संक्षिप्त समाचार 14-08-2026

उज्जैन में वैश्‍य टेकरी स्तूप

पाठ्यक्रम: GS1/प्राचीन भारतीय इतिहास

संदर्भ

  • मध्य प्रदेश सरकार उज्जैन स्थित वैश्य टेकरी में नए सिरे से उत्खनन पर विचार कर रही है। यहाँ वर्ष 1938–39 में आंशिक उत्खनन किया गया था, जिसमें एक विशाल बौद्ध स्तूप के अवशेष मिले थे। माना जाता है कि यह स्तूप सांची स्तूप से भी बड़ा हो सकता है।

वैश्य टेकरी क्या है?

  • वैश्य टेकरी मध्य प्रदेश के उज्जैन के निकट स्थित एक विशाल पुरातात्त्विक टीला है।
  • माना जाता है कि इसमें एक विशाल बौद्ध स्तूप के अवशेष हैं, जिसे प्राचीन कनिपुरा/कनकगिरि बौद्ध केंद्र से संबद्ध माना जाता है।
    • पूर्व में किए गए उत्खनन में मुख्य स्तूप के कुछ हिस्सों के साथ-साथ दो छोटे स्तूपों के अवशेष भी सामने आए थे।
  • इस स्थल को अस्थायी रूप से मौर्य काल, लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का माना गया है। इस स्मारक का पारंपरिक रूप से संबंध सम्राट अशोक तथा उज्जैन में उनके शासनकाल से जोड़ा जाता है।
  • इस स्तूप का अनुमानित व्यास लगभग 350 फीट तथा ऊँचाई 100 फीट या उससे अधिक मानी जाती है।

सांची का महान स्तूप

  • स्तूप एक बौद्ध स्मारक होता है, जिसमें सामान्यतः बुद्ध अथवा अन्य संतों के पवित्र अवशेष संरक्षित किए जाते हैं।
  • निर्माण: इस स्तूप का निर्माण मौर्य वंश के सम्राट अशोक द्वारा तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में कराया गया था।
    • बाद में शुंग एवं सातवाहन काल के दौरान स्तूप का विस्तार एवं अलंकरण किया गया।
  • संरचना: महान स्तूप पत्थर एवं ईंटों से निर्मित एक अर्धगोलाकार गुंबद है। इसके मध्य में एक विशाल उठा हुआ चबूतरा है, जिसमें बुद्ध के अवशेष रखे गए हैं।
    • इसके शीर्ष पर ‘हरमिका’ स्थित है, जिस पर त्रिस्तरीय छत्र अथवा ‘छत्रावली’ स्थापित है। यह बौद्ध धर्म के तीन रत्नों—बुद्ध, धम्म एवं संघ—का प्रतिनिधित्व करती है।
    • गुंबद के ऊपर ‘चक्र’ अथवा छत्र जैसी स्तंभाकार संरचना स्थित है, जो बुद्ध की उपस्थिति एवं ज्ञानोदय का प्रतीक मानी जाती है।
    • यह स्तूप यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है तथा विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है।
सांची का महान स्तूप

स्रोत: TOI

भारत में महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दवाओं की कमी

पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य

संदर्भ

  • भारत में दो प्रमुख कीमोथेरेपी दवाओं—सिस्प्लैटिन एवं कार्बोप्लैटिन—की देशव्यापी गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके प्रमुख कारणों में वैश्विक स्तर पर प्लैटिनम कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया के शिपिंग मार्गों में व्यवधान तथा घरेलू मूल्य-सीमा शामिल हैं।

परिचय 

  • रोगियों के लिए इसका अर्थ जीवनरक्षक उपचार में बाधा या विलंब के रूप में सामने आया है।
    • घरेलू विनिर्माण इकाइयों में बंद उत्पादन लाइनों को पुनः शुरू करने में सहायता के लिए सरकार ने विगत महीने दोनों दवाओं की अधिकतम मूल्य-सीमा में अस्थायी रूप से 50% की वृद्धि की।
  • सिस्प्लैटिन: यह एक कीमोथेरेपी औषधि है, जिसका उपयोग ठोस ट्यूमर के साथ-साथ कुछ प्रकार के रक्त कैंसर के उपचार में किया जाता है।
  • कार्बोप्लैटिन: यह प्लैटिनम-आधारित दूसरी पीढ़ी का यौगिक है, जिसका उपयोग मुख्यतः ठोस ट्यूमर के उपचार में किया जाता है।
    • दोनों भारत में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली कीमोथेरेपी दवाओं में शामिल हैं। इनका उपयोग अंडाशय, सिर एवं गर्दन, फेफड़े, पित्ताशय, मूत्राशय, स्तन तथा वृषण के कैंसर के उपचार में किया जाता है।

कीमोथेरेपी

  • कीमोथेरेपी एक ऐसी औषधीय उपचार पद्धति है, जिसमें शरीर में तीव्रता से बढ़ने वाली कोशिकाओं, विशेषकर कैंसर कोशिकाओं, को नष्ट करने के लिए शक्तिशाली रसायनों का उपयोग किया जाता है।
  • कीमोथेरेपी दवाओं का उपयोग अकेले या अन्य दवाओं के साथ संयोजन में विभिन्न प्रकार के कैंसर के उपचार के लिए किया जा सकता है।
  • यद्यपि कीमोथेरेपी अनेक प्रकार के कैंसर के उपचार का प्रभावी माध्यम है, लेकिन इसके उपचार के साथ दुष्प्रभावों का जोखिम भी जुड़ा रहता है।

स्रोत: TH

गिरफ्तारी की शक्ति पर संवैधानिक सीमाएँ

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था

संदर्भ

  • सर्वोच्च न्यायालय ने विहान कुमार बनाम हरियाणा राज्य (2025) मामले में निर्णय दिया कि प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के आधारों के बारे में उचित एवं सार्थक रूप से सूचित किया जाना अनिवार्य है।

सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय

  • गिरफ्तारी की संवैधानिकता की जाँच करना आवश्यक है, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ किया जा सके तथा राज्य की शक्ति एवं नागरिक की स्वतंत्रता के बीच उचित संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।
  • गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी प्रदान करने में विफलता संविधान के अनुच्छेद 22(1) तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 47 का उल्लंघन मानी जाएगी।
  • निर्णय में कहा गया कि केवल रिश्तेदारों को गिरफ्तारी की जानकारी देना अथवा अस्पष्ट अभिलेख उपलब्ध कराना संवैधानिक आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं करता।
  • अनुच्छेद 22(2) तथा BNSS, 2023 की धारा 58 की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए गिरफ्तारी ज्ञापन में गिरफ्तारी का समय दर्ज होना अनिवार्य है।

गिरफ्तारी एवं हिरासत की संवैधानिकता

  • अनुच्छेद 22 गिरफ्तार व्यक्ति के लिए प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय प्रदान करता है। इनमें गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार, यथाशीघ्र अपने वकील से परामर्श करने एवं उसके द्वारा बचाव किए जाने का अधिकार तथा यात्रा में लगने वाले समय को छोड़कर 24 घंटे के भीतर निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने का अधिकार शामिल है।
  • गिरफ्तारी और हिरासत अलग-अलग अवधारणाएँ हैं। हिरासत जाँच के उद्देश्य से किसी व्यक्ति को अस्थायी रूप से रोकने की स्थिति है, जिसमें उस व्यक्ति पर आवश्यक रूप से किसी अपराध का आरोप नहीं लगाया गया होता। इसके विपरीत, गिरफ्तारी किसी अपराध के किए जाने के संभावित आधार पर पुलिस अभिरक्षा में लेने की एक औपचारिक कार्रवाई है।
  • असंज्ञेय अपराधों, जैसे मानहानि, में गिरफ्तारी के लिए सामान्यतः वारंट आवश्यक होता है, जबकि संज्ञेय अपराधों, जैसे हत्या एवं बलात्कार, में पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है।

सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्णय

  • अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014): सर्वोच्च न्यायालय ने आपराधिक कानूनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए गिरफ्तारी के संबंध में दिशा-निर्देश निर्धारित किए।
    • न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में, जहाँ अपराध के लिए सजा सात वर्ष से कम है, गिरफ्तारी सामान्य नियम के बजाय अपवाद होनी चाहिए।
    • पुलिस को BNSS की धारा 35 के अंतर्गत यह निर्धारित करना चाहिए कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी वास्तव में आवश्यक है या नहीं।
  • मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978): सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद 21 का संबंध अनुच्छेद 14 एवं अनुच्छेद 19 से है।
    • इनमें अनुच्छेद 14 मनमानेपन का प्रतिषेध करता है और इससे सारभूत प्राकृतिक न्याय की अवधारणा विकसित होती है, जबकि अनुच्छेद 19(1) प्रक्रियात्मक प्राकृतिक न्याय के तत्वों को समाहित करता है।

स्रोत: TH

श्रावाणी (SraVaani)

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) की SPIRE लैब ने ARTPARK के सहयोग तथा गूगल के समर्थन से श्रावाणी को विकसित किया है।

श्रावाणी

  • यह एक बहुभाषी भारतीय वाक् पहचान मॉडल है, जिसे 65 भारतीय भाषाओं एवं बोलियों पर प्रशिक्षित किया गया है। इनमें 40 से अधिक ऐसी भाषाएँ एवं बोलियाँ शामिल हैं, जिन्हें वर्तमान वाक् पहचान प्रणालियाँ आधिकारिक रूप से समर्थन नहीं देती हैं।
  • श्रावाणी में 20 अनुसूचित भाषाओं तथा 45 क्षेत्रीय भाषाओं एवं बोलियों को शामिल किया गया है। इससे 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 25 करोड़ लोगों के लिए वाक्-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Speech AI) की क्षमताएँ उपलब्ध होने की संभावना है, जिनकी भाषाओं को वर्तमान प्रणालियाँ पर्याप्त रूप से समझ नहीं पाती हैं।
  • इसका कवरेज अखिल भारतीय स्तर पर तैयार किया गया है। इसमें पूर्वोत्तर भारत की 19, पूर्वी भारत की 16, पश्चिमी भारत की 9, उत्तरी भारत की 8, दक्षिणी भारत की 6 तथा मध्य भारत की 5 भाषाएँ एवं बोलियाँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त अंग्रेजी एवं संस्कृत को भी शामिल किया गया है।
  • यह मॉडल गारो, अंगिका, चकमा, कोकबोरोक, तुलु, बुंदेली एवं बज्जिका जैसी भाषाओं को भी समर्थन प्रदान करता है।

स्रोत: TH

विश्व हाथी दिवस

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

संदर्भ

  • भारत ने 12 अगस्त 2026 को विश्व हाथी दिवस मनाया। इस अवसर पर हाथी संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पुनः रेखांकित हुई।

हाथियों के बारे में

  • हाथी पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे बड़े स्थलीय जीव हैं और अत्यधिक बुद्धिमान माने जाते हैं। स्तनधारियों में इनकी गर्भावधि सबसे लंबी होती है।
  • हाथियों की तीन प्रमुख प्रजातियाँ हैं:
    • अफ्रीकी सवाना हाथी (बुश हाथी)
    • अफ्रीकी वन हाथी
    • एशियाई हाथी
    • अफ्रीकी सवाना हाथी हाथियों की सबसे बड़ी प्रजाति है।
  • खतरे: अफ्रीकी हाथियों के लिए सबसे बड़ा खतरा अवैध हाथीदाँत व्यापार के लिए होने वाला शिकार है, जबकि एशियाई हाथियों की जनसंख्या के लिए आवास की हानि तथा इसके परिणामस्वरूप मानव–हाथी संघर्ष प्रमुख खतरे हैं।
  • IUCN रेड लिस्ट की स्थिति
हाथियों के बारे में

क्या आप जानते हैं?

  • भारत में विश्व के 60% से अधिक जंगली एशियाई हाथी पाए जाते हैं।
  • सिंक्रोनस अखिल भारतीय हाथी जनसंख्या आकलन (SAIEE) 2021–25 के अनुसार भारत में जंगली हाथियों की अनुमानित संख्या 22,446 है।
  • भारत सरकार ने भारतीय हाथी को राष्ट्रीय विरासत पशु घोषित किया है।

हाथियों के संरक्षण के लिए पहल

  • प्रोजेक्ट एलिफेंट (PE): यह वर्ष 1992 में शुरू की गई केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका क्रियान्वयन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा किया जाता है। इसके अंतर्गत प्रमुख हाथी-बहुल राज्यों को हाथियों, उनके आवासों तथा गलियारों के संरक्षण के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान की जाती है।
  • कानूनी संरक्षण: भारतीय हाथी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के अंतर्गत सर्वोच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
  • हाथी गलियारे एवं आरक्षित क्षेत्र नेटवर्क: भारत में हाथियों के संरक्षण के लिए हाथी गलियारे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्तमान में 150 हाथी गलियारे हाथियों की आवाजाही को सुगम बनाते हैं।
  • हाथियों के लिए सुरक्षित रेल परिवहन: संयुक्त सर्वेक्षणों के माध्यम से 3,452.4 किलोमीटर लंबाई वाले 127 संवेदनशील रेल खंडों की पहचान की गई। इसके बाद अंडरपास, ओवरपास, रैंप तथा पुलों में संशोधन जैसे उपाय किए गए।
    • इन उपायों के परिणामस्वरूप रेलगाड़ियों की टक्कर से होने वाली हाथियों की मृत्यु 2013 में 26 से घटकर 2024 में 12 रह गई, अर्थात इसमें 50% से अधिक की कमी आई।
  • हाथियों की अवैध हत्या की निगरानी (MIKE) कार्यक्रम: इसे वर्ष 2003 में शुरू किया गया। यह एक अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक कार्यक्रम है, जो अफ्रीका एवं एशिया में हाथियों की अवैध हत्या की प्रवृत्तियों पर निगरानी रखता है तथा जमीनी स्तर पर संरक्षण प्रयासों की प्रभावशीलता का आकलन करता है।
  • ऑपरेशन थंडरबर्ड: वन्यजीव अपराधों से निपटने के लिए वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समन्वय से भारत में ‘ऑपरेशन थंडरबर्ड’ चलाया गया।
  • बंदी हाथी (स्थानांतरण या परिवहन) नियम, 2024: सरकार ने बंदी हाथियों के स्थानांतरण एवं परिवहन को विनियमित करने के लिए इन नियमों को अधिसूचित किया।

स्रोत: PIB

IOL द्वारा नागरिक बाजार के लिए स्वदेशी ‘गरुड़’ उच्च-रिज़ॉल्यूशन दूरबीन लॉन्च 

पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा

संदर्भ

  • इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL) ने नागरिक बाजार के लिए स्वदेशी ‘गरुड़’ उच्च-रिज़ॉल्यूशन दूरबीन लॉन्च की है। IOL, रक्षा उत्पादन विभाग के अधीन मिनी रत्न श्रेणी-I रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • गरुड़ में 8 गुना आवर्धन तथा 7.6 डिग्री का विस्तृत दृश्य क्षेत्र उपलब्ध है। इससे दूर की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देखने के साथ-साथ व्यापक दृश्य परिप्रेक्ष्य बनाए रखना संभव होता है।
  • इसकी मौसम-प्रतिरोधी संरचना विभिन्न बाहरी परिस्थितियों में विश्वसनीय उपयोग सुनिश्चित करती है।
  • यह दूरबीन पक्षी-दर्शन, वन्यजीव अवलोकन, प्रकृति-अन्वेषण, यात्रा, खेल, वानिकी, समुद्री गतिविधियों तथा सुरक्षा संबंधी अनुप्रयोगों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग के लिए उपयुक्त है।
  • गरुड़ में IOL के रक्षा-ऑप्टिक्स क्षेत्र के अनुभव को आधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ संयोजित किया गया है, जिससे इसे नागरिक उपयोगकर्ताओं के लिए उपयुक्त बनाया गया है।
  • इसके लॉन्च के साथ कंपनी की ऑप्टिकल तकनीकी क्षमताएँ व्यापक जनसमुदाय, विशेषकर बाहरी गतिविधियों में रुचि रखने वाले लोगों एवं पेशेवर उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध हो गई हैं।

स्रोत: PIB

 

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