पाठ्यक्रम: जीएस-2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध
सन्दर्भ
- न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री ने बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए भारत और न्यूज़ीलैंड के साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बदलता वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य
- न्यूज़ीलैंड ने वर्तमान वैश्विक स्थिति को एक “निर्णायक मोड़ (Inflection Point)” बताया, जहाँ विश्व नियम-आधारित व्यवस्था से शक्ति-आधारित व्यवस्था की ओर तथा मुख्यतः बहुपक्षीय ढाँचे से अधिक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।
अनेक प्रमुख वैश्विक चुनौतियों को रेखांकित किया गया, जैसे—
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन का बढ़ता सामरिक प्रभाव।
- रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण से उत्पन्न संघर्ष।
- वैश्विक मामलों में संयुक्त राज्य अमेरिका की बदलती प्राथमिकताएँ।
- न्यूज़ीलैंड के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था से छोटे देशों को विशेष लाभ मिला है, क्योंकि यह सुनिश्चित करती है कि अंतर्राष्ट्रीय नियम छोटे और बड़े सभी देशों पर समान रूप से लागू हों।
उन्होंने भारत–न्यूज़ीलैंड संबंधों के तीन प्रमुख स्तंभ भी बताए—
- रक्षा सहयोग,
- सुरक्षा सहयोग,
- जन-से-जन (People-to-People) संबंध।
भारत–न्यूज़ीलैंड संबंध
1.कूटनीतिक संबंध
- भारत और न्यूज़ीलैंड ने 1952 में राजनयिक संबंध स्थापित किए।
- दोनों देश राष्ट्रमंडल (Commonwealth) के सदस्य हैं तथा लोकतांत्रिक मूल्यों और सुशासन के सिद्धांतों को साझा करते हैं।
- न्यूज़ीलैंड ने 2011 में अधिसूचित अपनी ‘ओपनिंग डोर्स टू इंडिया’ (Opening Doors to India) नीति में भारत को प्राथमिकता वाला देश घोषित किया, जिसकी 2015 में पुनः पुष्टि की गई।
2. आर्थिक सहयोग
- वर्तमान में न्यूज़ीलैंड, ओशिनिया क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
- 2024 में न्यूज़ीलैंड का आयात 47 अरब अमेरिकी डॉलर तथा निर्यात 42 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
3.सेवा व्यापार (Services Trade):
- वर्ष 2024 में न्यूज़ीलैंड को भारत का सेवा निर्यात 13% बढ़कर 634 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
इसके प्रमुख क्षेत्र हैं—
- यात्रा,
- सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी),
- व्यावसायिक सेवाएँ।
- 2024–25 में भारत का न्यूज़ीलैंड को निर्यात, न्यूज़ीलैंड से आयात की तुलना में अधिक रहा, जिससे भारत का सकारात्मक व्यापार संतुलन (Trade Balance) बना रहा।
- भारत और न्यूज़ीलैंड ने भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (IN–NZ FTA) पर हस्ताक्षर किए।

4.सीमा शुल्क सहयोग:
- वर्ष 2024 में न्यूज़ीलैंड और भारत ने सीमा शुल्क सहयोग व्यवस्था (Customs Cooperative Arrangement) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य व्यापारिक संबंधों को सुदृढ़ करना तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध के विरुद्ध सहयोग को बढ़ाना है।
5.प्रवासी भारतीय
- न्यूज़ीलैंड में 2,92,092 भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं।
- न्यूज़ीलैंड में अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थियों के सबसे बड़े स्रोत देशों में भारत दूसरा स्थान रखता है।
- वर्तमान में लगभग 8,000 भारतीय विद्यार्थी न्यूज़ीलैंड में सूचना प्रौद्योगिकी, आतिथ्य, विज्ञान, अभियांत्रिकी तथा वास्तुकला जैसे विभिन्न विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
- हिंदी, न्यूज़ीलैंड में पाँचवीं सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।
6.रक्षा सहयोग
- वर्ष 2025 में हस्ताक्षरित रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन (MoU) ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के लिए एक औपचारिक संस्थागत ढाँचा प्रदान किया।
- प्रथम भारत–न्यूज़ीलैंड रक्षा सामरिक संवाद वर्ष 2025 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया।
संबंधों में चुनौतियाँ
आव्रजन एवं मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से जुड़ी चिंताएँ
- न्यूज़ीलैंड की हालिया आव्रजन नीति पर हुई बहसों से भारत में चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं। आरोप हैं कि नए नियम भारतीय प्रवासियों को असंगत रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
- श्रमिक गतिशीलता (Labour Mobility) को लेकर मतभेद, व्यापक भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने में प्रमुख चुनौती बने हुए हैं।
डेयरी बाज़ार तक पहुँच का विवाद
- व्यापार वार्ताओं में डेयरी क्षेत्र सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
- न्यूज़ीलैंड भारत के डेयरी बाज़ार में अधिक पहुँच चाहता है, जबकि भारत लाखों छोटे डेयरी किसानों के हितों की रक्षा करता है।
खालिस्तान मुद्दा
- भारत ने न्यूज़ीलैंड में खालिस्तान समर्थक समूहों की गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की है।
- भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर आधारित न्यूज़ीलैंड के दृष्टिकोण में मतभेद हैं।
आगे की राह
- भौगोलिक रूप से दूर होने के बावजूद भारत और न्यूज़ीलैंड के हित लोकतंत्र, व्यापार, सुरक्षा तथा स्थिर हिंद-प्रशांत क्षेत्र के संदर्भ में समान हैं।
- ऐसे समय में, जब वैश्विक संस्थाएँ अनेक चुनौतियों का सामना कर रही हैं, दोनों देशों के बीच अधिक सशक्त साझेदारी अधिक समावेशी, न्यायसंगत तथा नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देने में सहायक हो सकती है।
Previous article
संक्षिप्त समाचार 08-07-2026