किगाली संशोधन के 10 वर्ष: भारत के शीतलन संबंधी विकल्प क्यों महत्त्वपूर्ण 

पाठ्यक्रम: GS3/ पर्यावरण

संदर्भ 

  • 15 अक्टूबर 2016 को अपनाया गया मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का किगाली संशोधन हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) के उपयोग में कमी लाने के वैश्विक प्रयासों के एक दशक को चिह्नित करता है।

किगाली संशोधन क्या है?

  • पृष्ठभूमि: वर्ष 1987 में अपनाया गया मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ओजोन परत की रक्षा के उद्देश्य से बनाया गया था। इसके अंतर्गत क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) जैसे ओजोन-क्षयकारी पदार्थों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का प्रावधान किया गया।
  • इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी? HFCs को CFCs के विकल्प के रूप में व्यापक रूप से अपनाया गया, क्योंकि ये ओजोन परत का क्षय नहीं करते हैं। हालाँकि, अनेक HFCs में वैश्विक तापन की उच्च क्षमता होती है।
  • अंगीकरण: इसे 15 अक्टूबर 2016 को किगाली, रवांडा में अपनाया गया तथा यह 1 जनवरी 2019 को प्रभावी हुआ।
  • उद्देश्य: विश्वभर में HFCs के उत्पादन और उपभोग में क्रमिक कमी लाना। इसमें पूर्ण प्रतिबंध के बजाय इनके उपयोग एवं उत्पादन को चरणबद्ध रूप से कम करने का प्रावधान है।
  • जलवायु संबंधी लाभ: इसका पूर्ण कार्यान्वयन वर्ष 2100 तक वैश्विक तापन को लगभग 0.3°C–0.5°C तक रोकने में सहायता कर सकता है।

महत्त्वपूर्ण प्रशीतक: CFCs बनाम HFCs

  • CFCs (क्लोरोफ्लोरोकार्बन): ये समतापमंडलीय ओजोन परत को हानि पहुँचाते हैं तथा वैश्विक तापन में भी योगदान देते हैं।
  • HFCs (हाइड्रोफ्लोरोकार्बन): ये सीधे तौर पर ओजोन परत का क्षय नहीं करते हैं, लेकिन इनमें से अनेक की वैश्विक तापन क्षमता अधिक होती है।
  • कम वैश्विक तापन क्षमता वाले विकल्प: अमोनिया, कार्बन डाइऑक्साइड तथा कुछ हाइड्रोकार्बन जैसे विकल्प जलवायु पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम कर सकते हैं। हालाँकि, इनका चयन उपकरणों की आवश्यकताओं तथा सुरक्षा संबंधी पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

जलवायु कार्रवाई के लिए शीतलन क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  • शीतलन दो प्रमुख तरीकों से जलवायु को प्रभावित करता है:
    • प्रशीतक उत्सर्जन: एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर तथा अन्य शीतलन उपकरणों से HFCs का रिसाव हो सकता है, जिससे वैश्विक तापन में वृद्धि होती है।
    • विद्युत की खपत: शीतलन उपकरण बड़ी मात्रा में विद्युत की खपत करते हैं। यदि इस विद्युत  का उत्पादन जीवाश्म ईंधनों से किया जाता है, तो इससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हो सकता है।

किगाली संशोधन के अंतर्गत भारत की प्रतिबद्धताएँ

  • अनुसमर्थन: भारत ने वर्ष 2021 में इस संशोधन का अनुसमर्थन किया।
  • HFCs के उत्पादन एवं उपभोग पर रोक: भारत को वर्ष 2028 में निर्धारित आधार स्तर पर HFCs के उत्पादन और उपभोग को स्थिर करना होगा।
  • कटौती की समय-सारणी: वर्ष 2032 में आधार स्तर की तुलना में प्रथम बार 10% की कटौती की जाएगी। इसके बाद क्रमशः अधिक कटौती करते हुए वर्ष 2047 तक इसे 85% तक पहुँचाया जाएगा।
  • प्रमुख चुनौती: बढ़ते तापमान, शहरीकरण, आय में वृद्धि तथा एयर कंडीशनिंग तक बढ़ती पहुँच के कारण भारत में शीतलन की माँग में वृद्धि होने की संभावना है।

आगे क्या किए जाने की आवश्यकता है?

  • ऊर्जा दक्षता में सुधार: उपकरणों के मानकों को सुदृढ़ किया जाना चाहिए, ताकि नए शीतलन उपकरण कम विद्युत  की खपत करें।
  • प्रशीतकों का प्रबंधन: पुराने उपकरणों से प्रशीतकों को पुनर्प्राप्त, पुनर्चक्रित अथवा सुरक्षित रूप से नष्ट किया जाना चाहिए, ताकि उनके रिसाव को रोका जा सके।
  • उद्योग को समर्थन: निर्माताओं और तकनीशियनों को उपयुक्त प्रौद्योगिकी, वित्तीय सहायता तथा प्रशिक्षण तक पहुँच उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
  • कार्यान्वयन को सुदृढ़ करना: उपकरणों की सर्विसिंग संबंधी प्रक्रियाओं, प्रशीतक पुनर्प्राप्ति प्रणालियों तथा HFCs के उपयोग की निगरानी में सुधार किया जाना चाहिए।

बहुपक्षीय कोष 

  • बहुपक्षीय कोष: इसकी स्थापना वर्ष 1990 में विकासशील देशों को मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के अंतर्गत अपने दायित्वों को पूरा करने में सहायता प्रदान करने के लिए की गई थी।
  • उद्देश्य: यह प्रौद्योगिकी रूपांतरण, क्षमता निर्माण तथा प्रशिक्षण के लिए सहायता प्रदान करता है।
  • महत्त्व: वित्तीय एवं तकनीकी सहायता विकासशील देशों को वैकल्पिक प्रौद्योगिकियाँ अपनाने में सहायता  करती है, ताकि संक्रमण की पूरी लागत का भार घरेलू उद्योगों पर न पड़े।

स्रोत : IE

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, GS3/ आंतरिक सुरक्षा संदर्भ  गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा गठित एक उच्च-स्तरीय समिति ने एक पोर्टल शुरू किया है, जिसके माध्यम से नागरिकों, सरकारी एजेंसियों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) आदि को भारत में जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के संबंध में अपने सुझाव एवं जानकारी प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है। इसके लिए विशेष रूप...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था संदर्भ आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी की ₹52,878 करोड़ में फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को रणनीतिक बिक्री की स्वीकृति दी। यह निर्णय सरकार के वार्षिक विनिवेश लक्ष्य के लगभग पूरा होने के बावजूद लिया गया। भारत सरकार की विनिवेश नीति विनिवेश के संबंध में सरकार की नीति में...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण संदर्भ  दिल्ली के उपराज्यपाल ने हाल ही में कहा कि ई-मोबिलिटी देश की रणनीतिक आवश्यकताओं, विकास तथा पारिस्थितिक दिशा के लिए भविष्य का मार्ग है। ई-मोबिलिटी  ई-मोबिलिटी (विद्युत गतिशीलता) से तात्पर्य पेट्रोल या डीजल से मुख्यतः संचालित होने वाले वाहनों के स्थान पर विद्युत-चालित वाहनों एवं परिवहन प्रणालियों के उपयोग से है। इसमें...
Read More

दक्षिणी हिंद महासागर मत्स्य पालन समझौता (SIOFA) पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध; GS3/पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी संदर्भ केंद्र सरकार ने दक्षिणी हिंद महासागर मत्स्य पालन समझौते (SIOFA) में भारत के शामिल होने को स्वीकृति दे दी है। इससे समझौते में भारत की स्थिति एक सहयोगी गैर-अनुबंधकारी पक्ष से उन्नत होकर पूर्ण अनुबंधकारी पक्ष की हो जाएगी। SIOFA क्या...
Read More
scroll to top