भारत में एक ही मानक समय: सरकारी एवं वाणिज्यिक उपयोग के लिए IST अनिवार्य 

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी; GS2/शासन

संदर्भ 

  • हाल ही में, केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जिसके अंतर्गत भारत के लिए IST को एकमात्र आधिकारिक समय-संदर्भ बनाया गया है।
    • ये नियम विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 की धारा 52 के अंतर्गत अधिसूचित किए गए हैं।

विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009

  • यह भारत में बाट एवं माप के मानकों तथा उनके उपयोग से संबंधित मामलों को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है।
  • यह अधिनियम वर्ष 2011 में प्रभावी हुआ और इसने पहले के बाट एवं माप मानक अधिनियम, 1976 तथा बाट एवं माप मानक (प्रवर्तन) अधिनियम, 1985 का स्थान लिया।
  • अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों में मानकीकरण, अंतरराष्ट्रीय इकाई प्रणाली (SI) पर आधारित विधिक इकाइयाँ, सत्यापन एवं मुहरांकन, विनिर्माण एवं बिक्री, पैकेज्ड वस्तुएँ, उपभोक्ता संरक्षण, अपराध एवं दंड, प्रवर्तन तंत्र तथा अंतर-राज्यीय एकरूपता शामिल हैं।

नए नियमों में क्या प्रावधान हैं?

  • इन नियमों का उद्देश्य वर्ष 2025 में घोषित ‘एक राष्ट्र, एक समय’ व्यवस्था को संस्थागत रूप देना है।
    • इनके अंतर्गत सरकारी विभागों और महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए एक ऐसे सत्यापन योग्य एवं अधिकृत भारतीय मानक समय (IST) संदर्भ का उपयोग अनिवार्य किया गया है, जिसे राष्ट्रीय समय-संदर्भ से जोड़ा जा सके।
  • ये नियम राजपत्र में प्रकाशित होने के 180 दिन पश्चात लागू होंगे। इससे संस्थानों को अपनी प्रणालियों को उन्नत करने और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक समय मिलेगा।
  • IST का रखरखाव वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) द्वारा किया जाता है, जो भारत की राष्ट्रीय समय-निर्धारक संस्था है।
  • NPL UTC (NPLI) का रखरखाव करता है, जो भारत में समन्वित सार्वभौमिक समय (UTC) का राष्ट्रीय रूपांतरण है। भारतीय मानक समय का निर्धारण UTC (NPLI) + 5:30 घंटे के रूप में किया जाता है।

सटीक समय समन्वयन क्यों महत्वपूर्ण है?

  • आधुनिक डिजिटल अवसंरचना केवल सही समय पर निर्भर नहीं करती, बल्कि अत्यधिक सटीक और समन्वित टाइमस्टैम्प पर भी निर्भर करती है।
  • बैंकिंग एवं डिजिटल भुगतान: टाइमस्टैम्प यह निर्धारित करने में सहायता करते हैं कि कोई लेन-देन कब शुरू और कब संसाधित किया गया।
  • पूंजी बाजार: सटीक समय से ऑर्डर और ट्रेड के क्रम को निर्धारित करने तथा नियामकीय जांच में सहायता मिलती है।
  • दूरसंचार: समन्वित घड़ियाँ सर्वर लॉग को आपस में जोड़ने और किसी विशेष समय पर IP पते के उपयोग जैसी घटनाओं की पहचान करने में सहायता करती हैं।
  • विद्युत ग्रिड: सटीक टाइमस्टैम्प संचालन के समन्वय और प्रणालीगत विफलताओं के पुनर्निर्माण में सहायता करते हैं।
  • परिवहन: रेलवे और हवाई अड्डों को भौगोलिक रूप से दूर-दराज स्थित प्रणालियों के बीच समन्वित समय-सारणी की आवश्यकता होती है।
  • सरकारी एवं विधिक अभिलेख: एक साझा समय-संदर्भ आधिकारिक अभिलेखों की विश्वसनीयता को सुदृढ़ करता है।
  • साइबर सुरक्षा: समन्वित लॉग साइबर घटनाओं के दौरान घटनाओं के क्रम को पुनर्निर्मित करने में सहायता कर सकते हैं।
    • इस प्रकार, समय का समन्वयन अब केवल घड़ियों की सटीकता का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह तीव्रता से अवसंरचना और राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता बनता जा रहा है।

भारत IST का प्रसार कैसे करेगा?

  • CSIR-NPL राष्ट्रीय संदर्भ समय का स्रोत बना रहेगा, जबकि प्रसार संबंधी अवसंरचना के माध्यम से महत्वपूर्ण उपयोगकर्ताओं तक IST पहुँचाया जाएगा।
  • NPL और ISRO के सहयोग से पाँच क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशालाओं (RRSLs)—अहमदाबाद, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, फरीदाबाद और गुवाहाटी—में समय-प्रसार प्रयोगशालाएँ स्थापित की जा रही हैं।
  • एक महत्वपूर्ण पहल बेंगलुरु में हाल ही में शुरू किया गया व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी-आधारित IST प्रसार प्रदर्शन नेटवर्क है।

व्हाइट रैबिट प्रौद्योगिकी क्या है?

  • व्हाइट रैबिट एक ओपन-सोर्स प्रौद्योगिकी है, जो फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क के माध्यम से उप-नैनोसेकंड स्तर तक घड़ियों के समन्वयन में सक्षम बनाती है।
  • यह सिग्नल के प्रसार में लगने वाले समय को मापकर उसकी भरपाई करती है, जिससे भौगोलिक रूप से अलग-अलग स्थित कंप्यूटर अत्यंत उच्च सटीकता के साथ एक-दूसरे से समन्वित रह सकते हैं।
  • इसकी फाइबर-आधारित संरचना प्रत्येक स्थान पर उपग्रह संकेतों पर निर्भरता को भी कम करती है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि उपग्रह-आधारित नेविगेशन संकेत जैमिंग और स्पूफिंग के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं।

NavIC की भूमिका और सामरिक महत्व

  • नियम प्रसार के लिए भारतीय नक्षत्र में नेविगेशन (NavIC) तथा अन्य स्वीकृत भारतीय समय-स्रोतों के उपयोग की अनुमति देते हैं। इससे निम्नलिखित को मिलाकर अधिक सुदृढ़ और लचीली संरचना तैयार की जा सकती है:
    • NPL परमाणु घड़ी संदर्भ → स्थलीय फाइबर नेटवर्क/व्हाइट रैबिट + NavIC → समन्वित महत्वपूर्ण अवसंरचना
  • यह दृष्टिकोण विदेशी उपग्रह-नेविगेशन प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने तथा भारत की सामरिक स्वायत्तता, साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुदृढ़ता को सुदृढ़ करने में सहायक हो सकता है।

एक समय-संदर्भ से जुड़ी चुनौतियाँ एवं चिंताएँ

  • सौर समय से असंगति: पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों में घड़ी के समय तथा सूर्योदय-सूर्यास्त के वास्तविक समय के बीच पर्याप्त अंतर हो सकता है।
  • क्षेत्रीय असुविधा: निश्चित IST स्थानीय कार्य और विद्यालयी समय-सारणी के लिए प्रत्येक क्षेत्र में समान रूप से उपयुक्त नहीं हो सकता।
  • उत्पादकता संबंधी चिंताएँ: विभिन्न क्षेत्रों में दिन के प्रकाश की उपलब्धता में पर्याप्त भिन्नता हो सकती है।
  • केंद्रीकरण का जोखिम: एक राष्ट्रीय समय-संदर्भ पर अत्यधिक निर्भरता के लिए सुदृढ़ बैकअप प्रणालियों की आवश्यकता होगी।
  • कार्यान्वयन लागत: पुरानी प्रणालियों को उन्नत करने और नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने में पर्याप्त व्यय हो सकता है।
  • भौगोलिक सीमा: एकल समय क्षेत्र भारत के व्यापक पूर्व-पश्चिम भौगोलिक विस्तार के अनुरूप स्थानीय आवश्यकताओं को पूरी तरह संबोधित नहीं कर सकता।
  • कार्यान्वयन के लिए आवश्यक कदम:
    • पुरानी घड़ियों और IT अवसंरचना को उन्नत करना;
    • विभिन्न क्षेत्रों में परस्पर-संचालनीय समय मानकों की स्थापना करना;
    • समय-संदर्भ नेटवर्क की साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना;
    • नेटवर्क व्यवधान के दौरान वैकल्पिक समय-स्रोतों की व्यवस्था बनाए रखना;
    • छोटे संस्थानों के लिए अनुपालन लागत का प्रबंधन करना।

आगे की राह

  • ‘एक घड़ी’ व्यवस्था के कार्यान्वयन के लिए क्षेत्र-विशिष्ट तकनीकी मानकों, विश्वसनीय वैकल्पिक समय-स्रोतों, साइबर सुरक्षा उपायों और सार्वजनिक तथा निजी प्रणालियों के बीच परस्पर-संचालनीयता की आवश्यकता होगी।
  • उद्देश्य केवल ‘एक घड़ी’ स्थापित करना नहीं होना चाहिए, बल्कि एक ऐसी लचीली, सुरक्षित और सत्यापन योग्य राष्ट्रीय समय-निर्धारण व्यवस्था विकसित करना होना चाहिए, जो देश की महत्वपूर्ण अवसंरचना एवं डिजिटल अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक आवश्यकताओं को पूरा कर सके।

Source: BS

 

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