SIPRI ईयरबुक 2026

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी; GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध

संदर्भ

  • स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (SIPRI) ईयरबुक 2026 के अनुसार, भारत ने वर्ष 2025 के दौरान अपने परमाणु शस्त्रागार का सीमित विस्तार किया है।

प्रमुख बिंदु

  • परमाणु हथियारों पर बढ़ती निर्भरता: परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र अपनी सुरक्षा रणनीतियों में परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को अधिक महत्व दे रहे हैं।
    • यह प्रवृत्ति परमाणु हथियारों की भूमिका एवं संख्या को कम करने के लिए किए गए दशकों पुराने प्रयासों के विपरीत है।
  • परमाणु शस्त्रागार का विस्तार एवं आधुनिकीकरण: सभी नौ परमाणु हथियार संपन्न देशों—संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया तथा इज़राइल—ने वर्ष 2025 में अपने आधुनिकीकरण कार्यक्रम जारी रखे तथा नई परमाणु-सक्षम प्रणालियों की तैनाती की।
  • वैश्विक परमाणु भंडार: जनवरी 2026 तक विश्व में अनुमानित रूप से 12,187 परमाणु वारहेड उपस्थित थे।
    • रूस एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के पास संयुक्त रूप से विश्व के लगभग 83% परमाणु वारहेड हैं।
  • हथियार नियंत्रण एवं निरस्त्रीकरण में गिरावट: शीत युद्ध की समाप्ति के पश्चात सेवानिवृत्त परमाणु वारहेडों को नष्ट करने की प्रक्रिया सामान्यतः नए हथियारों की तैनाती से अधिक रही है।
    • SIPRI ने चेतावनी दी है कि यह प्रवृत्ति अब उलट सकती है, क्योंकि हथियारों के विघटन की गति धीमी हो रही है तथा नए हथियारों की तैनाती तीव्र हो रही है।
  • कमजोर होता हथियार नियंत्रण तंत्र: प्रमुख परमाणु शक्तियों के बीच रणनीतिक संवाद में निरंतर कमी आ रही है।
  • बढ़ते हुए परमाणु संघर्ष जोखिम: मिसाइल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर क्षमताओं तथा अंतरिक्ष-आधारित प्रणालियों में प्रगति ने प्रतिरोधक रणनीतियों को अधिक जटिल बना दिया है।
    • SIPRI के अनुसार, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव गलत आकलन के कारण परमाणु संघर्ष की आशंका को बढ़ा सकते हैं।
  • भारत से संबंधित प्रमुख अवलोकन: भारत के परमाणु वारहेडों की अनुमानित संख्या बढ़कर 190 हो गई, जो विगत वर्ष 180 थी।
    • भारत लंबी दूरी की मिसाइलों, एमआईआरवी (MIRV) प्रौद्योगिकी तथा समुद्र-आधारित परमाणु क्षमता को सुदृढ़ करके अपनी प्रतिरोधक क्षमता का आधुनिकीकरण कर रहा है।
    • भारत की सामरिक योजना पर चीन की बढ़ती सैन्य क्षमताओं का प्रभाव बढ़ रहा है, जबकि भारत-पाकिस्तान परमाणु प्रतिद्वंद्विता भी महत्त्वपूर्ण बनी हुई है।
  • सैन्य व्यय: भारत वर्ष 2025 में विश्व का पाँचवाँ सबसे बड़ा सैन्य व्ययकर्ता बना रहा।
    • भारत का सैन्य व्यय 92.1 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो विगत वर्ष की तुलना में 8.9% अधिक है।
  • हथियारों का आयात: वर्ष 2021-25 की अवधि में भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा प्रमुख हथियार आयातक बना रहा, जिसका वैश्विक हथियार आयात में 8.2% योगदान था।

SIPRI के बारे में

  • स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (SIPRI) एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्थान है, जो संघर्ष, आयुध, हथियार नियंत्रण एवं निरस्त्रीकरण से संबंधित अनुसंधान कार्य करता है।
    • इसका मुख्यालय स्टॉकहोम (स्वीडन) में स्थित है।
  • स्थापना: इसकी स्थापना वर्ष 1966 में की गई थी।
    • यह संस्थान खुली स्रोत सामग्री के आधार पर नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, मीडिया तथा आम जनता को आँकड़े, विश्लेषण एवं नीतिगत सुझाव उपलब्ध कराता है।
  • वित्तपोषण: SIPRI की स्थापना स्वीडिश संसद के निर्णय के आधार पर की गई थी तथा इसके वित्तपोषण का एक बड़ा भाग स्वीडिश सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाले वार्षिक अनुदान से प्राप्त होता है।
    • इसके अतिरिक्त, यह संस्थान अपने शोध कार्यों के संचालन हेतु अन्य संगठनों से भी वित्तीय सहायता प्राप्त करता है।

परमाणु निरस्त्रीकरण

  • परमाणु निरस्त्रीकरण से आशय हथियारों, विशेषकर आक्रामक हथियारों, को एकतरफा अथवा पारस्परिक रूप से समाप्त करने की प्रक्रिया से है।
  • यह या तो हथियारों की संख्या में कमी अथवा संपूर्ण हथियार श्रेणियों के उन्मूलन को संदर्भित कर सकता है।

परमाणु निरस्त्रीकरण से संबंधित प्रमुख संधियाँ

  • परमाणु अप्रसार संधि (NPT): इस पर वर्ष 1968 में हस्ताक्षर किए गए तथा यह 1970 में प्रभावी हुई।
    • इसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना तथा परमाणु निरस्त्रीकरण को प्रोत्साहन देना है।
    • यह विश्व को दो श्रेणियों में विभाजित करती है—
      • परमाणु हथियार संपन्न राज्य (NWS), जिन्हें संधि के हस्ताक्षर के समय परमाणु हथियार रखने वाला माना गया।
      • गैर-परमाणु हथियार राज्य (NNWS), जो परमाणु हथियार विकसित या प्राप्त नहीं करने पर सहमत होते हैं।
    • यह संधि परमाणु हथियार संपन्न राज्यों को सद्भावना के साथ निरस्त्रीकरण वार्ताएँ आगे बढ़ाने के लिए बाध्य करती है।
    • भारत, इज़राइल, उत्तर कोरिया तथा पाकिस्तान ने NPT पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
  • परमाणु हथियार निषेध संधि (TPNW): इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2017 में अपनाया गया तथा 2018 में हस्ताक्षर हेतु खोला गया।
    • इसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के विकास, परीक्षण, उत्पादन, भंडारण, तैनाती, हस्तांतरण, उपयोग तथा उपयोग की धमकी पर प्रतिबंध लगाना है।
    • यह परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, यद्यपि किसी भी परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
  • व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT): इसे वर्ष 1996 में हस्ताक्षर हेतु खोला गया।
    • इसका उद्देश्य नागरिक एवं सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए सभी प्रकार के परमाणु विस्फोटों पर प्रतिबंध लगाना है।
    • यद्यपि इस पर 185 देशों ने हस्ताक्षर तथा 170 देशों ने अनुमोदन किया है, फिर भी यह अभी प्रभावी नहीं हुई है क्योंकि इसके क्रियान्वयन के लिए परमाणु हथियार संपन्न देशों द्वारा अनुमोदन आवश्यक है।
  • बाह्य अंतरिक्ष संधि : यह बहुपक्षीय संधि वर्ष 1967 में प्रभावी हुई।
    • यह अंतरिक्ष में व्यापक विनाश के हथियारों की तैनाती पर प्रतिबंध लगाती है।
    • जिन नौ देशों के पास परमाणु हथियार होने का अनुमान है, वे सभी इस संधि के पक्षकार हैं।

भारत का परमाणु हथियार कार्यक्रम

  • स्माइलिंग बुद्ध , 1974: भारत ने वर्ष 1974 में अपना प्रथम परमाणु परीक्षण ‘स्माइलिंग बुद्ध’ नामक कोड-नाम के अंतर्गत किया।
    • इसके पश्चात भारत ने भूमि-आधारित, समुद्र-आधारित तथा वायु-आधारित वितरण प्रणालियों से युक्त परमाणु त्रय (Nuclear Triad) विकसित किया।
  • ऑपरेशन शक्ति , 1998: भारत ने वर्ष 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षणों की एक श्रृंखला संचालित की, जिसे ‘ऑपरेशन शक्ति’ नाम दिया गया।
    • यह भारत के औपचारिक रूप से परमाणु हथियार संपन्न देशों के समूह में प्रवेश का प्रतीक था।

परमाणु हथियारों के प्रति भारत की नीति

  • प्रथम प्रयोग न करने की नीति : भारत ने ‘प्रथम प्रयोग न करने’ की घोषित नीति अपनाई है।
    • इसके अनुसार भारत युद्ध के साधन के रूप में परमाणु हथियारों का प्रयोग तब तक नहीं करेगा, जब तक उस पर पहले परमाणु हथियारों से हमला न किया जाए।
  • गैर-परमाणु हथियार संपन्न राज्यों के विरुद्ध प्रयोग नहीं: भारत ने यह प्रतिबद्धता व्यक्त की है कि वह गैर-परमाणु हथियार संपन्न राज्यों के विरुद्ध परमाणु हथियारों का उपयोग नहीं करेगा।
  • केवल प्रतिघात की नीति : भारत के परमाणु सिद्धांत के अनुसार परमाणु हथियार केवल प्रतिरोधक उद्देश्य के लिए हैं तथा भारत ‘केवल प्रतिघात’ की नीति का पालन करेगा।
  • बहुपक्षीय विधिक व्यवस्थाओं के प्रति प्रतिबद्धता: भारत इन प्रतिबद्धताओं को बहुपक्षीय कानूनी व्यवस्थाओं में परिवर्तित करने के लिए तैयार है।

Source: SIPRI

 

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