गोबरधन योजना
पाठ्यक्रम: जीएस-3/पर्यावरण
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री ने संपीड़ित बायोगैस (CBG) क्षेत्र के विकास के लिए गोबरधन योजना का शुभारंभ किया।
गोबरधन योजना
- ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन को बढ़ावा देना (GOBARdhan) योजना वर्ष 2018 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) के एक अभिन्न हिस्से के रूप में शुरू की गई थी।
- इसका उद्देश्य जैव-अपशिष्ट—पशु अपशिष्ट, रसोई से निकलने वाला कचरा, फसल अवशेष और बाजार से निकलने वाले कचरे—को बायोगैस और जैव-स्लरी में परिवर्तित करना था, जिससे गांवों में स्वच्छता सुनिश्चित हो और ग्रामीण जीवन में सुधार हो।
- अगस्त 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय परिपत्र जैव-ऊर्जा योजना—गोबरधन को कुल ₹23,731 करोड़ के बजट के साथ मंजूरी दी।
- यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जो भारत में CBG के विकास को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक 10 वर्षों का ढांचा प्रदान करती है।
घटक
1. सुनिश्चित CBG खरीद
- गोबरधन योजना उत्पादकों के लिए एक विश्वसनीय और पूर्वानुमानित बाजार उपलब्ध कराने हेतु एक समर्पित CBG खरीद आश्वासन ढांचा स्थापित करती है।
- नगर गैस वितरण संस्थाओं द्वारा खरीद से CNG (परिवहन) और PNG (घरेलू) क्षेत्रों में अधिसूचित CBG दायित्व की दिशा में लक्ष्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी:
- वित्त वर्ष 2026-27 में 3%
- वित्त वर्ष 2027-28 में 4%
- वित्त वर्ष 2028-29 से आगे 5%
2. स्थिर CBG मूल्य निर्धारण ढांचा
- गोबरधन योजना ₹2,110 प्रति मेट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBTU) का स्थिर प्रशासित CBG मूल्य निर्धारित करती है।
- इसे सरकार समर्थित मूल्य निर्धारण ढांचे के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी।
3. पूंजीगत सहायता
- पात्र नई CBG परियोजनाओं को स्थापित CBG क्षमता के प्रति टन प्रतिदिन (TPD) ₹2 करोड़ तक की पूंजीगत सहायता प्राप्त होगी।
- यह सहायता केवल मुख्य संयंत्र मशीनरी तक सीमित नहीं होगी, बल्कि कच्चे माल के एकत्रीकरण, जैविक खाद प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन से संबंधित महत्वपूर्ण मूल्य श्रृंखला परिसंपत्तियों तक भी विस्तारित होगी।
- उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाली मौजूदा परियोजनाएं भी पात्र होंगी।
4. पाइपलाइन अवसंरचना का विकास
- योजना समूह-आधारित और स्वतंत्र, दोनों प्रकार की पाइपलाइन अवसंरचना को सहायता प्रदान करती है।
- इसका उद्देश्य CBG संयंत्रों को मुख्य पाइपलाइनों और नगर गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ना है।
5. ऋण गारंटी सहायता
- एक समर्पित ऋण गारंटी तंत्र ऋणदाताओं के विश्वास को मजबूत करेगा और पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम-आधारित CBG परियोजनाओं के लिए संस्थागत ऋण के प्रवाह को बढ़ाएगा।
6. CBG पारिस्थितिकी तंत्र चुनौती कोष
- गोबरधन योजना एक समर्पित CBG पारिस्थितिकी तंत्र चुनौती कोष स्थापित करती है।
- इसका उद्देश्य जिला स्तर पर कार्यान्वयन में तेजी लाना और पूरे CBG पारिस्थितिकी तंत्र में स्थानीय मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करना है।
उद्देश्य
- इसका उद्देश्य एक दीर्घकालिक ढांचे के माध्यम से घरेलू CBG उत्पादन को लगभग 10 गुना बढ़ाकर लगभग 5 MMSCMD करना है, जिससे निवेशकों और ऋणदाताओं को बेहतर आश्वासन मिल सके।
- इसका लक्ष्य संपीड़ित बायोगैस (CBG) उत्पादन में 10 गुना वृद्धि, ईंधन आयात पर ₹40,000 करोड़ से अधिक की बचत, सकल घरेलू उत्पाद में ₹75,000 करोड़ से अधिक की वृद्धि और 1.5 लाख से अधिक रोजगार सृजित करना है।
- सरकार का उद्देश्य कृषि एवं जैविक अपशिष्ट को घरेलू ऊर्जा के एक नए स्रोत में परिवर्तित करना है।
स्रोत :TH
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड
पाठ्यक्रम: जीएस-3/पर्यावरण
चर्चा में क्यों?
दस बंदी प्रजनित ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIBs) को राजस्थान के जैसलमेर में उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाना तय है। यह प्रजाति की जंगली आबादी को पुनः बढ़ाने के प्रयास का हिस्सा है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB)
- GIB बड़े आकार के पक्षी हैं, जिनकी ऊँचाई लगभग एक मीटर और वजन लगभग 15 से 18 किलोग्राम होता है।
- यह शुष्क और अर्ध-शुष्क खुले प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों की एक प्रमुख प्रजाति है। यह कई वर्षों से विलुप्ति के कगार पर है और इसकी जंगली आबादी लगभग 120-150 के बीच बनी हुई है।
- नवीनतम आबादी के अनुमान के अनुसार, सबसे बड़ी आबादी 130 (+/-20) राजस्थान में है, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक में लगभग 5-6-6 व्यक्ति पाए जाते हैं।
- यह राजस्थान का राजकीय पक्षी है।
संरक्षण
- इसे भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध किया गया है।
- इसे CMS अभिसमय तथा CITES के परिशिष्ट I में भी सूचीबद्ध किया गया है।
- IUCN लाल सूची में इसे अति संकटग्रस्त (Critically Endangered) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
खतरे:
इन्हें आवास की हानि, अवैध शिकार तथा शिकारियों द्वारा इनके अंडों और पक्षियों का शिकार जैसे खतरों का सामना करना पड़ा है।
- हाल के समय में, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से बिजली की निकासी के लिए स्थापित विद्युत लाइनों से टकराने के कारण होने वाली मृत्यु भी एक बड़ा खतरा बन गई है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि DNP के बाहर स्थित क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की विद्युत लाइनों को दिसंबर 2027 तक भूमिगत किया जाना है।
स्रोत :IE
अभ्यास ‘वरुण’
पाठ्यक्रम: जीएस-3/रक्षा
चर्चा में क्यों?
भारतीय नौसेना का पोत त्रिशूल ‘वरुण’ अभ्यास के 24वें संस्करण में भाग लेने के लिए फ्रांस के टूलॉन पहुँचा।
‘वरुण’ अभ्यास
- यह भारतीय नौसेना और फ्रांसीसी नौसेना के बीच वार्षिक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास है।
- इसकी शुरुआत 2001 में हुई थी और यह दोनों देशों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण आधार बन गया है। यह नौसैनिक अंतर-संचालन क्षमता और परिचालन समन्वय को बढ़ाने के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- इसमें बंदरगाह और समुद्र में पेशेवर गतिविधियाँ, जिनमें क्रॉस-डेक यात्राएँ, परिचालन संबंधी बातचीत और खेल गतिविधियाँ शामिल हैं, आयोजित की जाएँगी।
महत्व
- यह दोनों नौसेनाओं को अनुभव और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ साझा करने, अंतर-संचालन क्षमता बढ़ाने तथा आपसी समझ को और मजबूत करने के अवसर प्रदान करेगा।
स्रोत: PIB
सिकल सेल एनीमिया की गंभीरता का अनुमान लगाने के लिए भारत-विशिष्ट उपकरण
पाठ्यक्रम: जीएस-3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
चर्चा में क्यों?
CSIR-केंद्र कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान संस्थान (CCMB) के वैज्ञानिकों ने सिकल सेल एनीमिया (SCA) के लिए भारत-विशिष्ट रोग गंभीरता स्कोर विकसित किया है।
सिकल सेल एनीमिया
1. यह एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जो बीटा ग्लोबिन जीन में उत्परिवर्तन के कारण होता है। यह असामान्य हीमोग्लोबिन का निर्माण करता है, जिसके कारण लाल रक्त कोशिकाएँ हँसिया के आकार की हो जाती हैं। इससे एनीमिया, गंभीर दर्द के दौरे, अंगों को क्षति और अन्य जटिलताएँ हो सकती हैं।
2. यह अफ्रीकी, भूमध्यसागरीय, मध्य-पूर्वी और भारतीय मूल के लोगों में अधिक सामान्य है।
3. कारण और लक्षण:
- यह एकल-जीन उत्परिवर्तन से होने वाला रोग है, जिसकी गंभीरता अलग-अलग हो सकती है। यह HBB जीन में उत्परिवर्तन के कारण होता है, जो हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए निर्देश प्रदान करता है।
- भारतीयों में रोग का स्वरूप अपेक्षाकृत कम गंभीर दिखाई देता है, जिसका एक कारण भ्रूणीय हीमोग्लोबिन के उच्च स्तर को माना जाता है। अफ्रीकी लोगों की तुलना में कुछ गंभीर जटिलताएँ भारतीयों में कम सामान्य हैं।
- हालांकि, पोषण संबंधी कमियाँ, संक्रमण और पर्यावरणीय तनाव एनीमिया तथा रोग के परिणामों को और गंभीर बना सकते हैं।
4. निदान:
- सिकल सेल एनीमिया का सामान्यतः रक्त परीक्षण के माध्यम से निदान किया जाता है। इन परीक्षणों में असामान्य हीमोग्लोबिन (HbS) की जाँच की जाती है, जो इस रोग की प्रमुख विशेषता है।
5. उपचार:
- सिकल सेल रोग (SCD) के उपचार का उद्देश्य लक्षणों से राहत देना और जटिलताओं को रोकना है।
- अस्थि-मज्जा/स्टेम-सेल प्रत्यारोपण संभवतः उपचारात्मक हो सकता है, लेकिन यह महँगा है, इसमें पर्याप्त जोखिम होते हैं और इसके लिए अनुकूल दाता की आवश्यकता होती है।
- हाइड्रॉक्सीयूरिया, दर्द निवारक दवाएँ, रक्त आधान और एंटीबायोटिक्स सामान्य उपचार हैं। हाल के समय में जीन-संपादन आधारित दवाएँ भी विकसित की गई हैं।
- दिसंबर 2023 में अमेरिकी FDA ने Casgevy और Lyfgenia को मंजूरी दी। इनमें Casgevy सिकल सेल रोग के लिए जीनोम-संपादन तकनीक का उपयोग करने वाली पहली FDA-अनुमोदित चिकित्सा थी।
6. भारत के कदम:
- 2023 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन शुरू किया, जिसका लक्ष्य 2047 तक सिकल सेल रोग को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करना है।
- मिशन का समग्र उद्देश्य सभी SCD रोगियों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध कराना तथा जागरूकता, व्यवहार में बदलाव और जाँच संबंधी हस्तक्षेपों के माध्यम से इसके प्रसार को कम करना है।
नवीनतम घटनाक्रम
- CSIR-CCMB के वैज्ञानिकों ने सिकल सेल एनीमिया (SCA) के लिए भारत-विशिष्ट गंभीरता स्कोर (ISS) विकसित किया है। इसके लिए 171 भारतीय बच्चों के चिकित्सीय आँकड़ों का उपयोग किया गया।
- अंतरराष्ट्रीय बाल चिकित्सा गंभीरता स्कोर का विशेषज्ञों के आकलन के साथ केवल 67% सामंजस्य था। शोधकर्ताओं ने अब भारतीय शिशुओं में अक्सर पाए जाने वाले चिकित्सीय मानदंडों को शामिल किया है, जैसे बार-बार रक्त आधान, गंभीर एनीमिया और बार-बार होने वाले बुखार वाले संक्रमण।
- संशोधित ISS1 ने सटीकता को लगभग 83% तक सुधार दिया, जबकि मुख्य रूप से दिखाई देने वाले चिकित्सीय संकेतों पर आधारित ISS2 लगभग 85% सामंजस्य तक पहुँचा और प्रयोगशाला परीक्षणों पर निर्भरता कम की।
- इस उपकरण में चिकित्सकों को समय पर उपचार संबंधी निर्णय लेने में सहायता करने की क्षमता है, जिसमें हाइड्रॉक्सीयूरिया के प्रबंधन संबंधी निर्णय भी शामिल हैं। हालाँकि, इसे बड़े और अधिक विविध समूहों पर मान्य किया जाना अभी आवश्यक है।
स्रोत:TH
बुक्सा टाइगर रिजर्व
पाठ्यक्रम: जीएस-3/पर्यावरण
सन्दर्भ
- T138 नामक तीन वर्षीय बाघिन को पश्चिम बंगाल के बुक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया है। यह एक चरणबद्ध बाघ पुनर्प्रवेश कार्यक्रम की शुरुआत है, जिसका उद्देश्य एक स्व-निर्भर बाघ आबादी स्थापित करना है।
बुक्सा टाइगर रिजर्व का परिचय
- स्थान: यह उत्तरी पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में भारत-भूटान सीमा के पास स्थित है।
- बुक्सा को 1983 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था
पारिस्थितिक महत्व:
यह पूर्वी हिमालय की तलहटी का हिस्सा है और असम तथा भूटान के जंगलों के साथ पारिस्थितिक संबंध स्थापित करता है।
- जीव-जंतु: यहाँ पाए जाने वाले स्तनधारियों में एशियाई हाथी, गौर, सांभर हिरण, क्लाउडेड लेपर्ड, भारतीय तेंदुआ और एशियाई गोल्डन कैट शामिल हैं।
- बाघों की आबादी: आवास के क्षरण, विखंडन और शिकार की उपलब्धता में कमी के कारण रिजर्व में लंबे समय से एक स्थिर स्थानीय बाघ आबादी का अभाव रहा है।
- नदियाँ: संकोश नदी असम सीमा के साथ रिजर्व की पूर्वी सीमा का एक हिस्सा बनाती है।
- जयन्ती नदी: यह बुक्सा क्षेत्र से होकर बहने वाली एक प्रमुख मौसमी नदी है।
स्रोत: TH
पैरासेल द्वीप समूह में एंटीलोप रीफ
पाठ्यक्रम: जीएस-1/भूगोल, जीएस-2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
सन्दर्भ
- चीन दक्षिण चीन सागर में विवादित पैरासेल द्वीप समूह के एंटीलोप रीफ पर एक रनवे का निर्माण कर रहा है। इससे क्षेत्र में चीन की सैन्य पहुँच का विस्तार होने की संभावना है।
एंटीलोप रीफ का परिचय
- स्थान: एंटीलोप रीफ पैरासेल द्वीप समूह का हिस्सा है, जिसे चीनी भाषा में शिशा द्वीप समूह कहा जाता है। यह उत्तरी दक्षिण चीन सागर में, चीन के हैनान द्वीप के पास स्थित है।
- क्षेत्रीय दावे: पैरासेल द्वीप समूह पर चीन, वियतनाम और ताइवान दावा करते हैं। हालाँकि, 1974 से चीन ने इस द्वीप समूह पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा है।

दक्षिण चीन सागर
- यह पश्चिमी प्रशांत महासागर का एक सीमांत सागर है।
- यह दक्षिणी चीन, ताइवान, फिलीपींस, इंडोनेशिया, वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया और मलेशिया के बीच स्थित है।
- यह एक महत्वपूर्ण समुद्री प्रवेश द्वार और संपर्क क्षेत्र है, जो प्रशांत और हिंद महासागरों के बीच होने वाले समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।
दक्षिण चीन सागर में विवाद
- चीन, वियतनाम, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और ताइवान जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच दक्षिण चीन सागर के विवादित क्षेत्र को लेकर लंबे समय से विवाद रहे हैं।
विवाद के दो प्रमुख क्षेत्र हैं:
- स्प्रैटली द्वीप समूह
- पैरासेल द्वीप समूह
नाइन-डैश लाइन
- चीन इस क्षेत्र के अधिकांश हिस्से पर अपना दावा करता है। इस दावे के केंद्र में ‘नाईन-डैश लाइन’ है, जो लगभग 90% समुद्री क्षेत्र को अपने दावे में शामिल करती है।
- यह बिंदीदार रेखा 1940 के दशक के चीनी मानचित्रों से अपनाई गई थी और दक्षिण चीन सागर तथा इस रेखा के भीतर आने वाली सभी भू-आकृतियों पर बीजिंग के दावे को दर्शाती है।
स्रोत: RT
G7 देश 10 करोड़ बैरल तेल जारी करेंगे
पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतरराष्ट्रीय संबंध, जीएस-3/ऊर्जा
सन्दर्भ
- G7 देशों ने बढ़ती ईंधन कीमतों को कम करने के लिए चार महीनों में 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई है। पहले 20 दिनों में बड़ी मात्रा में डीजल जारी करने की योजना है।
परिचय
- इस समन्वित रूप से तेल जारी करने का उद्देश्य अल्पावधि में पेट्रोलियम की उपलब्धता बढ़ाना है।
- अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) इस तेल जारी करने की प्रक्रिया का समन्वय करेगी। यह बड़े ऊर्जा-बाजार व्यवधानों के दौरान अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को दर्शाता है।
G7 (ग्रुप ऑफ सेवन)
- यह सात देशों का एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसमें विश्व की सबसे अधिक औद्योगीकृत और विकसित अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं।
- सदस्य: फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, इटली, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और जापान।
- इतिहास: इसकी शुरुआत वर्ष 1973 के तेल संकट के बाद फ्रांस, पश्चिम जर्मनी, अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन और जापान के वित्त मंत्रियों की एक अनौपचारिक बैठक से हुई थी। इसे ग्रुप ऑफ फाइव कहा गया।
- कनाडा वर्ष 1976 में समूह में शामिल हुआ और यूरोपीय संघ (EU) ने 1977 से बैठकों में भाग लेना शुरू किया।
- वर्ष 1997 में मूल सात देशों के साथ रूस के जुड़ने के बाद इसे G8 कहा जाने लगा। 2014 में रूस द्वारा यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र के विलय के बाद उसे सदस्य के रूप में निष्कासित कर दिया गया और समूह फिर से G7 कहलाने लगा।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA)
- अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की स्थापना 1973-74 के तेल संकट के बाद की गई थी, ताकि औद्योगीकृत देशों को बड़े तेल संकटों से निपटने में सहायता मिल सके।
- मुख्यालय: पेरिस, फ्रांस।
- सदस्य: IEA में 32 सदस्य देश हैं, जिनमें अमेरिका, कनाडा, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया आदि शामिल हैं।
- सहयोगी देश: भारत, चीन, इंडोनेशिया, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड आदि।
IEA की सदस्यता के मानदंड
- IEA का सदस्य बनने के लिए किसी उम्मीदवार देश का OECD का सदस्य होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त उसे निम्नलिखित आवश्यकताओं को पूरा करना होता है:
- पिछले वर्ष के शुद्ध तेल आयात के 90 दिनों के बराबर कच्चे तेल और/या पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार होना।
- राष्ट्रीय तेल खपत को 10% तक कम करने के लिए मांग नियंत्रण कार्यक्रम होना।
- राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया उपाय (CERM) संचालित करने के लिए आवश्यक कानून और संगठनात्मक व्यवस्था होना।
स्रोत: Air
पाकिस्तान में SCO राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक
पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
चर्चा में क्यों?
भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को पाकिस्तान भेजा। यह पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय अधिकारी प्रतिनिधिमंडल की पाकिस्तान की पहली यात्रा थी।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO)
- यह दस सदस्य देशों वाला बहुपक्षीय संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून 2001 को कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के नेताओं द्वारा की गई थी।
- उज्बेकिस्तान को छोड़कर ये सभी देश अप्रैल 1996 में गठित ‘शंघाई-5’ समूह के सदस्य रहे थे।
- सदस्य देश: बेलारूस गणराज्य
- भारत गणराज्य
- ईरान इस्लामी गणराज्य
- कजाकिस्तान गणराज्य
- चीन जनवादी गणराज्य
- किर्गिज गणराज्य
- पाकिस्तान इस्लामी गणराज्य
- रूसी संघ
- ताजिकिस्तान गणराज्य
- उज्बेकिस्तान गणराज्य
- पर्यवेक्षक देश – अफगानिस्तान इस्लामी गणराज्य,
मंगोलिया
- उद्देश्य : SCO आगे चलकर शांति, सुरक्षा, स्थिरता, आर्थिक सहयोग तथा सामाजिक-सांस्कृतिक विकास पर केंद्रित एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन के रूप में विकसित हुआ है।
इसके मूल सिद्धांतों को “शंघाई भावना” कहा जाता है, जिनमें शामिल हैं:
- पारस्परिक विश्वास
- संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान
- आक्रमण न करना
- आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना
- मतभेदों का शांतिपूर्ण समाधान
- यह स्वयं को खुले संगठन के रूप में प्रस्तुत करता है और किसी अन्य राज्य या क्षेत्र के विरुद्ध निर्देशित नहीं है।
- यह सैन्य या रक्षा गठबंधन नहीं है।
SCO राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक
- SCO की राष्ट्रीय समन्वयक परिषद वार्षिक आधार पर घूर्णन प्रणाली के तहत अध्यक्षता करने वाले देश के नेतृत्व में बैठक करती है।
- 31 अगस्त–1 सितंबर को बिश्केक शिखर सम्मेलन के बाद पाकिस्तान ने अध्यक्षता संभाली, इसलिए बैठक इस्लामाबाद में आयोजित हुई।
- SCO के सदस्य के रूप में भारत के लिए बैठक में भाग लेना एक दायित्व था।
- यह अक्टूबर 2024 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की SCO शासनाध्यक्षों की बैठक के लिए पाकिस्तान यात्रा के बाद ऐसी पहली यात्रा भी थी।
भारत के लिए प्रमुख निष्कर्ष
1. कूटनीतिक संतुलन
- भारत पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद SCO और BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से दोनों देशों के साथ संवाद बनाए रखते हुए घटनाक्रम पर नजर रख रहा है।
- इसका उद्देश्य अपने हितों की रक्षा करना तथा किसी भी कथा या क्षेत्रीय दावे को बिना चुनौती दिए स्वीकार न होने देना है।
2. प्रधानमंत्री मोदी की संभावित पाकिस्तान यात्रा
- संभावना है कि पाकिस्तान अगली SCO नेताओं की बैठक के लिए प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित करे।
- इसमें भारत की भागीदारी का निर्णय एक राजनीतिक निर्णय होगा।
- SCO में भारत की वर्तमान भागीदारी से यह आकलन करने में मदद मिल सकती है कि ऐसी यात्रा व्यवहार्य है या नहीं।
3. ट्रंप कारक
- ट्रंप कारक भारत-पाकिस्तान संबंधों में अनिश्चितता का एक अतिरिक्त तत्व जोड़ता है।
- रूस-यूक्रेन तथा अमेरिका-ईरान विवादों के कारण विश्व का ध्यान इन मुद्दों की ओर चला गया है, जबकि ट्रंप द्वारा कथित रूप से पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को समर्थन देने से उसकी स्थिति मजबूत हुई है।
- इसलिए भारत को ट्रंप के कार्यकाल के दौरान पाकिस्तान के साथ किसी भविष्य के युद्ध के प्रभावों का सावधानीपूर्वक आकलन करना होगा।
- साथ ही, संचार के माध्यम खुले रखने और तनाव बढ़ने के जोखिम को कम करने के लिए सीमित कूटनीतिक संवाद बनाए रखना होगा।
4. पाकिस्तान के दावों का जवाब
- भारत द्वारा कश्मीर और आतंकवाद से संबंधित पाकिस्तानी बयानों का कड़ा जवाब दिए जाने की संभावना है, जैसा कि भारत ने SCO और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किया है।
5. चीन की चुनौती
- पाकिस्तान की तुलना में चीन की चुनौती भारत के लिए अधिक महत्वपूर्ण है, विशेषकर 2020 से जारी सीमा विवाद के कारण।
- इसलिए दोनों सीमाओं पर स्थिरता बनाए रखना भारत का एक रणनीतिक उद्देश्य बना हुआ है।
- बहुपक्षीय मंच तनाव कम करने और संवाद बनाए रखने का अवसर प्रदान करते हैं।
स्रोत:IE