दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद
पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन
संदर्भ
- 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक तमिलनाडु के महाबलीपुरम में आयोजित की गई।
परिचय
- क्षेत्रीय परिषदें दो या अधिक राज्यों के बीच अथवा केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग एवं समन्वय को बढ़ावा देने के लिए राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत स्थापित वैधानिक निकाय हैं।
- क्षेत्रीय परिषदों के अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री होते हैं, जबकि सदस्य राज्यों में से किसी एक राज्य का मुख्यमंत्री घूर्णन के आधार पर उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करता है।
- क्षेत्रीय परिषदें सलाहकारी निकाय हैं। सदस्य राज्यों के मुख्य सचिवों की एक स्थायी समिति भी उन मुद्दों की जांच करती है, जिन्हें क्षेत्रीय परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है। अनसुलझे मामलों को बाद में पूर्ण परिषद के समक्ष रखा जा सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- क्षेत्रीय परिषदों का विचार प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा 1956 में प्रस्तुत किया गया था और इसके बाद पांच क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना की गई। ये हैं:
- उत्तरी क्षेत्रीय परिषद: इसमें हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान राज्य तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ शामिल हैं।
- केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद: इसमें छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्य शामिल हैं।
- पूर्वी क्षेत्रीय परिषद: इसमें बिहार, झारखंड, ओडिशा, सिक्किम और पश्चिम बंगाल राज्य शामिल हैं।
- पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद: इसमें गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र राज्य तथा दमन एवं दीव और दादरा एवं नगर हवेली केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं।
- दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद: इसमें आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु राज्य तथा पुडुचेरी केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं।
- पूर्वोत्तर परिषद : पूर्वोत्तर राज्यों—(i) असम, (ii) अरुणाचल प्रदेश, (iii) मणिपुर, (iv) त्रिपुरा, (v) मिजोरम, (vi) मेघालय और (vii) नागालैंड—को क्षेत्रीय परिषदों में शामिल नहीं किया गया है। इन राज्यों की विशेष समस्याओं के समाधान के लिए पूर्वोत्तर परिषद कार्य करती है, जिसकी स्थापना पूर्वोत्तर परिषद अधिनियम, 1972 के अंतर्गत की गई थी।
- सिक्किम को भी पूर्वोत्तर परिषद (संशोधन) अधिनियम, 2002 के माध्यम से वर्ष 2002 में पूर्वोत्तर परिषद में शामिल किया गया।
स्रोत: AIR
प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM)
पाठ्यक्रम: GS2/सरकारी पहल
संदर्भ
- प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM) भारत की जनजातीय वन-आधारित अर्थव्यवस्था की क्षमता को बढ़ावा दे रहा है।
PMJVM के बारे में
- PMJVM को 2021-22 में शुरू किया गया था। यह जनजातीय कार्य मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है।
- इस योजना का कार्यान्वयन भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ (TRIFED) तथा राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है।
- इसका उद्देश्य जनजातीय उत्पादों में मूल्य संवर्धन, उद्यमिता और बाजार संपर्क को बढ़ावा देकर जनजातीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसरों का विस्तार करना है।
- इसके अंतर्गत चिन्हित लघु वनोपज (MFP) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भी उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए जनजातीय संग्राहकों से प्रत्यक्ष खरीद की जाती है।
स्रोत: PIB
प्रमुख क्षेत्र की वृद्धि में मंदी
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारत के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों की वृद्धि जून में 6% से घटकर जुलाई 2026 में 5.4% रह गई।
परिचय
- इस मंदी का प्रमुख कारण उर्वरक, लौह अयस्क और इस्पात क्षेत्रों की वृद्धि में उल्लेखनीय कमी रही। इसके साथ ही प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के क्षेत्रों में निरंतर संकुचन जारी रहा।
- नौ प्रमुख उद्योग हैं—कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट, लौह अयस्क और विद्युत।
- प्रमुख उद्योगों का सूचकांक (ICI): यह एक उत्पादन मात्रा सूचकांक है, जिसका उद्देश्य केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) जारी किए जाने से पहले ‘प्रमुख’ प्रकृति के उद्योगों के उत्पादन प्रदर्शन का प्रारंभिक संकेत उपलब्ध कराना है।
- इस सूचकांक का संकलन और प्रकाशन आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA), उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DIPP) तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
स्रोत: TH
8 राज्यों में जिला कलेक्टरों को CAA के अंतर्गत नागरिकता प्रदान करने का अधिकार
पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन
संदर्भ
- केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने आठ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के अंतर्गत लंबित नागरिकता आवेदनों के प्रसंस्करण का अधिकार जिला कलेक्टरों को हस्तांतरित कर दिया है।
- गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जिला कलेक्टरों को इस संबंध में अधिकृत किया गया है।
परिचय
- नागरिकता संशोधन अधिनियम, 1955 में संशोधन करते हुए दो प्रमुख बदलाव किए गए, जिनका उद्देश्य अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए छह गैर-मुस्लिम समुदायों—हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई—से संबंधित ऐसे दस्तावेज-विहीन प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करना है, जो 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके थे।
- नागरिकता के लिए पात्र होने हेतु आवश्यक अवधि को पहले निर्धारित 11 वर्ष के निरंतर निवास से घटाकर 5 वर्ष का निरंतर निवास कर दिया गया।
- हालांकि, पाकिस्तानी हिंदू पहले से ही नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5 और धारा 6(1) के अंतर्गत नागरिकता प्राप्त करने के पात्र थे। CAA ने उनके मामले में मुख्यतः आवेदन प्रक्रिया को तेज करने में सहायता की।
- नियमों के अनुसार, नागरिकता प्रदान करने का अंतिम अधिकार जनगणना संचालन निदेशक की अध्यक्षता वाली सशक्त समिति को दिया गया है। वहीं, पोर्टल पर ऑनलाइन दाखिल किए गए आवेदनों की जांच डाक विभाग के अधिकारियों की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति (DLC) द्वारा की जाती है।
- दस्तावेजों के सफल सत्यापन के बाद DLCs आवेदकों को निष्ठा की शपथ दिलाती हैं।
स्रोत: TH
NAMASTE योजना का विस्तार
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
चर्चा में क्यों?
- सरकार राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र कार्रवाई (NAMASTE) पहल को शहरी क्षेत्रों से ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तारित करने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य स्वच्छता कार्यों के मशीनीकरण तथा खतरनाक सफाई कार्य के दौरान होने वाली मृत्यु को रोकना है। प्रस्तावित विस्तार 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए है।
NAMASTE योजना के बारे में
- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सहयोग से वर्ष 2023 में NAMASTE योजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना है।
- इस योजना का मुख्य जोर खतरनाक सफाई कार्यों की रोकथाम तथा प्रशिक्षित और प्रमाणित स्वच्छता कर्मियों के माध्यम से सुरक्षित सफाई प्रथाओं को बढ़ावा देने पर है।
- NAMASTE योजना के अंतर्गत स्वच्छता कर्मियों की पहचान और प्रोफाइलिंग की जाती है तथा उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE), स्वास्थ्य बीमा, आयुष्मान भारत कवरेज और व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण सहित विभिन्न लाभ प्रदान किए जाते हैं।

- यह योजना मैनुअल स्कैवेंजर्स (हाथ से मैला ढोने वाले कर्मियों) और सेप्टिक टैंक श्रमिकों (SSWs) को स्वच्छता से संबंधित अपने स्वयं के उद्यम स्थापित करने में सहायता करती है। इसके लिए कुल परियोजना लागत की 50% तक पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाती है। साथ ही, शहरी स्थानीय निकायों में आपातकालीन स्वच्छता प्रतिक्रिया इकाइयाँ स्थापित करने में भी सहायता दी जाती है।
स्रोत: TH
GISAT-1A
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
चर्चा में क्यों?
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) GISAT-1A उपग्रह के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है।
GISAT-1A (जियो इमेजिंग सैटेलाइट)
- इसे नई नामकरण प्रणाली के अंतगर्त EOS-05 के नाम से भी जाना जाता है।
- यह वर्ष 2021 में प्रक्षेपित GISAT-1 (या EOS-03) का प्रतिस्थापन उपग्रह है। GISAT-1 अपने निर्धारित कक्ष में स्थापित नहीं हो सका था, क्योंकि रॉकेट का अंतिम प्रणोदन चरण प्रज्वलित नहीं हो पाया था।
- इसे जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) के माध्यम से प्रक्षेपित किया जाना निर्धारित है।
- यह मिशन जनवरी 2026 में PSLV-C62/EOS-N1 मिशन की विफलता के बाद ISRO का पहला प्रक्षेपण होगा।
- उद्देश्य: GISAT-1A को भारतीय भू-भाग के बड़े क्षेत्रों की उच्च आवृत्ति वाली इमेजिंग के लिए डिजाइन किया गया है।
- इसके प्रमुख उपयोगों में प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी, कृषि, वानिकी तथा धरातल पर होने वाले अन्य परिवर्तनों की निगरानी शामिल हैं।
- इस उपग्रह का निर्धारित मिशन जीवनकाल 10 वर्ष है।
स्रोत: IE
सतकोसिया टाइगर रिजर्व
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
संदर्भ
- ओडिशा सरकार ने सतकोसिया टाइगर रिजर्व (STR) से गांवों के विस्थापन के मामले की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय जांच समिति गठित की है। ग्रामीणों को कथित रूप से जबरन विस्थापित किए जाने के आरोपों के बीच यह समिति गठित की गई है।
सतकोसिया टाइगर रिजर्व के बारे में
- स्थान: ओडिशा में, दक्कन प्रायद्वीप और पूर्वी घाट के मिलन क्षेत्र में स्थित है।
- स्थापना: इसे 2007 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत स्थापित किया गया था।
- क्षेत्रफल: इस रिजर्व में सतकोसिया गॉर्ज वन्यजीव अभयारण्य और बैसीपल्ली वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं, जो संयुक्त रूप से लगभग 1,000 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले हैं।
- महानदी नदी इस रिजर्व से होकर बहती है और यहां सतकोसिया गॉर्ज का निर्माण करती है, जो एक मनोरम प्राकृतिक घाटी है।
- वनस्पति: यहां मुख्यतः पर्णपाती वनों के साथ-साथ साल (शोरिया रोबस्टा) तथा नदी तटीय वन पाए जाते हैं।
स्रोत: TH
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