केंद्र की राजकोषीय स्थिति का परिदृश्य 

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • 2026-27 में केंद्र की राजकोषीय स्थिति व्यापक रूप से बजट अनुमानों के अनुरूप रहने की संभावना है। हालांकि, कमजोर कर संग्रह, अधिक सब्सिडी, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता से जुड़े जोखिम बने हुए हैं।

सरकार की राजस्व स्थिति

  • सकल कर राजस्व (GTR) में 2026-27 की पहली तिमाही में केवल 3.7% की वृद्धि हुई, जो प्रमुख कर स्रोतों से कमजोर राजस्व वृद्धि को दर्शाती है।
  • व्यक्तिगत आयकर (PIT) में 6.8% की वृद्धि हुई, जबकि प्रथम तिमाही में GST राजस्व में 11% की कमी दर्ज की गई।
  • केंद्रीय उत्पाद शुल्क संग्रह में 22.4% की गिरावट आई। इसका एक कारण ईंधन पर उत्पाद शुल्क में की गई कमी थी, जिसका उद्देश्य कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करना था।
  • अनुमानित 12.5-13% की उच्च बजटित नाममात्र GDP वृद्धि कर संग्रह को कुछ समर्थन प्रदान कर सकती है।

राज्यों को हस्तांतरण और राजकोषीय संघवाद

  • 16वें वित्त आयोग ने केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में राज्यों की हिस्सेदारी 41% पर बरकरार रखी है, जिससे कर हस्तांतरण की वर्तमान व्यवस्था कायम रही है।
    • 2026-27 की प्रथम तिमाही में राज्यों को कर हस्तांतरण में 19.5% की कमी आई।
  • वित्त वर्ष 2026-27 में राज्यों को वित्त आयोग के अनुदान में 23,556 करोड़ रुपये की कमी का बजट अनुमान है, जिससे राज्यों पर राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है।
  • उपकरों पर बढ़ती निर्भरता भी राजकोषीय संघवाद को लेकर चिंताएँ उत्पन्न कर सकती है, क्योंकि उपकर सामान्यतः विभाज्य पूल से बाहर रखे जाते हैं और इसलिए राज्यों को हस्तांतरित की जाने वाली 41% हिस्सेदारी का हिस्सा नहीं होते।

सरकार के राजस्व एकत्रित करने के उपाय

  • राजस्व पर पड़ने वाले दबाव की भरपाई के लिए सरकार ने GST क्षतिपूर्ति उपकर की समाप्ति के बाद 1 फरवरी 2026 से स्वास्थ्य सुरक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा (HSNS) उपकर लागू किया।
  • उपकर (Cess) किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए लगाया जाने वाला कर है। विभाज्य पूल में शामिल करों के विपरीत, उपकर सामान्यतः वित्त आयोग की कर हस्तांतरण व्यवस्था के माध्यम से राज्यों के साथ साझा नहीं किए जाते।
  • सरकार ने डीजल, पेट्रोल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर (Windfall Tax) में भी वृद्धि की। इसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा कीमतों की अनुकूल परिस्थितियों से होने वाले असाधारण लाभ के एक हिस्से को राजस्व के रूप में प्राप्त करना है।
  • सोने और चांदी की बुलियन तथा कुछ अन्य बहुमूल्य धातु उत्पादों पर आयात शुल्क भी बढ़ाया गया। इससे राजस्व जुटाने का एक अतिरिक्त माध्यम उपलब्ध हुआ तथा गैर-आवश्यक वस्तुओं की आयात मांग को प्रभावित करने में भी सहायता मिली।

गैर-कर राजस्व एक राजकोषीय सहारा

  • गैर-कर राजस्व से आशय सरकार को करों के अतिरिक्त प्राप्त होने वाली आय से है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और RBI से प्राप्त लाभांश, ब्याज प्राप्तियाँ, शुल्क, रॉयल्टी तथा अन्य प्रशासनिक प्राप्तियाँ शामिल हैं।
  • 2026-27 की प्रथम तिमाही में गैर-कर राजस्व ने केंद्र की शुद्ध राजस्व प्राप्तियों में लगभग 37% का योगदान दिया, जिससे यह कमजोर कर संग्रह के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण सहारा बन गया।
  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से प्राप्त लाभांश हस्तांतरण ने विशेष रूप से सुदृढ़ समर्थन प्रदान किया। 2026-27 के पूरे वर्ष के लिए बजट में अनुमानित लाभांश एवं लाभ का लगभग 77% हिस्सा पहले ही वित्त वर्ष के शुरुआती तीन महीनों में प्राप्त हो चुका था।
  • सुदृढ़ गैर-कर प्राप्तियाँ अस्थायी रूप से कर राजस्व और उधारी पर दबाव कम कर सकती हैं। हालांकि, दीर्घकालिक एवं टिकाऊ राजकोषीय समेकन के लिए असाधारण प्राप्तियों पर अत्यधिक निर्भरता के बजाय सरकार के नियमित राजस्व आधार को सुदृढ़ करना आवश्यक है।

सरकार का व्यय प्रबंधन

  • केंद्र सरकार ने 2026-27 की पहली तिमाही में राजस्व व्यय की वृद्धि को 7.4% तक सीमित रखा, जबकि पूंजीगत व्यय में 23.7% की वृद्धि हुई। इससे स्पष्ट होता है कि उभरते राजकोषीय दबावों के बावजूद सरकार ने उत्पादक सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देना जारी रखा।
  • पूंजीगत व्यय से आशय ऐसे सरकारी व्यय से है, जिससे भौतिक या वित्तीय परिसंपत्तियों का सृजन होता है अथवा देनदारियों में कमी आती है। इसके विपरीत, राजस्व व्यय मुख्यतः वेतन, पेंशन, सब्सिडी और ब्याज भुगतान जैसे आवर्ती व्ययों से संबंधित होता है।

राजकोषीय घाटा और ऋण की स्थिति

  • राजकोषीय घाटा कुल सरकारी व्यय और उधारी को छोड़कर कुल प्राप्तियों के बीच के अंतर को दर्शाता है। इस प्रकार, यह एक वित्तीय वर्ष के दौरान सरकार की उधारी आवश्यकता को दर्शाता है।
  • 2026-27 की प्रथम तिमाही में केंद्र का राजकोषीय घाटा पूरे वर्ष के बजट अनुमानित स्तर का लगभग 18.2% रहा, जबकि राजस्व घाटा पूरे वर्ष के बजट अनुमान का केवल 0.4% रहा।
  • नई GDP शृंखला के अंतर्गत  केंद्र का अनुमानित ऋण-GDP अनुपात लगभग 55.8% है।

राजकोषीय परिदृश्य के प्रमुख जोखिम

  • यदि 2026-27 की शेष तिमाहियों में GST, आयकर और अन्य प्रमुख करों का संग्रह नहीं सुधरता है, तो कमजोर कर राजस्व वृद्धि से राजस्व में कमी उत्पन्न हो सकती है।
  • लगातार ऊंची कच्चे तेल की कीमतें एक साथ ईंधन कर संग्रह को कम कर सकती हैं और सब्सिडी की आवश्यकताओं को बढ़ा सकती हैं। इससे सरकार के राजकोषीय संतुलन के राजस्व और व्यय दोनों पक्षों पर दबाव पड़ सकता है।
  • अधिक उधारी की आवश्यकता से भविष्य में ब्याज भुगतान बढ़ सकता है और उत्पादक व्यय के लिए उपलब्ध राजकोषीय विकल्प धीरे-धीरे कम हो सकती है।
  • उपकरों और अधिभारों पर अधिक निर्भरता केंद्र-राज्य राजकोषीय संबंधों को लेकर चिंताएँ उत्पन्न कर सकती है, क्योंकि इनसे प्राप्त राजस्व सामान्यतः विभाज्य पूल में शामिल नहीं होता।

आगे की राह

  • सरकार को कर आधार का विस्तार, अनुपालन में सुधार, अर्थव्यवस्था के औपचारिकीकरण को बढ़ावा देने तथा कर अपवंचन को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से कर उछाल को सुदृढ़ करना चाहिए।
  • दीर्घकालिक आर्थिक विकास को प्रभावित किए बिना राजकोषीय समेकन सुनिश्चित करने के लिए पूंजीगत व्यय को सुदृढ़ करने के साथ-साथ अप्रभावी और खराब लक्षित सब्सिडियों को तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता है।
  • भारत को ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाकर, नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार, ऊर्जा दक्षता में सुधार तथा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को सुदृढ़ करके ऊर्जा सुरक्षा बढ़ानी चाहिए। इससे आयातित कच्चे तेल से उत्पन्न राजकोषीय संवेदनशीलता को कम करने में सहायता मिलेगी।
दैनिक मुख्य अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न]: 2026-27 के लिए केंद्र का राजकोषीय परिदृश्य व्यापक रूप से प्रबंधनीय बना हुआ है, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ और कर राजस्व में कमजोर वृद्धि राजकोषीय समेकन के लिए महत्वपूर्ण जोखिम उत्पन्न करती हैं। भारत के राजकोषीय परिदृश्य को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों की चर्चा कीजिए तथा राजकोषीय सुदृढ़ता को सुदृढ़ करने के उपाय सुझाइए।

स्रोत: TH

 

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