पाठ्यक्रम: जीएस-3/ऊर्जा
सन्दर्भ
- पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के समर्थन में स्पष्टीकरण जारी किया।
एथेनॉल
- एथेनॉल का उत्पादन गन्ना, मक्का, गेहूँ आदि उच्च स्टार्च युक्त फसलों से किया जा सकता है।
- भारत में एथेनॉल का उत्पादन मुख्यतः गन्ने के शीरे (Molasses) से किण्वन (Fermentation) प्रक्रिया द्वारा किया जाता है।
- इसे पेट्रोल के साथ मिलाकर विभिन्न प्रकार के मिश्रण तैयार किए जा सकते हैं।
- उपयोग: एथेनॉल का व्यापक उपयोग केवल वैकल्पिक ईंधन के रूप में ही नहीं, बल्कि विभिन्न उद्योगों में रासायनिक विलायक (Chemical Solvent) तथा कार्बनिक यौगिकों के संश्लेषण में भी किया जाता है।
- एथेनॉल का उपयोग प्रतिजीवाणुनाशक (Antiseptic) एवं कीटाणुनाशक (Disinfectant) के रूप में भी होता है, जिससे इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।
एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending)
- एथेनॉल मिश्रण का अर्थ है एथेनॉल को पेट्रोल के साथ मिलाकर ऐसा ईंधन तैयार करना, जिसका उपयोग आंतरिक दहन इंजन (Internal Combustion Engine) में किया जा सके।
कुछ सामान्य मिश्रण इस प्रकार हैं:
- E10: इसमें 10% एथेनॉल तथा 90% पेट्रोल होता है। यह सबसे सामान्य मिश्रण है और अनेक देशों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
- E15: इसमें 15% एथेनॉल तथा 85% पेट्रोल होता है।
- E85: यह उच्च एथेनॉल मिश्रण है, जिसमें 85% एथेनॉल तथा 15% पेट्रोल होता है। इसका उपयोग उन फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में किया जाता है, जिन्हें अधिक एथेनॉल वाले ईंधन पर चलने के लिए बनाया गया है।
एथेनॉल मिश्रण की वैश्विक स्थिति
- एथेनॉल मिश्रण अब विश्वभर में व्यापक रूप से स्वीकार की गई व्यवस्था बन चुकी है। अनेक प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने इसे अपनी ईंधन रणनीति का महत्वपूर्ण भाग बनाया है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका: पूरे देश में E10 मानक मिश्रित ईंधन है। E15 का उपयोग भी अमेरिकी सरकार के समर्थन से तेजी से बढ़ रहा है।
- लाखों वाहन पहले से ही फ्लेक्स-फ्यूल सक्षम हैं, जो E85 तक के मिश्रण पर चल सकते हैं।
- ब्राज़ील: एथेनॉल उपयोग में ब्राज़ील विश्व का अग्रणी देश है। वहाँ वर्तमान में E27 मानक पेट्रोल मिश्रण अनिवार्य है, जिसे बढ़ाकर लगभग 35% किया जा रहा है।
- वहाँ बिकने वाली 80% से अधिक नई कारें फ्लेक्स-फ्यूल वाहन हैं, जो E27, E30 अथवा शुद्ध जलयुक्त एथेनॉल (Hydrous Ethanol) पर चल सकती हैं।
- जापान: जापान ने भी चरणबद्ध तरीके से E10 मिश्रण लागू करके एथेनॉल को अपने ईंधन मिश्रण में शामिल किया है।
एथेनॉल मिश्रण के लाभ
- पर्यावरणीय लाभ: स्वच्छ दहन के कारण ग्रीनहाउस गैसों तथा कार्बन मोनोऑक्साइड, कणीय पदार्थ और हाइड्रोकार्बन जैसे हानिकारक प्रदूषकों का उत्सर्जन कम होता है।

- ऊर्जा सुरक्षा एवं आर्थिक लाभ: कच्चे तेल के आयात में कमी आती है, विदेशी मुद्रा की बचत होती है, ऊर्जा स्रोतों में विविधता आती है तथा अंतरराष्ट्रीय तेल मूल्यों में उतार-चढ़ाव पर निर्भरता घटती है।
- किसान कल्याण: फसलों तथा कृषि अवशेषों की मांग बढ़ती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त एवं स्थिर आय प्राप्त होती है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का सृजन होता है।
- इंजन का बेहतर प्रदर्शन: एथेनॉल की उच्च ऑक्टेन क्षमता इंजन की दक्षता बढ़ाती है, नॉकिंग को कम करती है तथा वाहन के समग्र प्रदर्शन में सुधार करती है।
भारत का दृष्टिकोण
- एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम वर्ष 2003 में प्रारम्भ किया गया था।
- इसका उद्देश्य वैकल्पिक एवं पर्यावरण-अनुकूल ईंधनों को बढ़ावा देना तथा ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भरता कम करना था।
उद्देश्य
- आयात निर्भरता कम करना: भारत कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाकर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है।
- पर्यावरणीय लाभ: एथेनॉल, पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छ ईंधन है, जिससे वायु प्रदूषण एवं ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है।
- किसानों को समर्थन: यह कार्यक्रम कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहित करता है क्योंकि एथेनॉल का उत्पादन प्रायः गन्ना, मक्का एवं अन्य फसलों से किया जाता है।
प्रमुख घटक
- मिश्रण लक्ष्य: भारत ने एथेनॉल मिश्रण के लिए निर्धारित लक्ष्य तय किए हैं। उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, 2018 में 2025-26 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा गया।
- चरणबद्ध कार्यान्वयन: E20 जैसे उच्च मिश्रणों की ओर धीरे-धीरे बढ़ते हुए लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से लागू किए जा रहे हैं।
- अवसंरचना विकास: सरकार एथेनॉल उत्पादन, भंडारण एवं वितरण के लिए आवश्यक अवसंरचना विकसित कर रही है, जिसमें नए उत्पादन संयंत्र एवं मिश्रण इकाइयाँ शामिल हैं।
EBP कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियाँ
- एथेनॉल मिश्रण 2013-14 में 1.5% से भी कम से बढ़कर 2025-26 में 20% हो गया।
- भारत ने 20% मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच वर्ष पहले प्राप्त कर लिया।
- एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY) 2013-14 में लगभग 38 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद बढ़कर 2025-26 में 1,200 करोड़ लीटर (अनुमानित) से अधिक हो गई।
- उत्पादन क्षमता 2014 में 421 करोड़ लीटर से बढ़कर 2026 में लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई।
- इससे कच्चे तेल के आयात में कमी आई, विदेशी मुद्रा की बचत हुई, ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटा तथा किसानों को नए बाज़ार अवसर प्राप्त हुए।
चुनौतियाँ एवं चिंताएँ
- अवसंरचना: बड़े पैमाने पर एथेनॉल उत्पादन एवं मिश्रण के लिए आवश्यक अवसंरचना विकसित करना जटिल एवं महँगा है।
- कच्चे माल की उपलब्धता: गन्ने जैसे कच्चे माल की निरंतर एवं पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है, विशेषकर बदलती कृषि परिस्थितियों एवं बाज़ार उतार-चढ़ाव के कारण।
- उपभोक्ता स्वीकृति: उपभोक्ताओं को जागरूक करना तथा यह सुनिश्चित करना कि वाहन उच्च एथेनॉल मिश्रण पर कुशलतापूर्वक चल सकें, आवश्यक है।
- उच्च एथेनॉल मिश्रण से जुड़ी चिंताएँ: अधिक एथेनॉल मिश्रण से पुराने वाहनों में इंजन एवं ईंधन प्रणाली को नुकसान, माइलेज में कमी तथा ठंडे मौसम में स्टार्ट होने की समस्या हो सकती है।
- इससे पुराने वाहन मालिकों के रखरखाव व्यय में वृद्धि हो सकती है। साथ ही विभिन्न ईंधन विकल्पों का अभाव उपभोक्ता की पसंद को सीमित करता है।
- वाहन निर्माताओं के लिए E20 से E25 की ओर बढ़ने हेतु इंजन का पुनः अंशांकन (Recalibration), नया प्रमाणीकरण तथा अतिरिक्त अभियांत्रिकी लागत की आवश्यकता होगी, जिससे वाहनों की कीमत बढ़ सकती है।
सरकार का स्पष्टीकरण
- पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण पिछले दो दशकों में 2020-21 के 8.1% से बढ़कर 2025-26 में 20% तक चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है।
- मंत्रालय के अनुसार पूरे देश में E0, E10 और E20 जैसे विभिन्न ईंधन ग्रेड उपलब्ध कराना लॉजिस्टिक दृष्टि से कठिन एवं महँगा है।
- मंत्रालय ने इंजन क्षति के दावों को भी अस्वीकार किया और कहा कि व्यापक परीक्षण किए जा चुके हैं। उसने 3–5% ईंधन दक्षता में कमी स्वीकार की, लेकिन साथ ही उच्च ऑक्टेन क्षमता, कम उत्सर्जन तथा बेहतर ऊर्जा सुरक्षा जैसे लाभों पर बल दिया।
- मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 का उत्पादन शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक महँगा है और इस कार्यक्रम का उद्देश्य ईंधन की कीमत घटाना नहीं, बल्कि कच्चे तेल के आयात में कमी लाना तथा वैश्विक मूल्य उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान करना है।
आगे की राह
- भारत को उच्च एथेनॉल मिश्रण की ओर क्रमिक एवं साक्ष्य-आधारित संक्रमण अपनाना चाहिए।
- उपभोक्ताओं के हितों तथा वाहनों की अनुकूलता से जुड़ी चिंताओं का उचित समाधान किया जाना चाहिए।
- फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को प्रोत्साहन एवं तकनीकी सहायता के माध्यम से व्यापक रूप से अपनाने को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- कृषि अवशेषों तथा द्वितीय पीढ़ी (Second Generation) के जैव ईंधनों जैसे वैकल्पिक कच्चे माल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
स्रोत: DD