पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
समाचारों में
- भारत में प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गमों (IPOs) के माध्यम से धन एकत्रित करने वाली कंपनियों की संख्या में वृद्धि के बीच आईपीओ का अनौपचारिक ग्रे मार्केट तीव्रता से लोकप्रिय हो रहा है।
- लघु निवेशक कल्याण संघ (SIREN) ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से कथित अवैध कारोबार, बाजार में हेरफेर और बढ़े हुए ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) के विरुद्ध हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
आईपीओ क्या है?
- प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से कोई असूचीबद्ध कंपनी प्रथम बार आम जनता को अपने शेयर जारी करती है और किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होती है।
- यह प्राथमिक बाजार की एक व्यवस्था है, जिसके माध्यम से कंपनियाँ पूँजी एकत्रित करती हैं तथा निवेशकों को कंपनी में स्वामित्व प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती हैं।
आईपीओ के प्रकार
- नया निर्गम : कंपनी नए शेयर जारी करती है और उनसे प्राप्त धनराशि का उपयोग व्यावसायिक विस्तार, पूँजीगत व्यय, ऋण चुकाने अथवा अनुसंधान एवं विकास के लिए करती है।
- बिक्री हेतु प्रस्ताव : इसमें वर्तमान शेयरधारक, जैसे प्रवर्तक या निजी इक्विटी निवेशक, अपने शेयर आम जनता को बेचते हैं। इससे प्राप्त धनराशि कंपनी के बजाय शेयर बेचने वाले शेयरधारकों को मिलती है।
आईपीओ के उद्देश्य
- दीर्घकालिक इक्विटी पूँजी एकत्रण।
- व्यावसायिक विस्तार और पूँजीगत व्यय का वित्तपोषण करना।
- ऋण चुकाना तथा कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार करना।
- संस्थापकों, प्रवर्तकों और शुरुआती निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी से बाहर निकलने का अवसर प्रदान करना।
आईपीओ निवेशकों की श्रेणियाँ
- QIBs (योग्य संस्थागत खरीदार): इनमें म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियाँ और पात्र वित्तीय संस्थान शामिल होते हैं।
- NIIs (गैर-संस्थागत निवेशक): इनमें उच्च निवल संपत्ति वाले व्यक्ति शामिल होते हैं।
- खुदरा व्यक्तिगत निवेशक: ऐसे निवेशक, जो निर्धारित खुदरा निवेश सीमा के अंदर आवेदन करते हैं।
- एंकर निवेशक : ऐसे पात्र योग्य संस्थागत खरीदार (QIBs), जो सार्वजनिक निर्गम खुलने से पहले निवेश करते हैं।
आईपीओ कैसे कार्य करता है?

आईपीओ ग्रे मार्केट क्या है?
- आईपीओ ग्रे मार्केट एक अनौपचारिक और अनियमित बाजार है, जहाँ ऐसी कंपनियों के शेयरों का कारोबार किया जाता है, जो अभी तक स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं हुई हैं। यह कारोबार मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों के बाहर होता है।
- इसमें लेन-देन अनौपचारिक नेटवर्क, दलालों और निजी समझौतों के माध्यम से किया जाता है।
- इस प्रकार के कारोबार में आधिकारिक स्टॉक एक्सचेंज की व्यवस्था का उपयोग नहीं किया जाता है।
- ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP): यह वह अनौपचारिक अतिरिक्त कीमत है, जिस पर किसी आईपीओ के शेयरों का स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने से पहले कारोबार किया जाता है।
- निवेशक अक्सर GMP का उपयोग आईपीओ के संभावित लिस्टिंग मूल्य का अनुमान लगाने के लिए करते हैं।
ग्रे मार्केट कैसे कार्य करता है?
- मान लीजिए कि कोई कंपनी प्रति शेयर ₹1,000 के निर्गम मूल्य पर आईपीओ जारी करती है।
- ग्रे मार्केट में उस शेयर का कारोबार ₹300 के प्रीमियम पर होता है।
- इस प्रकार, शेयर का अनौपचारिक अनुमानित लिस्टिंग मूल्य ₹1,300 हो जाता है।
- यदि शेयर ₹1,400 पर सूचीबद्ध होता है, तो खरीदार को ₹100 का लाभ होता है।
- यदि शेयर ₹1,200 पर सूचीबद्ध होता है, तो खरीदार को ₹100 की हानि होती है।
ग्रे मार्केट का विस्तार क्यों हो रहा है?
- आईपीओ में तीव्रता: सार्वजनिक निर्गमों की बढ़ती संख्या सट्टा गतिविधियों को आकर्षित करती है।
- लिस्टिंग लाभ की अपेक्षा : निवेशक आईपीओ के माध्यम से शीघ्र लाभ कमाने की अपेक्षा रखते हैं।
- सूचना विषमता : खुदरा निवेशक माँग का आकलन करने के लिए अनौपचारिक GMP आँकड़ों पर निर्भर रहते हैं।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म : व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सार्वजनिक ट्रैकिंग पोर्टल अनौपचारिक प्रीमियम संबंधी सूचनाओं के प्रसार को आसान बनाते हैं।
- नियामकीय कमियाँ : मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों के बाहर होने वाले लेन-देन की निगरानी करना कठिन होता है।
- बाजार में अत्यधिक उत्साह : उच्च GMP से शेयरों के मजबूत लिस्टिंग प्रदर्शन को लेकर निवेशकों की अपेक्षाएँ बढ़ जाती हैं।
प्रमुख चिंताएँ
- भ्रामक माँग संकेत : सार्वजनिक किए गए GMP को प्रायः आईपीओ की सुदृढ़ अभिदान स्थिति का प्रमाण मान लिया जाता है, जबकि ये आँकड़े सत्यापित खरीद आदेशों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। खुदरा निवेशक प्रचार और उत्साह को कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति समझ लेते हैं तथा मूल्यांकन, वित्तीय विवरणों एवं व्यावसायिक जोखिमों की जाँच नहीं करते हैं।
- बाजार में हेरफेर : कृत्रिम रूप से प्रीमियम बढ़ाकर बाजार में अनावश्यक उत्साह और माँग का वातावरण बनाया जा सकता है।
- खुदरा निवेशकों की असुरक्षा : शीघ्र लाभ कमाने का आकर्षण अनुभवहीन निवेशकों को ऋण लेने या अपनी बचत निवेश करने के लिए प्रेरित करता है।
- उदाहरण के लिए, रिलायंस पावर के आईपीओ में सूचीबद्ध होने से पहले भारी प्रीमियम के बावजूद, सूचीबद्धता के समय शेयर की कीमत ₹450 के निर्गम मूल्य से लगभग ₹100 नीचे गिर गई थी।
- वित्तीय स्थिरता और बाजार की निष्पक्षता : सट्टा गतिविधियाँ प्राथमिक बाजार में निवेशकों के विश्वास को कमजोर कर सकती हैं। इससे उचित मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है तथा बाजार में निष्पक्ष भागीदारी बाधित हो सकती है।
आगे की राह
- कानूनी स्थिति स्पष्ट करना : SEBI को एक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना चाहिए, जिसमें अनुमेय गतिविधियों और दंडनीय उल्लंघनों के बीच अंतर स्पष्ट किया जाए।
- अंतर-एजेंसी समन्वय : SEBI, राज्य पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) को सूचनाओं का आदान-प्रदान करना चाहिए तथा समन्वित रूप से कार्रवाई करनी चाहिए।
- प्लेटफॉर्म की जवाबदेही : GMP प्रकाशित करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों के लिए परामर्श तथा आपत्तिजनक सामग्री हटाने संबंधी मानदंड निर्धारित किए जाने चाहिए।
- निवेशक जागरूकता : SEBI और स्टॉक एक्सचेंजों को निवेशकों के लिए जागरूकता संबंधी परामर्श जारी करना चाहिए, जिसमें स्पष्ट किया जाए कि GMP एक विश्वसनीय संकेतक नहीं है और आईपीओ में सूचीबद्धता से लाभ की कोई गारंटी नहीं होती है।
स्रोत: IE
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