संक्षिप्त समाचार 09-06-2026

प्राइड मंथ और भारत में LGBTQ+ अधिकारों का विकास

पाठ्यक्रम: GS1/समाज; GS2/सामाजिक न्याय

संदर्भ

  • जून माह को विश्वभर में प्राइड मंथ के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य LGBTQ+ समुदाय का सम्मान करना तथा समानता, समावेशन और मानवाधिकारों से संबंधित मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

LGBTQ+ समुदाय के बारे में

  • LGBTQ+ एक व्यापक शब्द है, जिसमें लेस्बियन , गे, बाइसेक्सुअल , ट्रांसजेंडर  तथा क्वियर व्यक्तियों को सम्मिलित किया जाता है। इसमें प्रयुक्त ‘+’ चिन्ह उन अन्य लैंगिक एवं यौन पहचानों का प्रतिनिधित्व करता है जो इन अक्षरों में विशेष रूप से सम्मिलित  नहीं हैं।
  • उल्लेखनीय है कि LGBTQ+ समुदाय के व्यक्ति प्रायः पारंपरिक लैंगिक भूमिकाओं एवं अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं होते। इनमें ऐसे लोग भी सम्मिलित  हैं जिनकी शारीरिक लैंगिक विशेषताएँ सामान्य पुरुष या महिला द्विआधारी वर्गीकरण में नहीं आतीं तथा जिनकी लैंगिक पहचान जन्म के समय निर्धारित लिंग से भिन्न हो सकती है।

प्राइड मंथ क्या है?

  • प्राइड मंथ की उत्पत्ति वर्ष 1969 में न्यूयॉर्क शहर में हुए स्टोनवॉल विद्रोह से मानी जाती है।
  • यह LGBTQ+ समुदाय के अधिकारों के लिए हुए संघर्ष का स्मरण करने तथा विविधता एवं समावेशन का उत्सव मनाने का अवसर है।
  • भारत में 2 जुलाई 1999 को कोलकाता में आयोजित ‘फ्रेंडशिप वॉक’ को देश के प्राइड परेड आंदोलन का अग्रदूत माना जाता है।

LGBTQ+ अधिकारों पर भारत की स्थिति

  • जनगणना 2011 के अनुसार भारत में 4.87 लाख व्यक्तियों ने लिंग श्रेणी में “अन्य (Other)” विकल्प का चयन किया था।
  • ट्रांसजेंडर अधिकार: NALSA बनाम भारत संघ (2014) के निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने व्यक्ति के स्वयं अपनी लैंगिक पहचान निर्धारित करने के अधिकार को मान्यता प्रदान की।
    • इस निर्णय ने ट्रांसजेंडर समुदाय को “तृतीय लिंग” के रूप में स्वीकार करते हुए उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की।
  • अपराधमुक्ति : नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ (2018) के ऐतिहासिक निर्णय में सहमति से स्थापित समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को आंशिक रूप से निरस्त किया गया।
  • संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 14 – समानता का अधिकार
    • अनुच्छेद 15 – लिंग के आधार पर भेदभाव का निषेध
    • अनुच्छेद 21 – जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
  • विधायी प्रावधान: ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 ट्रांसजेंडर पहचान को विधिक मान्यता प्रदान करता है।

स्रोत: IE


ज़ोजिला सुरंग 

पाठ्यक्रम: GS1/भूगोल

संदर्भ

  • जून 2026 में ज़ोजिला सुरंग ने अपनी अंतिम ब्रेकथ्रू प्राप्त कर ली, जो कश्मीर और लद्दाख के बीच वर्षभर संपर्क स्थापित करने के भारत के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

ज़ोजिला सुरंग के बारे में

  • ज़ोजिला सुरंग 13.14 किलोमीटर लंबी, एकल-ट्यूब , द्वि-दिशात्मक सड़क सुरंग है, जिसका निर्माण हिमालय में स्थित ज़ोजिला दर्रे के नीचे किया जा रहा है।
  • यह लगभग 11,578 फीट की ऊँचाई पर स्थित है तथा कश्मीर के बालटाल को लद्दाख के मीनामार्ग से जोड़ती है।
  • सुरंग को दो-लेन वाली घोड़े की नाल संरचना के रूप में डिजाइन किया गया है।
  • यह इतनी अधिक ऊँचाई पर निर्मित विश्व की सबसे लंबी सड़क सुरंगों में से एक होगी।
  • परियोजना का क्रियान्वयन मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड (MEIL) द्वारा किया जा रहा है।
  • निर्माण तकनीक: सुरंग का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) के माध्यम से किया गया है। इस पद्धति में सम्मिलित  हैं—
    • क्रमिक उत्खनन 
    • शॉटक्रीट एवं रॉक बोल्टिंग जैसे त्वरित सहायक उपाय
    • सतत भू-तकनीकी निगरानी 
    • यह तकनीक इंजीनियरों को सुरंग निर्माण के दौरान बदलती भूगर्भीय परिस्थितियों के अनुसार लचीले ढंग से कार्य करने में सक्षम बनाती है।

सामरिक महत्त्व

  • यह कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच वर्षभर संपर्क सुनिश्चित करेगी।
  • इससे बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण शीतकाल में बंद रहने वाले ज़ोजिला दर्रे पर निर्भरता कम होगी।
  • वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट क्षेत्रों में सैन्य रसद और सैनिकों की आवाजाही में सुधार होगा।

स्रोत: TH

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA)

पाठ्यक्रम: GS2/सरकारी पहलें

संदर्भ

  • प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) की 10वीं वर्षगांठ मनाई गई।

PMSMA के बारे में

  • यह अभियान 9 जून 2016 को प्रारंभ किया गया था। इसके अंतर्गत प्रत्येक माह की 9 तारीख को निर्धारित सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं, विशेषकर गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में, निःशुल्क एवं व्यापक प्रसवपूर्व देखभाल प्रदान की जाती है।
  • प्रमुख सेवाएँ: PMSMA के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को निम्नलिखित सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं—
    • चिकित्सीय परीक्षण एवं जोखिम मूल्यांकन
    • रक्त एवं मूत्र परीक्षण
    • अल्ट्रासोनोग्राफी
    • आवश्यक दवाएँ एवं पूरक आहार
    • पोषण, सुरक्षित गर्भावस्था एवं प्रसव की तैयारी संबंधी परामर्श
  • डॉक्टर स्वयंसेवी प्रणाली : यह कार्यक्रम निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों, जैसे—
    • प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ 
    • रेडियोलॉजिस्ट
    • चिकित्सक, को प्रत्येक माह की 9 तारीख को स्वैच्छिक रूप से प्रसवपूर्व देखभाल सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
  • विस्तारित PMSMA : वर्ष 2022 में सरकार ने विस्तारित PMSMA (e-PMSMA) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की बेहतर निगरानी एवं अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
  • उपलब्धियाँ: भारत का मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) वर्ष 2014–16 में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 130 से घटकर वर्ष 2022–24 में 87 हो गया।
    • यह पहल भारत को वर्ष 2030 तक प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर मातृ मृत्यु दर को 70 से कम करने के सतत विकास लक्ष्य (SDG) की प्राप्ति में सहायता प्रदान कर रही है।

अन्य मातृ स्वास्थ्य पहलों के साथ समन्वित कार्य

  • PMSMA अकेले कार्य नहीं करता, बल्कि यह सरकार द्वारा संचालित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के व्यापक तंत्र का हिस्सा है।
    • जननी सुरक्षा योजना (JSY): संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करती है।
      • मार्च 2025 तक 2014-15 से अधिक 11.96 करोड़ महिलाओं को लाभान्वित कर चुकी है।
    • जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK): गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है।
      • 2014-15 से अब तक 18.05 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई है।
    • सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (SUMAN): गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करता है।
      • देशभर में 99,290 से अधिक स्वास्थ्य सुविधाओं के नेटवर्क के माध्यम से कार्यरत है।
    • अन्य प्रमुख पहलें: पोषण अभियान – मातृ एवं शिशु पोषण में सुधार हेतु।
      • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) – मातृत्व लाभ प्रदान करने हेतु।
      • लेबर रूम क्वालिटी इम्प्रूवमेंट इनिशिएटिव (LaQshya) – प्रसव कक्षों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने हेतु।
  • इन सभी कार्यक्रमों के संयुक्त प्रयास से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के लिए एक व्यापक और सुदृढ़ ढाँचा विकसित हुआ है।

स्रोत: PIB

निवारक निरोध

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन

संदर्भ

  • हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निवारक निरोध संबंधी कानूनों के कथित दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की है।

निवारक निरोध क्या है?

  • निवारक निरोध से तात्पर्य किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के हिरासत में रखने से है, ताकि उसे ऐसे कार्य करने से रोका जा सके जो सार्वजनिक व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा अथवा राज्य के अन्य महत्वपूर्ण हितों के लिए खतरा उत्पन्न कर सकते हों।
  • यह दंडात्मक निरोध से भिन्न है, जो किसी न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि  के पश्चात दंड के रूप में लगाया जाता है। निवारक निरोध इस आशंका पर आधारित होता है कि कोई व्यक्ति ऐसी गतिविधियों में संलग्न हो सकता है जो निम्नलिखित के लिए हानिकारक हों—
    • राज्य की सुरक्षा 
    • भारत की रक्षा 
    • लोक व्यवस्था 
    • विदेश संबंध आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति तथा रखरखाव 
  • संविधान ने निवारक निरोध संबंधी कानून बनाने की विधायी शक्ति को संघ और राज्यों के बीच विभाजित किया है।

संवैधानिक प्रावधान

  • संविधान का अनुच्छेद 22(3) निवारक निरोध संबंधी कानूनों का प्रावधान करता है, जबकि अनुच्छेद 22(4) इस शक्ति के दुरुपयोग को रोकने हेतु निम्नलिखित सुरक्षा उपाय प्रदान करता है—
    • कोई भी निवारक निरोध कानून किसी व्यक्ति को तीन माह से अधिक अवधि तक निरुद्ध रखने की अनुमति नहीं दे सकता।
    • तीन माह से अधिक अवधि तक निरोध जारी रखने के लिए सलाहकार बोर्ड की स्वीकृति आवश्यक होती है।
  • 44वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा सलाहकार बोर्ड की राय प्राप्त किए बिना निरोध की अवधि को तीन माह से घटाकर दो माह कर दिया गया था। तथापि, यह प्रावधान अभी तक लागू नहीं किया गया है, इसलिए वर्तमान में तीन माह की मूल अवधि ही प्रभावी है।

स्रोत: IE


प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 

पाठ्यक्रम: GS2/शासन

संदर्भ

  • केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के अंतर्गत परिवारों को प्रदान किए जाने वाले सब्सिडी युक्त एलपीजी सिलेंडरों की संख्या नौ से घटाकर चार कर दी गई है।

परिचय

  • नवीनतम जानकारी के अनुसार, उज्ज्वला लाभार्थियों को प्रति वर्ष केवल प्रथम चार सिलेंडरों पर ₹300 प्रति सिलेंडर की सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जो उनकी औसत वार्षिक खपत (चार से पाँच सिलेंडर) को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की गई है।
  • घरेलू एलपीजी गैस की कीमतों में प्रति सिलेंडर ₹29 की वृद्धि की गई है।
  • यह तीन महीनों में दूसरी मूल्य वृद्धि है, क्योंकि सरकारी तेल विपणन कंपनियाँ वैश्विक ऊर्जा लागत में वृद्धि से प्रभावित हैं।
  • उज्ज्वला योजना के लाभार्थी वर्तमान में 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर के लिए प्रभावी रूप से ₹642 का भुगतान करते हैं।
  • वहीं दिल्ली में सामान्य उपभोक्ता को यही सिलेंडर ₹942 में उपलब्ध है।
  • जबकि इसकी वास्तविक आपूर्ति लागत बढ़कर ₹1,600 से अधिक हो चुकी है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के बारे में

  • भारत सरकार ने वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) प्रारंभ की।
  • उद्देश्य: इस योजना का उद्देश्य कोयला, लकड़ी एवं अन्य पारंपरिक ईंधनों के स्थान पर स्वच्छ एलपीजी ईंधन को बढ़ावा देना है, ताकि घरेलू धुएँ से होने वाले प्रदूषण को कम कर महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।
  • पात्रता: प्रारंभ में एलपीजी कनेक्शन केवल उन महिलाओं को प्रदान किए गए जो—
    • गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवनयापन करने वाले परिवारों से संबंधित थीं;
    • तथा जिनकी पहचान सामाजिक-आर्थिक एवं जातीय जनगणना (SECC), 2011 के माध्यम से की गई थी।
  • PMUY 2.0 (वर्ष 2021): PMUY 2.0 के अंतर्गत निम्नलिखित वर्गों को भी पात्रता प्रदान की गई—
    • प्रवासी परिवार 
    • अनुसूचित जातियाँ (SCs)
    • अनुसूचित जनजातियाँ (STs)
    • अत्यंत पिछड़ा वर्ग (MBCs)
    • प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी
    • वनवासी समुदाय
    • अन्य गरीब परिवार जो पूर्व में योजना से वंचित रह गए थे
  • योजना के अंतर्गत लाभ: पूर्णतः निःशुल्क एलपीजी कनेक्शन
    • प्रथम रिफिल (Refill)
    • गैस चूल्हा (Stove)
  • प्रगति: योजना का प्रारंभिक लक्ष्य गरीब परिवारों को 8 करोड़ निःशुल्क एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराना था।
    • यह लक्ष्य सितंबर 2019 में प्राप्त कर लिया गया।
    • अधिक परिवारों तक पहुँचने हेतु PMUY 2.0 वर्ष 2021 में प्रारंभ की गई।
    • वर्ष 2022 तक इसके अंतर्गत अतिरिक्त 1.6 करोड़ कनेक्शन वितरित किए गए।
  • उपलब्धियाँ: योजना के अंतर्गत 10 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं।
    • भारत में एलपीजी कवरेज लगभग सार्वभौमिक घरेलू कवरेज के स्तर तक पहुँच गई है।
    • इससे स्वास्थ्य परिणामों में सुधार हुआ है तथा जैव ईंधनों पर निर्भरता में कमी आई है।

स्रोत: LM


वीरता पुरस्कार 

पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा

संदर्भ

  • राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह के दौरान सशस्त्र बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तथा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस के कर्मियों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए।

परिचय

  • राष्ट्रपति ने कुल 7 कीर्ति चक्र, 15 वीर चक्र तथा 29 शौर्य चक्र प्रदान किए।
  • भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान  के लिए चयनित चार गगनयात्रियों में से एक ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर को उनके अदम्य साहस एवं वीरता के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।

वीरता पुरस्कारों के बारे में

  • वीरता पुरस्कार भारत सरकार द्वारा सशस्त्र बलों, अर्द्धसैनिक बलों तथा नागरिकों द्वारा प्रदर्शित असाधारण साहस, बलिदान एवं वीरता को सम्मानित करने हेतु प्रदान किए जाते हैं।
  • इन पुरस्कारों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है—
    •  युद्धकालीन वीरता पुरस्कार (शत्रु के समक्ष प्रदर्शित वीरता हेतु)
    • शांतिकालीन वीरता पुरस्कार
  • प्रशासन: सशस्त्र बलों के लिए: रक्षा मंत्रालय
    • पुलिस बल एवं नागरिकों के लिए: गृह मंत्रालय
    • पुरस्कार प्रदान करने वाला प्राधिकारी
    • भारत के राष्ट्रपति
  • घोषणा: इन पुरस्कारों की घोषणा प्रत्येक वर्ष दो अवसरों पर की जाती है—
    • गणतंत्र दिवस
    • स्वतंत्रता दिवस
  • युद्धकालीन वीरता पुरस्कार: परम वीर चक्र (PVC)
    • महावीर चक्र (MVC)
    • वीर चक्र (VrC)
    • इन पुरस्कारों की स्थापना 26 जनवरी 1950 को की गई थी तथा इन्हें 15 अगस्त 1947 से प्रभावी माना गया।
  • शांतिकालीन वीरता पुरस्कार: अशोक चक्र (AC)
    • कीर्ति चक्र (KC)
    • शौर्य चक्र (SC)
    • भारत सरकार ने 4 जनवरी 1952 को इन तीन पुरस्कारों की स्थापना की तथा इन्हें भी 15 अगस्त 1947 से प्रभावी माना गया।
    • प्रारंभ में इनके नाम निम्नलिखित थे—
      • अशोक चक्र श्रेणी-I
      • अशोक चक्र श्रेणी-II
      • अशोक चक्र श्रेणी-III
  • वरीयता क्रम : परम वीर चक्र (PVC)
    • अशोक चक्र (AC)
    • महावीर चक्र (MVC)
    • कीर्ति चक्र (KC)
    • वीर चक्र (VrC)
    • शौर्य चक्र (SC)
    • उपरोक्त सभी छह पुरस्कार मरणोपरांत (Posthumously) भी प्रदान किए जा सकते हैं।

स्रोत: AIR

 तेजस

पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा

संदर्भ

  • रक्षा मंत्री ने हाल ही में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की विभिन्न प्रमुख प्रगतिशील परियोजनाओं की समीक्षा की, जिसमें हल्के लड़ाकू विमान (LCA) तेजस Mk-1A की आपूर्ति में हो रही देरी पर भी चर्चा की गई।

परिचय

  • रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए तेजस मार्क-1A संस्करण के 97 हल्के लड़ाकू विमानों की खरीद हेतु हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • इस खरीद का उद्देश्य शीघ्र ही सेवा से हटाए जाने वाले पुराने मिग-21 (MiG-21) लड़ाकू विमानों के बेड़े का प्रतिस्थापन करना है।
  • भारतीय वायु सेना के पास स्वीकृत 42.5 स्क्वाड्रनों की तुलना में वर्तमान में केवल 29 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, इसलिए तेजस Mk-1A का सम्मिलित  किया जाना उसकी परिचालन आवश्यकताओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

तेजस Mk-1A

  • हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित तेजस अपने वर्ग का विश्व का सबसे हल्का लड़ाकू विमान है।
  • यह 4.5वीं पीढ़ी का, सभी मौसमों में संचालन योग्य तथा बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है।
  • इस विमान को एक बहुउद्देशीय प्लेटफ़ॉर्म के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जो आक्रामक वायु सहायता , निकटवर्ती हवाई युद्ध तथा भूमि-आधारित हमलों जैसी भूमिकाओं का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकता है।
  • LCA Mk-1A, तेजस का अब तक का सबसे उन्नत संस्करण है।
  • प्रमुख विशेषताएँ: यह विमान निम्नलिखित अत्याधुनिक प्रणालियों से सुसज्जित है—
  • AESA रडार (एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार)
  • इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली (EW Suite), जिसमें—
    • रडार चेतावनी प्रणाली 
    • स्व-सुरक्षा जैमिंग प्रणाली 
  • डिजिटल मैप जनरेटर (DMG)
  • स्मार्ट मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले (SMFD)
  • कंबाइंड इंटरोगेटर एंड ट्रांसपोंडर (CIT)
  • उन्नत रेडियो अल्टीमीटर 
  • अन्य आधुनिक एवं उन्नत तकनीकी सुविधाएँ

स्रोत: TH


शाकनाशी-सहिष्णु सरसों संकर

पाठ्यक्रम: GS3/कृषि

संदर्भ

भारत वर्ष 2026–27 के रबी मौसम से इमिडाज़ोलिनोन-प्रतिरोधी सरसों संकरों की बड़े पैमाने पर कृषि  प्रारंभ करने जा रहा है।

परिचय

  • इन संकर किस्मों को ओरोबैंचे नामक परजीवी खरपतवार के नियंत्रण के लिए विकसित किया गया है।
  • यह खरपतवार सरसों के पौधों की जड़ों से चिपककर उनसे जल एवं पोषक तत्व प्राप्त करता है।
  • इसके परिणामस्वरूप पौधों की वृद्धि एवं उत्पादकता में कमी आती है।
    • चूँकि इस परजीवी का अधिकांश भाग भूमि के नीचे रहता है, इसलिए इसे हाथ से हटाना कठिन एवं प्रायः अप्रभावी होता है।

IMI-प्रतिरोधी सरसों संकर क्या हैं?

  • ये ऐसी सरसों की संकर किस्में हैं जो इमिडाज़ोलिनोन (IMI) शाकनाशियों के प्रति प्रतिरोधी होती हैं।
  • इनका विकास आनुवंशिक रूपांतरण के माध्यम से नहीं, बल्कि उत्परिवर्तन प्रजनन तकनीक द्वारा किया गया है।
  • उत्परिवर्तन प्रजनन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें स्वाभाविक रूप से उत्पन्न आनुवंशिक परिवर्तनों की पहचान कर उन्हें संरक्षित एवं चयनित किया जाता है, ताकि वांछित गुणों वाली फसल किस्में विकसित की जा सकें।

यह तकनीक कैसे कार्य करती है?

  • यह तकनीक एसीटोलैक्टेट सिंथेज़ (ALS) नामक एंजाइम पर आधारित है, जो पौधों की वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक होता है।
  • सामान्य स्थिति में: IMI शाकनाशी ALS एंजाइम की क्रिया को अवरुद्ध कर देते हैं।
    • परिणामस्वरूप संवेदनशील पौधे एवं खरपतवार नष्ट हो जाते हैं।
  • नई संकर किस्मों में :ALS जीन में एक विशेष उत्परिवर्तन उपस्थित होता है।
    • यह उत्परिवर्तन ALS एंजाइम को शाकनाशी के प्रभाव से प्रतिरोधी बना देता है।
    • फलस्वरूप किसान पूरे खेत में IMI शाकनाशी का छिड़काव कर सकते हैं।
    • इससे खरपतवार नष्ट हो जाते हैं, जबकि सरसों की फसल सुरक्षित बनी रहती है।
  • महत्त्व: परजीवी खरपतवारों का प्रभावी नियंत्रण।
    • फसल उत्पादकता में वृद्धि।
    • श्रम लागत में कमी।
    • खरपतवार प्रबंधन को अधिक सरल एवं प्रभावी बनाना।

स्रोत: TH

 

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