पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने लिंडसे ओ. ग्राहम द्वारा प्रस्तुत रूस और ईरान पर प्रतिबंध संबंधी अधिनियम, 2026 पारित किया है। इसके अंतर्गत अमेरिका को रूसी तेल के पाँच सबसे बड़े खरीदार देशों पर 100% तक शुल्क लगाने की अनुमति मिल सकती है।
विधेयक के बारे में
- विधेयक में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को प्रत्येक 180 दिनों में रूसी तेल के पाँच सबसे बड़े खरीदार देशों का पुनर्मूल्यांकन करने का प्रावधान है, ताकि उनके खरीद व्यवहार में होने वाले बदलावों के आधार पर शुल्क दरों में संशोधन किया जा सके।
- चीन और भारत के अतिरिक्त रूसी तेल के अन्य प्रमुख खरीदारों में तुर्किये, स्लोवाकिया और हंगरी शामिल हैं।
- इसमें उन देशों को अपवाद देने का प्रावधान है, जो अपनी प्राकृतिक गैस का 15% से कम हिस्सा रूस से आयात करते हैं और इन आयातों को कम करने के लिए कदम उठा रहे हैं।
- विधेयक के समर्थकों का दावा है कि रूस की ऊर्जा आय को सीमित करना आवश्यक है, ताकि यूक्रेन में युद्ध के वित्तपोषण की रूसी राष्ट्रपति की क्षमता को कमजोर किया जा सके।
भारत द्वारा रूसी तेल का आयात

- यूक्रेन पर आक्रमण: वर्ष 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद अधिकांश पश्चिमी देशों ने रूसी कच्चे तेल से दूरी बना ली।
- रूस ने इच्छुक खरीदारों, जिनमें भारतीय तेल शोधन कंपनियाँ भी शामिल थीं, को अपने तेल पर छूट देना शुरू कर दिया।
- इसी के परिणामस्वरूप भारत को तेल की सीमित आपूर्ति करने वाला रूस, भारत के कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत बन गया और उसने पश्चिम एशिया के पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं का स्थान ले लिया।
- पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा: पश्चिम एशिया संकट के दौरान जब खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति बाधित हुई, तब रूसी तेल भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के एक सुदृढ़ विकल्प के रूप में सामने आया।
- आसानी से प्रतिस्थापित न किया जा सकने वाला आपूर्ति स्रोत: प्रतिबंधों के खतरे के बावजूद, वर्तमान बाजार परिस्थितियों में रूसी कच्चा तेल भारतीय तेल शोधन कंपनियों के लिए सबसे व्यावहारिक और प्रतिस्पर्धी आपूर्ति स्रोतों में से एक बना हुआ है तथा इसे तत्काल किसी अन्य स्रोत से पूरी तरह बदलना अत्यंत कठिन है।
- भारत ने अगस्त में प्रतिदिन 20.8 लाख बैरल रूसी तेल का आयात किया, जो देश के कुल तेल आयात का 45% था। इससे पहले के दो महीनों में यह हिस्सा 50% से अधिक था।
भारत के लिए चिंताएँ
- वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव: पश्चिम एशिया संकट के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव की वर्तमान स्थिति में भारत के लिए रूसी तेल के आयात को कम करना व्यावहारिक रूप से अत्यंत कठिन है।
- अमेरिका के लिए भी, जब पश्चिम एशिया से ऊर्जा की आपूर्ति अत्यधिक सीमित बनी हुई है, तब वैश्विक बाजार से रूसी तेल के लाखों बैरल हटाना विवेकपूर्ण नहीं होगा।
- उच्च आयात लागत और मुद्रास्फीति: यदि रूसी तेल की आपूर्ति उपलब्ध नहीं रहती और भारत को अधिक महंगे वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदना पड़ता है, तो इसका प्रभाव परिवहन, विनिर्माण, कृषि एवं उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
- भारत–अमेरिका व्यापारिक संबंध: प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। भारत ने स्वयं चेतावनी दी है कि ऐसे उपाय दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।
- रणनीतिक स्वायत्तता: भारत की ऊर्जा खरीद में बदलाव के लिए बाहरी दबाव उसकी राष्ट्रीय ऊर्जा-सुरक्षा के हितों के आधार पर स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने की क्षमता को सीमित कर सकता है।
आगे की राह
- आपूर्ति स्रोतों में विविधता बनाए रखना: रूस से कच्चा तेल खरीदने के साथ-साथ भारत मध्य पूर्व, अफ्रीका, अमेरिका और अन्य विश्वसनीय स्रोतों से आपूर्ति बढ़ा सकता है, ताकि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचा जा सके।
- कूटनीतिक संवाद को आगे बढ़ाना: भारत को अपनी ऊर्जा-सुरक्षा संबंधी हितों की रक्षा के लिए अमेरिका और रूस दोनों के साथ संवाद जारी रखना चाहिए तथा यह पक्ष रखना चाहिए कि प्रतिबंधों एवं शुल्क संबंधी उपायों से वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर नहीं होने चाहिए।
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को सुदृढ़ करना: रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार और उसका कुशल प्रबंधन अचानक उत्पन्न होने वाले भू-राजनीतिक या आपूर्ति संबंधी व्यवधानों के विरुद्ध सुरक्षा कवच प्रदान कर सकता है।
- ऊर्जा साझेदारियों को सुदृढ़ करना: भारत को प्रमुख ऊर्जा-उपभोग करने वाले देशों के साथ आपातकालीन भंडार, वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों और ऊर्जा-संकट से निपटने की व्यवस्थाओं के संबंध में सहयोग को सुदृढ़ करना चाहिए।
- सामर्थ्य और रणनीतिक स्वायत्तता के बीच संतुलन: तत्काल प्राथमिकता किफायती और निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना होनी चाहिए, जबकि दीर्घकाल में भू-राजनीतिक दबाव के प्रति संवेदनशीलता को धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए।
स्रोत: TH
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