हरित अमोनिया के माध्यम से भारत के उर्वरक क्षेत्र का कार्बनमुक्तिकरण

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण; कृषि

संदर्भ

  • भारत ने अपने उर्वरक क्षेत्र के कार्बनमुक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उर्वरक कंपनियों और हरित अमोनिया उत्पादकों के बीच ग्रीन अमोनिया परचेज एग्रीमेंट्स (GAPA) और ग्रीन अमोनिया सप्लाई एग्रीमेंट्स (GASA) का आदान-प्रदान किया गया है।
    • SIGHT कार्यक्रम के अंतर्गत सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) इन समझौतों के क्रियान्वयन हेतु प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया आयोजित करेगा।

परिचय

  • भारत लगभग 165–170 लाख मीट्रिक टन (LMT) फॉस्फेटिक और पोटैसिक (P&K) उर्वरक जैसे DAP और NPK का उत्पादन करता है, परंतु अमोनिया आयात पर अत्यधिक निर्भर है।
  • वैश्विक व्यवधानों के कारण मूल्य अस्थिरता और आपूर्ति अनिश्चितता उत्पन्न हुई है, जिसका सीधा प्रभाव उर्वरक उपलब्धता एवं खाद्य सुरक्षा पर पड़ता है।
    • अतः अमोनिया आयात में कमी ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • यह पहल राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के अंतर्गत आयात निर्भरता कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और सतत उर्वरक उत्पादन को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखती है।

हरित अमोनिया क्या है?

  • अमोनिया (NH₃) उर्वरकों का एक प्रमुख घटक है। हरित अमोनिया पूर्णतः नवीकरणीय और कार्बन-मुक्त प्रक्रियाओं से उत्पादित होता है।
  • सामान्य विधि में जल-विद्युत अपघटन से प्राप्त हाइड्रोजन और वायु से पृथक नाइट्रोजन को हैबर-बॉश प्रक्रिया द्वारा उच्च तापमान एवं दबाव में अभिक्रियित किया जाता है, जिसमें केवल सतत विद्युत का उपयोग होता है।

हरित अमोनिया संक्रमण के लाभ

  • पर्यावरणीय स्थिरता: पारंपरिक अमोनिया उत्पादन वैश्विक CO₂ उत्सर्जन का ~2% योगदान करता है। प्रत्येक टन अमोनिया से 1.9–2.6 टन CO₂ उत्सर्जित होता है।
  • आर्थिक लाभ: हरित अमोनिया की ओर संक्रमण से विदेशी मुद्रा की उल्लेखनीय बचत (~$2.5 अरब एक दशक में) संभव है।
  • औद्योगिक विकास: हरित अमोनिया संक्रमण विनिर्माण विस्तार को बढ़ावा देता है (~5 MMT हरित हाइड्रोजन क्षमता और ~125 GW नवीकरणीय ऊर्जा वृद्धि 2030 तक), बड़े निवेश आकर्षित करता है और ~6 लाख रोजगार सृजित करता है।
  • आत्मनिर्भरता: उर्वरक और ऊर्जा क्षेत्र में आयात निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर भारत को सुदृढ़ करता है, जिससे आर्थिक लचीलापन और रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ती है।

हरित हाइड्रोजन उत्पादन की चुनौतियाँ

  • उच्च लागत: हरित अमोनिया वर्तमान में पारंपरिक अमोनिया से 2–3 गुना महँगा है, मुख्यतः हरित हाइड्रोजन उत्पादन लागत और महंगे इलेक्ट्रोलाइज़र प्रौद्योगिकी के कारण।
  • भंडारण और परिवहन: अमोनिया विषाक्त और संक्षारक है, जिसके लिए विशेष भंडारण (दबावयुक्त/क्रायोजेनिक टैंक) और प्रबंधन अवसंरचना आवश्यक है।
  • सीमित निजी क्षेत्र भागीदारी: बड़े पैमाने पर हरित अमोनिया संयंत्र हेतु ~$1–1.5 अरब की उच्च प्रारंभिक पूंजी निवेश आवश्यकता।
  • लंबी परियोजना अवधि और अनिश्चित मांग: निवेशकों की रुचि धीमी पड़ती है।

निष्कर्ष

  • हरित अमोनिया की ओर संक्रमण भारत को उर्वरक क्षेत्र का कार्बनमुक्तिकरण करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, आयात निर्भरता कम करने और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने का अद्वितीय अवसर प्रदान करता है।
  • इस पहल को सतत रूप से विस्तार देने हेतु रणनीतिक नीतिगत सहयोग, तकनीकी नवाचार और निजी क्षेत्र की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। इससे भारत हरित उर्वरक उत्पादन में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति प्राप्त कर सकता है।

स्रोत: PIB

 

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