भारत के लिए ई-मोबिलिटी ही भविष्य की दिशा 

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

संदर्भ 

  • दिल्ली के उपराज्यपाल ने हाल ही में कहा कि ई-मोबिलिटी देश की रणनीतिक आवश्यकताओं, विकास तथा पारिस्थितिक दिशा के लिए भविष्य का मार्ग है।

ई-मोबिलिटी 

  • ई-मोबिलिटी (विद्युत गतिशीलता) से तात्पर्य पेट्रोल या डीजल से मुख्यतः संचालित होने वाले वाहनों के स्थान पर विद्युत-चालित वाहनों एवं परिवहन प्रणालियों के उपयोग से है।
    • इसमें परिवहन को अधिक स्वच्छ एवं ऊर्जा-दक्ष बनाने के लिए विद्युत वाहनों (EVs), बैटरियों, चार्जिंग अवसंरचना तथा संबंधित प्रौद्योगिकियों का उपयोग शामिल है।

विद्युत वाहन 

  • EV ऐसा वाहन है, जो बैटरी में संचित ऊर्जा का उपयोग करने वाली विद्युत मोटर से संचालित होता है। इसे किसी बाहरी विद्युत स्रोत से पुनः चार्ज किया जा सकता है।
  • EVs के चार प्रकार हैं:
    • बैटरी विद्युत वाहन (BEVs): ये पूरी तरह से विद्युत से संचालित होते हैं।
    • हाइब्रिड विद्युत वाहन (HEVs) एवं प्लग-इन हाइब्रिड विद्युत वाहन (PHEVs): इनमें वाहन को संचालित करने के लिए आंतरिक दहन इंजन और विद्युत मोटर दोनों का उपयोग किया जाता है। PHEVs में अतिरिक्त रूप से ऐसी बैटरी होती है, जिसे बाहरी विद्युत स्रोत से चार्ज किया जा सकता है। इससे वाहन लंबी दूरी तक केवल विद्युत शक्ति से चल सकता है।
    • ईंधन सेल विद्युत वाहन (FCEVs): इनमें रासायनिक ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जाती है, जिसका उपयोग वाहन को संचालित करने में होता है।

भारत में EVs को अपनाने की स्थिति

  • भारत में EVs को अपनाने की दर में कई गुना वृद्धि हुई है। यह वित्त वर्ष 2015–16 में 0.08% से बढ़कर वित्त वर्ष 2025–26 में 8.26% हो गई।
    • भारत की वृद्धि दर वैश्विक प्रवृत्तियों से अधिक रही है, जहाँ EV की बिक्री में लगभग 20 गुना वृद्धि दर्ज की गई।
  • वर्ष 2020 में भारत में EV की बाजार पैठ वैश्विक स्तर की केवल पाँचवें हिस्से के बराबर थी। वर्ष 2024 में यह बढ़कर वैश्विक स्तर के दो-पाँचवें हिस्से से अधिक हो गई।
    • वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा EV बाजार बनकर उभरा, जिसके बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक का स्थान रहा।
  • निर्यात: EV निर्यात का मूल्य वर्ष 2020 में 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2024 में 84 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। प्रमुख निर्यात गंतव्यों में नेपाल, इंडोनेशिया और जापान शामिल थे।
  • अवसंरचना: भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के अनुसार, जुलाई 2026 तक उपलब्ध 52,718 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों में से 16,561 में तीव्र EV चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है।
  • निवेश: भारत के EV पारितंत्र में वित्त वर्ष 2025 के दौरान 1.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश एकत्रित किया गया, जो वर्ष 2024 की तुलना में लगभग 27% अधिक था। इस अवधि में दिल्ली EV निवेश के लिए अग्रणी शहर के रूप में उभरी।
  • ई-विटारा (2025): यह सुजुकी का प्रथम वैश्विक रणनीतिक बैटरी विद्युत वाहन (BEV) है। भारत में निर्मित इन BEVs का निर्यात 100 से अधिक देशों में करने का लक्ष्य है। इस उपलब्धि के साथ भारत EVs के लिए सुजुकी का वैश्विक विनिर्माण केंद्र बन गया।
    • वर्ष 2025 में भारत का EV बाजार 3.71 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था। अनुमान है कि 54.94% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ते हुए यह वर्ष 2034 तक 191.04 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच जाएगा।
    • भारत का EV बैटरी बाजार वर्ष 2025 में 2.71 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2034 तक 15.90 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने की संभावना है। इसके लिए 21.70% की CAGR का अनुमान है।
  • लक्ष्य: भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक कुल वाहन बिक्री में विद्युत वाहनों की हिस्सेदारी 30% तक पहुँचाना है। यह वैश्विक EV30@30 पहल के अनुरूप है।
    • वर्ष 2030 तक पूरे भारत में 13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना से EV पारितंत्र को अधिक सुदृढ़ करने का लक्ष्य है।

EVs को अपनाने में चुनौतियाँ

  • उच्च प्रारंभिक लागत: भारत में विद्युत वाहन खरीदने की प्रारंभिक लागत पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन वाले वाहनों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक है।
    • इस लागत में वाहन की कीमत के साथ-साथ बैटरी की लागत भी शामिल होती है।
  • सीमित चार्जिंग अवसंरचना: चार्जिंग अवसंरचना की अपर्याप्त उपलब्धता भारत में EVs को अपनाने के मार्ग में एक प्रमुख बाधा बनी हुई है।
  • दूरी संबंधी चिंता : चार्जिंग स्टेशन तक पहुँचने से पहले बैटरी की ऊर्जा समाप्त हो जाने का भय भारतीय उपभोक्ताओं के बीच एक प्रमुख चिंता है। यह विशेष रूप से उन उपभोक्ताओं में देखा जाता है, जो EV खरीदने पर विचार कर रहे हैं।
  • बैटरी प्रौद्योगिकी एवं आपूर्ति शृंखला: भारत लिथियम-आयन बैटरियों के लिए अत्यंत सीमा तक आयात पर निर्भर है। इससे लागत बढ़ती है तथा EV क्षेत्र आपूर्ति शृंखला में व्यवधानों के प्रति संवेदनशील हो जाता है।
  • उपभोक्ता जागरूकता एवं शिक्षा: भारत में अनेक उपभोक्ताओं को विद्युत वाहनों, उनके लाभों, प्रौद्योगिकी तथा उपलब्ध मॉडलों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है।

सरकारी पहलें

  • राष्ट्रीय विद्युत गतिशीलता मिशन योजना (NEMMP) एवं FAME-I: विद्युत वाहनों को अपनाने और उनके उत्पादन में तीव्रता लाने के लिए NEMMP लागू की गई।
    • इस मिशन के अंतर्गत विद्युत एवं हाइब्रिड वाहनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु वर्ष 2015 से 2019 तक हाइब्रिड एवं विद्युत वाहनों को तेजी से अपनाने और विनिर्माण करने की योजना (FAME India) लागू की गई।
  • FAME-II (विद्युत वाहनों को तीव्रता से अपनाने एवं विनिर्माण करने की योजना—चरण II): वर्ष 2019 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य EVs को अपनाने की दर बढ़ाना, ई-बस नेटवर्क का विस्तार करना तथा चार्जिंग अवसंरचना को सुदृढ़ करना है।
  • भारत में ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI-Auto): वर्ष 2021 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों (AAT) के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
    • टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी प्रमुख कंपनियों ने EV उत्पादन में बड़े निवेश के माध्यम से इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
    • इस योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए कंपनियों को कम-से-कम 50% घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) सुनिश्चित करना आवश्यक है।
  • भारत में विद्युत यात्री कारों के विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना, 2024 (SPMEPCI): वैश्विक वाहन निर्माताओं को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करने हेतु इस योजना के अंतर्गत अनुमोदित आवेदकों को पाँच वर्ष की अवधि में विद्युत चारपहिया वाहनों (e-4W) की पूर्णतः निर्मित इकाइयों (CBUs) का आयात करने की अनुमति दी जाती है। इन वाहनों का न्यूनतम CIF (लागत, बीमा एवं मालभाड़ा) मूल्य 35,000 अमेरिकी डॉलर होना चाहिए तथा इन पर 15% की रियायती सीमा शुल्क दर लागू होती है।
  • भारत विद्युत गतिशीलता सूचकांक (IEMI): नीति आयोग ने वर्ष 2025 में भारत विद्युत गतिशीलता सूचकांक (IEMI) जारी किया। इसका उद्देश्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की विद्युत गतिशीलता संबंधी लक्ष्यों की दिशा में प्रगति का आकलन, मापन तथा तुलनात्मक मूल्यांकन करना है।
    • इस सूचकांक के हालिया परिणामों में दिल्ली, महाराष्ट्र और चंडीगढ़ को सुदृढ़ विद्युत गतिशीलता पारितंत्र वाले अग्रणी क्षेत्रों के रूप में स्थान दिया गया।
  • PM ई-बस सेवा–भुगतान सुरक्षा तंत्र (PSM) योजना: इसे वर्ष 2024 में अधिसूचित किया गया। यह योजना तैनात की गई प्रत्येक बस के लिए अधिकतम 12 वर्ष तक भुगतान सुरक्षा प्रदान करती है।
  • दिल्ली की EV नीति: इसका उद्देश्य वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना तथा शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार करना है। वर्ष 2026 में सरकार ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में पुराने और अधिक उत्सर्जन करने वाले ट्रकों तथा बसों को बदलने के लिए एक व्यापक योजना को स्वीकृति दी।
    • दो वर्ष की यह योजना दिल्ली-NCR (दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश) में लगभग 2.07 लाख वाणिज्यिक वाहनों को बदलने में सहायता प्रदान करेगी।
  • राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (NMM): वर्ष 2025 के राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन में EVs को नवाचार-आधारित विकास के प्रमुख ‘बीज’ क्षेत्रों में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य GDP में विनिर्माण क्षेत्र के योगदान को वर्ष 2023 के 12.9% से बढ़ाकर 25% करना है।
    • यह उन्नत विनिर्माण को बढ़ावा देने, प्रौद्योगिकी विकास को प्रोत्साहित करने तथा EV उत्पादन को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के साथ एकीकृत करने के माध्यम से भारत के EV पारितंत्र को सुदृढ़ करता है।
  • नवोन्मेषी वाहन संवर्धन के लिए PM इलेक्ट्रिक ड्राइव क्रांति योजना (PM E-DRIVE): इसका उद्देश्य लक्षित माँग प्रोत्साहनों, घरेलू विनिर्माण को समर्थन तथा चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार के माध्यम से EVs को अपनाने की प्रक्रिया में तीव्रता लाना है।
  • EVs पर कम GST: भारत में EVs पर 5% की रियायती वस्तु एवं सेवा कर (GST) दर लागू होती है। यह दर सभी विद्युत कारों, दोपहिया और तिपहिया वाहनों पर लागू होती है। इससे पारंपरिक वाहनों की तुलना में इन पर कर का बोझ काफी कम हो जाता है।

आगे की राह

  • भारत आयात पर निर्भर बाजार से स्वयं को EV उत्पादन के वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है।
    • यह परिवर्तन ऊर्जा सुरक्षा, तेल आयात में कमी तथा वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने जैसी भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
  • सरकार कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (CAFE) मानकों के अगले चरणों—CAFE III (2027–2032) और CAFE IV (2033–2037)—को विकसित कर रही है।
    • इनमें विश्वव्यापी समन्वित हल्के वाहन परीक्षण प्रक्रिया (WLTP) के आधार पर CO₂ उत्सर्जन के अधिक कठोर लक्ष्य प्रस्तावित किए गए हैं।
  • भविष्य की दिशा आपूर्ति शृंखला के गहन एकीकरण, बैटरी के घरेलू विनिर्माण एवं स्थानीयकरण में तीव्रता तथा सुदृढ़ चार्जिंग अवसंरचना के विकास से निर्धारित होगी।
    • ये सभी स्तंभ मिलकर वैश्विक EV परिदृश्य में भारत के नेतृत्व की दिशा तय करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

स्रोत : TH

 

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