पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
चर्चा में क्यों?
भारत और नीदरलैंड ने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने तथा सहयोग के नए क्षेत्रों की खोज के लिए द्विपक्षीय वार्ता की।
ऐतिहासिक सम्बन्ध
- भारत और नीदरलैंड ने वर्ष 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित किए।
- वर्ष 2022 में राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे हुए।
- भारत और नीदरलैंड के बीच मजबूत राजनीतिक, आर्थिक और वाणिज्यिक संबंध हैं। उच्च-स्तरीय पारस्परिक आदान-प्रदान ने दोनों देशों के बीच बहुआयामी साझेदारी को गति प्रदान की है।
- जल, कृषि और स्वास्थ्य (WAH) तकनीक और नवाचार के अलावा सहयोग के तीन प्राथमिक क्षेत्र हैं।
सहयोग के क्षेत्र
नवीकरणीय ऊर्जा
- भारत और नीदरलैंड के बीच नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत सहयोग है।
- नीदरलैंड ने मई 2018 में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- भारत वैश्विक अनुकूलन आयोग (GCA) के सह-संयोजक देशों में से एक है, जिसका मुख्यालय नीदरलैंड में है।
- नीदरलैंड वर्ष 2021 में आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) में शामिल हुआ।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष
- नीदरलैंड वैज्ञानिक अनुसंधान संगठन (NWO) भारत में अनुसंधान के लिए प्रमुख राष्ट्रीय वित्तपोषण संस्थाओं जैसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEITY) के साथ सहयोग करता है।
- भारत और नीदरलैंड ने फरवरी 2025 में नई दिल्ली में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर संयुक्त कार्य समूह (JWG) की 9वीं बैठक आयोजित की।
रणनीतिक सहयोग
- भारत और नीदरलैंड ने 2026–2030 के लिए अपने संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” तक बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। इसका ध्यान नियमित उच्च-स्तरीय संवाद और प्रमुख क्षेत्रों में मजबूत सहयोग पर होगा।
- नीदरलैंड ने 2020 में हिंद-प्रशांत पर अपने दिशा-निर्देश जारी किए, जिनमें भारत को एक प्रमुख साझेदार के रूप में पहचाना गया है। भारत ने इन दिशा-निर्देशों का स्वागत किया।
- दोनों पक्ष स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत के लिए एक-दूसरे के दृष्टिकोण में निकट समानता को स्वीकार करते हैं।
व्यापार और वाणिज्यिक संबंध
- व्यापार और वाणिज्यिक संबंध दोनों देशों के जीवंत संबंधों की आधारशिला हैं।
- नीदरलैंड दुनिया में भारत का 11वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
- यह वैश्विक स्तर पर भारत का तीसरा सबसे बड़ा वस्तु निर्यात गंतव्य और यूरोप में सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है।
- वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान नीदरलैंड के साथ भारत का कुल वस्तु व्यापार 27.8 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
- नीदरलैंड के साथ कुल वस्तु व्यापार भारत के कुल वस्तु व्यापार का 2.40% है।
- नीदरलैंड भारत में चौथा सबसे बड़ा निवेशक है।
बंदरगाह/जहाजरानी/अंतर्देशीय जलमार्ग
- भारत और नीदरलैंड ने 2008 में बंदरगाहों, समुद्री परिवहन और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे हाल ही में अक्टूबर 2025 में फिर से विस्तारित किया गया।
- इसमें अनुसंधान एवं विकास, जहाज निर्माण, नवाचार और स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया गया है।
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण
- कृषि दोनों पक्षों द्वारा द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए चिन्हित किए गए प्रमुख क्षेत्रों में से एक है। भारत और नीदरलैंड संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से कृषि के क्षेत्र में सहयोग करते हैं।
- हाल ही में दोनों पक्षों ने कृषि और बागवानी क्षेत्रों में 25 उत्कृष्टता केंद्रों (CoEs) की स्थापना की दिशा में हुई प्रगति पर चर्चा की।
- इसके अलावा, दोनों पक्षों ने सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करने वाली एक कार्ययोजना के माध्यम से बीज क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएँ तलाशने पर सहमति व्यक्त की, ताकि प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक स्पष्ट ढाँचा तैयार किया जा सके।
स्वास्थ्य सेवा में सहयोग
- भारत और नीदरलैंड स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन के तहत एक संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से काम करते हैं। इसका उद्देश्य संक्रामक रोगों और रोगाणुरोधी प्रतिरोध से जुड़ी उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों पर वैश्विक अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देना है।
- इस समझौता ज्ञापन को हाल ही में 2025 में विस्तारित किया गया।
भारतीय समुदाय और विद्यार्थी
- नीदरलैंड में मुख्यभूमि यूरोप में भारतीय मूल के लोगों की सबसे बड़ी आबादी रहती है।
- यहाँ भारतीय प्रवासी समुदाय के लगभग 3,00,000 सदस्य रहते हैं, जिनमें लगभग 2,00,000 सुरिनामी हिंदुस्तानी समुदाय के सदस्य शामिल हैं, जो अब डच समाज में पूरी तरह एकीकृत हो चुके हैं।
संबंधों का उन्नयन
- भारत और नीदरलैंड ने 2026–2030 के लिए समयबद्ध रणनीति के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक उन्नत किया।
- सहयोग में राजनीतिक संवाद, व्यापार और निवेश, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य, औषधियाँ, नई प्रौद्योगिकियाँ, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, शिक्षा और अनुसंधान शामिल हैं।
- दोनों पक्ष हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, चक्रीय अर्थव्यवस्था, सतत शहरी विकास और हरित एवं डिजिटल समुद्री गलियारे पर सहयोग को गहरा करेंगे।
- वे रक्षा, समुद्री और सुरक्षा सहयोग का भी विस्तार करेंगे, जिसमें आतंकवाद-रोधी प्रयास और साइबर सुरक्षा शामिल हैं।
- रणनीति विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और कुशल पेशेवरों के निष्पक्ष प्रवासन और आवागमन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ सांस्कृतिक, पर्यटन, विरासत और जन-से-जन संपर्क को बढ़ाने को भी प्रोत्साहित करती है। इससे लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं, नवाचार, निवेश और सतत विकास को समर्थन मिलेगा।
साझेदारी का महत्व
आर्थिक प्रवेश द्वार और व्यापार सुविधा
- नीदरलैंड भारत के लिए यूरोपीय संघ के बाजार तक आर्थिक और लॉजिस्टिक प्रवेश द्वार है, जबकि डच उद्यमों को भारत के विशाल उपभोक्ता आधार और कुशल श्रमिकों के समूह तक पहुँच प्राप्त होती है।
ऊर्जा संक्रमण और जलवायु अनुकूलन में तेजी
- नीदरलैंड की जल एवं नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी विशेषज्ञता और भारत के विशाल हरित ऊर्जा स्तर का संयोजन दोनों पक्षों के लिए कार्बन उत्सर्जन में कमी और जलवायु अनुकूलन को गति प्रदान करता है।
महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं का लचीलापन
- सेमीकंडक्टर, स्मार्ट विनिर्माण और डिजिटल अवसंरचना में रणनीतिक तकनीकी संबंध एकल देश पर निर्भरता से उत्पन्न वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के जोखिम को कम करते हैं।
हिंद-प्रशांत में समानता और रणनीतिक अभिसरण
- स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत व्यवस्था के प्रति साझा प्रतिबद्धता यूरोपीय समुद्री नीति को भारत के क्षेत्रीय नेतृत्व से जोड़ती है।
मुद्दे और चिंताएँ
यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) का प्रभाव
- यूरोपीय संघ की कार्बन कर नीतियाँ यूरोपीय संघ के बाजार में भारत के इस्पात, एल्युमीनियम और विनिर्मित वस्तुओं के निर्यात के लिए चुनौती उत्पन्न करती हैं।
निर्यात नियंत्रण और नियामक बाधाएँ
- महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े निर्यात नियंत्रण गैर-नाटो देशों को इन प्रौद्योगिकियों के सुचारु हस्तांतरण में बाधा डाल सकते हैं।
विलंब
- भारत में बड़े शहरी जल और अवसंरचना परियोजनाओं को नौकरशाही विलंब और स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, जिसका कारण बहु-स्तरीय प्रशासनिक ढाँचा है।
विदेश नीति के उद्देश्यों में टकराव
- भू-राजनीतिक हितों का मिश्रण—नीदरलैंड का नाटो और यूरोपीय सुरक्षा स्थिति पर ध्यान तथा भारत की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक स्वायत्तता पर केंद्रित नीति—राजनयिक चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकता है।
निष्कर्ष
- भारत-नीदरलैंड संबंध पारंपरिक आर्थिक संबंध से आगे बढ़कर एक समग्र, प्रौद्योगिकी-आधारित साझेदारी के रूप में विकसित हुए हैं।
- दोनों देश व्यापार की बाधाओं को और कम करने तथा व्यापार तंत्र को जलवायु उद्देश्यों के अनुरूप बनाने के लिए उपयुक्त स्थिति में हैं, जिससे पूरे यूरोप और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सतत आर्थिक विकास को गति दी जा सके।
स्रोत: PIB