पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी की ₹52,878 करोड़ में फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को रणनीतिक बिक्री की स्वीकृति दी। यह निर्णय सरकार के वार्षिक विनिवेश लक्ष्य के लगभग पूरा होने के बावजूद लिया गया।
भारत सरकार की विनिवेश नीति
- विनिवेश के संबंध में सरकार की नीति में निम्नलिखित शामिल हैं:
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) में रणनीतिक विनिवेश/निजीकरण।
- CPSEs में अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री।
- रणनीतिक विनिवेश से तात्पर्य किसी CPSE में सरकार की संपूर्ण या पर्याप्त हिस्सेदारी की बिक्री के साथ-साथ प्रबंधन नियंत्रण के हस्तांतरण से है।
- निजीकरण रणनीतिक विनिवेश का एक उप-प्रकार है। इसमें CPSE में सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी और प्रबंधन नियंत्रण किसी निजी रणनीतिक खरीदार को हस्तांतरित कर दिया जाता है।
- रणनीतिक विनिवेश के अन्य मामलों में सरकारी इक्विटी हिस्सेदारी और नियंत्रण किसी अन्य CPSE को हस्तांतरित किया जा सकता है।
- कुछ CPSEs में अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री प्रबंधन नियंत्रण हस्तांतरित किए बिना की जाती है। इसके लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा अनुमोदित विभिन्न विधियों का उपयोग किया जाता है, जैसे प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO), बिक्री हेतु प्रस्ताव (OFS), शेयरों की पुनर्खरीद आदि।
- ये विधियाँ निम्नलिखित माध्यमों से पूँजी बाजार को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं:
- बेहतर प्रदर्शन करने वाले CPSEs के सार्वजनिक रूप से कारोबार योग्य शेयरों की उपलब्धता बढ़ाना।
- खुदरा निवेशकों को शेयरों की व्यापक शृंखला में निवेश करने का अवसर प्रदान करना।
- पूँजी बाजार की तरलता और गहराई में वृद्धि करना।
नई सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (PSE) नीति
- आत्मनिर्भर भारत के लिए नई सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (PSE) नीति को मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद वर्ष 2021 में अधिसूचित किया गया। यह नीति रणनीतिक विनिवेश के संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश प्रदान करती है।
- इस नीति का उद्देश्य अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में सरकार की उपस्थिति को न्यूनतम करना है।
- इसके अंतर्गत वर्तमान केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs), सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों तथा सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों को शामिल किया गया है।
- विनिवेश किए जाने वाले क्षेत्रों का दो श्रेणियों में वर्गीकरण:
- रणनीतिक क्षेत्र : इन क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की उपस्थिति न्यूनतम आवश्यक स्तर तक सीमित रखी जाएगी। शेष उद्यमों का निजीकरण किया जाएगा अथवा उनका अन्य CPSEs के साथ विलय, सहायक कंपनियों के रूप में पुनर्गठन या समापन किया जाएगा।
- इसके अंतर्गत निम्नलिखित चार क्षेत्र शामिल हैं:
- परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष एवं रक्षा।
- परिवहन एवं दूरसंचार।
- विद्युत, पेट्रोलियम, कोयला एवं अन्य खनिज।
- बैंकिंग, बीमा एवं वित्तीय सेवाएँ।
- गैर-रणनीतिक क्षेत्र : इस श्रेणी के CPSEs का निजीकरण किया जाएगा; अन्यथा उन्हें बंद किया जाएगा।
सरकार विनिवेश जारी क्यों रख रही है?
- बढ़ता सब्सिडी व्यय: पश्चिम एशिया में संघर्ष तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से संबंधित व्यवधानों ने व्यय संबंधी दबाव बढ़ा दिया है। इसका विशेष प्रभाव उर्वरक तथा तेल से संबंधित सहायता पर पड़ा है।
- अनुमान से अधिक उर्वरक सब्सिडी की आवश्यकता: वित्त वर्ष 2026–27 के लिए ₹1.71 लाख करोड़ के बजटीय अनुमान की तुलना में अप्रैल–अगस्त के दौरान यूरिया तथा पोषक तत्त्व-आधारित उर्वरकों पर सब्सिडी व्यय ₹1.03 लाख करोड़ तक पहुँच गया।
- राजकोषीय घाटे का प्रबंधन: सरकार ने वित्त वर्ष 2026–27 में राजकोषीय घाटे को GDP के 4.3% तक सीमित रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अन्य परिस्थितियाँ समान रहने पर, ऋण से इतर अतिरिक्त प्राप्तियाँ व्यय के वित्तपोषण में सहायता कर सकती हैं तथा उधार लेने की आवश्यकता को कम कर सकती हैं।
विनिवेश का महत्व
- परिचालन दक्षता में सुधार: निजी क्षेत्र की भागीदारी से अधिक सुदृढ़ व्यावसायिक प्रोत्साहन, पेशेवर प्रबंधन तथा बेहतर जवाबदेही को बढ़ावा मिल सकता है।
- राजकोषीय बोझ में कमी: इससे घाटे में चल रहे अथवा अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करने वाले उद्यमों को सरकारी सहायता देने की आवश्यकता कम हो सकती है।
- प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा: जहाँ पर्याप्त सुरक्षा उपाय विद्यमान हों, वहाँ निजी क्षेत्र की भागीदारी सेवा की गुणवत्ता में सुधार, नवाचार को प्रोत्साहन तथा प्रतिस्पर्धा को सुदृढ़ कर सकती है।
- सार्वजनिक परिसंपत्तियों की क्षमता का उपयोग: विनिवेश से सरकारी निवेश के मूल्य को प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है तथा पूँजी को अन्य सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।
चिंताएँ
- अनिश्चित बाजार परिस्थितियाँ: निवेशकों की कमजोर धारणा, मूल्यांकन में उतार-चढ़ाव तथा क्षेत्र-विशिष्ट जोखिम लेन-देन में विलंब कर सकते हैं या बिक्री से प्राप्त राशि को कम कर सकते हैं।
- मूल्यांकन संबंधी चिंताएँ: सार्वजनिक परिसंपत्तियों को उनके उचित आर्थिक मूल्य से कम कीमत पर बेचने से सरकारी राजकोष को दीर्घकालिक हानि हो सकता है।
- रोजगार संबंधी चिंताएँ: कर्मचारियों को रोजगार की सुरक्षा, सेवा शर्तों तथा भविष्य में पुनर्गठन को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।
- राजस्व संबंधी अनिश्चितता: विनिवेश से प्राप्त राशि एकमुश्त आय होती है और यह नियमित कर राजस्व का स्थायी विकल्प नहीं बन सकती।
निष्कर्ष
- विनिवेश सार्वजनिक पूँजी का बेहतर उपयोग करने तथा वाणिज्यिक उद्यमों की दक्षता बढ़ाने के माध्यम से राजकोषीय प्रबंधन को सुदृढ़ कर सकता है। हालाँकि, यह राजस्व सृजन के सतत स्रोतों का विकल्प नहीं है।
- यह सुनिश्चित करने के लिए कि विनिवेश समावेशी एवं सतत विकास में योगदान दे, एक पारदर्शी और रणनीतिक रूप से संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है, जो राजकोषीय आवश्यकताओं, आर्थिक दक्षता, जनहित तथा परिसंपत्तियों के दीर्घकालिक मूल्य के बीच संतुलन स्थापित करे।
निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM)
- विनिवेश विभाग की स्थापना वर्ष 1999 में एक अलग विभाग के रूप में की गई थी।
- वर्ष 2016 से इसका नाम बदलकर निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) कर दिया गया।
- वर्तमान कार्य आवंटन नियमों के अनुसार, इस विभाग का कार्यादेश निम्नलिखित है:
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सरकारी इक्विटी हिस्सेदारी के विनिवेश सहित, केंद्र सरकार के इक्विटी निवेशों के प्रबंधन से संबंधित सभी मामले।
- पूर्ववर्ती केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में केंद्र सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी की बिक्री से संबंधित सभी मामले, चाहे यह बिक्री बिक्री हेतु प्रस्ताव (OFS), निजी नियोजन (Private Placement) अथवा किसी अन्य माध्यम से की जाए।