कार्बन ग्रहण, उपयोग एवं भंडारण (CCUS)

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

समाचारों में

  • नीति आयोग ने इस्पात, सीमेंट, तेल एवं गैस, पेट्रोरसायन, रसायन तथा उर्वरक जैसे उन क्षेत्रों को कार्बन-मुक्त करने के लिए कार्बन ग्रहण, उपयोग एवं भंडारण (CCUS) को महत्त्वपूर्ण बताया है, जहाँ कार्बन उत्सर्जन को कम करना अपेक्षाकृत कठिन है।

कार्बन ग्रहण, उपयोग एवं भंडारण (CCUS)

  • यह उन विभिन्न प्रौद्योगिकियों के समूह को संदर्भित करता है, जिनके माध्यम से इस्पात, सीमेंट और विद्युत उत्पादन जैसे औद्योगिक क्षेत्रों से उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को ग्रहण किया जाता है, ताकि उसे वायुमंडल में प्रवेश करने से रोका जा सके।
  • ग्रहण की गई CO₂ को या तो पृथ्वी के अंदर भंडारित किया जाता है अथवा विभिन्न रूपों में औद्योगिक उपयोग के लिए पुनः प्रयुक्त किया जाता है।

CCUS की प्रक्रिया एवं प्रमुख चरण

  • कार्बन का ग्रहण: कार्बन ग्रहण, उपयोग एवं भंडारण (CCUS) प्रक्रिया में औद्योगिक उत्सर्जनों से CO₂ को अलग करना तथा उसके पश्चात उसका शुद्धीकरण, आर्द्रता हटाना और संपीड़न करना शामिल है।
  • ग्रहण से परिवहन तक: ग्रहण की गई CO₂ को पाइपलाइन, जहाज अथवा अन्य उपयुक्त माध्यमों से उपयोग संबंधी सुविधाओं या भंडारण स्थलों तक पहुँचाया जाता है।
  • कार्बन का उपयोग एवं स्थायी भंडारण: ग्रहण की गई CO₂ का उपयोग उन्नत तेल निष्कर्षण, खाद्य एवं पेय पदार्थों के निर्माण, यूरिया उत्पादन, हरित मेथनॉल निर्माण तथा कंक्रीट उत्पादन जैसे कार्यों में किया जा सकता है।
    • इसके अतिरिक्त, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए CO₂ को भूवैज्ञानिक संरचनाओं में गहराई में स्थायी रूप से भंडारित किया जा सकता है। इनमें समाप्त हो चुके तेल एवं गैस भंडार, गहरे लवणीय जलभृत तथा बेसाल्टिक चट्टानें शामिल हैं।
CCUS की प्रक्रिया एवं प्रमुख चरण

सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदम

  • भारत सरकार ने CCUS के विकास को आगे बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए अनुसंधान, नीतिगत सुधारों तथा औद्योगिक पहलों के माध्यम से विभिन्न कदम उठाए हैं।
    • ये उपाय वर्ष 2070 तक भारत के शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य को प्राप्त करने की आधारशिला को सुदृढ़ करते हैं।
  • केंद्रीय बजट 2026–27 — CCUS योजना: फरवरी 2026 में घोषित इस योजना के अंतर्गत वित्त मंत्रालय ने पाँच प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों—विद्युत, इस्पात, सीमेंट, तेल शोधन और रसायन—में कार्बन ग्रहण, उपयोग एवं भंडारण को बढ़ावा देने के लिए पाँच वर्षों में ₹20,000 करोड़ आवंटित किए।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग — CCUS अनुसंधान एवं विकास रूपरेखा: दिसंबर 2025 में प्रारंभ की गई इस रूपरेखा में CCUS से संबंधित अनुसंधान, वित्तपोषण, प्रौद्योगिकी विकास और कार्यान्वयन के लिए रणनीतिक दिशा प्रदान की गई है। इसमें व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रौद्योगिकियों की तैयारी, क्रांतिकारी नवाचारों तथा आवश्यक सहायक ढाँचों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
  • नीति आयोग — CCUS नीतिगत रूपरेखा एवं तंत्र: नवंबर 2022 में जारी इस रिपोर्ट में उन क्षेत्रों के गहन कार्बन-मुक्तीकरण की रणनीति के रूप में CCUS की समीक्षा की गई है, जहाँ उत्सर्जन कम करना कठिन है। इसमें CCUS के कार्यान्वयन के लिए क्षेत्र-विशिष्ट नीतिगत उपाय भी प्रस्तुत किए गए हैं।
  • राष्ट्रीय CCUS केंद्र: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से वर्ष 2022 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), बॉम्बे और जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (JNCASR), बेंगलुरु में CCUS केंद्र स्थापित किए गए। ये केंद्र CCUS संबंधी अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, प्रायोगिक स्तर पर प्रदर्शन तथा उद्योगों के साथ सहयोग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • भारत की CCUS पहल: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के संयुक्त नेतृत्व में भारत ने CCUS के क्षेत्र में एक व्यापक अनुसंधान अभियान प्रारंभ किया।
    • वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा मंच ‘मिशन इनोवेशन’ के अंतर्गत भारत ने 13 साझेदार देशों के साथ सहयोग किया। इस सहयोग का उद्देश्य CO₂ को ग्रहण करने, पृथक करने, सुरक्षित रूप से भंडारित करने तथा उसे उपयोगी मूल्यवर्धित सामग्रियों में परिवर्तित करने वाली प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाना था।
  • सीमेंट उद्योग के लिए पाँच CCU परीक्षण सुविधाओं का शुभारंभ: 11 मई 2025 को भारत ने सीमेंट उद्योग के लिए कार्बन ग्रहण एवं उपयोग (CCU) की पाँच परीक्षण सुविधाओं के पहले समूह का शुभारंभ किया।
    • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के नेतृत्व में इस पहल के अंतर्गत सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से प्रमुख सीमेंट कंपनियों और अग्रणी अनुसंधान संस्थानों को एक साथ लाया गया है, ताकि औद्योगिक स्तर पर कार्बन ग्रहण एवं उपयोग की प्रौद्योगिकियों का विकास और कार्यान्वयन किया जा सके।

स्रोत: PIB

 

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