पाठ्यक्रम: GS3/अवसंरचना
संदर्भ
- भारत में ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स के तीव्र विस्तार से वेयरहाउस के आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिल रहा है। ऐसे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अनुकूलन और लक्षित स्वचालन गति, दक्षता तथा लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गए हैं।
भारत में वेयरहाउस क्षेत्र एवं वर्तमान स्थिति
- वेयरहाउसिंग अब केवल भंडारण की गतिविधि न रहकर भारत के लॉजिस्टिक्स तंत्र का एक रणनीतिक घटक बनता जा रहा है।
- ई-कॉमर्स, संगठित खुदरा व्यापार, विनिर्माण और क्विक-कॉमर्स के विस्तार से रणनीतिक रूप से स्थित, प्रौद्योगिकी-सक्षम वेयरहाउस तथा शहरी डार्क स्टोर की मांग बढ़ी है।
- भारत का वेयरहाउसिंग बाजार अधिक संस्थागत स्वरूप ग्रहण कर रहा है, जिसमें संगठित डेवलपर्स और प्रौद्योगिकी कंपनियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
- स्वचालन का विस्तार ऑटोमेटेड स्टोरेज और रिट्रीवल सिस्टम , ऑटोनॉमस मोबाइल रोबोट, कन्वेयर सिस्टम, सॉर्टेशन सिस्टम और वेयरहाउस मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से हो रहा है।
भारत के वेयरहाउसिंग मॉडल के प्रमुख लाभ
- भारी स्वचालन से पहले AI: सबसे बड़ा अवसर आवश्यक रूप से श्रमिकों को रोबोट से प्रतिस्थापित करने में नहीं, बल्कि श्रमिकों और मशीनों द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों को बेहतर बनाने में निहित है।
- AI पिकिंग के क्रम, भंडारण स्थान, इन्वेंट्री आवंटन, मांग पूर्वानुमान और डिलीवरी मार्गों को अनुकूलित कर सकता है।
- AI-आधारित डायनेमिक पिकिंग से अधिक मांग की स्थिति में समय पर ऑर्डर पूर्ति की दर लगभग 82% से बढ़कर 98% तक पहुँचने की सूचना है।
- वर्तमान अवसंरचना का पुनःउपयोग: सॉफ्टवेयर-आधारित स्वचालन को वर्तमान वेयरहाउस में पूरी सुविधा का पुनर्निर्माण किए बिना लागू किया जा सकता है।
- यह भारत के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहाँ पूंजीगत लागत महत्त्वपूर्ण है और वेयरहाउस अवसंरचना के मानक एवं स्वरूप विभिन्न क्षेत्रों में काफी भिन्न हैं।
- मानव-मशीन का मिश्रित मॉडल: विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत में श्रमबल की उपलब्धता अधिक है।
- इसलिए मानव + मशीन मॉडल आर्थिक रूप से अधिक व्यवहार्य हो सकता है। इसमें सॉफ्टवेयर श्रमिकों का मार्गदर्शन कर सकता है, जबकि रोबोट दोहराए जाने वाले और उच्च मात्रा वाले कार्यों को संभाल सकते हैं।
- स्थान का बेहतर उपयोग: स्वचालित भंडारण प्रणालियाँ भंडारण घनत्व को बढ़ा सकती हैं, जबकि बुद्धिमत्तापूर्ण इन्वेंट्री प्लेसमेंट अनावश्यक आवाजाही को कम करके ऑर्डर पूर्ति की गति में सुधार कर सकता है।
मुद्दे एवं चिंताएँ
- खंडित और असमान अवसंरचना: भारत की वेयरहाउस क्षमता का एक बड़ा हिस्सा अभी भी खंडित है। निर्माण मानकों, अग्नि सुरक्षा, भंडारण प्रणालियों, यंत्रीकरण और कनेक्टिविटी में व्यापक अंतर देखने को मिलता है।
- उच्च लॉजिस्टिक्स लागत: अक्षम भंडारण, इन्वेंट्री की आवाजाही, खंडित आपूर्ति शृंखलाएँ और अंतिम-मील मार्गों का अपर्याप्त अनुकूलन लॉजिस्टिक्स की कुल लागत को बढ़ाते हैं तथा भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करते हैं।
- प्रौद्योगिकी का निम्न प्रसार: कई वेयरहाउस अभी भी मैनुअल पिकिंग, कागज-आधारित प्रक्रियाओं और बुनियादी इन्वेंट्री प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भर हैं।
- चुनौती केवल स्वचालन की नहीं है, बल्कि इन्वेंट्री, श्रमिकों, मशीनों और परिवहन से संबंधित डेटा के वास्तविक समय में एकीकरण की भी है।
- कौशल एवं रोजगार संबंधी चिंताएँ: स्वचालन दोहराए जाने वाले शारीरिक कार्यों को कम कर सकता है, लेकिन इससे तकनीशियनों, डेटा-समझ रखने वाले पर्यवेक्षकों और मशीन ऑपरेटरों की मांग बढ़ेगी।
- यदि सुनियोजित पुनःकौशल प्रशिक्षण नहीं किया गया, तो तकनीकी परिवर्तन उत्पादक रूपांतरण के बजाय रोजगार विस्थापन का कारण बन सकता है।
- पूंजी एवं विस्तार संबंधी बाधाएँ: उन्नत रोबोटिक्स के लिए पर्याप्त प्रारंभिक निवेश की आवश्यकता होती है और कम-उत्पादन या अधिक श्रम-निर्भर सुविधाओं में इससे पर्याप्त प्रतिफल प्राप्त न हो पाने की संभावना रहती है।
- इसलिए प्रौद्योगिकी मॉड्यूलर, परस्पर-संचालनीय और वर्तमान अवसंरचना में स्थापित की जा सकने वाली होनी चाहिए।
वेयरहाउस अवसंरचना से संबंधित प्रयास एवं पहल
- राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP), 2022: इसका उद्देश्य एक समन्वित और प्रौद्योगिकी-सक्षम लॉजिस्टिक्स तंत्र का निर्माण करना तथा अक्षमताओं को कम करना है।
- PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान: यह विभिन्न मंत्रालयों के बीच अवसंरचना नियोजन को एकीकृत करता है और बहु-माध्यमीय कनेक्टिविटी में सुधार करता है।
- यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP): यह लॉजिस्टिक्स से संबंधित डेटासेट के एकीकरण को सक्षम बनाता है और संपूर्ण लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया में एंड-टू-एंड दृश्यता को बढ़ावा देता है।
- लॉजिस्टिक्स ईज एक्रॉस डिफरेंट स्टेट्स (LEADS): यह लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन के आधार पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का मूल्यांकन करता है तथा सुधारों को प्रोत्साहित करता है।
- राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम: यह एकीकृत औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के विकास में सहायता करता है।
- वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (WDRA): यह विशेष रूप से कृषि जिंसों के लिए परक्राम्य वेयरहाउस रसीदों को बढ़ावा देता है तथा वेयरहाउसिंग क्षेत्र के व्यावसायीकरण एवं पेशेवरकरण में सहायता करता है।
- डिजिटल इंडिया एवं IndiaAI पहल: ये AI-आधारित निर्णय लेने, पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण और बुद्धिमान लॉजिस्टिक्स के लिए सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करती हैं।
आगे की राह: सुदृढ़ीकरण के उपाय
- भारत को केवल रोबोटीकरण पर बल देने के बजाय ‘बुद्धिमान मिश्रित वेयरहाउसिंग’ को अपनाना चाहिए।
- AI-आधारित WMS को इन्वेंट्री, पिकिंग, स्लॉटिंग और मांग पूर्वानुमान के लिए मूलभूत डिजिटल स्तर के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
- स्वचालन को उन दोहराए जाने वाले और उच्च-मात्रा वाले कार्यों तक लक्षित किया जाना चाहिए, जहाँ निवेश से पर्याप्त प्रतिफल प्राप्त हो।
- खुले मानक सुनिश्चित किए जाने चाहिए, ताकि विभिन्न विक्रेताओं के रोबोट, सॉफ्टवेयर और लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म आपस में संवाद कर सकें।
- सरकार और उद्योग को रोबोटिक्स रखरखाव, डेटा विश्लेषण, WMS संचालन एवं सुरक्षा को शामिल करते हुए वेयरहाउस कौशल-विकास कार्यक्रम तैयार करने चाहिए।
- ULIP और गति शक्ति के माध्यम से बेहतर डेटा-साझाकरण से पूर्वानुमानात्मक एवं बहु-माध्यमीय आपूर्ति-शृंखला नियोजन को सक्षम बनाया जा सकता है।
- ऊर्जा-कुशल उपकरणों, रूफटॉप सौर ऊर्जा, विद्युत चालित सामग्री-हैंडलिंग प्रणालियों और अनुकूलित आवागमन मार्गों के माध्यम से वेयरहाउस को हरित लॉजिस्टिक्स के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न]: भारत की ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स अर्थव्यवस्था को समर्थन प्रदान करने के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने तथा आपूर्ति शृंखला की दक्षता में सुधार करने में स्मार्ट वेयरहाउसिंग की संभावनाओं पर चर्चा कीजिए। |
स्रोत: BL
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