पाठ्यक्रम: GS2/ शासन
संदर्भ
- ग्रामीण विकास मंत्रालय ने VB-G RAM G अधिनियम, 2025 के क्रियान्वयन से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए VB-G RAM G (शिकायत निवारण) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं।
शिकायत निवारण नियम, 2026 के प्रावधान
- कोई भी व्यक्ति योजना के क्रियान्वयन से उत्पन्न या उससे संबंधित किसी भी विषय के संबंध में शिकायत दर्ज करा सकता है।
- शिकायत या अभ्यावेदन मौखिक, लिखित अथवा डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है।
- नियम 4(5) के अनुसार: “प्रारूप, भाषा, प्रस्तुत करने के तरीके अथवा किसी प्रक्रियात्मक कमी के आधार पर किसी भी शिकायत के पंजीकरण से मना नहीं किया जाएगा।”
- इन नियमों के अंतर्गत जाँच पूरी करने के लिए सात कार्यदिवस निर्धारित किए गए हैं तथा शिकायत प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर उसका निवारण करना अनिवार्य है।
- त्रिस्तरीय शिकायत निवारण तंत्र :
- ग्राम पंचायत स्तर: शिकायतों का प्रारंभिक पंजीकरण और निपटारा।
- ब्लॉक स्तर: शिकायतों की जाँच तथा अनसुलझी शिकायतों को उच्च स्तर पर भेजना।
- जिला स्तर: उच्च स्तरीय निगरानी और शिकायतों का निवारण। इस प्रक्रिया की निगरानी जिला कार्यक्रम समन्वयक द्वारा की जाएगी।
VB-G RAM G के बारे में
- इसने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (MGNREGA) का स्थान लिया है।
- यह परिवर्तन ‘माँग-आधारित ढाँचे’ से ‘आपूर्ति-आधारित योजना’ की ओर बदलाव को दर्शाता है।
- विस्तारित आजीविका गारंटी : इसके अंतर्गत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ग्रामीण परिवार को 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों के वैधानिक मजदूरी रोजगार की गारंटी प्रदान की जाएगी। यह सुविधा उन वयस्क सदस्यों के लिए होगी, जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हों।
- केंद्र प्रायोजित योजना : इस योजना का क्रियान्वयन केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में किया जाएगा। इसके अंतर्गत पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए केंद्र एवं राज्य के बीच वित्तपोषण का अनुपात 90:10 तथा अन्य सभी राज्यों के लिए 60:40 होगा।
- कृषि के व्यस्त मौसम में श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना : राज्यों को एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों की ऐसी अवधि पहले से अधिसूचित करने का अधिकार होगा, जिसमें बुवाई और कटाई के व्यस्त मौसम के दौरान अधिनियम के अंतर्गत कार्य नहीं कराए जाएँगे। इससे कृषि के महत्त्वपूर्ण समय में पर्याप्त कृषि श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
- राज्यों को मानक-आधारित आवंटन: राज्य पंचायतों की श्रेणी और स्थानीय विकास संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जिलों तथा ग्राम पंचायतों के बीच धनराशि का पारदर्शी एवं आवश्यकता-आधारित आंतरिक वितरण सुनिश्चित करेंगे।
- बेरोजगारी भत्ता : यदि पात्र आवेदकों को निर्धारित समय-सीमा के अंदर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो राज्य सरकारें उन्हें बेरोजगारी भत्ता देने के लिए बाध्य होंगी।
- VGPP आधारित नियोजन : नियोजन की प्रक्रिया विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के माध्यम से की जाएगी। इन योजनाओं को ग्राम पंचायतों द्वारा तैयार किया जाएगा तथा राष्ट्रीय स्थानिक नियोजन प्रणालियों के साथ एकीकृत किया जाएगा।
- संस्थागत निगरानी : कानून के प्रावधानों की समीक्षा, निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद तथा राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषदों का गठन किया जाएगा। ये परिषदें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में कार्य करेंगी।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA)
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 ग्रामीण परिवारों को मजदूरी-आधारित रोजगार का कानूनी आश्वासन प्रदान करता है।
- इसे वर्ष 2006 में लागू किया गया था तथा वर्ष 2009 में इसका नाम बदलकर MGNREGA कर दिया गया।
- मुख्य उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों के उन सभी परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम-से-कम 100 दिनों का सुनिश्चित मजदूरी रोजगार प्रदान करके उनकी आजीविका की स्थिरता को बढ़ावा देना, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हों।
- क्रियान्वयन : यह माँग-आधारित एवं अधिकार-आधारित कार्यक्रम है, जिसका क्रियान्वयन मुख्य रूप से ग्राम पंचायतों के माध्यम से किया जाता है।
- भत्ते : काम की माँग करने के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराने पर बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान है।
- कार्यक्रम में भाग लेने वाले कुल श्रमिकों में कम-से-कम एक-तिहाई (33%) महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रावधान है।
स्रोत: HT
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