खजुराहो के मंदिर
पाठ्यक्रम: GS1 / कला एवं संस्कृति
समाचारों में
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) खजुराहो के जवारी मंदिर में स्थित सिरविहीन विष्णु प्रतिमा के सिर का पुनर्निर्माण करने की योजना बना रहा है।
खजुराहो के मंदिर
- खजुराहो स्मारक समूह मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित हिंदू मंदिरों और जैन मंदिरों का एक समूह है।
- इन मंदिरों का निर्माण चंदेल वंश के शासनकाल में लगभग 950 से 1050 ईस्वी के बीच किया गया था। इन पर उकेरी गई मूर्तियों में देवी-देवताओं, दिव्य प्राणियों, सामान्य जनजीवन और प्रेमी युगलों को दर्शाया गया है। इन मूर्तियों को स्थानीय रूप से उपलब्ध बलुआ पत्थर पर अत्यंत कुशलता से तराशा गया है।
- खजुराहो के मंदिर यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल में शामिल हैं। ये नागर शैली की स्थापत्य कला, प्रतीकात्मकता और कामुक मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध हैं।
- 14वीं शताब्दी तक ये मंदिर एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बने रहे, लेकिन अंततः चंदेल वंश के पतन के साथ इनका महत्त्व भी कम हो गया।
- वर्ष 1838 में ब्रिटिश अभियंता टी. एस. बर्ट ने इन मंदिरों को पुनः खोजा। इसके बाद महाराजा प्रताप सिंह, अलेक्जेंडर कनिंघम तथा अन्य व्यक्तियों ने इनके अभिलेखीकरण और संरक्षण में योगदान दिया।
- खजुराहो और इसके मंदिरों का प्रारंभिक उल्लेख अबू रेहान अल-बिरूनी (1022 ईस्वी) तथा इब्न बतूता (1335 ईस्वी) के विवरणों में मिलता है।
- इन मंदिरों की मूर्तिकला हिंदू धर्म के जीवन के चार पुरुषार्थों को प्रतिबिंबित करती है, अर्थात् धर्म, काम, अर्थ और मोक्ष।
प्रमुख विशेषताएँ
- खजुराहो के मंदिरों को तीन समूहों में वर्गीकृत किया गया है—पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी समूह।
- पश्चिमी समूह: इसमें खजुराहो के कुछ भव्य मंदिर शामिल हैं, जिनमें देवी, वराह, लक्ष्मण, कंदारिया महादेव, पार्वती, विश्वनाथ और भैरव मंदिर प्रमुख हैं।
- कनिंघम ने लिखा था कि पश्चिमी समूह, जिसमें पूरी तरह ब्राह्मणवादी अर्थात् हिंदू मंदिर शामिल हैं, सिब-सागर के तट पर स्थित है।
- पूर्वी समूह: इसमें जवारी मंदिर शामिल है, जहाँ सिरविहीन विष्णु प्रतिमा स्थित है। इसके अतिरिक्त, इस समूह में हनुमान और शिव को समर्पित मंदिर भी हैं।
- इस समूह में गाँव के दक्षिण-पूर्व में स्थित जैन मंदिरों का एक समूह भी शामिल है, जिसे आधुनिक परिधि-दीवार से संरक्षित किया गया है।
- दक्षिणी समूह: इसमें दुलादेव और चतुर्भुज मंदिर शामिल हैं।
- पश्चिमी समूह: इसमें खजुराहो के कुछ भव्य मंदिर शामिल हैं, जिनमें देवी, वराह, लक्ष्मण, कंदारिया महादेव, पार्वती, विश्वनाथ और भैरव मंदिर प्रमुख हैं।
स्रोत: IE
अज़रबैजान
पाठ्यक्रम: GS1 / समाचारों में स्थान
संदर्भ
- विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हाल की बाकू यात्रा से अज़रबैजान के साथ भारत के संबंधों में नए सिरे से सुधार के संकेत मिले हैं। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में तनाव उत्पन्न हो गया था।
हालिया राजनयिक संवाद
- व्यापार एवं निवेश: दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग के विस्तार की संभावनाओं को स्वीकार करते हुए व्यापार और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने के अवसरों की पहचान की।
- ऊर्जा सहयोग: चर्चाओं में तेल एवं ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आर्थिक साझेदारी के अतिरिक्त क्षेत्रों की संभावनाओं का पता लगाने पर ध्यान दिया गया।
- संपर्क सुविधा: दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के संबंध में अधिक निकट समन्वय स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की।
- क्षमता निर्माण: भारत ने भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम में अज़रबैजान के पेशेवरों की भागीदारी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।
अज़रबैजान
- अज़रबैजान एशिया में स्थित एक देश है, जिसकी सीमाएँ चार देशों—रूस, जॉर्जिया, आर्मेनिया और ईरान—से लगती हैं।
- इसके पूर्व में कैस्पियन सागर स्थित है।
- देश के उत्तरी और पश्चिमी भाग का अधिकांश क्षेत्र काकेशस पर्वतों से आच्छादित है।
- यद्यपि अज़रबैजान की तटरेखा कैस्पियन सागर से लगती है, फिर भी इसे स्थलरुद्ध देश माना जाता है, क्योंकि न तो अज़रबैजान और न ही कैस्पियन सागर का खुले महासागर से सीधा संपर्क है।
- बाकू में वर्ष 1840 के दशक में पहले तेल कुओं की खुदाई की गई थी। इसे विश्व का प्रथम तेल नगर माना जाता है।
- अज़रबैजान में स्थित यानार दाग नामक प्राकृतिक अग्नि कम-से-कम 65 वर्षों से निरंतर जल रही है।

स्रोत: IE
लिकटेंस्टाइन
पाठ्यक्रम: GS2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध
समाचारों में
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में लिकटेंस्टाइन के वंशानुगत युवराज एलोइस के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।
लिकटेंस्टाइन के बारे में
- शासन व्यवस्था: लिकटेंस्टाइन एक छोटा यूरोपीय राजतंत्र है। यहाँ राजकुमार राष्ट्राध्यक्ष होता है, जबकि वंशानुगत युवराज एलोइस उसकी ओर से राष्ट्राध्यक्ष के कार्यों का निर्वहन करते हैं। यहाँ एकसदनीय संसद है, जिसे लैंडटाग कहा जाता है। इसकी प्रधानमंत्री ब्रिगिट हास हैं।
- लिकटेंस्टाइन ने वर्ष 1868 में अपनी सेना समाप्त कर दी थी और तब से तटस्थता की नीति अपनाई है। आंतरिक सुरक्षा का दायित्व पुलिस निभाती है।
- भौगोलिक स्थिति: यह आल्प्स पर्वत क्षेत्र में ऊपरी राइन घाटी में स्थित है। इसकी सीमाएँ स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया से लगती हैं।
- दोहरी स्थलरुद्ध स्थिति : लिकटेंस्टाइन विश्व के केवल दो ऐसे देशों में से एक है, जो दोहरी स्थलरुद्ध स्थिति में हैं। इसका अर्थ है कि यह स्वयं स्थलरुद्ध है और इसके सभी पड़ोसी देश भी स्थलरुद्ध हैं। दूसरा देश उज्बेकिस्तान है।

महत्त्व
- यूरोप के लिए: लिकटेंस्टाइन यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) और यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र (EEA) का सदस्य है। ये व्यवस्थाएँ इसे यूरोपीय तथा वैश्विक बाजारों से जोड़ती हैं।
- भारत के लिए: लिकटेंस्टाइन यूरोपीय बाजार तक पहुँच का एक माध्यम और निवेश का स्रोत है। उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग, वित्त तथा नवाचार के क्षेत्र में इसकी क्षमताएँ भारत की निवेश एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी को बढ़ावा देने की प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं।
स्रोत: TH
अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY)
पाठ्यक्रम: GS2 / सरकारी पहल
संदर्भ
- अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY) भारत की वृद्ध होती जनसंख्या की बहुआयामी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक व्यापक एवं निरंतर विकसित होने वाली व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करती है।
परिचय
- नोडल मंत्रालय: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE)।
- शुरुआत: वर्ष 2021 में प्रारंभ की गई AVYAY योजना ने पहले से संचालित वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना (NAPSrC) को अपने अंतर्गत समाहित करते हुए उसका विस्तार किया। इसके माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से संबंधित अनेक पहलों को एक ही व्यापक योजना के अंतर्गत लाया गया।
- प्रकृति: यह एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है, जिसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सहायता प्रदान करना तथा सक्रिय और उत्पादक वृद्धावस्था को प्रोत्साहित करना है।

क्या आप जानते हैं?
- भारत में जनसांख्यिकीय परिवर्तन धीरे-धीरे हो रहा है। जनगणना 2011 के अनुसार, देश में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों की कुल संख्या 10.38 करोड़ थी।
- वर्ष 2036 तक भारत की वृद्ध जनसंख्या बढ़कर 23 करोड़ होने का अनुमान है। यह वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक व्यापक सहायता प्रणाली विकसित करने की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित करता है।
स्रोत: PIB
अवसंरचना निवेश न्यास (InvITs)
पाठ्यक्रम: GS3 / अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारत में अवसंरचना निवेश न्यास (InvITs) अधिक निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। इससे घरेलू बचत को सड़कों, विद्युत पारेषण नेटवर्क और अन्य अवसंरचना परिसंपत्तियों में निवेश करने का एक संभावित माध्यम उपलब्ध हो रहा है।
भारत के अवसंरचना निवेश न्यास (InvITs) के बारे में
- अवसंरचना निवेश न्यास ऐसे निवेश साधन हैं, जो म्यूचुअल फंड की तरह कार्य करते हैं।
- इनके माध्यम से व्यक्तिगत और संस्थागत निवेशक अवसंरचना परियोजनाओं में सीधे निवेश कर सकते हैं तथा प्रतिफल के रूप में उनसे होने वाली आय का एक हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं।
- InvIT की संरचना कई स्तरों वाली होती है। इसमें प्रायोजक InvIT की स्थापना करता है, जो पात्र अवसंरचना परियोजनाओं में सीधे अथवा विशेष प्रयोजन माध्यमों (SPVs) के जरिए निवेश करता है।
- नियामकीय ढाँचा: भारत में InvITs का विनियमन भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा SEBI (इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) विनियम,2014 के अंतर्गत किया जाता है।
- आय का वितरण: SEBI के नियमों के अधीन InvITs अपने शुद्ध वितरण योग्य नकदी प्रवाह का एक बड़ा हिस्सा निवेशकों में वितरित करते हैं।
- कारोबार की सुविधा: सूचीबद्ध InvIT इकाइयों को शेयर बाजारों में खरीदा और बेचा जा सकता है। इससे निवेशकों को तरलता अर्थात् आवश्यकता पड़ने पर निवेश को नकदी में बदलने की सुविधा मिलती है।
स्रोत: TH
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संक्षिप्त समाचार 28-10-2026