पुलिस आधुनिकीकरण मिशन (PMM) 

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन

संदर्भ 

  • केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि उसने आगामी पाँच वर्षों के दौरान ₹24,000 करोड़ की एक छत्र योजना, जिसे पुलिस आधुनिकीकरण मिशन (PMM) कहा गया है, को लागू करना शुरू कर दिया है।

पुलिस आधुनिकीकरण मिशन (PMM) के बारे में

  • कवरेज: यह योजना लक्षित निवेश, सुधारों तथा प्रौद्योगिकी-आधारित रूपांतरण के माध्यम से राज्य पुलिस बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तथा केंद्र सरकार की सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों की आंतरिक सुरक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करेगी।
  • सीसीटीवी अवसंरचना: राज्यों के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।

पुलिस आधुनिकीकरण की जिम्मेदारी

  • भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-II की प्रविष्टि 2 के अनुसार, पुलिस तथा लोक व्यवस्था राज्य के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विषय हैं।
    • अतः इन विषयों के प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है।
  • हालाँकि, वित्तीय बाधाओं के कारण राज्य अपने पुलिस बलों का वांछित स्तर तक पूर्ण रूप से आधुनिकीकरण एवं सुसज्जीकरण नहीं कर पाए हैं। इसलिए, गृह मंत्रालय (MHA) राज्यों के प्रयासों एवं संसाधनों को अतिरिक्त सहायता प्रदान करता रहा है।

भारत में पुलिस बलों से संबंधित मुद्दे

  • अत्यधिक कार्यभार वाला पुलिस बल: कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा अपराध की रोकथाम की अपनी मूल जिम्मेदारियों के अतिरिक्त, पुलिस कर्मियों को अक्सर यातायात प्रबंधन, आपदा प्रतिक्रिया तथा अतिक्रमण हटाने जैसे कार्यों के लिए भी तैनात किया जाता है।
  • जाँच की निम्न गुणवत्ता: विधि आयोग (2012) ने उल्लेख किया कि भारत में कम दोषसिद्धि दर के प्रमुख कारणों में से एक जाँच की निम्न गुणवत्ता है।
    • पुलिस कर्मियों के पास पेशेवर स्तर की जाँच के लिए आवश्यक पर्याप्त प्रशिक्षण, विशिष्ट विशेषज्ञता तथा आधुनिक फोरेंसिक सहायता का अभाव है।
  • अपर्याप्त पुलिस-जनसंख्या अनुपात: अनेक राज्यों में पुलिस कर्मियों की कमी है, जिसके कारण पुलिस-जनसंख्या अनुपात प्रतिकूल बना हुआ है।
  • परिचालन स्वायत्तता का अभाव: पुलिस बल पर नियंत्रण काफी हद तक राजनीतिक कार्यपालिका के हाथों में रहता है।
    • द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) (2007) ने उल्लेख किया कि इस प्रकार का नियंत्रण पुलिस के कार्यों में अनुचित हस्तक्षेप का कारण बन सकता है, जिसमें स्थानांतरण, पदस्थापन तथा परिचालन संबंधी निर्णय शामिल हैं।
  • अपर्याप्त अवसंरचना: कई पुलिस थानों में अभी भी आधुनिक उपकरणों, वाहनों, संचार प्रणालियों, फोरेंसिक सुविधाओं तथा सीसीटीवी कैमरों जैसी कार्यात्मक निगरानी अवसंरचना का अभाव है।
    • पुलिस बलों में महिलाओं का अपर्याप्त प्रतिनिधित्व लैंगिक रूप से संवेदनशील पुलिस व्यवस्था को प्रभावित करता है तथा महिलाओं को कुछ प्रकार के अपराधों की रिपोर्ट करने से हतोत्साहित कर सकता है।

पुलिस आधुनिकीकरण के लिए वर्तमान सरकारी पहल

  • पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को सहायता (ASUMP) योजना: केंद्र सरकार पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को सहायता (ASUMP) योजना के माध्यम से राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के प्रयासों को अतिरिक्त सहायता प्रदान करती है।
    • इसका उद्देश्य पुलिस थानों को आधुनिक प्रौद्योगिकी, हथियारों, संचार प्रणालियों, गतिशीलता संबंधी साधनों तथा पुलिस थानों एवं आवास जैसी चयनित अवसंरचनात्मक सुविधाओं से सुसज्जित करके पुलिस अवसंरचना को अत्याधुनिक स्तर पर सुदृढ़ करना है।
  • पुलिस बलों का आधुनिकीकरण (MPF) योजना:पुलिस बलों का आधुनिकीकरण (MPF) योजना वर्ष 1969-70 में शुरू की गई थी तथा विगत वर्षों के दौरान इसमें कई संशोधन किए गए हैं।
    • इस योजना के अंतर्गत पुलिस थानों के निर्माण तथा आधुनिक हथियारों, निगरानी एवं संचार उपकरणों की उपलब्धता के माध्यम से पुलिस अवसंरचना में सुधार के लिए धनराशि का उपयोग किया जाता है।
    • प्रशिक्षण अवसंरचना का उन्नयन, पुलिस आवास तथा कंप्यूटरीकरण भी इस योजना के अंतर्गत वित्तपोषित किए जाने वाले महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं।
  • राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस को राष्ट्रीय स्तर पर अपराधों एवं अपराधियों से संबंधित सूचनाओं को साझा करने के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गृह मंत्रालय (MHA) ने अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणालियाँ (CCTNS) लागू की हैं, जिसके अंतर्गत देशभर के 17,712 पुलिस थानों को शामिल किया गया है।
  • SMART पुलिसिंग: इसमें पुलिसिंग गतिविधियों की संपूर्ण शृंखला शामिल है, जैसे साइबर अपराध की रोकथाम, नशामुक्ति, नवीनतम उपकरणों के माध्यम से क्षमता निर्माण तथा वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध प्रतिरोधात्मक उपाय आदि।

उच्चतम न्यायालय के निर्णय

  • परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह मामला: न्यायालय ने पुलिस थानों के प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया, जिसमें प्रवेश एवं निकास द्वार, लॉक-अप, गलियारे, स्वागत कक्ष तथा निरीक्षकों और उप-निरीक्षकों के कक्ष शामिल हैं।
  • प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) निर्णय: उच्चतम न्यायालय ने तीन संस्थाओं की स्थापना के लिए दिशा-निर्देश जारी किए—राज्य सुरक्षा आयोग, पुलिस स्थापना बोर्ड तथा पुलिस शिकायत प्राधिकरण।

द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) की सिफारिशें

  • राज्यों को पुलिस बल के अंदर विशेषीकृत जाँच इकाइयों की स्थापना करनी चाहिए, ताकि पेशेवर स्तर पर आपराधिक जाँच सुनिश्चित की जा सके।
  • यातायात प्रबंधन, आपदा बचाव तथा अन्य गैर-मुख्य पुलिसिंग गतिविधियों जैसे कार्यों को विशेषीकृत सरकारी विभागों अथवा निजी एजेंसियों को हस्तांतरित किया जाना चाहिए।
  • पुलिस कर्मियों को अनुचित राजनीतिक हस्तक्षेप से संरक्षण प्रदान किया जाना चाहिए तथा साथ ही उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी तंत्र स्थापित किए जाने चाहिए।
  • वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की नियुक्तियाँ योग्यता, पेशेवर दक्षता तथा पारदर्शी प्रक्रियाओं के आधार पर की जानी चाहिए।
  • पुलिस बलों को नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए तथा जनता के विश्वास एवं सहयोग को बढ़ाने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ सहभागिता को सुदृढ़ करना चाहिए।

स्रोत: PRS, TH

 

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