पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके माध्यम से रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों में छूट दी गई तथा भारत जैसे रूसी ऊर्जा संसाधन खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के निर्णय को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
परिचय
- अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में पारित लिंडसे ओ. ग्राहम रूस एवं ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त छूट देने की शक्ति का उपयोग किया। इस अधिनियम का उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र को गंभीर रूप से कमजोर करना था।
- इसमें रूसी तेल और गैस के पाँच प्रमुख खरीदार देशों—भारत, चीन, अज़रबैजान, स्लोवाकिया और हंगरी—पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान था।
- इसके अतिरिक्त, अमेरिका को होने वाले रूसी निर्यात पर 500 प्रतिशत तक तथा रूस को प्रतिबंधों से बचने में सहायता करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान था।
- रूस-अमेरिका ऊर्जा समझौता: रूस तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीज़ल की आपूर्ति अमेरिका और वैश्विक बाजार को करेगा। इसके बाद नवंबर में अतिरिक्त 5 लाख टन तथा तत्पश्चात तत्काल 10 लाख टन डीज़ल की आपूर्ति की जाएगी।
- इस कदम के पीछे अमेरिका का तर्क था कि इससे घरेलू और वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में कमी आएगी।
भारत पर प्रभाव
- शुल्क संबंधी खतरों से राहत: अतिरिक्त शुल्कों पर अस्थायी रोक से इस तात्कालिक जोखिम में कमी आती है कि रूसी तेल खरीदने के कारण भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर दंडात्मक शुल्क लगाए जाएँ।
- कठिन विकल्प चुनने से बचाव: भारत रूसी कच्चा तेल खरीदना जारी रख सकता है और उसे किफायती ऊर्जा आपूर्ति तथा अमेरिका को होने वाले निर्यात की सुरक्षा के बीच तत्काल कठिन विकल्प चुनने की स्थिति का कम सामना करना पड़ेगा।
- तेल शोधन कंपनियों को अधिक लचीलापन: भारतीय तेल शोधन कंपनियाँ केवल अतिरिक्त शुल्क के खतरे के आधार पर निर्णय लेने के बजाय रूसी कच्चे तेल का मूल्य, उपलब्धता और परिवहन लागत के आधार पर आकलन कर सकती हैं।
- व्यापार वार्ताओं में अनिश्चितता में कमी: इस छूट से तनाव के एक प्रमुख कारण से अस्थायी राहत मिलती है, जबकि भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर वार्ता जारी रखे हुए हैं।
आगे की राह
- यह छूट शुल्क संबंधी एक और विवाद के तात्कालिक खतरे को कम करके द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के लिए अस्थायी अवसर प्रदान करती है।
- हालाँकि, इससे रूसी तेल की भारत द्वारा खरीद को लेकर दोनों देशों के बीच विद्यमान मूलभूत मतभेद समाप्त नहीं होते हैं।
- भारत को इस छूट को अमेरिका की ओर से स्थायी आश्वासन के बजाय एक अस्थायी रणनीतिक अवसर के रूप में देखना चाहिए।
- आयात रणनीति में विविधता, कूटनीतिक संवाद और ऊर्जा संबंधी आत्मनिर्भरता एवं लचीलेपन को सुदृढ़ करना भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा एवं व्यापारिक हितों, दोनों की रक्षा करने में सहायता प्रदान करेगा।
स्रोत: TH