पाठ्यक्रम: GS3/ रक्षा
समाचारों में
- अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के विभिन्न स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई आमने-सामने की झड़पों ने ग्रे-ज़ोन वॉरफेयर रणनीति से जुड़ी चिंताओं को उजागर किया।
ग्रे-ज़ोन वॉरफेयर रणनीति (GZW) क्या है?
- यह संघर्ष का एक ऐसा स्वरूप है, जो पारंपरिक युद्ध की सीमा से नीचे रहता है, लेकिन अस्पष्टता, उत्तरदायित्व से मना करने की क्षमता और दबाव के माध्यम से रणनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रयास करता है।
- चीन की इस रणनीति का आधार ‘अप्रतिबंधित वॉरफेयर’ की अवधारणा है। इसके प्रमुख साधनों में राजनीतिक कार्रवाई, आर्थिक दबाव, साइबर अभियान और गैर-राज्य अभिकर्ताओं का उपयोग शामिल हैं।
- चीनी जनमुक्ति सेना (PLA) ‘तीन वॉरफेयर’ की रणनीति का भी अनुसरण करती है। इसमें जनमत युद्ध, मनोवैज्ञानिक युद्ध और विधिक युद्ध शामिल हैं।
चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर इसका उपयोग कैसे करता है?
- अवसंरचना: सीमा के निकट G695 और G580 जैसे नए राजमार्गों का निर्माण, रेलवे लाइनों का निर्माण तथा हवाई पट्टियों और हेलिपोर्टों का उन्नयन।
- ‘धीरे-धीरे अतिक्रमण और फिर बातचीत’ (Nibble and Negotiate): गश्त और निर्माण गतिविधियों के माध्यम से बुनियादी स्थिति में छोटे-छोटे बदलाव करना, जो समय के साथ जुड़कर बड़ा प्रभाव उत्पन्न करते हैं, लेकिन तत्काल किसी कड़ी प्रतिक्रिया को प्रेरित नहीं करते।
- सीमावर्ती गाँव: चीन ने लगभग 628 श्याओकांग गाँव विकसित किए हैं, जिनमें से अधिकांश अरुणाचल प्रदेश के सामने स्थित हैं। ये गाँव अग्रिम चौकियों के रूप में कार्य कर सकते हैं। इन्हें चीन के वर्ष 2022 के भूमि सीमा कानून का समर्थन प्राप्त है।
- स्थानों का नामकरण: अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों को चीनी नाम देना, ताकि मानचित्रों के माध्यम से अपने क्षेत्रीय दावों को समर्थन प्रदान किया जा सके।
- व्यापक गठबंधन: पाकिस्तान सहित एशिया, अफ्रीका और हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ आर्थिक एवं सुरक्षा संबंधों को मजबूत करना, ताकि भारत पर दो मोर्चों से दबाव बनाया जा सके।
इसका सामना करना कठिन क्यों है?
- उच्चस्तरीय बैठकों के माध्यम से कुछ संघर्ष-बिंदुओं पर तनाव कम हुआ है, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर मूलभूत मतभेद अब भी बने हुए हैं।
- वर्ष 2020 के बाद लद्दाख में पहले से निर्धारित गश्त-बिंदु अब दोनों पक्षों के लिए साझा संदर्भ-बिंदुओं के रूप में प्रभावी ढंग से कार्य नहीं करते।
- राजनयिक संबंधों में मधुरता सीमा पर शांति की गारंटी नहीं देती। चीन सीमा विवाद को व्यापक द्विपक्षीय संबंधों से अलग मुद्दे के रूप में देखता है।
भारत क्या कर सकता है?
- स्पष्ट राष्ट्रीय चीन रणनीति: भारत को ऐसी स्पष्ट राष्ट्रीय रणनीति विकसित करनी चाहिए, जो सैन्य तत्परता, सीमा प्रबंधन, अवसंरचना, कूटनीति और अर्थव्यवस्था के बीच समन्वय स्थापित करे।
- निगरानी एवं खुफिया क्षमताओं को सुदृढ़ करना: बेहतर निगरानी व्यवस्था, खुफिया सूचनाओं का प्रभावी संकलन, सैनिकों की त्वरित तैनाती तथा रसद संबंधी क्षमताओं में सुधार किया जाना चाहिए।
- सरल एवं प्रभावी कमान संरचना: सीमा प्रबंधन के लिए अधिक सुव्यवस्थित कमान व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। एक मत के अनुसार, सेना के परिचालन नियंत्रण के अंतर्गत एक समर्पित सीमा बल, गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाले भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की तुलना में अधिक तीव्रता से प्रतिक्रिया दे सकता है।
- विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता: भूमि और समुद्र, दोनों क्षेत्रों में विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जानी चाहिए, ताकि चीन द्वारा छोटे-छोटे क्षेत्रीय लाभ प्राप्त करने के प्रयास उसके लिए महँगे और जोखिमपूर्ण सिद्ध हों।
स्रोत: IE
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