अग्नि सुरक्षा सप्ताह 

पाठ्यक्रम: जीएस-3/आपदा प्रबंधन

सन्दर्भ

  • केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के सहयोग से, 4 से 10 मई 2026 तक पूरे भारत में ‘अग्नि सुरक्षा सप्ताह’ मनाने जा रहा है, जिसका उद्देश्य आग से होने वाले खतरों की रोकथाम और शमन के महत्त्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

भारत में अग्नि सेवाएँ

  • अग्नि सेवा एक राज्य विषय है और इसे संविधान के अनुच्छेद 243(w) के अंतर्गत बारहवीं अनुसूची में नगर पालिका के कार्य के रूप में शामिल किया गया है।
  • इसके परिणामस्वरूप विभिन्न राज्यों में विधिक और संस्थागत ढाँचे में भिन्नता पाई जाती है।
  • भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा जारी राष्ट्रीय भवन संहिता, 2016, अग्नि सुरक्षा पर सबसे व्यापक दस्तावेज है।
  • इसमें भवन डिजाइन, निर्माण तथा अग्नि सुरक्षा प्रणालियों के लिए विस्तृत तकनीकी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
  • राज्य स्तर पर, विभिन्न अग्नि सेवा अधिनियम कार्यान्वयन और प्रवर्तन को नियंत्रित करते हैं।
  • ये कानून अग्निशमन विभागों को निरीक्षण करने, अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने तथा उल्लंघनों पर कार्रवाई करने का अधिकार देते हैं।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, जिसे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा लागू किया जाता है, अग्नि घटनाओं को व्यापक आपदा प्रबंधन ढाँचे में शामिल करता है और तैयारी तथा प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ करता है।
  • कारखाना अधिनियम, 1948; विस्फोटक अधिनियम, 1884; तथा पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 जैसे क्षेत्र विशेष कानून औद्योगिक और जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा को विनियमित करते हैं।
  • बहुमंजिला भवनों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिनमें अग्नि लिफ्ट, शरण क्षेत्र तथा दाबयुक्त सीढ़ियाँ शामिल हैं, ताकि सुरक्षित निकासी और अग्निशमन कार्यों में सुविधा हो सके।

संस्थागत ढांचा

  • केंद्रीय स्तर पर, अग्नि सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं होमगार्ड महानिदेशालय, गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है और नीति निर्माण, प्रशिक्षण तथा आधुनिकीकरण के लिए उत्तरदायी है।
  • राज्य स्तर पर, अग्निशमन विभाग नियमों के क्रियान्वयन, निरीक्षण, प्रमाणन जारी करने तथा आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया देने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

अग्नि सुरक्षा प्रमाणन (अनापत्ति प्रमाणपत्र)

  • अग्नि सुरक्षा अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र या अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
  • यह प्रमाणपत्र बहुमंजिला भवनों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों, विद्यालयों तथा अन्य सार्वजनिक भवनों के लिए अनिवार्य है।
  • इस प्रक्रिया में भवन योजना का प्रस्तुतिकरण, अग्निशमन विभाग द्वारा निरीक्षण, सुरक्षा मानकों के अनुपालन का सत्यापन तथा प्रमाणपत्र का निर्गमन शामिल होता है।
  • निरंतर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर इसका नवीनीकरण आवश्यक है।

चुनौतियाँ

  • व्यापक ढाँचे के बावजूद भारत में अग्नि सुरक्षा कई समस्याओं का सामना कर रही है।
  • इनमें भवन संहिताओं के कमजोर प्रवर्तन, अनधिकृत निर्माण, नियमित निरीक्षण की कमी, अपर्याप्त अग्निशमन अवसंरचना तथा अग्नि सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता का निम्न स्तर शामिल हैं।

आगे की राह 

  • राज्यों के बीच समानता सुनिश्चित करने हेतु एक समान राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा कानून की आवश्यकता है।
  • प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करना, स्मार्ट अग्नि पहचान प्रणालियों जैसी तकनीक का उपयोग करना तथा नियमित सुरक्षा ऑडिट और अभ्यास करना आवश्यक है।
  • इसके अतिरिक्त, अग्निशमन सेवाओं की क्षमता बढ़ाना और जन-जागरूकता को सुदृढ़ करना, आग से संबंधित जोखिमों को कम करने और समग्र सुरक्षा में सुधार के लिए महत्त्वपूर्ण होगा।

स्रोत: PIB

 

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