“भारत के सेमीकंडक्टर केंद्र के रूप में साणंद: ‘सिलिकॉन वैली’ तक एक सेतु”

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने गुजरात के साणंद में केन्स सेमिकॉन द्वारा स्थापित सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट सुविधा का उद्घाटन किया।

परिचय

  • यह परियोजना इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) का भाग है और भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • साणंद को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में स्थापित किया जा रहा है।
    • प्रधानमंत्री मोदी ने इसे “साणंद और सिलिकॉन वैली के बीच सेतु” के रूप में वर्णित किया।
  • लगभग ₹3,300 करोड़ के निवेश से निर्मित यह संयंत्र इंटेलिजेंट पावर मॉड्यूल्स का निर्माण करेगा और अमेरिका सहित वैश्विक बाजारों में चिप्स की आपूर्ति करेगा।

भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र: वृद्धि एवं संभावनाएँ

  • वर्तमान बाजार आकार: ₹4.5 लाख करोड़ (~$50–55 अरब)
  • अनुमानित वृद्धि: ₹9 लाख करोड़ (~$100+ अरब) तक, वर्ष 2030 तक
    • वृद्धि के प्रमुख कारक: इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) पारिस्थितिकी तंत्र
  • भारत की वैश्विक हिस्सेदारी: ~3% (मुख्यतः डिज़ाइन आधारित)
  • वैश्विक सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इंजीनियरों में भारत का योगदान: ~20%

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM)

  • प्रारंभ: 2021, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा
  • उद्देश्य: संपूर्ण सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण — डिज़ाइन, फैब्रिकेशन, असेंबली, टेस्टिंग, पैकेजिंग (ATMP)
  • वित्तीय प्रावधान: $10 अरब (~₹76,000 करोड़) प्रोत्साहन पैकेज
  • घटक:
    • सेमीकंडक्टर फैब्स
    • डिस्प्ले फैब्स
    • ATMP/OSAT (असेंबली, टेस्टिंग, पैकेजिंग)
    • डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI)
  • प्रगति: गुजरात, असम और कर्नाटक में अनेक परियोजनाएँ स्वीकृत
  • कुल निवेश पाइपलाइन: ₹1.5–1.6 लाख करोड़
  • ISM 2.0 (केंद्रीय बजट 2026–27): उपकरण एवं सामग्री पर ध्यान केंद्रित कर पूर्ण भारतीय सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण
    • लक्ष्य: 3-नैनोमीटर और 2-नैनोमीटर तकनीकी नोड्स प्राप्त करना; 2035 तक शीर्ष सेमीकंडक्टर राष्ट्रों में शामिल होना

प्रमुख सरकारी योजनाएँ

  • डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना: घरेलू चिप डिज़ाइन स्टार्टअप्स को वित्तीय एवं अवसंरचनात्मक सहयोग; 100+ भारतीय डिज़ाइन कंपनियों का लक्ष्य
  • PLI योजना (इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हेतु): मोबाइल विनिर्माण वृद्धि से जुड़ा मांग-पक्ष पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ करना
  • चिप्स-टू-स्टार्टअप कार्यक्रम: EDA टूल्स एवं फैब्रिकेशन सहयोग; 300+ संस्थानों को शामिल
  • राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन एवं रेयर अर्थ कॉरिडोर: चीन (रेयर अर्थ) और ताइवान (फैब्स) पर निर्भरता कम करना

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला एवं रणनीतिक स्थिति

  • भारत की सदस्यता पैक्स सिलिका (अमेरिका-नेतृत्व वाली पहल) में, जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर एवं AI सहित महत्वपूर्ण तकनीकों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना है
  • महामारी एवं भू-राजनीतिक संघर्षों से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है — ऐसे में भारत एक लोकतांत्रिक एवं विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभर रहा है
  • भारत का लक्ष्य: ताइवान एवं दक्षिण कोरिया जैसे पूर्वी एशियाई केंद्रों का विश्वसनीय विकल्प बनना

चुनौतियाँ

  • उन्नत फैब्रिकेशन सुविधाओं का अभाव; उच्च पूंजी आवश्यकता (~$5–10 अरब प्रति फैब)
  • वर्तमान में ~90% चिप्स आयातित; ताइवान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका की तुलना में तकनीकी अंतराल
  • लिथोग्राफी उपकरण एवं रेयर अर्थ मिनरल्स पर निर्भरता

निष्कर्ष

  • साणंद सेमीकंडक्टर सुविधा भारत के उपभोक्ता से उत्पादक बनने की दिशा में परिवर्तन को दर्शाती है।
  • भारत का लक्ष्य है कि वह एक विश्वसनीय सेमीकंडक्टर केंद्र बने, “मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड” की दृष्टि के अनुरूप — सुदृढ़ नीतिगत सहयोग, वैश्विक साझेदारी और आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण के साथ।

स्रोत: TH

 

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