संयुक्त राष्ट्र ने नए विश्व मानचित्र को अपनाने के लिए मतदान किया
पाठ्यक्रम: जीएस-1/भूगोल; जीएस-2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध
सन्दर्भ
- संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पारंपरिक विश्व मानचित्र को ऐसे मानचित्र से बदलने के लिए मतदान किया है, जो अफ्रीका के आकार को अधिक सटीक रूप से दर्शाता है।
नए मानचित्र की मांग का कारण क्या था?
- मर्केटर मानचित्र, जो 16वीं शताब्दी से व्यापक रूप से उपयोग में है, की इस बात के लिए आलोचना की गई है कि यह अफ्रीका को ग्रीनलैंड के लगभग समान आकार का दिखाता है, जबकि वास्तव में अफ्रीका का भू-भाग ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है।
- पहली बार वर्ष 1569 में तैयार किया गया यह मानचित्र यूरोपीय खोजकर्ताओं को विश्व भर में नौवहन में सहायता करने के लिए बनाया गया था। मानचित्र का विकृतिकरण इस तथ्य पर आधारित है कि ग्लोब की सतह को द्वि-आयामी मानचित्र पर प्रदर्शित नहीं किया जा सकता।
- मर्केटर मानचित्र में पृथ्वी की वक्रता को समायोजित करने के लिए भूमध्य रेखा के पास के देशों को उनके वास्तविक आकार से छोटा और ध्रुवों के पास के देशों को उनके वास्तविक आकार से बड़ा दिखाया जाता है।
- इस विकृति को दूर करने के लिए वर्ष 2018 में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन (Equal Earth Projection) विकसित किया गया था। हाल ही में टोगो द्वारा अफ्रीकी देशों के समर्थन से इस मानचित्र को संयुक्त राष्ट्र के समक्ष रखा गया। इसके पक्ष में 164 वोट मिले, जिसमें भारत भी शामिल था, जबकि अमेरिका ने इसके विरुद्ध मतदान किया और छह देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया।
स्रोत: HT
वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम
पाठ्यक्रम: जीएस-2/शासन; जीएस-3/अर्थव्यवस्था
चर्चा में क्यों?
- वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) बुनियादी ढाँचे के विकास, आजीविका में सुधार और सरकारी योजनाओं तक पहुँच प्रदान करके सीमावर्ती समुदायों को भारत के विकास में सक्रिय भागीदार बना रहा है।
वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम (VVP)
- इसे वर्ष 2023 में शुरू किया गया था और इसका उद्देश्य भारत की सीमा पर स्थित लक्षित गाँवों के एकीकृत विकास में तेजी लाना है।
- इसका उद्देश्य सक्रिय, सुरक्षित और समृद्ध सीमावर्ती कस्बों की स्थापना करना है तथा सीमावर्ती लोगों को सीमा की सुरक्षा करने वाली सेनाओं की आँख और कान के रूप में देखता है।
- इसे ग्राम कार्य योजनाओं (Village Action Plans) के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक सीमा, राज्य और गाँव की आवश्यकताओं के अनुरूप हस्तक्षेप किए जाते हैं।
- यह वर्तमान सरकारी परियोजनाओं का अधिकतम कवरेज सुनिश्चित करने के लिए अभिसरण दृष्टिकोण (Convergence Approach) पर आधारित है, जबकि PMGSY-IV के तहत सभी मौसमों में सड़क संपर्क प्रदान किया जाता है।
- राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और सीमा सुरक्षा बलों के साथ समन्वय के लिए नोडल मंत्रालय गृह मंत्रालय (MHA) है।
चरण
- सरकार वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम को दो चरणों में लागू कर रही है, जो मिलकर भारत की पूरी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा को कवर करते हैं।
- VVP-I उत्तरी सीमा के साथ स्थित गाँवों को कवर करता है।
- VVP-I एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसे राज्यों के साथ मिलकर लागू किया जाता है।
- VVP-II इसी दृष्टिकोण को अन्य अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमाओं तक विस्तारित करता है।
- VVP-II एक केंद्रीय क्षेत्र योजना (Central Sector Scheme) है, जिसका पूरा वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।

स्रोत: PIB
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग
पाठ्यक्रम: जीएस-2/शासन
चर्चा में क्यों?
- सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की है।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK)
- इसे राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अधिनियम, 1993 के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में अगस्त 1994 में प्रारंभ में तीन वर्ष की अवधि के लिए गठित किया गया था।
- वर्तमान में यह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत एक गैर-वैधानिक निकाय के रूप में जारी है।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के कार्य और अधिदेश
- यह सफाई कर्मचारियों की देखभाल, गरिमा, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक बेहतरी के लिए स्थापित किया गया है।
- यह असमानताओं को दूर करने के लिए सरकारी कार्यक्रमों को बढ़ावा देता है, पुनर्वास योजनाओं की जाँच करता है, शिकायतों की जाँच करता है, कल्याणकारी नीतियों के कार्यान्वयन न होने पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लेता है तथा कार्य परिस्थितियों, स्वास्थ्य, सुरक्षा और वेतन की निगरानी करता है।
- यह सफाई कर्मचारियों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं पर केंद्र और राज्य सरकारों को रिपोर्ट और सिफारिशें भी प्रस्तुत करता है।
- यह हाथ से मैला उठाने के रोजगार का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के कार्यान्वयन की निगरानी करता है।
- यह शिकायतों और उल्लंघनों की जाँच करता है, प्रभावी कार्यान्वयन के संबंध में सरकारों को सलाह देता है और अनुपालन न होने पर स्वतः संज्ञान लेता है।
स्रोत: PIB
आपातकालीन ऋण लाइन गारंटी योजना (ECLGS) 5.0
पाठ्यक्रम:जीएस-2/शासन/जीएस-3/
अर्थव्यवस्था
सन्दर्भ
- आपातकालीन ऋण लाइन गारंटी योजना (ECLGS) 5.0 बाहरी व्यवधानों से प्रभावित व्यवसायों को लक्षित ऋण गारंटी सहायता प्रदान करती है।
परिचय
- ECLGS को 2020 में आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत COVID-19 महामारी के कारण उत्पन्न वित्तीय तनाव से उबरने में व्यवसायों की सहायता के लिए शुरू किया गया था।
- ECLGS 1.0 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs), व्यावसायिक उद्यम, मुद्रा ऋण लेने वाले और व्यक्तिगत व्यवसाय ऋण शामिल थे।
- फरवरी 2020 तक जिन उधारकर्ताओं का बकाया ऋण ₹50 करोड़ से अधिक नहीं था और जिनके ऋण की अवधि 60 दिनों तक अतिदेय थी, वे पात्र थे।
- ECLGS 2.0 ने कवरेज का विस्तार कामथ समिति द्वारा पहचाने गए 26 तनावग्रस्त क्षेत्रों और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र तक किया। इसमें फरवरी 2020 तक ₹50 करोड़ से अधिक और ₹500 करोड़ तक का बकाया ऋण रखने वाले तथा 60 दिनों तक अतिदेय उधारकर्ताओं को शामिल किया गया।
- ECLGS 3.0 ने आतिथ्य, यात्रा एवं पर्यटन, मनोरंजन एवं खेल तथा नागरिक उड्डयन क्षेत्रों को सहायता प्रदान की।
- ECLGS 4.0 ने महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया। इसमें अस्पताल/नर्सिंग होम/क्लीनिक/मेडिकल कॉलेज तथा तरल ऑक्सीजन, ऑक्सीजन सिलेंडर आदि के निर्माताओं को शामिल किया गया।
- ECLGS 5.0 31 मार्च 2027 तक या ₹2.55 लाख करोड़ की गारंटी जारी होने तक, जो भी पहले हो, परिचालन में रहेगी। इसमें MSMEs, पात्र गैर-MSME व्यावसायिक उधारकर्ता और अनुसूचित यात्री एयरलाइन कंपनियाँ शामिल हैं।
- ऋण गारंटी कवरेज: पात्र MSMEs को दिए गए ऋणों के लिए 100% गारंटी और पात्र गैर-MSMEs के लिए 90% गारंटी कवरेज।
- योजना के तहत MLIs द्वारा कोई गारंटी शुल्क देय नहीं है।
स्रोत: PIB
वर्ष 2029 तक भारत को नशा-मुक्त बनाने का रोडमैप
पाठ्यक्रम: जीएस-3/आंतरिक सुरक्षा
सन्दर्भ
- केंद्रीय गृह मंत्री ने वर्ष 2029 तक भारत को नशा-मुक्त बनाने के लिए तीन वर्षीय रोडमैप प्रस्तुत किया।
रोडमैप का परिचय
यह रोडमैप चार स्तंभों पर आधारित है-
- पहला – खुफिया जानकारी और अभियान-आधारित प्रवर्तन;
- दूसरा — प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण;
- तीसरा — मांग और नुकसान में कमी (Demand and Harm Reduction); और
- चौथा — क्षमता निर्माण और समन्वय।
- बीएसएफ, सीआईएसएफ, भारतीय तटरक्षक बल, सीमा शुल्क विभाग और DRI बेहतर निगरानी के लिए भूमि सीमाओं, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और कार्गो पर जोखिम-आधारित प्रोफाइलिंग करेंगे और स्कैनर स्थापित करेंगे।
- सीबीआई, विदेश मंत्रालय और इंटरपोल भगोड़ों को वापस लाने का कार्य करेंगे।
- प्रवर्तन निदेशालय, वित्तीय खुफिया इकाई और बैंकिंग प्रणाली धन के प्रवाह का पता लगाएंगे।
सरकार द्वारा की गई पहल
- स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act): यह अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन, कब्जे, बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगाता है तथा उल्लंघनों के लिए दंड का प्रावधान करता है।
- नशा मुक्त भारत अभियान: वर्ष 2020 में शुरू किया गया यह अभियान नशीली दवाओं के दुरुपयोग के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करने और नशा-मुक्त भारत को बढ़ावा देने का उद्देश्य रखता है।
- भारत ने 2047 तक नशा-मुक्त भारत प्राप्त करने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है।
- भारत ने मादक दवाओं और मन:प्रभावी पदार्थों (NDPS) तथा रासायनिक प्रीकर्सरों की अवैध तस्करी और संबंधित अपराधों से निपटने के लिए 27 देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते, 16 देशों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) और 02 देशों के साथ सुरक्षा सहयोग समझौते किए हैं।
- एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF): कई राज्यों ने राज्य स्तर पर मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन को मजबूत करने के लिए ANTF की स्थापना की है।
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के तहत डार्कनेट मॉनिटरिंग सेल ऑनलाइन मादक पदार्थों की बिक्री पर नज़र रखता है।
- महत्वपूर्ण और बड़ी मात्रा में की गई जब्तियों की जाँच की निगरानी के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के महानिदेशक की अध्यक्षता में एक संयुक्त समन्वय समिति (JCC) स्थापित की गई है।
- वर्ष 2019 में, मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए राष्ट्रीय समन्वय समिति (NCORD) की चार-स्तरीय व्यवस्था कार्यकारी, राज्य और जिला स्तरों पर समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई थी।
स्रोत: AIR
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