बाइनेंस पर साइबर हमला
पाठ्यक्रम: GS-3 / साइबर सुरक्षा
चर्चा में क्यों?
- विश्व के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों में से एक बाइनेंस (Binance) पर कथित तौर पर एक बड़ा साइबर हमला हुआ, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 6.3 अरब अमेरिकी डॉलर की हानि का अनुमान लगाया गया है।
साइबर हमला क्या है?
- साइबर हमला किसी कंप्यूटर नेटवर्क, कंप्यूटर प्रणाली अथवा डिजिटल उपकरण तक अनधिकृत पहुँच प्राप्त करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है।
- इसका उद्देश्य डेटा, एप्लिकेशन अथवा अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों की चोरी करना, उन्हें उजागर करना, उनमें बदलाव करना, निष्क्रिय करना अथवा नष्ट करना होता है।
भारत का साइबर सुरक्षा ढाँचा
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: यह भारत के साइबर कानून संबंधी ढाँचे का आधार है।
- इसमें पहचान की चोरी, प्रतिरूपण, कंप्यूटर संसाधनों के माध्यम से छलपूर्वक किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण करना तथा अश्लील या हानिकारक सामग्री के प्रसार जैसे अपराधों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
- ये प्रावधान वित्तीय लाभ के लिए डिजिटल मंचों का दुरुपयोग करने वाले धोखेबाजों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने में महत्त्वपूर्ण हैं। साथ ही, इनके माध्यम से प्राधिकरणों को दुर्भावनापूर्ण वेबसाइटों एवं धोखाधड़ी वाले एप्लिकेशन को अवरुद्ध करने का अधिकार मिलता है।
- सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशा-निर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021: ये नियम सोशल मीडिया मध्यस्थों, डिजिटल मंचों तथा ऑनलाइन बाज़ारों की जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं।
- इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग से संबंधित प्रावधान शामिल हैं तथा डिजिटल मंचों से गैर-कानूनी सामग्री हटाना अनिवार्य किया गया है।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 : यह सुनिश्चित करता है कि सभी व्यक्तिगत डेटा का प्रसंस्करण विधिसम्मत तरीके से तथा उपयोगकर्ता की सहमति के आधार पर किया जाए। इससे भारत का डिजिटल परिवेश अधिक सुरक्षित एवं जवाबदेह बनता है।
- यह अधिनियम डेटा न्यासियों पर डेटा की सुरक्षा के लिए कठोर दायित्व निर्धारित करता है, जिससे अनधिकृत पहुँच एवं डेटा के दुरुपयोग के जोखिम कम होते हैं।
- भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In): यह साइबर सुरक्षा संबंधी घटनाओं से निपटने के लिए भारत की राष्ट्रीय एजेंसी है।
- यह साइबर खतरों की निगरानी करता है, कमजोरियों की पहचान करता है तथा आवश्यक परामर्श एवं दिशा-निर्देश जारी करता है।
- राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र (NCIIPC): सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70A के अंतर्गत नामित यह केंद्र भारत में महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है।
- समन्वय पोर्टल : यह पोर्टल विश्लेषण आधारित आँकड़ों के माध्यम से अपराधियों एवं अपराधों के अंतरराज्यीय संबंधों की पहचान कर साइबर धोखाधड़ी की जाँच को सुदृढ़ बनाता है।
- इसका ‘प्रतिबिंब’ मॉड्यूल अपराधियों एवं अपराध से संबंधित अवसंरचना के स्थानों का मानचित्रण करता है, जिससे कानून प्रवर्तन अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए उपयोगी जानकारी प्राप्त होती है।
- सहयोग पोर्टल : यह पोर्टल गैर-कानूनी ऑनलाइन सामग्री से निपटने के लिए एक केंद्रीकृत मंच उपलब्ध कराता है।
- इसके माध्यम से मध्यस्थों को सामग्री हटाने संबंधी नोटिस स्वचालित रूप से जारी किए जा सकते हैं, जिससे साइबर जगत में प्रसारित हानिकारक सामग्री के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होती है।
स्रोत: TH
भारत की निजी क्षेत्र की परमाणु संलयन पहल
पाठ्यक्रम: GS-3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप प्रानोस फ्यूजन ने प्लाज्मा प्रबंधन एवं अतिचालक चुंबकों के परीक्षण के लिए PRAGYA नामक एक छोटे डोनट के आकार का टोकामक विकसित किया है।
टोकामक की कार्यप्रणाली
- टोकामक एक डोनट के आकार का उपकरण है, जो अत्यधिक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग करके प्लाज्मा नामक अत्यधिक गर्म, विद्युत आवेशित गैस को एक सीमित क्षेत्र में नियंत्रित रखता है।
- चुंबकीय परिरोध प्लाज्मा को रिएक्टर की दीवारों के संपर्क में आने से रोकता है, जिससे संलयन के लिए आवश्यक अत्यधिक उच्च तापमान बनाए रखना संभव होता है।
- अतिचालक चुंबक ऊर्जा की हानि को कम करते हुए शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने में सहायता करते हैं।
- महत्त्व : यह प्रयोग PRANIK नामक एक बड़े टोकामक के निर्माण की दिशा में महत्त्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
- PRANIK में प्लाज्मा को लाखों डिग्री तक गर्म किया जाएगा, जो सूर्य के आंतरिक भाग के तापमान से भी अधिक होगा।
- इतना उच्च तापमान हाइड्रोजन परमाणुओं के नाभिकों के संलयन तथा ऊर्जा उत्पादन के लिए आवश्यक है।
परमाणु ऊर्जा के बारे में
- परमाणु ऊर्जा वह ऊर्जा है, जो नाभिकीय अभिक्रियाओं के दौरान मुक्त होती है। ये अभिक्रियाएँ मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं—नाभिकीय विखंडन और नाभिकीय संलयन।
- नाभिकीय संलयन : यह वह प्रक्रिया है, जिसमें दो हल्के परमाणु नाभिक आपस में मिलकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते हैं तथा इस प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। यही प्रक्रिया सूर्य सहित अन्य तारों को ऊर्जा प्रदान करती है।
- संलयन में प्रयुक्त ईंधन: सबसे सामान्य संलयन अभिक्रिया में हाइड्रोजन के दो समस्थानिकों—ड्यूटेरियम और ट्रिटियम —का उपयोग किया जाता है।
- जब ये दोनों समस्थानिक आपस में संलयित होते हैं, तो हीलियम का निर्माण होता है तथा एक न्यूट्रॉन और बड़ी मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है।

स्रोत: TH
वायुसेना प्रमुख द्वारा VAYU रूपरेखा की प्राथमिकताओं का रेखांकन
पाठ्यक्रम: GS-3 / रक्षा
संदर्भ
- एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित, जिन्होंने भारतीय वायुसेना के 29वें वायुसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला है, ने VAYU रूपरेखा के अंतर्गत भारतीय वायुसेना (IAF) की प्रमुख प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।
VAYU रूपरेखा के बारे में
- यह रूपरेखा भारतीय वायुसेना को अधिक सशक्त बनाने के लिए चार प्रमुख प्राथमिकताओं को निर्धारित करती है:
- V – सतर्कता, विजय एवं तत्परता (Vigilance, Victory and Readiness): सभी सैन्य संरचनाओं में उच्चतम स्तर की परिचालन तत्परता बनाए रखना तथा युद्धक क्षमता को स्वीकृत स्तर तक पुनर्स्थापित करना।
- A – आत्मनिर्भरता (Aatmanirbharta): सैन्य प्लेटफॉर्म, सेंसर, हथियारों एवं प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को तीव्रता से विकसित करना। इसके अंतर्गत परिचालन आत्मनिर्भरता तथा निरंतर युद्धक क्षमता पर विशेष ध्यान देना।
- Y – युक्ति (Yukti): सैन्य सिद्धांतों, प्रौद्योगिकी एवं परिचालन प्रक्रियाओं में रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देना। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित कमान एवं नियंत्रण प्रणाली, ड्रोन-रोधी क्षमताएँ, लचीलापन तथा उभरते परिचालन क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
- U – सामूहिक प्रयासों में एकता (Unity of Effort): राष्ट्रीय दृष्टिकोण JAI—संयुक्तता (Jointness), आत्मनिर्भरता (Aatmanirbharta) एवं नवाचार (Innovation)—के अनुरूप थलसेना, नौसेना तथा राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ संयुक्तता एवं समन्वय को सुदृढ़ करना।
एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित के बारे में
- शैक्षणिक पृष्ठभूमि: वे पुणे के निकट स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), बांग्लादेश के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज तथा नई दिल्ली के राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (NDC) के पूर्व छात्र हैं।
- आयोग प्राप्ति : उन्होंने 6 दिसंबर, 1986 को भारतीय वायुसेना की लड़ाकू विमान शाखा में कमीशन प्राप्त किया।
- अनुभव: वे एक प्रायोगिक परीक्षण पायलट तथा योग्य उड़ान प्रशिक्षक हैं। उन्हें मिराज-2000, विभिन्न मिग विमानों, किरण, जगुआर, IL-78, हॉक तथा तेजस सहित विभिन्न विमानों पर 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है।
- परिचालन अनुभव: अपने चार दशक लंबे सेवाकाल के दौरान वे ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक तथा ऑपरेशन सिंदूर सहित कई सैन्य अभियानों एवं अभ्यासों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं।
क्या आप जानते हैं?
- वर्ष 1955 से भारतीय वायुसेना के पेशेवर प्रमुख के पद को वायुसेना प्रमुख (CAS) कहा जाता है। इससे पहले इस पद को भारतीय वायुसेना का कमांडर-इन-चीफ कहा जाता था।
- वायुसेना प्रमुख, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी , राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद तथा रक्षा योजना समिति के स्थायी सदस्य होते हैं।
- वे रक्षा मंत्री, प्रधानमंत्री तथा सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति को वरिष्ठ सैन्य सलाहकार के रूप में भी सेवाएँ प्रदान करते हैं।
- परंपरागत रूप से यह पद चार सितारा रैंक वाले एयर चीफ मार्शल के पास होता है। सामान्यतः यह सक्रिय सेवा में वायुसेना का सर्वोच्च रैंक वाला अधिकारी होता है, जब तक कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) स्वयं वायुसेना से संबंधित न हों।
स्रोत: PIB