पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- वित्तीय समावेशन समानतापूर्ण विकास के भारत के दृष्टिकोण का एक केंद्रीय आधार है। भारत ने बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, ऋण, बीमा, पेंशन तथा निवेश के अवसरों तक पहुँच का व्यापक विस्तार किया है।
वित्तीय समावेशन
- वित्तीय समावेशन वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से कमजोर वर्गों एवं निम्न-आय समूहों जैसे वंचित वर्गों को वहनीय लागत पर वित्तीय सेवाओं तथा आवश्यकता के समय समयबद्ध एवं पर्याप्त ऋण तक पहुँच सुनिश्चित की जाती है।

भारत में वित्तीय समावेशन की प्रगति
- RBI वित्तीय समावेशन सूचकांक (FI Index): यह वित्तीय सेवाओं की पहुँच, उपयोग एवं गुणवत्ता के आधार पर वित्तीय समावेशन की स्थिति को मापता है।
- यह देशभर में औपचारिक वित्तीय सेवाओं के विस्तार की प्रगति का एक व्यापक संकेतक है।
- FI Index 2017 में 43.4 से बढ़कर 2026 में 70.0 हो गया, जो इन तीनों आयामों में व्यापक सुधार को दर्शाता है।
- ग्लोबल फिनडेक्स डेटाबेस : यह वित्तीय समावेशन से संबंधित विश्व का प्रमुख डेटा स्रोत है।
- यह विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में वयस्कों द्वारा वित्तीय सेवाओं तक पहुँच और उनके उपयोग को मापता है।
- वर्ष 2011 से बैंक खाता रखने वाले वयस्कों का अनुपात 89% तक पहुँच गया है, जो औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुँच तथा सक्रिय बैंक खाता उपयोग में विगत दशक के दौरान हुई महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।
- बैंकिंग सेवाओं तक पहुँच बैंक शाखाओं, बैंकिंग संवाददाताओं तथा इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के आउटलेट्स के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।
- वर्ष 2026 में देश के 99.92% गाँवों में 5 किलोमीटर के दायरे के अंदर बैंकिंग आउटलेट उपलब्ध हैं।

चुनौतियाँ
- साइबर सुरक्षा संबंधी जोखिम: डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग से डेटा उल्लंघन तथा साइबर हमलों की आशंका बढ़ी है। संवेदनशील वित्तीय डेटा की सुरक्षा के लिए सुदृढ़ सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
- डिजिटल साक्षरता का अभाव: जनसंख्या के एक बड़े हिस्से के पास अभी भी पर्याप्त डिजिटल साक्षरता एवं प्रौद्योगिकी तक पहुँच नहीं है, जिससे फिनटेक समाधानों की पहुँच एवं प्रभावशीलता सीमित होती है।
- ग्राहक विश्वास: विशेषकर वृद्ध वर्ग तथा प्रौद्योगिकी के नए उपयोगकर्ताओं के बीच डिजिटल वित्तीय सेवाओं के प्रति विश्वास स्थापित करना एक चुनौती है।
- नवाचार एवं विस्तार क्षमता: तीव्र तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बनाए रखना तथा उपयोगकर्ताओं की माँग बढ़ने के साथ प्रणालियों को प्रभावी ढंग से विस्तार योग्य बनाना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
सरकारी पहल
- प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY): इसका उद्देश्य नए बैंक खातों के माध्यम से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की सुविधा प्रदान करना तथा वित्तीय सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना है।

- JAM त्रिमूर्ति: JAM त्रिमूर्ति के अंतर्गत जन धन खाते, आधार एवं मोबाइल कनेक्टिविटी को एकीकृत करके वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ किया गया है।
- यह सरकारी लाभों के पारदर्शी एवं कुशल वितरण के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) को सक्षम बनाती है।
- DBT से लीकेज कम होते हैं, फर्जी लाभार्थियों का उन्मूलन होता है तथा कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में मध्यस्थों की भूमिका न्यूनतम होती है।
- यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI): यह व्यक्तियों एवं व्यापारियों के बीच वास्तविक समय में तत्काल, अंतर-संचालनीय तथा सुरक्षित लेनदेन की सुविधा प्रदान करता है।
- भारत में कुल खुदरा भुगतान लेनदेन का 81% UPI के माध्यम से संसाधित होता है।
- प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY): PMJJBY (2015) एक वार्षिक नवीकरणीय जीवन बीमा योजना है, जो 18–50 वर्ष की आयु के व्यक्तियों को ₹2 लाख का जीवन बीमा कवर प्रदान करती है।
- यह योजना दुर्घटनाजनित मृत्यु के लिए तत्काल बीमा कवर तथा गैर-दुर्घटनाजनित मृत्यु के लिए 30 दिनों की प्रतीक्षा अवधि प्रदान करती है।
- प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY): PMSBY (2015) 18–70 वर्ष की आयु के बचत बैंक खाता धारकों के लिए वार्षिक नवीकरणीय दुर्घटना बीमा योजना है। यह दुर्घटनाजनित मृत्यु या पूर्ण विकलांगता के लिए ₹2 लाख तथा आंशिक विकलांगता के लिए ₹1 लाख का बीमा कवर प्रदान करती है।
- यह बीमा ₹20 के वार्षिक प्रीमियम पर उपलब्ध है, जिसे संबद्ध बैंक खाते से स्वतः डेबिट किया जाता है।
- अटल पेंशन योजना (APY): APY (2015) असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक अंशदायी पेंशन योजना है, जिसे वर्ष 2015 में शुरू किया गया था।
- यह 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद ₹1,000 से ₹5,000 तक की गारंटीकृत मासिक पेंशन प्रदान करती है।
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PM Mudra Yojana): यह विनिर्माण, व्यापार, सेवा तथा संबद्ध कृषि गतिविधियों से जुड़े गैर-कॉरपोरेट, गैर-कृषि सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को ₹20 लाख तक का संपार्श्विक-मुक्त ऋण प्रदान करती है।
- PM SVANidhi: यह रेहड़ी-पटरी एवं स्ट्रीट वेंडर्स पर केंद्रित अपनी तरह की प्रथम सूक्ष्म ऋण पहल है, जिसे सरकार समर्थित ऋण गारंटी का सहयोग प्राप्त है।
- इसके अंतर्गत ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 की तीन क्रमिक किश्तों में संपार्श्विक-मुक्त ऋण प्रदान किया जाता है।
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): KCC बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से किसानों को समय पर एवं पर्याप्त ऋण उपलब्ध कराता है।
- इसमें ATM-सक्षम डेबिट कार्ड, एकमुश्त दस्तावेजीकरण तथा लचीली निकासी की सुविधा उपलब्ध है।
- जन समर्थ (Jan Samarth): जन समर्थ ऋण-संबद्ध सरकारी योजनाओं के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
- यह लाभार्थियों को सीधे ऋणदाताओं से जोड़ता है तथा सरकार प्रायोजित ऋण तक पहुँच की प्रक्रिया को सरल बनाता है।
- राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा केंद्र (NCFE): यह केंद्र राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा रणनीति के अंतर्गत समाज के सभी वर्गों में वित्तीय शिक्षा एवं जागरूकता को बढ़ावा देता है।
- यह वित्तीय साक्षरता को सुदृढ़ करने के लिए सेमिनार, कार्यशालाएँ, प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा जागरूकता अभियान आयोजित करता है।
- वयस्कों के लिए वित्तीय शिक्षा कार्यक्रम (FEPA): FEPA को NCFE द्वारा वर्ष 2019 में वयस्कों के बीच वित्तीय जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था।
- इस कार्यक्रम में किसानों, महिला समूहों, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वयं सहायता समूहों (SHGs), कर्मचारियों तथा कौशल विकास प्रशिक्षणार्थियों को शामिल किया जाता है।
- राष्ट्रव्यापी वित्तीय समावेशन संतृप्ति अभियान: वित्तीय समावेशन का विस्तार 2.70 लाख ग्राम पंचायतों एवं शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) तक करने के लिए यह चार महीने का अभियान वर्ष 2025 में शुरू किया गया।
निष्कर्ष
- भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा केवल बैंक खातों की संख्या बढ़ाने से आगे बढ़कर लोगों की सार्थक वित्तीय भागीदारी सुनिश्चित करने तक पहुँच गई है।
- बैंकों के सुदृढ़ नेटवर्क, डिजिटल अवसंरचना तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं ने औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुँच का व्यापक विस्तार किया है।
- इन पहलों के समन्वित प्रभाव से एक अधिक सुलभ, सुदृढ़ एवं समावेशी वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो रहा है, जो समावेशी आर्थिक विकास को गति प्रदान करता है।
स्रोत: PIB
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