पाठ्यक्रम: जीएस-2 / शासन
सन्दर्भ
- केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 में प्रस्तावित संशोधनों का प्रारूप प्रकाशित किया है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) का उद्देश्य जनगणना 2011 के आधार पर ग्रामीण जनसंख्या के 75% तथा शहरी जनसंख्या के 50% (कुल 81.35 करोड़ व्यक्तियों) की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति करना है।
- इसका उद्देश्य लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के माध्यम से रियायती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराकर खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
पात्र परिवारों को निम्नलिखित आधार पर रियायती खाद्यान्न प्रदान किया जाता है:
अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवार:
- ये परिवार समाज के सबसे गरीब वर्ग से संबंधित होते हैं। इन्हें प्रति परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त करने का अधिकार है।
प्राथमिकता परिवार (PHH):
- इन परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त करने का अधिकार है।
इसके अंतर्गत केंद्रीय निर्गम मूल्य अत्यधिक रियायती हैं—
- चावल – ₹3 प्रति किलोग्राम
- गेहूँ – ₹2 प्रति किलोग्राम
- मोटा अनाज – ₹1 प्रति किलोग्राम
- साथ ही, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कम-से-कम ₹6,000 की मातृत्व नकद सहायता प्रदान की जाती है।
लाभार्थी कौन हैं?
1. अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवार
- राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा केंद्र सरकार के मानदंडों के आधार पर चयनित किए जाते हैं। इसमें समाज के सबसे गरीब परिवार शामिल होते हैं।
पात्र श्रेणियाँ हैं—
- विधवा, असाध्य रोग से पीड़ित, दिव्यांग अथवा 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के ऐसे व्यक्तियों के परिवार, जिनके पास आजीविका का सुनिश्चित साधन या सामाजिक सहारा नहीं है।
- विधवा, असाध्य रोग से पीड़ित, दिव्यांग, 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्ति, अकेली महिला या अकेला पुरुष, जिनके पास परिवार, सामाजिक सहारा अथवा आजीविका का सुनिश्चित साधन नहीं है।
- सभी आदिम जनजातीय परिवार।
- भूमिहीन कृषि श्रमिक, सीमांत किसान, ग्रामीण कारीगर एवं शिल्पकार, झुग्गी-झोपड़ी निवासी, असंगठित क्षेत्र में दैनिक आजीविका कमाने वाले व्यक्ति तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की अन्य समान श्रेणियाँ।
- एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों के सभी पात्र गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवार।
2. प्राथमिकता परिवार (PHH)
- राज्य सरकारों एवं केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन द्वारा अपने-अपने मानदंडों के अनुसार चयनित किए जाते हैं।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) का विलय
- वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) प्रारंभ की, जिसके अंतर्गत अतिरिक्त खाद्यान्न निःशुल्क उपलब्ध कराया गया।
- जनवरी 2023 से सरकार ने PMGKAY का NFSA में विलय कर दिया तथा NFSA के अंतर्गत मिलने वाले नियमित खाद्यान्न को भी निःशुल्क कर दिया।
- वर्ष 2023 में इस निःशुल्क खाद्यान्न योजना को पाँच वर्षों (जनवरी 2024 से दिसंबर 2028) के लिए बढ़ा दिया गया।
NFSA में प्रस्तावित संशोधन
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 3 में एक नया प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, जिसके अनुसार अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के अंतर्गत आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को प्रति माह 7 किलोग्राम खाद्यान्न मिलेगा, किंतु प्रति परिवार अधिकतम 35 किलोग्राम की सीमा लागू रहेगी।
- पहले AAY के अंतर्गत प्रति परिवार 35 किलोग्राम खाद्यान्न दिया जाता था, चाहे परिवार में सदस्यों की संख्या कितनी भी हो।
- AAY राशन कार्डधारकों के लिए यह खाद्यान्न पूर्णतः निःशुल्क रहेगा।
प्रस्ताव का औचित्य:
- खाद्यान्न आवंटन में मौजूद असंतुलन को दूर करना, जहाँ छोटे परिवारों को बड़े परिवारों की तुलना में प्रति व्यक्ति अधिक खाद्यान्न मिल जाता है।
चिंताएं
अपर्याप्त पोषण सुरक्षा:
- संशोधन केवल अनाज तक सीमित है। इसमें दालें, खाद्य तेल अथवा अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल नहीं हैं।
अधिक खाद्यान्न की माँग:
- भोजन के अधिकार से जुड़े कार्यकर्ताओं ने विशेष रूप से सबसे गरीब परिवारों के लिए प्रति व्यक्ति 7 किलोग्राम के स्थान पर 14 किलोग्राम खाद्यान्न देने की माँग की है।
बड़े परिवारों के साथ असमानता:
- संशोधन में प्रति परिवार 35 किलोग्राम की अधिकतम सीमा बरकरार रखी गई है। इससे बड़े परिवारों को अभी भी अपेक्षित प्रति व्यक्ति खाद्यान्न नहीं मिल सकेगा।
क्षेत्रीय असमानताएँ:
- दक्षिणी राज्यों में अधिक प्रचलित छोटे (एकल) परिवारों को वर्तमान व्यवस्था की तुलना में कम खाद्यान्न प्राप्त हो सकता है।
पुराना लाभार्थी कवरेज:
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का कवरेज अभी भी जनगणना 2011 पर आधारित है, जबकि जनसंख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो चुकी है। अनुमान है कि लाखों पात्र परिवार अब भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के दायरे से बाहर हैं।
क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियाँ:
- संशोधन सार्वजनिक वितरण प्रणाली की परिचालन संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं करता।
- बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की विफलता, ई-केवाईसी से होने वाला बहिष्करण(exclusions) , कनेक्टिविटी की समस्याएँ तथा प्रवासी श्रमिकों, वृद्धजनों और दिव्यांग व्यक्तियों को आने वाली कठिनाइयाँ अब भी पात्र लाभार्थियों को उनका खाद्यान्न प्राप्त करने से वंचित करती हैं।
आगे की राह
- नवीनतम जनगणना के आधार पर NFSA के लाभार्थियों का कवरेज अद्यतन किया जाए, ताकि वर्तमान जनसांख्यिकीय स्थिति परिलक्षित हो।
- यह सुनिश्चित किया जाए कि परिवर्तन की प्रक्रिया के कारण किसी भी वर्तमान लाभार्थी को खाद्य असुरक्षा का सामना न करना पड़े।
- पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए अनाज के साथ दालें, खाद्य तेल तथा सुदृढ़ीकृत (फोर्टिफाइड) खाद्य पदार्थों को भी शामिल करने पर विचार किया जाए।
- संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले राज्यों के साथ व्यापक परामर्श कर सहमति बनाई जाए तथा सहकारी संघवाद को और अधिक सुदृढ़ किया जाए।
स्रोत: TH