भारत में ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस 

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • भारत ने अधिक पारदर्शी एवं सुविधा-आधारित व्यावसायिक वातावरण तैयार करने के लिए व्यापक स्तर पर सुधार किए हैं।

ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस 

  • यह किसी देश या क्षेत्र में व्यवसाय शुरू करने एवं संचालित करने में होने वाली सुगमता या कठिनाई की स्थिति को दर्शाता है।
  • यह मुख्य रूप से नियामक वातावरण, नौकरशाही प्रक्रियाओं, कानूनी ढाँचे तथा सरकारी सेवाओं की दक्षता जैसे कारकों पर निर्भर करता है।

वर्तमान स्थिति

  • भारत के व्यावसायिक वातावरण तथा ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस (EoDB) में सुधार के कारण निवेशकों का विश्वास बढ़ रहा है।
  • यह प्रगति विश्व बैंक की डूइंग बिज़नेस रिपोर्ट 2020 जैसे वैश्विक आकलनों में भी परिलक्षित होती है।
  • भारत की रैंकिंग 2014 में 142वें स्थान से बढ़कर 2019 में 63वें स्थान पर पहुँच गई, अर्थात पाँच वर्षों में 79 स्थानों का सुधार हुआ।
  • आईएमडी विश्व प्रतिस्पर्धात्मकता रैंकिंग 2025 में किसी देश के आर्थिक प्रदर्शन, सरकारी एवं व्यावसायिक दक्षता तथा व्यवसायों के लिए अवसंरचना विकास को ध्यान में रखा जाता है।
  • भारत की रैंकिंग 2021 में 43वें स्थान से सुधरकर 2025 में 41वें स्थान पर पहुँच गई। यह बेहतर व्यावसायिक वातावरण, सुशासन तथा डिजिटल एवं नियामकीय सुधारों को दर्शाता है।
  • वर्ष 2020, 2022 और 2025 में भारत को विश्व बैंक के गवटेक परिपक्वता सूचकांक में समूह A में स्थान दिया गया। यह सूचकांक सार्वजनिक क्षेत्र में डिजिटल रूपांतरण का मूल्यांकन करता है।
  • यह श्रेणी उन देशों को मान्यता देती है, जो मुख्य सरकारी प्रणालियों, सार्वजनिक सेवा वितरण, डिजिटल नागरिक सहभागिता तथा गवटेक सक्षमकारी तंत्रों में नवोन्मेषी एवं उन्नत प्रक्रियाओं के अग्रणी हैं।
  • वर्ष 2014 के बाद भारत की लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हुआ है, जिसमें बहु-माध्यमीय संपर्क एवं अवसंरचना के विस्तार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
  • विश्व बैंक लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक 2023 में भारत की रैंकिंग 2014 के 54वें स्थान से सुधरकर 2023 में 38वें स्थान पर पहुँच गई।

भारत के व्यावसायिक वातावरण में सुधार

  • स्टार्टअप इंडिया: स्टार्टअप इंडिया योजना जनवरी 2016 में उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा एक सुदृढ़ स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य भारत को रोजगार खोजने वालों के बजाय रोजगार सृजित करने वाला देश बनाना है।
  • उद्यम पंजीकरण पोर्टल: इसे जुलाई 2020 में शुरू किया गया।
    • यह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए निःशुल्क, कागज रहित तथा स्व-घोषणा आधारित पंजीकरण व्यवस्था प्रदान करता है।
    • यह बिना प्रशासनिक बाधाओं के एकीकृत डिजिटल एवं कागज रहित पंजीकरण प्रक्रिया उपलब्ध कराता है तथा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और GSTN (GST नेटवर्क) के डेटाबेस तक पहुँच प्रदान करता है।
  • डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP): DILRMP को वर्ष 2016 में भूमि अभिलेखों के प्रबंधन में सुधार तथा भूमि एवं संपत्ति संबंधी विवादों को कम करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
    • यह कार्यक्रम भूमि अभिलेख प्रबंधन प्रणाली की सटीकता में सुधार करने में सहायक है।
  • राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज़ पंजीकरण प्रणाली (NGDRS) – एक देश, एक पंजीकरण: NGDRS ने संपत्ति एवं दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए एक व्यापक उपयोगकर्ता इंटरफेस उपलब्ध कराकर संपत्ति लेनदेन तथा ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा दिया है।
    • यह कार्यक्रम नागरिकों को ऑनलाइन भूमि खरीदने की सुविधा भी प्रदान करता है। खरीदार भूमि की सर्किल दर, वर्तमान दरों के अनुसार संपत्ति का मूल्यांकन तथा भूमि के प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  • राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (NSWS): NSWS एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो किसी फर्म की आवश्यकताओं के अनुसार आवश्यक अनुमोदनों की पहचान करने तथा उनके लिए आवेदन करने में सहायता करता है।
  • परिवेश (PARIVESH): परिवेश पोर्टल को अगस्त 2018 में पर्यावरणीय स्वीकृति (EC), वन स्वीकृति (FC), वन्यजीव स्वीकृति (WL) तथा तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए विकसित किया गया था।
  • SPICe+ फॉर्म: SPICe+ एकीकृत वेब फॉर्म को वर्ष 2020 में शुरू किया गया। इसका उद्देश्य व्यवसाय पंजीकरण में तीव्रता लाने के लिए सरकार की विभिन्न सेवाओं को एकल मंच पर एकीकृत करना है।
  • MCA21 संस्करण 3.0: MCA21 परियोजना एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित पहल है, जो भारत के व्यावसायिक क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती है।
  • सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM): सार्वजनिक खरीद को डिजिटल, अधिक सुव्यवस्थित एवं समावेशी बनाने के लिए GeM को वर्ष 2016 में शुरू किया गया था। यह ई-मार्केटप्लेस महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSEs), कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) तथा दिव्यांगजनों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC): ONDC डिजिटल अथवा इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर वस्तुओं एवं सेवाओं के आदान-प्रदान के सभी पहलुओं के लिए खुले नेटवर्क को बढ़ावा देने की एक पहल है। इसकी स्थापना अप्रैल 2022 में डिजिटल व्यापार को सभी के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से की गई थी।
  • प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान: प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान को अक्टूबर 2021 में एकीकृत अवसंरचना विकास एवं बहु-माध्यमीय संपर्क के लिए एक परिवर्तनकारी कार्यक्रम के रूप में शुरू किया गया था।
    • यह एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो 58 केंद्रीय मंत्रालयों तथा सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को 3,199 डेटा लेयर्स के माध्यम से जोड़कर सहयोगात्मक अवसंरचना योजना एवं कार्यान्वयन को सक्षम बनाता है।
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY): PMMY को छोटे उद्यमों के लिए वित्तीय पहुँच की कमी को दूर करने हेतु ₹20 लाख तक के संपार्श्विक-मुक्त ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
    • वर्ष 2015 में स्थापना के बाद से 27 मार्च 2026 तक इस योजना के अंतर्गत 57 करोड़ से अधिक खातों में ₹40.07 लाख करोड़ के ऋण वितरित किए जा चुके हैं।
  • वस्तु एवं सेवा कर (GST): GST को वर्ष 2017 में एक ऐसी अप्रभावी एवं असंगठित अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के स्थान पर लागू किया गया, जो व्यवसायों एवं उपभोक्ताओं दोनों पर भार डालती थी।
    • इससे पहले उत्पाद शुल्क, सेवा कर, VAT, CST आदि जैसे विभिन्न प्रकार के कर लागू थे।

ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस का महत्व

  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करना: वैश्विक निवेशकों के लिए ऐसे नियामक संस्थानों की आवश्यकता होती है, जो पूर्वानुमेय, पारदर्शी एवं विश्वसनीय हों। अनुपालन संबंधी सरल मानदंड तथा संपत्ति खरीद में सुगमता भी निवेशकों के विश्वास को बढ़ाती है।
  • MSMEs का सशक्तिकरण: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। नियामकीय भार कम करने से व्यवसाय करने की लागत घटती है तथा अनौपचारिक उद्यमों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में आने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
  • उद्यमिता को सुगम बनाना: सरल पंजीकरण, लाइसेंसिंग एवं अनुपालन प्रक्रियाएँ स्टार्टअप्स, MSMEs तथा नए उद्यमों को बाजार तक आसानी से पहुँचने में सहायता करती हैं।
  • रोजगार सृजन: भारत की युवा जनसंख्या को औपचारिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उद्यमों की स्थापना एवं विस्तार की प्रक्रिया को तीव्र करना आवश्यक है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता: निर्बाध लॉजिस्टिक्स, सीमा शुल्क की डिजिटल व्यवस्था तथा त्वरित पर्यावरणीय स्वीकृतियों के माध्यम से भारतीय कंपनियाँ वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से अधिक सहजता से जुड़ सकती हैं।

समस्याएँ एवं चिंताएँ

  • नियमन में वृद्धि: कराधान, पर्यावरण एवं औद्योगिक कानूनों में होने वाले लगातार परिवर्तन निवेश को हतोत्साहित कर सकते हैं।
    • अनुपालन नियमों की जटिलता का MSMEs एवं स्टार्टअप्स पर असमान रूप से अधिक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि उनके पास अनुपालन के लिए सीमित संसाधन होते हैं।
    • राज्यों एवं जिलों का प्रदर्शन अलग-अलग रहा है, जिसके परिणामस्वरूप असमान व्यावसायिक वातावरण देखने को मिलता है।
    • केंद्र द्वारा किए गए सुधार स्थानीय स्तर पर प्रभावी सेवाओं में आवश्यक रूप से परिवर्तित नहीं हो पाते।
  • भूमि एवं भवन संबंधी विलंब: भूमि रूपांतरण, भूमि संबंधी दस्तावेजों तथा भवन निर्माण की अनुमति प्राप्त करने में समय लगता है।
  • वित्त तक सीमित पहुँच: विशेषकर MSMEs के लिए समय पर एवं कम लागत वाले वित्तपोषण की उपलब्धता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
  • कमजोर अवसंरचना एवं लॉजिस्टिक्स: परिवहन, बंदरगाह, विद्युत, इंटरनेट की उपलब्धता तथा लॉजिस्टिक्स संबंधी बाधाएँ व्यवसाय संचालन की लागत को बढ़ाती हैं।

सुझाव

  • क्षमता निर्माण: स्थानीय सरकारों, नगर निकायों तथा जिला प्रशासन की तकनीकी एवं मानव संसाधन क्षमता का विकास किया जाना चाहिए।
  • पूर्वानुमेय नीतिगत व्यवस्था: व्यापार एवं कर नीतियों में दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि वैश्विक निवेशक नीतिगत बदलावों, विशेषकर पूर्वव्यापी परिवर्तनों की चिंता के बिना दीर्घकालिक निवेश योजनाएँ बना सकें।
  • अनुमोदन प्रक्रियाओं के लिए एकल वास्तविक-समय आधारित प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है।
  • लाइसेंसिंग, निरीक्षण एवं अनुपालन प्रक्रियाओं में दोहराव को समाप्त किया जाना चाहिए।
  • सुधारों को विशेष रूप से MSMEs एवं स्टार्टअप्स की आवश्यकताओं तथा उनके सामने आने वाली नियामकीय बाधाओं के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

  • भारत में ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस की यात्रा अब केवल अलग-अलग प्रक्रियाओं को सरल बनाने से आगे बढ़कर अधिक उत्तरदायी एवं उद्यम-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में विकसित हो रही है।
  • सुदृढ़ डिजिटल अवसंरचना, बाजारों एवं वित्त तक व्यापक पहुँच तथा अधिक नियामकीय निश्चितता के साथ व्यवसाय अब अवसरों का बेहतर लाभ उठाने, सतत रूप से विस्तार करने तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की बेहतर स्थिति में हैं।

स्रोत: PIB

 

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