हैं।
भारत–ओमान संबंधों की चुनौतियाँ
- आर्थिक चुनौतियाँ :द्विपक्षीय व्यापार अपनी संभावनाओं से कम है तथा हाइड्रोकार्बन से परे व्यापार में पर्याप्त विविधीकरण नहीं हुआ है।
- भू-राजनीतिक समस्या :पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय अस्थिरता।
- ईरान–खाड़ी तनाव:अरब सागर एवं खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ।
- प्रतिस्पर्धा:ओमान के अवसंरचना एवं रणनीतिक क्षेत्रों में चीन, अमेरिका तथा यूरोपीय देशों की बढ़ती भागीदारी।
- श्रम संबंधी समस्याएँ: ओमानीकरण (Omanisation) नीति से विदेशी श्रमिकों के अवसर कम हो सकते हैं। भारतीय कार्यबल के निरंतर कौशल उन्नयन की आवश्यकता।
- संपर्क व्यवस्था:रसद नेटवर्क का सीमित प्रत्यक्ष एकीकरण। समुद्री परिवहन तथा वायु माल ढुलाई संपर्क में सुधार की आवश्यकता।
- निवेश संबंधी बाधाएँ:नियामकीय प्रक्रियाएँ जटिल हैं एवं निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी की आवश्यकता है।
आगे की राह : भारत–ओमान संबंधों को और सुदृढ़ बनाना
- राजनीतिक:वार्षिक रणनीतिक संवाद को संस्थागत स्वरूप दिया जाए। संसद तथा राज्यों के स्तर पर आदान-प्रदान बढ़ाया जाए।
- रक्षा:नौसैनिक अंतर-संचालन क्षमता बढ़ाई जाए। संयुक्त सैन्य अभ्यासों का विस्तार किया जाए। समुद्री क्षेत्र जागरूकता को मजबूत किया जाए। दुक्म बंदरगाह का अधिक प्रभावी परिचालन उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
- व्यापार: व्यापारिक वस्तुओं का दायरा बढ़ाया जाए। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के सहयोग को बढ़ावा दिया जाए। रसद संपर्क को सुदृढ़ किया जाए।
- ऊर्जा:हाइड्रोकार्बन पर निर्भरता कम करते हुए हरित हाइड्रोजन, हरित अमोनिया, नवीकरणीय ऊर्जा, महत्त्वपूर्ण खनिज तथा कार्बन अवशोषण प्रौद्योगिकियों में साझेदारी विकसित की जाए।
- निवेश:संयुक्त उपक्रमों को बढ़ावा दिया जाए।सार्वभौमिक संपदा कोषों की भागीदारी प्रोत्साहित की जाए।औद्योगिक गलियारों एवं रसद केंद्रों का विकास किया जाए।
- प्रौद्योगिकी: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), साइबर सुरक्षा, वित्तीय प्रौद्योगिकी (FinTech), सेमीकंडक्टर तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम में सहयोग बढ़ाया जाए।
- ब्लू इकोनॉमी: मत्स्य पालन, समुद्री जैव प्रौद्योगिकी, बंदरगाह-आधारित विकास तथा महासागर शासन में सहयोग को बढ़ावा दिया जाए।
- जन-से-जन संपर्क:प्रवासी भारतीयों के कल्याण की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। शैक्षिक आदान-प्रदान बढ़ाया जाए। पर्यटन एवं सांस्कृतिक कूटनीति को प्रोत्साहित किया जाए।
स्रोत: News On AIR
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संक्षिप्त समाचार 10-07-2026