पाठ्यक्रम: GS1/संस्कृति
संदर्भ
- भारत में प्राप्त बौद्ध अवशेषों को परियोजना 108 के अंतर्गत निर्मित किए जा रहे 108 जांगचुब चोर्टेन (ज्ञानोदय के स्तूपों) में प्रतिष्ठित किया जाएगा।
ज़ुंग और जांगचुब चोर्टेन के बारे में
- ये अवशेष ‘ज़ुंग’ का हिस्सा हैं, जो बुद्ध के प्रबुद्ध शरीर, वाणी और मन का सजीव स्वरूप माना जाता है।
- ज़ुंग के पवित्र घटकों में थांगका (कपास या रेशम के कपड़े पर निर्मित पारंपरिक तिब्बती बौद्ध चित्रकारी), मूर्तियाँ, बहुमूल्य पत्थर, मंत्रों से युक्त लपेटे हुए पत्र (स्क्रॉल) अथवा धारणी तथा प्रबुद्ध महापुरुषों के पवित्र अवशेष शामिल होते हैं।
- चोर्टेन तिब्बती और भूटानी भाषा में ‘स्तूप’ के लिए प्रयुक्त शब्द है। यह एक पवित्र बौद्ध स्मारक है, जिसमें पवित्र अवशेषों, धर्मग्रंथों अथवा अन्य अभिषिक्त वस्तुओं को प्रतिष्ठित किया जाता है।
- जांगचुब चोर्टेन भगवान बुद्ध के ज्ञानोदय की घटना का स्मरण कराता है तथा अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है।
- प्रतिष्ठा एवं अभिषेक के पश्चात् चोर्टेन को सजीव बुद्ध के समकक्ष माना जाता है।
परियोजना 108 क्या है?
- स्थान: भूटान के गेलेफू में माउ छू नदी के किनारे।
- उद्देश्य: प्रस्तावित गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) के लिए आध्यात्मिक आधार स्थापित करना। इसकी परिकल्पना एक ऐसे वैश्विक आर्थिक केंद्र के रूप में की गई है, जहाँ आध्यात्मिकता, सतत विकास और आर्थिक विकास का समन्वय हो।
- डिजाइन: प्रत्येक चोर्टेन की ऊँचाई लगभग 15 मीटर होगी तथा दो क्रमिक चोर्टेन के बीच 108 मीटर की दूरी होगी।
- 108 का महत्त्व : तिब्बती बौद्ध धर्म की कुछ परंपराओं में कांग्युर—प्रमुख पवित्र बौद्ध धर्मग्रंथों का संग्रह—108 खंडों में व्यवस्थित है।
- वज्रयान बौद्ध परंपरा में 108 की संख्या आध्यात्मिक पूर्णता, ब्रह्मांडीय संतुलन और कर्मों के शुद्धीकरण का प्रतीक मानी जाती है।
बौद्ध स्तूपों के बारे में
- स्तूप एक बौद्ध स्थापत्य संरचना है, जिसका निर्माण भगवान बुद्ध अथवा अन्य प्रबुद्ध महापुरुषों के पवित्र अवशेषों को सुरक्षित रखने तथा बौद्ध धर्म की महत्त्वपूर्ण घटनाओं के स्मरण के लिए किया जाता है।
- वास्तुशिल्पीय विशेषताएँ : एक पारंपरिक स्तूप के पाँच प्रमुख घटक होते हैं:
- अंड (गुंबद): अर्द्धगोलाकार संरचना, जो ब्रह्मांडीय अंडे तथा संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करती है।
- हर्मिका: गुंबद के ऊपर स्थित वर्गाकार वेदिका या रेलिंगनुमा संरचना, जो देवताओं के निवास स्थान का प्रतीक है।
- यष्टि : हर्मिका के ऊपर उठने वाला केंद्रीय स्तंभ, जो ब्रह्मांडीय धुरी का प्रतिनिधित्व करता है।
- छत्र : स्तंभ पर स्थापित छतरीनुमा चक्र, जो आध्यात्मिक संप्रभुता और संरक्षण का प्रतीक है।
- मेधि : गुंबद को सहारा देने वाला ऊँचा वृत्ताकार चबूतरा या मंच, जिसका उपयोग प्रायः श्रद्धालु स्तूप की परिक्रमा करने के लिए करते हैं।
- धार्मिक महत्त्व : स्तूप बुद्ध के प्रबुद्ध मन और उनकी शिक्षाओं का प्रतीक हैं। श्रद्धालु पारंपरिक रूप से इनके चारों ओर दक्षिणावर्त परिक्रमा करते हैं, जो श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने का एक माध्यम है।
- विकास : स्तूप वास्तुकला का विस्तार पूरे एशिया में हुआ और समय के साथ इसका विभिन्न क्षेत्रीय स्वरूपों में विकास हुआ। इनमें तिब्बती चोर्टेन, श्रीलंकाई दागोबा और पूर्वी एशियाई पैगोडा शामिल हैं।

स्रोत: TH
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